# गोंडा के सुनील मौर्या ने छोड़ी पारंपरिक खेती, गेंदे के फूल से हर बीघे पर 50 हजार तक का मुनाफा

> गोंडा जिले के प्रगतिशील किसान सुनील मौर्या ने गेहूं और धान जैसी परंपरागत फसलें छोड़कर 25 बीघा में गेंदे की खेती शुरू की और अब प्रति बीघा 30 से 50 हजार रुपये तक की शुद्ध कमाई कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-06-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/gonda-ke-sunil-maurya-ne-chhori-parnparika-kheti-gende-ke-phula-se-hara-bighe-para-50-hajara-taka-ka-munapha-2446 · **Language:** Hindi
**Tags:** गेंदे की खेती, सुनील मौर्या, गोंडा किसान, फूलों की खेती, कृषि मुनाफा, उत्तर प्रदेश खेती, प्रगतिशील किसान, फ्लोरीकल्चर

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक किसान की नई सोच ने यह साबित कर दिया है कि थोड़ी हिम्मत और सही फसल का चुनाव जिंदगी पूरी तरह बदल सकता है। प्रगतिशील किसान सुनील मौर्या ने जब गेहूं और धान की खेती को अलविदा कहकर गेंदे के फूल उगाने का रास्ता चुना, तो शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह फैसला उन्हें हर साल लाखों रुपये की कमाई देगा। आज 25 बीघा में गेंदे की फसल से वे इतना मुनाफा कमा रहे हैं कि आसपास के गांवों के किसान भी उनकी राह पर चलने को तैयार हो रहे हैं।

## पुरानी खेती में लागत ज्यादा, कमाई कम
सुनील मौर्या बताते हैं कि पहले वे भी अपने खेतों में गेहूं, धान और दूसरी आम फसलें ही उगाते थे। इन फसलों में हर बार खूब मेहनत करनी पड़ती थी और लागत भी काफी लगती थी, लेकिन हाथ में आता था बेहद मामूली मुनाफा। बेहतर विकल्प की तलाश में उन्होंने काफी सोच-विचार किया और अंततः गेंदे की खेती को अपनाने का फैसला किया, जो उनके लिए पूरी तरह फायदे का सौदा बन गया।

## गेंदे की मांग साल के बारह महीने बनी रहती है
सुनील मौर्या के अनुसार गेंदे के फूल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी बाजार में मांग कभी नहीं रुकती। शादी-विवाह, धार्मिक समारोह, बड़े त्योहार और सजावट के कार्यक्रम, हर जगह गेंदे के फूल चाहिए होते हैं। इसीलिए स्थानीय मंडियों में ये जल्दी और अच्छे दाम पर बिक जाते हैं। एक बार फसल तैयार हो जाए, तो कई महीनों तक पौधे लगातार फूल देते रहते हैं और किसान को हर हफ्ते नियमित कमाई होती रहती है।

## 5 हजार लगाओ, 30 से 50 हजार कमाओ
सुनील मौर्या इस वक्त 25 बीघा जमीन पर पूरे साल गेंदे की खेती करते हैं। वे बताते हैं कि प्रति बीघा खेती में करीब 5 हजार रुपये की लागत आती है। इस हिसाब से 25 बीघा के पूरे खेत में 1 लाख 20 हजार से 1 लाख 25 हजार रुपये तक की कुल लागत लगती है। कमाई की बात करें तो एक बीघे की फसल से ही 30 हजार से 50 हजार रुपये तक की शुद्ध आमदनी हो जाती है। यानी 25 बीघा से हर साल लाखों रुपये का बंपर मुनाफा उनकी जेब में आता है।

