ग्रामीण युवाओं को स्मार्टफोन से AI सिखाने वाले प्रशांत चौधरी को मिला पांचवां रोहिणी नय्यर पुरस्कार देहरादून के तकनीकी शिक्षक प्रशांत चौधरी को कोडयोगी फाउंडेशन के जरिए गांवों में एआई शिक्षा पहुंचाने के लिए रोहिणी नय्यर पुरस्कार से नवाजा गया है। देहरादून के तकनीकी शिक्षक प्रशांत चौधरी को ग्रामीण विकास में प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा के योगदान के लिए पांचवें रोहिणी नय्यर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। शनिवार को आयोजित एक विशेष समारोह में पूर्व नीति आयोग सीईओ अमिताभ कांत ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान सौंपा। इस पुरस्कार के तहत 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार, एक प्रशस्ति पत्र और एक ट्रॉफी प्रदान की जाती है। चौधरी ने कोडयोगी फाउंडेशन की स्थापना की है, जो ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं को व्यावहारिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी कौशल सिखाने का कार्य करता है। कंप्यूटर और अंग्रेजी की बाधा को दूर करने वाला शिक्षण मॉडल समारोह के दौरान प्रशांत चौधरी ने अपने अभिनव शिक्षण मॉडल की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। यह संपूर्ण प्लेटफॉर्म पारिवारिक स्मार्टफोन के माध्यम से संचालित होता है और इसके लिए अलग से कंप्यूटर या लैपटॉप की जरूरत नहीं पड़ती है। इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से भारतीय भाषाओं में काम करता है। गांवों में अक्सर तकनीकी शिक्षा के रास्ते में उन्नत कंप्यूटर लैब, अंग्रेजी भाषा की अनिवार्यता और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी जैसी बुनियादी समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन इस मॉडल को इन सभी सीमाओं से मुक्त रखा गया है ताकि किसी भी साधनहीन परिवार का छात्र इससे जुड़ सके। 30 दिनों का व्यावहारिक एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम कोडयोगी वर्तमान में छात्रों के लिए 30 दिनों का व्यावहारिक एआई दक्षता कार्यक्रम संचालित कर रहा है। इस पाठ्यक्रम के तहत शिक्षार्थी वास्तविक एआई टूल्स का उपयोग करना सीखते हैं, जो उनकी पढ़ाई में सहायता करते हैं। इसके अलावा, ये उपकरण उनके घरों की दैनिक जरूरतों और सामान्य कार्यों को आसान बनाने में भी मदद करते हैं। अपनी इस शिक्षण पद्धति पर बात करते हुए चौधरी ने कहा कि "AI is evolving faster than school systems." उनका यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि स्कूली व्यवस्थाओं की धीमी गति और ग्रामीण बुनियादी ढांचे की सीमाओं के बीच जो अंतर पैदा होता है, उसे यह कार्यक्रम सीधे तौर पर भरता है। नौ राज्यों के 120 जिलों तक हुआ विस्तार प्रशांत चौधरी ने बताया कि बीते तीन वर्षों के भीतर इस शिक्षण कार्यक्रम का विस्तार बेहद तेजी से हुआ है। वर्तमान समय तक यह पहल नौ राज्यों के 120 जिलों में 3.5 लाख से अधिक छात्रों तक अपनी पहुंच बना चुकी है। यह भौगोलिक कवरेज भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है। संगठन का लक्ष्य अपनी पहुंच को और अधिक व्यापक बनाना है, जिसके तहत मार्च 2027 तक 10 लाख शिक्षार्थियों तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। छात्रों की विविधता और पृष्ठभूमि के आंकड़े इस शिक्षण मॉडल से जुड़ने वाले विद्यार्थियों का दायरा काफी व्यापक और विविध है। नामांकित छात्रों के आंकड़ों के अनुसार, कुल शिक्षार्थियों में 48.6 प्रतिशत छात्राएं शामिल हैं, जो ग्रामीण बालिकाओं की तकनीक में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। नामांकित