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  "type": "article",
  "title": "गौरीगंज की रेनू सिंह ने मोटे अनाज से बना डाला महीने के 30 से 40 हजार रुपये का कारोबार",
  "summary": "अमेठी के गौरीगंज की रेनू सिंह मक्का और बाजरा जैसे मोटे अनाज से नमकीन, पेड़ा, लड्डू और बिस्कुट बनाकर हर महीने 30 से 40 हजार रुपये कमा रही हैं, साथ ही गांव की दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।",
  "content": "देश में मोटे अनाज को बढ़ावा देने की मुहिम अब गांव-गांव तक असर दिखा रही है, और अमेठी के गौरीगंज की रहने वाली रेनू सिंह इसकी एक जीती-जागती मिसाल हैं। वे मक्का और बाजरा जैसे मोटे अनाज से कई तरह के प्रोडक्ट तैयार कर रही हैं और इसी काम से हर महीने अच्छी कमाई कर रही हैं।\n\nनमकीन से लेकर पेड़े तक, हर दिन तैयार होते हैं दर्जनों डिब्बे\nरेनू सिंह बाजार से मोटा अनाज खरीदकर लाती हैं और फिर उसी से नमकीन, पेड़ा, लड्डू, बिस्कुट, पट्टी और आटा जैसे कई प्रोडक्ट बनाती हैं। एक दिन में वे 8 से 10 डिब्बे अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार कर लेती हैं, जिनमें पेड़ा, बर्फी, लड्डू और नमकीन शामिल हैं। तैयार माल पर वे अपने समूह का लोगो लगाती हैं और उसके बाद ही उसकी बिक्री शुरू करती हैं, ताकि ग्राहकों को उनके उत्पाद की पहचान आसानी से हो सके।\n\nस्वयं सहायता समूह और प्रेरणा कैंटीन से भी सहारा\nरेनू का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके काम को नई रफ्तार मिली है। मोटे अनाज के प्रोडक्ट बनाने के साथ-साथ वे प्रेरणा कैंटीन भी चलाती हैं, जहां से रोजाना 500 से 1000 रुपये तक की बिक्री आराम से हो जाती है। रेनू के मुताबिक मोटे अनाज से बने प्रोडक्ट की बिक्री से उन्हें हर महीने 30 से 40 हजार रुपये की कमाई हो जाती है।\n\nबीमारियों से बचाता है मोटा अनाज\nरेनू बताती हैं कि मोटा अनाज सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। उनका कहना है कि अगर मोटे अनाज से बने इन उत्पादों को रोजाना के खानपान में शामिल कर लिया जाए तो शरीर कई बीमारियों से दूर रह सकता है।\n\nगांव की दूसरी महिलाओं को भी मिल रहा काम\nरेनू सिंह के मुताबिक इस काम से सिर्फ उन्हें ही नहीं, बल्कि गांव की कई और महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है। गांव की महिलाएं उनके पास आती हैं, अपने हिस्से का उत्पाद खुद तैयार करती हैं और फिर अपने स्तर पर उसकी बिक्री भी करती हैं। इससे उन महिलाओं को भी आर्थिक फायदा हो रहा है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: मोटे अनाज को बढ़ावा देने की मुहिम से जुड़कर देश भर में छोटे व्यवसाय शुरू करने वालों के लिए कमाई का नया रास्ता खुल सकता है।\n• अमेठी में: गौरीगंज जैसी जगहों पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को मोटे अनाज के प्रोडक्ट बनाकर हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कमाई का मौका मिल रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रेनू सिंह कहां की रहने वाली हैं?\nवे अमेठी के गौरीगंज की रहने वाली हैं।\n\n2. रेनू किन अनाजों से प्रोडक्ट बनाती हैं?\nवे मक्का और बाजरा जैसे मोटे अनाज से नमकीन, पेड़ा, लड्डू, बिस्कुट, पट्टी और आटा बनाती हैं।\n\n3. रेनू एक दिन में कितने प्रोडक्ट तैयार करती हैं?\nवे एक दिन में 8 से 10 डिब्बे अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार कर लेती हैं।\n\n4. रेनू हर महीने कितनी कमाई करती हैं?\nमोटे अनाज के प्रोडक्ट से उन्हें हर महीने 30 से 40 हजार रुपये की कमाई होती है।\n\n5. प्रेरणा कैंटीन से कितनी बिक्री होती है?\nप्रेरणा कैंटीन से रोजाना 500 से 1000 रुपये तक की बिक्री हो जाती है।\n\n6. क्या इस काम से गांव की अन्य महिलाओं को भी फायदा हो रहा है?\nहां, गांव की महिलाएं उनके पास आकर अपने हिस्से का प्रोडक्ट बनाती हैं और खुद उसकी बिक्री करती हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\n• छोटे स्तर पर शुरुआत करें: रेनू ने बाजार से मोटा अनाज खरीदकर घर पर ही प्रोडक्ट बनाना शुरू किया, बड़े निवेश का इंतजार नहीं किया।\n• समूह से जुड़ने का फायदा: स्वयं सहायता समूह से जुड़ने पर उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने में मदद मिली।\n• कमाई के एक से ज्यादा जरिए बनाएं: प्रोडक्ट बनाने के साथ-साथ प्रेरणा कैंटीन चलाकर उन्होंने आमदनी का दूसरा जरिया भी तैयार किया।\n• अपनी पहचान बनाएं: तैयार माल पर अपने समूह का लोगो लगाकर उन्होंने ग्राहकों के बीच अपने प्रोडक्ट को अलग पहचान दी।\n• दूसरों को साथ लेकर चलें: रेनू ने गांव की अन्य महिलाओं को भी अपने साथ काम से जोड़ा, जिससे उन्हें भी कमाई का मौका मिला।",
  "url": "https://trendkia.com/success-stories/gaurigunj-ki-renu-singh-ne-mote-anaja-se-bana-dala-mahine-ke-30-se-40-hajara-rupaye-ka-karobara-8783",
  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-19",
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    "मोटा अनाज",
    "रेनू सिंह",
    "अमेठी",
    "स्वयं सहायता समूह",
    "मिलेट्स बिजनेस",
    "प्रेरणा कैंटीन",
    "महिला उद्यमी"
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  "site": "TrendKia"
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