{
  "type": "article",
  "title": "फ्लिपकार्ट में काम करते हुए दिखा बड़ा गैप, आईआईटी के दोस्तों ने खड़ी कर दी सैकड़ों करोड़ की एआई कंपनी",
  "summary": "आईआईटी के पूर्व छात्रों ने फ्लिपकार्ट की नौकरी छोड़कर क्राउडसोर्सिंग और कैटलॉग ऑपरेशन्स को जोड़ने वाला स्टार्टअप प्लेमेंट बनाया, जिसे बाद में टेलस इंटरनेशनल ने खरीदा।",
  "content": "कॉरपोरेट जगत में अक्सर माना जाता है कि एक मजबूत विचार और सही रणनीति किसी भी नए उद्यम को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है। इस सिद्धांत को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी के पूर्व छात्रों ने धरातल पर साबित कर दिखाया है। एक ही संस्थान से डिग्री हासिल करने के बाद बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में साथ काम करने वाले दोस्तों ने जब उद्योग जगत की एक जटिल समस्या को पहचाना, तो उन्होंने स्थापित नौकरी छोड़कर जोखिम उठाने का निर्णय लिया। सामूहिक सूझबूझ और तकनीक के तालमेल से उन्होंने एक ऐसा उद्यम खड़ा किया, जिसकी धमक वैश्विक स्तर पर महसूस की गई और जिसकी वैल्यूएशन आज सैकड़ों करोड़ रुपये से भी अधिक आंकी जाती है।\n\nसहपाठियों का साझा सफर और कॉरपोरेट अनुभव\nयह उद्यमशीलता का सफर प्लेमेंट के संस्थापकों सिद्धार्थ माल, अक्षय लाल और हिमांशु मालसाने के इर्द-गिर्द घूमता है। तीनों ने आईआईटी खड़गपुर से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की थी और उसके बाद प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट में बतौर सीनियर बिजनेस एनालिस्ट अपनी सेवाएं दे रहे थे। कार्यक्षेत्र में दैनिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्हें महसूस हुआ कि दूसरों के प्लेटफॉर्म पर काम करने के बजाय अपने स्वतंत्र विचार को वास्तविकता में बदलना अधिक सार्थक होगा। इसी दौरान आईआईटी गुवाहाटी से पढ़े अजिंक्या भी इस समूह का हिस्सा बने। इन चार युवाओं ने मिलकर एक ऐसी संगठित योजना तैयार की, जो सीधे तौर पर क्राउडसोर्सिंग की शक्ति का उपयोग विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए कर सके।\n\nफ्लिपकार्ट के काम के दौरान ऐसे उपजा विचार\nउद्यम शुरू करने की प्रेरणा उन्हें सीधे उनके कार्यक्षेत्र के अनुभवों से मिली। फ्लिपकार्ट में जिम्मेदारी संभालने के दौरान अक्षय लाल कैटलॉग प्रोडक्ट टीम का कामकाज देख रहे थे। वहीं दूसरी तरफ, अजिंक्या और सिद्धार्थ कंपनी के क्राउडसोर्स हाइपरलोकल डिलीवरी आर्म के संचालन से जुड़े थे। इन दोनों कार्यक्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने यह बारीकी से देखा कि कैटलॉग संचालन और क्राउडसोर्सिंग प्रक्रियाओं के बीच कोई सीधा तालमेल मौजूद नहीं था। दोनों टीमों के अलग-अलग दिशाओं में काम करने की वजह से एक बड़ा परिचालन संबंधी अंतर दिखाई दे रहा था। संस्थापकों के मन में यह स्पष्ट विचार आया कि यदि क्राउडसोर्सिंग और कैटलॉग ऑपरेशन्स को तकनीक के जरिए एक साथ जोड़ दिया जाए, तो यह बिजनेस ऑपरेशन्स को कई गुना अधिक दक्ष और प्रभावी बना सकता है। इसी सोच को अमल में लाने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दिया और साल 2015 में प्लेमेंट की औपचारिक शुरुआत की।