छात्रों में से लगभग 95 प्रतिशत विद्यार्थी केवल और केवल अपने स्मार्टफोन का उपयोग करके ही पढ़ाई पूरी करते हैं। इसके अलावा, उन्नत स्तर के शिक्षार्थियों में 59 प्रतिशत छात्र ऐसे हैं जो गैर-स्टेम यानी विज्ञान और गणित से इतर पृष्ठभूमि से आते हैं। खुद प्रशांत चौधरी की शैक्षणिक यात्रा भी प्रेरणादायक रही है, वे वर्ष 2010 में मेरठ के पास स्थित एक गांव से आईआईटी में प्रवेश पाने वाले पहले व्यक्ति बने थे। रोहिणी नय्यर पुरस्कार का इतिहास और निदेशक मंडल रोहिणी नय्यर पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2022 में अर्थशास्त्री और प्रशासक डॉ रोहिणी नय्यर की स्मृति में की गई थी। डॉ रोहिणी नय्यर ने अपने पूरे करियर में ग्रामीण विकास से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर गहन कार्य किया था। उनके परिवार ने नय्यर फाउंडेशन फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक पर्पस के माध्यम से इस वार्षिक पुरस्कार की स्थापना की। यह सम्मान हर साल भारत में सामाजिक और आर्थिक विकास के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार के पिछले विजेताओं में नागालैंड से सेथरिचेम संगतम 2022 और छत्तीसगढ़ से दीनानाथ राजपूत 2023 शामिल हैं। इसके बाद के विजेताओं में ओडिशा से अनिल प्रधान 2024 रहे, जबकि पुणे से विद्या परशुरामकर ने वर्ष 2025 में यह सम्मान हासिल किया था। नय्यर फाउंडेशन फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक पर्पस के निदेशकों में जेएनयू के अर्थशास्त्र के एमेरिटस प्रोफेसर और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दीपक नय्यर शामिल हैं। इसके अन्य निदेशकों में वेदांत रिसोर्सेज के धीरज नय्यर और विश्व बैंक के गौरव नय्यर हैं, जो इस पूरे पुरस्कार का संचालन करते हैं। इसका आप पर असर यह नवाचार ग्रामीण भारत के छात्रों को बिना महंगे कंप्यूटर या अंग्रेजी ज्ञान के सीधे स्मार्टफोन से आधुनिक तकनीक सीखने का अवसर देता है। • भारत में: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के युवा अब पारंपरिक स्कूल व्यवस्था की सीमाओं से आगे निकलकर व्यावहारिक एआई कौशल हासिल कर सकते हैं। इससे गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि के छात्र भी आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था और नई नौकरियों के लिए तैयार हो सकेंगे। • उत्तराखंड में: देहरादून से शुरू हुए इस सफल मॉडल से राज्य के पर्वतीय और दूरदराज के क्षेत्रों के युवाओं को तकनीकी शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे। स्थानीय छात्र अपने परिवार के मोबाइल फोन से ही व्यावहारिक कौशल सीखकर रोजगारपरक बन सकते हैं। • छात्राओं की भागीदारी: कार्यक्रम में 48.6 प्रतिशत लड़कियों की भागीदारी से यह साबित होता है कि घरेलू मोबाइल फोन तकनीक में लैंगिक असमानता को पाटने का बड़ा जरिया बन रहे हैं। घर बैठे सीखने की सुविधा के चलते ग्रामीण लड़कियों के लिए उच्च तकनीक सीखना अधिक सुरक्षित और आसान हो गया है। • स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए: लगभग 95 प्रतिशत पढ़ाई सिर्फ मोबाइल पर होने के कारण महंगे लैपटॉप या कंप्यूटर खरीदने का वित्तीय दबाव खत्म हो गया है। सीमित आय वाले परिवार बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपने बच्चों को 30 दिवसीय प्रशिक्षण में शामिल कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह पहल ग्रामीण स्कूलों में तकनीकी संसाधनों की कमी और तेजी से बदलती एआई तकनीक के बीच के अंतर को पाटने के लिए शुरू की गई थी। • बुनियादी ढांचे की कमी: ग्रामीण इलाकों में उन्नत कंप्यूटर प्रयोगशालाएं और