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  "type": "article",
  "title": "गांव की महिलाओं को उद्यमी बना रहीं ज्योति गुप्ता, चार जिलों में फैला मुफ्त हुनर और कारोबार का नेटवर्क",
  "summary": "मुरादाबाद की ज्योति गुप्ता ग्रामीण महिलाओं को सिलाई, बुनाई और मसाला निर्माण जैसी मुफ्त व्यावसायिक ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बना रही हैं। मुरादाबाद के अलावा बिजनौर, रामपुर और अमरोहा में अब तक 100 से ज्यादा महिलाएं सशक्त उद्यमी बन चुकी हैं।",
  "content": "गांवों में घर-परिवार और चूल्हे-चौके की सीमाओं में सिमटी रहने वाली महिलाओं की जिंदगी में अब बदलाव की नई इबारत लिखी जा रही है। मुरादाबाद की निवासी ज्योति गुप्ता ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। वे गांवों की महिलाओं को अलग-अलग काम-धंधों की बिल्कुल मुफ्त ट्रेनिंग देकर उन्हें सफल उद्यमी बनने में मदद कर रही हैं। अब तक वे 100 से अधिक महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर अपने पैरों पर खड़ा कर चुकी हैं। इस निशुल्क ट्रेनिंग में सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, हैंडीक्राफ्ट और विभिन्न घरेलू उत्पाद बनाने का व्यावहारिक ज्ञान शामिल है।\n\nज्योति गुप्ता युक्ति संस्था के माध्यम से इस पहल को जमीन पर उतार रही हैं। उनका मुख्य फोकस ग्रामीण पृष्ठभूमि की महिलाओं को सक्षम बनाना है। विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को इस अभियान का सीधा लाभ मिल रहा है। आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का अधिकांश समय केवल घरेलू कार्यों में बीत जाता है और उन्हें बाहर जाकर रोजगार पाने के साधन नहीं मिल पाते हैं। इसी खाई को पाटने के लिए महिलाओं को ऐसे हुनर सिखाए जा रहे हैं, जिनसे वे घर संभालने के साथ-साथ सम्मानजनक कमाई भी कर सकें।\n\nसामान की खरीदारी से लेकर बाजार में बिक्री तक का मार्गदर्शन\nप्रशिक्षण सत्र केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कारोबार के हर पहलू को बारीकी से सिखाया जाता है। ट्रेनिंग में शामिल होने वाली महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के संचालन की पूरी कार्यप्रणाली समझाई जाती है। इसके साथ ही सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मार्केटिंग का होता है। महिलाओं को यह सिखाया जाता है कि काम के लिए सही गुणवत्ता का कच्चा माल कहां से और किस कीमत पर खरीदना है। तैयार माल को बाजार में कैसे पेश करना है, संभावित ग्राहक कहां मिलेंगे और सही कीमत पर उत्पादों की बिक्री कैसे सुनिश्चित की जाए, इसकी व्यावहारिक जानकारी दी जाती है। चाहे कढ़ाई-बुनाई का काम हो या फिर मसालों का उत्पादन, हर बिजनेस की जमीनी तकनीक महिलाओं को समझाई जाती है।\n\nरुचि के आधार पर चयन और प्रशिक्षण\nइस पूरे प्रशिक्षण अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि महिलाओं पर कोई खास काम थोपा नहीं जाता है। जिस महिला की रुचि जिस क्षेत्र में होती है, उसे उसी विधा की विशेष ट्रेनिंग और नॉलेज दी जाती है। इससे महिलाओं का काम जल्दी सीखने में मन लगता है और वे आत्मविश्वास के साथ उसे आगे बढ़ा पाती हैं। इस पहल के तहत अलग-अलग कार्यक्षेत्रों के कई समूह तैयार किए गए हैं। इन समूहों की खासियत यह है कि जो महिलाएं पहले सीखकर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं, वे आगे बढ़कर नई महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं। मकसद साफ है कि महिलाएं अपने घरेलू दायित्वों को निभाते हुए या समय निकालकर कमाई कर सकें और एक बेहतर जीवन जी सकें।