# कभी सड़क पर मांगते थे भीख, अब स्कूल में संवार रहे भविष्य; आकाश राजा ने स्लम के बच्चों को दी नई राह

> फिरोजाबाद के आकाश राजा ने सड़क पर भीख मांगते बच्चों को देखकर एक नई पहल की शुरुआत की। साल 2018 में शुरू हुआ यह सफर आज तीन सौ से ज्यादा बच्चों के लिए शिक्षा का बड़ा जरिया बन चुका है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-11-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/from-begging-on-streets-to-studying-in-schools-how-akash-raja-transformed-slum-education-56950 · **Language:** Hindi
**Tags:** फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, आकाश राजा, फ्री शिक्षा, स्लम शिक्षा, रॉयल कृष्णा संस्था, बाल अधिकार

जिंदगी में कई बार एक छोटी सी घटना इंसान के भीतर बड़ा बदलाव ले आती है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद कस्बे के रहने वाले आकाश राजा के जीवन में भी एक ऐसा ही मोड़ साल 2018 में आया था, जब उन्होंने एक झकझोर देने वाला दृश्य देखा। नारायण तिराहे के पास भोजन की तलाश में गए आकाश ने एक मासूम बच्चे को सड़क पर कार सवार से भीख मांगते हुए देखा। कार वाले ने मदद करने के बजाय उस बच्चे को धक्का देकर सड़क पर गिरा दिया। इस अमानवीय घटना ने आकाश के भीतर कुछ ऐसा असर छोड़ा कि उन्होंने इन बच्चों की तकदीर बदलने का पक्का इरादा कर लिया।

## भीख के कटोरे की जगह हाथों में थमाईं किताबें
उस दिन को याद करते हुए आकाश राजा ने बताया कि उन्हें महसूस हुआ कि ये बच्चे भीख मांगने के लिए इस दुनिया में नहीं आए हैं, बल्कि इन्हें भी समाज के अन्य बच्चों की तरह पढ़ने और आगे बढ़ने का पूरा हक है। उसी पल उन्होंने ठान लिया कि इन मासूमों के हाथों से भीख का कटोरा छीनकर वहां किताबें पहुंचाई जाएंगी। इस नेक काम में उनके साथी आशीष यादव भी उनके साथ आए। दोनों ने मिलकर रॉयल कृष्णा नाम की एक संस्था की स्थापना की और शुरुआत में संयुक्त अस्पताल के पास एक छोटा सा कोचिंग सेंटर शुरू किया। उस शुरुआती दौर में महज दस बच्चे वहां पढ़ने आते थे, जो या तो दिनभर सड़कों पर भीख मांगते थे या फिर अपने माता-पिता के साथ मजदूरी का काम करते थे।

## शुरुआती चुनौतियों को पार कर खड़ी की संस्था
किसी भी नए और बड़े बदलाव की तरह इस शुरुआत में भी तमाम रुकावटें आईं। आस-पड़ोस और समाज के लोगों ने ताने कसे और यहां तक कह दिया कि यह सिलसिला ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाएगा। लेकिन आकाश ने हार नहीं मानी और अपने संकल्प पर डटे रहे। समय के साथ लोगों का नजरिया बदला और इस नेक मुहिम पर उनका भरोसा भी गहरा होता गया। देखते ही देखते पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में भारी इजाफा हुआ। आज के समय में इस संस्था के बैनर तले तीन सौ से अधिक बच्चे पूरी तरह मुफ्त में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वर्तमान में इस फाउंडेशन की कुल तीन अलग-अलग शाखाएं संचालित हो रही हैं, जहां गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है।

## बदल रही है सैकड़ों बच्चों की तकदीर
संस्था के अध्यक्ष ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि यहां केवल औपचारिक पढ़ाई तक ही चीजें सीमित नहीं रखी जाती हैं, बल्कि बच्चों की जरूरत का पूरा सामान जैसे कॉपियां, किताबें और पठन-पाठन की अन्य सभी सामग्रियां भी संस्था द्वारा ही मुहैया कराई जाती हैं। यह पूरा ढांचा अन्य सक्षम लोगों और समाज के दानदाताओं के सहयोग से चल रहा है, जो आगे बढ़कर इन बच्चों के लिए मदद का हाथ बढ़ाते हैं। इस पहल का नतीजा यह है कि यहां से शिक्षा पाकर निकलने वाले बच्चे अब दिल्ली पब्लिक जैसे प्रतिष्ठित स्कूलों तक में पढ़ाई कर रहे हैं। आकाश की यह प्रेरणादायक मुहिम आज पूरे शहर के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह पूरी घटना किस जगह से जुड़ी हुई है?
यह घटना उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद कस्बे की है।

### 2. आकाश राजा ने इस शिक्षा मुहिम की शुरुआत कब की थी?
आकाश राजा ने साल 2018 में इस मुहिम की शुरुआत की थी।

### 3. संस्था का नाम क्या है और इसके संस्थापक कौन हैं?
संस्था का नाम रॉयल कृष्णा है और इसे आकाश राजा ने अपने सहयोगी आशीष यादव के साथ मिलकर शुरू किया था।

### 4. शुरुआत में कितने बच्चे पढ़ने आते थे और अब कितने हैं?
शुरुआत में इस कोचिंग सेंटर में सिर्फ दस बच्चे पढ़ते थे, जबकि आज संस्था में तीन सौ से ज्यादा बच्चे मुफ्त शिक्षा ले रहे हैं।

### 5. इस संस्था की वर्तमान में कितनी शाखाएं चल रही हैं?
वर्तमान में इस फाउंडेशन की तीन अलग-अलग शाखाएं संचालित हो रही हैं।

## प्रेरणा और सबक
आकाश राजा की यह पहल दिखाती है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है।

- **दृढ़ संकल्प:** **शुरुआती विरोध और कठिनाइयों के बावजूद अपने लक्ष्य पर अडिग रहें।** समाज की नकारात्मक बातें आपके हौसले को कमजोर नहीं करनी चाहिए।
- **सामूहिक सहयोग:** **भलाई के कार्यों में अन्य लोगों को साथ जोड़ें।** अकेले प्रयास करने के बजाय समाज के सहयोग से बड़े बदलाव हासिल किए जा सकते हैं।
- **जरूरतमंदों की मदद:** **संसाधनों के आभाव में किसी का भविष्य न रुकने दें।** शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें मुहैया कराकर आप किसी की पूरी पीढ़ी बदल सकते हैं।
- **दूरदर्शी सोच:** **छोटे प्रयासों से बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।** महज दस बच्चों से शुरू हुआ सफर आज सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवार रहा है।

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