\n\nएआई और क्राउडसोर्सिंग का अनूठा मॉडल\nप्लेमेंट की नींव एक आधुनिक एआई आधारित क्राउडसोर्सिंग मॉडल पर रखी गई। सामान्य शब्दों में क्राउडसोर्सिंग एक ऐसी तकनीकी व संगठनात्मक प्रणाली है, जिसमें किसी जटिल कार्य, विशिष्ट विचार अथवा समस्या के सटीक समाधान के लिए किसी व्यापक समुदाय या लोगों के बड़े समूह से इनपुट मांगे जाते हैं। कंपनी अपने डिजिटल व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न तकनीकी समस्याओं और चुनौतियों पर लोगों से सुझाव व डेटा एकत्र करती है। इस डेटा को परिष्कृत करके वास्तविक समाधान तैयार किए जाते हैं और क्लाइंट्स के प्रोजेक्ट्स को सटीकता से पूरा किया जाता है। ओपन प्लेटफॉर्म से मूल्यवान समाधान और इनपुट जुटाने की इस व्यवस्था ने कंपनी को अपने कॉरपोरेट क्लाइंट्स के लिए अत्याधुनिक डेटा संचालित उत्पाद विकसित करने में सक्षम बनाया।\n\nशुरुआती फंडिंग से लेकर अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण तक\nबेंगलुरु स्थित इस तकनीकी स्टार्टअप ने स्थापना के तुरंत बाद ही प्रमुख निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। साल 2016 में उद्यम पूंजी फर्म सैफ पार्टनर्स ने इसमें 7 लाख डॉलर का शुरुआती निवेश किया। उस समय प्लेमेंट का वैल्यूएशन करीब 28.6 लाख डॉलर यानी लगभग 25 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। कंपनी ने अपने पूरे सफर के दौरान 35 लाख डॉलर से भी अधिक का कुल फंड जुटाया। व्यापारिक सफलता और तकनीकी मजबूती को देखते हुए साल 2021 में टेलस इंटरनेशनल ने प्लेमेंट का अधिग्रहण कर लिया। हालांकि सौदे के समय इस अधिग्रहण राशि का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया था, जिससे इसकी सटीक डील वैल्यू सार्वजनिक नहीं हो सकी, लेकिन बाजार में इस स्टार्टअप का कुल वैल्यूएशन 1,000 करोड़ रुपये से भी अधिक माना जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nयह कहानी दर्शाती है कि कार्यस्थल पर मौजूद वास्तविक समस्याओं को पहचानने और उन पर तकनीक आधारित समाधान तैयार करने से बड़े व्यावसायिक अवसर पैदा हो सकते हैं।\n\n• पेशेवरों और कर्मचारियों के लिए: नौकरी के दौरान आने वाली प्रक्रियाओं की खामियों को पहचानकर उन्हें नए बिजनेस मॉडल में बदला जा सकता है। इससे यह समझ मिलती है कि उद्योग का व्यावहारिक अनुभव खुद का स्टार्टअप शुरू करने में सबसे बड़ी पूंजी साबित होता है।\n• तकनीकी छात्रों के लिए: इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान बने सहपाठियों के नेटवर्क से मजबूत संस्थापक टीमें तैयार हो सकती हैं। आईआईटी जैसे संस्थानों से निकले छात्रों के लिए सामूहिक कौशल का इस्तेमाल नए उद्यम खड़े करने का प्रभावी रास्ता है।\n• शुरुआती स्टार्टअप संस्थापकों के लिए: संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए शुरुआती चरण में एक स्पष्ट और कारगर बिजनेस आइडिया होना जरूरी है। सही मॉडल होने पर वैश्विक कंपनियां अधिग्रहण के रास्ते बड़ा एग्जिट दे सकती हैं।\n• एआई और डेटा सेक्टर के लिए: क्राउडसोर्सिंग और एआई के संयोजन से जटिल डेटा समस्याओं को हल करने का बाजार लगातार बढ़ रहा है। भारतीय प्रतिभाएं ऐसे मॉडल्स के जरिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद बना सकती हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह सफलता कॉरपोरेट अनुभव के दौरान एक स्पष्ट ऑपरेशनल गैप की पहचान और उस पर तत्काल कदम उठाने के कारण संभव हुई।\n\n• कार्यस्थल पर तालमेल की कमी: फ्लिपकार्ट में काम करते हुए संस्थापकों ने पाया कि कैटलॉग मैनेजमेंट और क्राउडसोर्सिंग डिलीवरी दोनों अलग-अलग दिशाओं में काम कर रहे थे। इस प्रक्रियागत दूरी ने उन्हें दोनों व्यवस्थाओं को तकनीक के जरिए एकीकृत करने का सीधा विचार दिया।