\n\nमुरादाबाद से आगे बिजनौर, रामपुर और अमरोहा तक विस्तार\nइस पहल का दायरा केवल मुरादाबाद शहर या उसके ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है। आसपास के अन्य जिलों में भी ट्रेनिंग कैंप और ग्रुप बनाकर महिलाओं को मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें बिजनौर, रामपुर और अमरोहा जिले प्रमुख हैं, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं इस अभियान से जुड़ रही हैं। चार जिलों में फैले इस नेटवर्क के जरिए 100 से अधिक महिलाएं अपना स्वतंत्र व्यवसाय स्थापित कर चुकी हैं।\n\nइस बदलाव का एक जीवंत उदाहरण अखिलेश नाम की महिला हैं। पहले वे केवल एक सामान्य गृहिणी थीं और उनका पूरा समय घर की जिम्मेदारियों में बीतता था। उन्होंने इस कार्यक्रम से जुड़कर मिर्च, हल्दी और विभिन्न खड़े व पिसे मसालों के कारोबार की बारीकियां समझीं और इसका विधिवत प्रशिक्षण लिया। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने 10 महिलाओं की एक मजबूत टीम बनाई और अपना एक स्वतंत्र ग्रुप तैयार किया। आज वे मसालों का सफल कारोबार चला रही हैं और साथ ही अपने समूह की मदद से अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी काम सिखाकर सशक्त बना रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह पहल दर्शाती है कि बिना किसी शुरुआती पूंजी या औपचारिक डिग्री के भी ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिए सम्मानजनक कमाई शुरू कर सकती हैं।\n\n• भारत में: यह मॉडल साबित करता है कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को बाजार की मांग से जोड़कर ग्रामीण बेरोजगारी को कम किया जा सकता है। देश के अन्य स्वयं सहायता समूह भी कच्चा माल खरीदने और सीधी मार्केटिंग की इस तकनीक को अपनाकर अपने उत्पादों का दायरा बढ़ा सकते हैं।\n• मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर और अमरोहा में: इन जिलों के गांवों में रहने वाली गृहिणियां युक्ति संस्था और स्थानीय समूहों से संपर्क कर सिलाई, कढ़ाई या मसाला उद्योग की मुफ्त ट्रेनिंग ले सकती हैं। इससे गृहिणियों को घर के काम के साथ हर महीने अतिरिक्त आय कमाने और अपनी 10-10 महिलाओं की टीम बनाने का सीधा मौका मिल रहा है।\n• कमाई और स्वावलंबन: जो महिलाएं घर में केवल घरेलू कामों तक सीमित थीं, वे अब सीधे सप्लायर और खरीदार बनकर बाजार से जुड़ रही हैं। बिचौलियों की निर्भरता खत्म होने से तैयार माल पर पूरा मुनाफा सीधे काम करने वाली महिलाओं की जेब में जाता है।\n• पारस्परिक सहयोग: एक बार प्रशिक्षित हो चुकी महिलाएं अन्य महिलाओं को भी ट्रेनिंग दे रही हैं, जिससे ग्रामीण स्तर पर ही नया रोजगार नेटवर्क तैयार हो रहा है। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है और बच्चों की शिक्षा व पोषण पर सकारात्मक असर पड़ रहा है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nग्रामीण इलाकों में आजीविका के सीमित अवसरों और महिलाओं की प्रतिभा को घरेलू जिम्मेदारियों के दायरे से बाहर निकालने की आवश्यकता ने इस पहल को जन्म दिया।\n\n• रोजगार और मार्गदर्शन की कमी: गांवों में रहने वाली अधिकांश महिलाओं के पास हुनर होने के बावजूद बाजार की समझ और औपचारिक रोजगार का अभाव रहता था। उनका अधिकांश समय सिर्फ घरेलू जिम्मेदारियों में बीतता था, जिसे आर्थिक रूप से उपयोगी बनाने के लिए मुफ्त ट्रेनिंग शुरू की गई।\n• स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क: गांवों में पहले से बने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की मौजूदगी ने इस योजना को लागू करना आसान बनाया। इन समूहों की महिलाओं को संगठित करके उन्हें सिर्फ उत्पाद बनाना ही नहीं, बल्कि खरीद-बिक्री के पूरे व्यापार चक्र से जोड़ा गया।