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  "title": "गोरखपुर में घर के काम के साथ टेराकोटा मूर्तियों से सुशीला की हर महीने 50 हजार से अधिक की कमाई",
  "summary": "गोरखपुर की सुशीला घरेलू जिम्मेदारियां निपटाने के बाद परिवार के सहयोग से रोजाना 50 टेराकोटा मूर्तियां तैयार करती हैं, जिससे सामान्य दिनों में 50 हजार रुपये और बड़े ऑर्डर पर 1 लाख रुपये से अधिक की मासिक बिक्री होती है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की निवासी सुशीला ने अपनी लगन, हुनर और कड़ी मेहनत के बल पर आत्मनिर्भरता की एक मिसाल कायम की है। घर के दैनिक कामकाज निपटाने के बाद वह अपने हुनर को आर्थिक स्वावलंबन का जरिया बना रही हैं। चिकनी मिट्टी को तराश कर बनाई जाने वाली उनकी सुंदर मूर्तियों की स्थानीय बाजार में भारी मांग है, जिसके चलते खरीदार स्वयं उनके निवास स्थान पर पहुंचकर मनपसंद मूर्तियों के निर्माण का ऑर्डर भी सौंपते हैं।\n\nघरेलू जिम्मेदारियों के बीच हुनर से बनाई नई पहचान\nसुशीला का दैनिक जीवन घर की देखरेख और पारिवारिक दायित्वों को पूरा करने से शुरू होता है। इन आवश्यक कार्यों से समय निकालकर वह अपने पारंपरिक हुनर को समय देती हैं। मिट्टी के शिल्प कार्य में उनकी रुचि और निरंतर प्रयास का परिणाम है कि आज उनकी पहचान एक कुशल मूर्तिकार के रूप में स्थापित हो चुकी है। ग्राहक केवल बाजार के माध्यम से ही नहीं, बल्कि सीधे उनके घर आकर अपनी व्यक्तिगत पसंद के अनुसार मूर्तियों के आकार और डिजाइन के ऑर्डर दर्ज कराते हैं।\n\nमशीन और पानी की मदद से मिट्टी तैयार करने की विशेष प्रक्रिया\nबेहतरीन मूर्तियां तैयार करने के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण चरण सही मिट्टी का चुनाव तथा उसका प्रसंस्करण होता है। सुशीला के अनुसार, सबसे पहले चिकनी मिट्टी को बाहर से लाया जाता है और उसे पर्याप्त पानी में भिगोकर रखा जाता है। इसके बाद मिट्टी को मशीन की सहायता से अच्छी तरह फेटा और मिलाया जाता है। इस यांत्रिक प्रक्रिया से मिट्टी एकदम चिकनी और लोचदार बन जाती है। चिकनी मिट्टी से निर्मित मूर्तियां न केवल बेहद मजबूत होती हैं, बल्कि उनकी सतह पर एक बेहतरीन फिनिशिंग और चमक भी दिखाई देती है।\n\nप्रतिदिन 50 मूर्तियों का निर्माण और पारिवारिक सहयोग\nइस शिल्प कार्य में सुशीला अकेली काम नहीं करतीं, बल्कि उनका पूरा परिवार इस उद्यम में हाथ बटाता है। परिवार के सदस्य विभिन्न प्रकार के डिजाइन तैयार करने, मिट्टी को आकार देने और फिनिशिंग के कामों में लगातार सहयोग करते हैं। इस सामूहिक प्रयास के बल पर रोजाना लगभग 50 पीस मूर्तियां तैयार कर ली जाती हैं। ग्राहकों की आवश्यकता और बाजार के रुझान को ध्यान में रखते हुए मूर्तियों के आकार तथा पैटर्न में विविधता लाई जाती है।\n\nटेराकोटा रंग की मूर्तियों की भारी मांग और एक लाख तक की आय\nबाजार में टेराकोटा कलर की मूर्तियों को सबसे अधिक पसंद किया जाता है। व्यापारी और थोक विक्रेता एक साथ बड़ी संख्या में टेराकोटा रंग की मूर्तियों की आपूर्ति के लिए ऑर्डर प्रदान करते हैं। इसी मांग के चलते सुशीला सामान्य दिनों में प्रति माह 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य की मूर्तियां बेच लेती हैं। जब पर्व-त्योहारों या विशेष अवसरों पर बड़े थोक ऑर्डर प्राप्त होते हैं, तब उनकी मासिक बिक्री 1 लाख रुपये के आंकड़े को भी पार कर जाती है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत भर में: यह सफलता दर्शाती है कि पारंपरिक हस्तशिल्प और घरेलू समय का सही प्रबंधन ग्रामीण एवं शहरी महिलाओं के लिए स्थायी स्वरोजगार का बेहतरीन जरिया बन सकता है।\n\nगोरखपुर में: स्थानीय मूर्तिकारों और टेराकोटा शिल्पकारों के लिए सीधे खरीदारों एवं थोक ऑर्डरों से कुटीर उद्योग को मजबूती मिल रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुशीला रोजाना कितनी टेराकोटा मूर्तियां तैयार करती हैं?\nसुशीला अपने पूरे परिवार के सहयोग से प्रतिदिन लगभग 50 टेराकोटा मूर्तियां तैयार करती हैं।\n\n2. मूर्तियां बनाने के लिए मिट्टी को किस प्रकार तैयार किया जाता है?\nचिकनी मिट्टी को पहले पानी में भिगोया जाता है और फिर मशीन की मदद से फेटा जाता है ताकि मूर्तियां मजबूत और फिनिश्ड बनें।\n\n3. सुशीला की मूर्तियों से हर महीने कितनी कमाई होती है?\nसामान्य दिनों में उनकी बिक्री 50 हजार रुपये से अधिक रहती है, जबकि बड़े ऑर्डर मिलने पर यह 1 लाख रुपये के पार पहुंच जाती है।\n\n4. ग्राहकों द्वारा ऑर्डर्स किस प्रकार दिए जाते हैं?\nस्थानीय बाजार में बिक्री के अलावा ग्राहक स्वयं उनके घर पहुंचकर मनपसंद डिजाइन का ऑर्डर देते हैं और थोक व्यापारी भी बड़े ऑर्डर देते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nआत्मनिर्भरता के प्रमुख पाठ:\n\n• समय का सही उपयोग: घरेलू जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद बचे समय का रचनात्मक और आर्थिक कार्यों में सदुपयोग करना।\n• पारिवारिक सामंजस्य: परिवार के सदस्यों को एक साथ जोड़कर उत्पादन क्षमता बढ़ाना।\n• तकनीक और गुणवत्ता पर ध्यान: मशीन की मदद से चिकनी मिट्टी तैयार कर मूर्तियों की मजबूती और फिनिशिंग बेहतर बनाना।\n• मांग के अनुसार बदलाव: थोक व्यापारियों और व्यक्तिगत खरीदारों की पसंद के अनुरूप डिजाइन में विविधता लाना।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-08-13",
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    "टेराकोटा मूर्तियां",
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