## देखभाल में लापरवाही नहीं, विशेषज्ञ भी उत्साहित
सुनील का साफ कहना है कि गेंदे की अच्छी पैदावार के लिए समय पर सिंचाई, उचित खाद और पौधों की नियमित देखभाल बेहद जरूरी है। उनकी सफलता की चर्चा दूर-दूर तक फैल रही है और आसपास के गांवों के कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर फूलों की खेती में कदम रखने के बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों की भी यही राय है कि जो किसान बाजार की मांग को समझकर आधुनिक तरीकों से फूलों की खेती करें, उनकी आय कई गुना बढ़ाने का यह एक बेहतरीन जरिया बन सकती है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** गेंदे की खेती एक कम लागत और अधिक मुनाफे वाला विकल्प है जिसे देश के किसी भी हिस्से के छोटे किसान अपनाकर अपनी आमदनी में बड़ा सुधार कर सकते हैं।
- **गोंडा में:** सुनील मौर्या की कामयाबी गोंडा और आसपास के इलाकों के किसानों को फूलों की खेती की ओर प्रेरित कर रही है, जिससे स्थानीय कृषि आय बढ़ने की उम्मीद बढ़ी है।

## सवाल-जवाब

### 1. सुनील मौर्या कहां के रहने वाले हैं?
सुनील मौर्या उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के रहने वाले हैं।

### 2. वे कितनी बीघा जमीन पर गेंदे की खेती करते हैं?
वे 25 बीघा जमीन पर पूरे साल गेंदे के फूल की खेती करते हैं।

### 3. गेंदे की खेती में प्रति बीघा कितनी लागत आती है?
प्रति बीघा गेंदे की खेती में करीब 5 हजार रुपये की लागत आती है।

### 4. 25 बीघा खेती के लिए कुल लागत कितनी है?
25 बीघा के लिए कुल लागत लगभग 1 लाख 20 हजार से 1 लाख 25 हजार रुपये के बीच है।

### 5. एक बीघे से कितनी शुद्ध कमाई होती है?
गेंदे की एक बीघे की फसल से 30 हजार से 50 हजार रुपये तक की शुद्ध आमदनी होती है।

### 6. गेंदे के फूल की मांग इतनी क्यों रहती है?
शादी-विवाह, धार्मिक समारोह, बड़े त्योहार और सजावट के कार्यक्रमों में गेंदे के फूलों की जरूरत साल भर बनी रहती है।

### 7. गेंदे की अच्छी पैदावार के लिए क्या जरूरी है?
समय पर सिंचाई, सही खाद और पौधों की नियमित देखभाल करना अच्छी पैदावार के लिए बेहद जरूरी है।

### 8. क्या दूसरे किसान भी गेंदे की खेती अपना रहे हैं?
हां, सुनील मौर्या की सफलता देखकर आसपास के गांवों के कई किसान भी अब फूलों की खेती में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

## प्रेरणा और सबक
सुनील मौर्या की यह यात्रा हर किसान और बदलाव की तलाश में जुटे व्यक्ति को कुछ ठोस सबक देती है:

- **परंपरा से बाहर निकलने की हिम्मत रखें:** जब गेहूं और धान ने सालों की मेहनत के बाद भी पर्याप्त मुनाफा नहीं दिया, तो सुनील ने वही रास्ता दोहराने से इनकार किया और एक नई दिशा चुनी।
- **बाजार की मांग को पहचानकर फसल चुनें:** गेंदे के फूल की साल भर मांग रहती है, यह समझकर फसल तय करना किस्मत नहीं बल्कि सोची-समझी रणनीति थी।
- **बड़ी पूंजी नहीं, सही सोच चाहिए:** प्रति बीघा केवल 5 हजार रुपये में शुरुआत करके उन्होंने लाखों का मुनाफा बनाया, यानी छोटी लागत भी बड़े नतीजे दे सकती है।
- **मेहनत और देखभाल में कोई समझौता नहीं:** समय पर सिंचाई, सही खाद और नियमित ध्यान रखने से ही फसल अच्छी होती है, शॉर्टकट से नहीं।
- **एक की सफलता पूरे समुदाय को राह दिखाती है:** सुनील की कामयाबी देखकर आसपास के किसान भी बदलाव की राह पर निकल रहे हैं, यही असली प्रेरणा की पहचान है।

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