\n• रुचि के अनुरूप कौशल विकास: पूर्व में चलाई जाने वाली कई योजनाओं में महिलाओं को बिना उनकी पसंद के कोई काम थमा दिया जाता था। इस अभियान में हर महिला की व्यक्तिगत रुचि के आधार पर काम चुना गया, जिससे उन्हें अपना काम जारी रखने की ठोस प्रेरणा मिली।\n• पीयर मेंटरशिप मॉडल: जब प्रशिक्षित महिलाओं ने खुद 10-10 सदस्यों की टीमें बनाकर अन्य महिलाओं को सिखाना शुरू किया, तो इस अभियान की गति मुरादाबाद के बाहर बिजनौर, रामपुर और अमरोहा तक स्वाभाविक रूप से फैल गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मुरादाबाद में महिलाओं को मुफ्त ट्रेनिंग कौन दे रहा है?\nमुरादाबाद की ज्योति गुप्ता युक्ति संस्था के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को विभिन्न व्यवसायों की मुफ्त ट्रेनिंग दे रही हैं।\n\n2. इस पहल के तहत अब तक कितनी महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है?\nअब तक 100 से अधिक महिलाओं को विभिन्न ट्रेड में मुफ्त ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाया जा चुका है।\n\n3. प्रशिक्षण कार्यक्रम में कौन-कौन से काम सिखाए जाते हैं?\nइसमें सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, विभिन्न उत्पाद निर्माण और मिर्च-हल्दी जैसे मसालों का व्यवसाय सिखाया जाता है।\n\n4. ट्रेनिंग में हुनर सिखाने के अलावा और क्या जानकारी दी जाती है?\nमहिलाओं को कच्चा माल खरीदने की जगह, मार्केटिंग के तरीके और तैयार सामान को बाजार में बेचने की पूरी जानकारी दी जाती है।\n\n5. मुरादाबाद के अलावा किन जिलों में यह ट्रेनिंग दी जा रही है?\nमुरादाबाद के अलावा बिजनौर, रामपुर और अमरोहा जिलों में भी महिलाओं के समूह बनाकर मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है।\n\n6. अखिलेश ने किस क्षेत्र में प्रशिक्षण लिया और उनकी क्या उपलब्धि रही?\nगृहिणी रहीं अखिलेश ने मसालों के कारोबार का प्रशिक्षण लिया और अब 10 महिलाओं की टीम बनाकर मसाला व्यवसाय चलाने के साथ अन्य महिलाओं को भी सिखा रही हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nमुरादाबाद और आसपास के जिलों की यह कहानी साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और सामूहिक इच्छाशक्ति से घरेलू जिम्मेदारियां निभाते हुए भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है।\n\n• रुचि को हुनर में बदलना: जिस काम में आपका स्वाभाविक मन लगता हो, उसे सही तकनीकी और व्यावसायिक ज्ञान के साथ सीखें ताकि आप उसमें बेहतर प्रदर्शन कर सकें।\n• कौशल के साथ बाजार की समझ जरूरी: केवल उत्पाद बना लेना काफी नहीं है; कच्चा माल कहां से सस्ता मिलेगा और तैयार उत्पाद कहां बिकेगा, यह जानना कारोबार की असली कुंजी है।\n• सामूहिकता में असली ताकत: अकेले काम करने के बजाय जब महिलाएं 10-10 की टीम बनाकर एक साथ काम करती हैं, तो संसाधनों की कमी दूर होती है और काम का बोझ बंट जाता है।\n• सफलता आगे बांटना: जब आप खुद सक्षम हो जाएं, तो अपने आसपास के अन्य लोगों को भी काम सिखाएं; दूसरों को आगे बढ़ाने से आपका अपना नेटवर्क और प्रभाव दोनों बढ़ते हैं।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-11-04",
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    "ज्योति गुप्ता",
    "मुरादाबाद",
    "महिला उद्यमिता",
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    "मुफ्त वोकेशनल ट्रेनिंग",
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