गोरखपुर के किसान ने फव्वारे और कूल पैड से बदल दी अपनी डेयरी की तस्वीर गोरखपुर के किसान अवनीश पांडे ने अपनी डेयरी में ऑटोमेटिक फव्वारा सिस्टम और कूल पैड लगाकर गायों को गर्मी से बचाने का हाईटेक तरीका अपनाया है, जिनकी 10 से ज्यादा गायों से रोज 100 लीटर से ज्यादा दूध मिलता है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में किसान अवनीश पांडे ने खेती और डेयरी को इस तरह जोड़ा है कि आसपास के दूसरे किसान भी अब उनके तरीके को गौर से देख रहे हैं। एक तरफ वह आधुनिक तकनीक से सब्जियों की खेती करते हैं, तो दूसरी तरफ उन्होंने अपनी डेयरी को पूरी तरह व्यवस्थित और हाईटेक बना दिया है। खेती और डेयरी के इस मेल से उन्हें अच्छी कमाई तो हो ही रही है, साथ ही उनके उत्पादों की गुणवत्ता भी बनी रहती है। 10 से ज्यादा गायें, रोज 100 लीटर से ज्यादा दूध अवनीश पांडे की डेयरी में अलग-अलग नस्ल की 10 से अधिक गायें हैं, जिनसे रोजाना 100 लीटर से ज्यादा दूध निकलता है। वह इस दूध को सीधे बेचने तक सीमित नहीं रखते, बल्कि इससे कई तरह के मिल्क प्रोडक्ट तैयार कर बाजार में बेचते हैं। इस वैल्यू एडिशन ने उनके डेयरी कारोबार को कहीं ज्यादा मुनाफे वाला बना दिया है। गर्मी से गायों को बचाने का हाईटेक इंतजाम ज्यादातर डेयरी संचालक सिर्फ दूध के उत्पादन पर ध्यान देते हैं और पशुओं की सुविधाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। अवनीश पांडे का तरीका इससे बिल्कुल अलग है। गर्मी के मौसम में गायों को राहत देने के लिए उन्होंने डेयरी शेड में खास हाईटेक इंतजाम किए हैं। एक ऑटोमेटिक फव्वारा सिस्टम तय समय के अंतराल पर गायों के ऊपर पानी का छिड़काव करता है, जिससे उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और गर्मी का असर कम हो जाता है। इसके साथ ही गायों के बैठने के लिए खास कूल पैड लगाए गए हैं, जो गर्म नहीं होते। इन इंतजामों से गायों को आरामदायक माहौल मिलता है और हीट स्ट्रेस की दिक्कत काफी हद तक कम हो जाती है। पशु चिकित्सक ने बताया, तनावमुक्त गायों का दूध उत्पादन पर असर पशु चिकित्सक शिवकुमार वर्मा का मानना है कि अगर पशुओं को साफ-सुथरा और तनावमुक्त माहौल मिले, तो इसका दूध उत्पादन पर भी अच्छा असर पड़ता है। अवनीश पांडे हर साल गर्मी शुरू होने से पहले ही डेयरी में ये सारे इंतजाम पूरे कर लेते हैं, ताकि गायों को गर्मी के दिनों में किसी तरह की तकलीफ न हो। गोरखपुर के किसानों के बीच चर्चा का मॉडल आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और डेयरी के वैज्ञानिक प्रबंधन की वजह से अवनीश पांडे का यह मॉडल गोरखपुर के किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उनका मानना है कि अगर किसान खेती के साथ डेयरी को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ें और अपने पशुओं की बेहतर देखभाल करें, तो कम लागत में भी बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। इसका आप पर असर • भारत में: देश भर के डेयरी किसानों के लिए यह मॉडल दिखाता है कि सिर्फ दूध की मात्रा नहीं, बल्कि पशुओं की देखभाल और वैल्यू एडिशन से भी कमाई बढ़ाई जा सकती है। • गोरखपुर में: गोरखपुर और आसपास के इलाके के किसान अवनीश पांडे के फव्वारा सिस्टम और कूल पैड जैसे उपाय अपनाकर गर्मी में अपनी गायों को होने वाले नुकसान और दूध उत्पादन में गिरावट को कम कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. अवनीश पांडे कौन हैं और कहां के रहने वाले हैं? वे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के किसान हैं, जो आधुनिक खेती और डेयरी प्रबंधन के लिए जाने जाते हैं। 2. उनकी डेयरी में कितनी गायें हैं और रोज कितना दूध मिलता है? उनकी डेयरी में अलग-अलग नस्ल की 10 से अधिक गायें हैं, जिनसे रोजाना 100 लीटर से ज्यादा दूध मिलता है। 3. वे गायों को गर्मी से बचाने के लिए क्या तकनीक इस्तेमाल करते हैं? वे डेयरी शेड में ऑटोमेटिक फव्वारा सिस्टम और गायों के बैठने के लिए खास कूल पैड इस्तेमाल करते हैं, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है। 4. क्या वे दूध सीधे बेचते हैं या कुछ और भी करते हैं? वे दूध से कई तरह के मिल्क प्रोडक्ट भी तैयार करते हैं, जिन्हें बाजार में बेचा जाता है, जिससे वैल्यू एडिशन होता है। 5. पशु चिकित्सक शिवकुमार वर्मा का इस बारे में क्या कहना है? उनका मानना है कि पशुओं को साफ-सुथरा और तनावमुक्त माहौल मिलने से दूध उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। 6. अवनीश पांडे यह इंतजाम कब करते हैं? वे हर साल गर्मी शुरू होने से पहले ही डेयरी में ये सारी व्यवस्थाएं पूरी कर लेते हैं, ताकि गायों को परेशानी न हो। प्रेरणा और सबक • पशुओं की देखभाल को कमाई से जोड़ें: अवनीश पांडे ने साबित किया कि गायों की सुविधाओं पर ध्यान देने से दूध उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ते हैं। • वैल्यू एडिशन अपनाएं: सिर्फ कच्चा दूध बेचने के बजाय उससे मिल्क प्रोडक्ट बनाकर उन्होंने डेयरी को ज्यादा लाभदायक बना दिया। • समय रहते तैयारी करें: वे हर साल गर्मी शुरू होने से पहले ही अपनी डेयरी को हीट-प्रूफ बना लेते हैं, ताकि नुकसान की नौबत ही न आए। • विशेषज्ञों की सलाह सुनें: पशु चिकित्सक की राय को गंभीरता से लेकर उन्होंने अपने पशुओं के लिए तनावमुक्त माहौल बनाया। • खेती और डेयरी को साथ जोड़ें: सब्जी की खेती और डेयरी को एक साथ आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्होंने आय के दो मजबूत स्रोत खड़े किए। https://trendkia.com/success-stories/gorakhpur-ke-kisana-ne-phavvare-aura-kula-paida-se-badala-di-apani-deyari-ki-tasvira-4332 TrendKia — Har trend, sabse pehle.