स्थिर इंटरनेट कनेक्शन सीमित हैं, जिससे पारंपरिक तकनीकी पाठ्यक्रम वहां लागू नहीं हो पाते। इसी चुनौती को देखते हुए पूरे पाठ्यक्रम को केवल स्मार्टफोन और भारतीय भाषाओं के अनुकूल तैयार किया गया। • स्कूली शिक्षा की धीमी गति: आधुनिक एआई टूल्स तेजी से विकसित हो रहे हैं जबकि पारंपरिक स्कूल पाठ्यक्रम उन्हें उतनी तेजी से शामिल करने में असमर्थ हैं। इस अंतर को कम करने के लिए 30 दिनों का व्यावहारिक कोर्स तैयार किया गया जो सीधे दैनिक जीवन और पढ़ाई से जुड़ता है। • सामाजिक-आर्थिक उद्देश्य: अर्थशास्त्री डॉ रोहिणी नय्यर के ग्रामीण विकास के विजन को आगे बढ़ाने के लिए नय्यर फाउंडेशन हर साल ऐसे जमीनी नवप्रवर्तकों को सम्मानित करता है जो पिछड़े क्षेत्रों में सार्थक बदलाव ला रहे हैं। सवाल-जवाब 1. प्रशांत चौधरी को कौन सा पुरस्कार मिला है? प्रशांत चौधरी को ग्रामीण विकास में तकनीकी शिक्षा के योगदान के लिए पांचवां रोहिणी नय्यर पुरस्कार प्रदान किया गया है। 2. रोहिणी नय्यर पुरस्कार के तहत क्या प्रदान किया जाता है? इस पुरस्कार के तहत 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार, एक प्रशस्ति पत्र और एक ट्रॉफी दी जाती है। 3. प्रशांत चौधरी को यह पुरस्कार किसने सौंपा? शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में पूर्व नीति आयोग सीईओ अमिताभ कांत ने उन्हें यह पुरस्कार सौंपा। 4. कोडयोगी फाउंडेशन क्या काम करता है? कोडयोगी फाउंडेशन ग्रामीण युवाओं को पारिवारिक स्मार्टफोन और भारतीय भाषाओं के माध्यम से व्यावहारिक एआई और तकनीकी कौशल सिखाता है। 5. कोडयोगी का एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम कितने दिनों का है? कोडयोगी वर्तमान में छात्रों के लिए 30 दिनों का व्यावहारिक एआई दक्षता कार्यक्रम चलाता है। 6. इस कार्यक्रम ने अब तक कितने छात्रों तक पहुंच बनाई है? यह कार्यक्रम नौ राज्यों के 120 जिलों में 3.5 लाख से अधिक छात्रों तक पहुंच चुका है। 7. कोडयोगी का मार्च 2027 तक क्या लक्ष्य है? फाउंडेशन ने मार्च 2027 तक 10 लाख शिक्षार्थियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। 8. रोहिणी नय्यर पुरस्कार कब और किसकी याद में शुरू हुआ था? यह पुरस्कार 2022 में अर्थशास्त्री और प्रशासक डॉ रोहिणी नय्यर की याद में नय्यर फाउंडेशन द्वारा शुरू किया गया था। प्रेरणा और सबक प्रशांत चौधरी की यात्रा यह साबित करती है कि साधनहीन पृष्ठभूमि से आने के बावजूद नवाचार के जरिए लाखों जिंदगियों को बदला जा सकता है। • सीमित संसाधनों में अवसर तलाशना: कंप्यूटर और लैब न होने की शिकायत करने के बजाय पारिवारिक स्मार्टफोन को मुख्य शिक्षण उपकरण बनाया गया। किसी भी बड़ी समस्या का समाधान हमेशा महंगे साधनों में नहीं, बल्कि मौजूदा संसाधनों के सही उपयोग में छिपा होता है। • अपनी जड़ों और सामाजिक पृष्ठभूमि को याद रखना: मेरठ के गांव से निकलकर 2010 में आईआईटी पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बनने के बाद चौधरी ने ग्रामीण युवाओं को ही सशक्त बनाने का रास्ता चुना। अपनी सफलता का उपयोग दूसरों के लिए रास्ते खोलने में करना वास्तविक उपलब्धि है। • रुकावटों को ताकत में बदलना: अंग्रेजी भाषा और स्टेम शिक्षा की अनिवार्य शर्त को हटाकर 59 प्रतिशत गैर-विज्ञान छात्रों और 48.6 प्रतिशत लड़कियों को जोड़ा गया। समावेशी दृष्टिकोण अपनाने से समाज के सबसे वंचित वर्ग तक तकनीकी शिक्षा आसानी से पहुंच सकती है। https://trendkia.com/success-stories/gramina-yuvaon-ko-smartaphona-se-ai-sikhane-vale-prashant-chaudhary-ko-mila-panchavan-rohini-nayyar-puraskara-54092 TrendKia — Har trend, sabse pehle.