\n• संस्थापकों की पूरक दक्षता: आईआईटी खड़गपुर और आईआईटी गुवाहाटी के इन युवाओं के पास डेटा एनालिटिक्स और प्रोडक्ट ऑपरेशन्स का व्यावहारिक अनुभव था। इस साझा समझ ने उन्हें विचार को तुरंत एक कामकाजी प्लेटफॉर्म में बदलने की ताकत दी।\n• शुरुआती संस्थागत पूंजी: साल 2016 में सैफ पार्टनर्स से मिले 7 लाख डॉलर के निवेश ने स्टार्टअप को विस्तार करने और तकनीक को मजबूत बनाने का प्रारंभिक आधार दिया। आगे चलकर इसी गति के कारण कंपनी 35 लाख डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटा सकी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्लेमेंट स्टार्टअप की शुरुआत किसने और कब की थी?\nप्लेमेंट की शुरुआत साल 2015 में आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्रों सिद्धार्थ माल, अक्षय लाल, हिमांशु मालसाने और आईआईटी गुवाहाटी के अजिंक्या ने मिलकर की थी।\n\n2. संस्थापकों को प्लेमेंट का बिजनेस आइडिया कहां से मिला?\nउन्हें यह आइडिया फ्लिपकार्ट में काम करने के दौरान मिला, जब उन्होंने देखा कि कैटलॉग प्रोडक्ट ऑपरेशन्स और क्राउडसोर्सिंग डिलीवरी टीमों के बीच तालमेल की कमी थी।\n\n3. प्लेमेंट किस तरह का काम करता है?\nयह एक एआई आधारित क्राउडसोर्सिंग प्लेटफॉर्म है, जो ओपन कम्युनिटी से डेटा और सुझाव जुटाकर क्लाइंट्स के प्रोजेक्ट्स और समस्याओं के समाधान तैयार करता है।\n\n4. प्लेमेंट को किस वैश्विक कंपनी ने और कब खरीदा?\nप्लेमेंट का अधिग्रहण साल 2021 में टेलस इंटरनेशनल ने किया था, हालांकि इस सौदे की वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।\n\n5. शुरुआती दौर में कंपनी को कितना निवेश मिला था और इसका कुल वैल्यूएशन कितना है?\nसाल 2016 में सैफ पार्टनर्स ने इसमें 7 लाख डॉलर का निवेश किया था जब वैल्यूएशन 28.6 लाख डॉलर था, जबकि कुल 35 लाख डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटाने के बाद इसकी मार्केट वैल्यू 1,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।\n\nप्रेरणा और सबक\nप्लेमेंट की यह यात्रा सिखाती है कि कैसे रोजमर्रा के काम में छिपे मौकों को पहचानकर एक बड़ा उद्यम खड़ा किया जा सकता है।\n\n• समस्या की पहचान ही अवसर है: अपने मौजूदा काम में आने वाली परिचालन संबंधी दिक्कतों को केवल शिकायत मानने के बजाय समाधान का आधार बनाएं। जब आप किसी वास्तविक कमी को ठीक करते हैं, तो बिजनेस अपने आप आकार लेने लगता है।\n• मजबूत टीम का निर्माण: समान सोच और पूरक क्षमताओं वाले साथियों के साथ साझेदारी करने से बड़े जोखिम लेना आसान हो जाता है। सही टीम होने पर शुरुआती असफलताओं और अनिश्चितताओं का सामना आसानी से किया जा सकता है।\n• नौकरी के अनुभव का सही उपयोग: कॉरपोरेट भूमिकाओं में रहते हुए सिस्टम और स्केल को समझना आगे चलकर अपने खुद के बिजनेस को व्यवस्थित रूप से चलाने में बेहद मददगार होता है।",
  "url": "https://trendkia.com/success-stories/flipkart-men-kama-karate-hue-dikha-bara-gaipa-iit-ke-doston-ne-khari-kara-di-saikaron-karora-ki-ai-knpani-42131",
  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-10-03",
  "tags": [
    "प्लेमेंट",
    "स्टार्टअप सफलता",
    "आईआईटी खड़गपुर",
    "फ्लिपकार्ट",
    "टेलस इंटरनेशनल",
    "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस",
    "क्राउडसोर्सिंग",
    "सैफ पार्टनर्स"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}