# गोंडा की प्रीति शास्त्री: MA की पढ़ाई के बीच मचान विधि से लौकी उगाकर 7 हजार की लागत में 60 हजार तक की कमाई का रास्ता

> उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की छात्रा प्रीति शास्त्री पढ़ाई के साथ करीब 1 बीघा खेत में मचान विधि से लौकी की खेती कर रही हैं, जिसमें लगभग 6 से 7 हजार रुपए की लागत पर 50 से 60 हजार रुपए तक की आमदनी की उम्मीद है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-06-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/gonda-ki-priti-shastri-ma-ki-parhai-ke-bicha-machana-vidhi-se-lauki-ugakara-7-ha-1452 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रीति शास्त्री, मचान विधि, लौकी की खेती, गोंडा, इटियाथोक, किसान सफलता, उत्तर प्रदेश खेती

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक में एक युवा छात्रा यह दिखा रही है कि किताबों और खेत को एक साथ संभालना मुमकिन है। प्रीति शास्त्री इस समय एमए (MA) की पढ़ाई कर रही हैं और इसके साथ ही अपने खेत में मचान विधि से लौकी उगाकर अच्छी आमदनी की राह बना रही हैं। उनकी यह कोशिश अब आसपास के किसानों और गांव के युवाओं के लिए एक मिसाल बनती जा रही है।

## सलाह देने वाली ने खुद उठाया फावड़ा
प्रीति बताती हैं कि वह पानी संस्थान के तहत इटियाथोक ब्लॉक की ग्राम पंचायत बसंतपुर राजा में सीआरपी (CRP) के पद पर कार्यरत हैं। इस भूमिका में उनका काम किसानों को खेती की नई-नई तकनीकों की जानकारी देना है। उनका मानना है कि सिर्फ जुबानी सलाह देने से बात उतनी नहीं बनती, जितनी तब बनती है जब आप खुद कोई तकनीक अपनाकर सामने उदाहरण रख दें। इसी सोच के साथ उन्होंने करीब 1 बीघा जमीन पर मचान विधि से लौकी की खेती शुरू की।

## पढ़ाई और खेत, दोनों के लिए समय
TrendKia से बातचीत में प्रीति शास्त्री ने बताया कि वह रोज नियमित रूप से अपनी पढ़ाई करती हैं और जो वक्त बचता है, उसमें खेत की देखभाल करती हैं। खेती में कुछ नया और अलग करने की इच्छा ही उन्हें मचान विधि तक ले गई। इस तरीके में लौकी की बेलों को जमीन पर फैलने देने के बजाय बांस और तार के सहारे ऊपर की ओर चढ़ाया जाता है। ऊपर रहने की वजह से पौधों को भरपूर धूप और हवा मिलती है, और इसी से फसल की गुणवत्ता भी सुधर जाती है।

## मचान विधि के फायदे क्या हैं
प्रीति के मुताबिक इस विधि से खेती करने के कई फायदे हैं। बेलें ऊपर टिकी रहती हैं तो फलों का आकार बेहतर निकलता है और उनमें सड़न या रोग लगने की आशंका घट जाती है। इसके अलावा खेत साफ-सुथरा बना रहता है और फलों की तुड़ाई भी आसानी से हो जाती है। यही वजह है कि इस तरीके से उत्पादन भी सामान्य खेती के मुकाबले ज्यादा मिलता है।

## लागत कितनी, कमाई कितनी
आमदनी के गणित पर प्रीति शास्त्री बताती हैं कि 1 बीघा में मचान विधि से लौकी की खेती पर लगभग 6 से 7 हजार रुपए की लागत आई है। इतने खर्च के बदले कितनी कमाई की उम्मीद है, इस सवाल पर उनका कहना है कि 1 बीघा लौकी की खेती से करीब 50 से 60 हजार रुपए तक की आमदनी होने की संभावना है। यानी सीमित लागत में अच्छा मुनाफा, और वह भी पढ़ाई छोड़े बिना।

## इसका आप पर असर
- **किसानों और छात्रों के लिए:** करीब 1 बीघा में सिर्फ 6 से 7 हजार रुपए की लागत पर मचान विधि से लौकी उगाकर 50 से 60 हजार रुपए तक की कमाई संभव है, जो कम पूंजी में अतिरिक्त आय का रास्ता दिखाती है।
- **गोंडा (उत्तर प्रदेश) में:** इटियाथोक ब्लॉक के आसपास के किसान बांस और तार के सहारे बेल चढ़ाकर बेहतर गुणवत्ता और ज्यादा उत्पादन पा सकते हैं, साथ ही पढ़ाई कर रहे युवा भी खाली समय में खेती से कमाई जोड़ सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रीति शास्त्री कौन हैं और क्या पढ़ाई कर रही हैं?
वह गोंडा जिले के इटियाथोक विकासखंड की छात्रा हैं और इस समय एमए (MA) की पढ़ाई कर रही हैं। साथ ही वह पानी संस्थान के तहत ग्राम पंचायत बसंतपुर राजा में सीआरपी के पद पर कार्यरत हैं।

### 2. मचान विधि क्या होती है?
इसमें लौकी की बेलों को जमीन पर फैलाने के बजाय बांस और तार के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है, जिससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है।

### 3. 1 बीघा खेती पर लागत कितनी आई?
प्रीति शास्त्री के अनुसार 1 बीघा में मचान विधि से लौकी की खेती पर लगभग 6 से 7 हजार रुपए की लागत आई है।

### 4. इस खेती से कितनी आमदनी की उम्मीद है?
उनके मुताबिक 1 बीघा लौकी की खेती से करीब 50 से 60 हजार रुपए तक की आमदनी होने की संभावना है।

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