# हादसे में दोनों पैर गंवाने वाले सुल्तानपुर के सुमित बने जोमैटो डिलीवरी बॉय, 10 महीने से खुद चला रहे खर्च

> सुल्तानपुर में दो मंजिला इमारत से गिरकर दोनों पैरों से लाचार हुए सुमित ने हिम्मत नहीं हारी और जोमैटो डिलीवरी पार्टनर बनकर पिछले 10 महीने से आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं.

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/hadase-men-donon-paira-gnvane-vale-sultanpur-ke-sumit-bane-zomato-dilivari-boya-10-mahine-se-khuda-chala-rahe-kharcha-45221 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुल्तानपुर, सुमित, जोमैटो, फूड डिलीवरी, दिव्यांग आत्मनिर्भरता, प्रेरणादायक कहानी, उत्तर प्रदेश

जिंदगी में अचानक होने वाली गंभीर दुर्घटनाएं इंसान की पूरी दुनिया उलट-पुलट कर सकती हैं, मगर मजबूत इरादे हों तो इंसान हर बाधा को पार कर जाता है. उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के रहने वाले सुमित का सफर इसी जज्बे को दिखाता है. एक भयानक हादसे के दौरान कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह सुन्न और दोनों पैर पैरालाइज्ड हो जाने के बावजूद उन्होंने किसी के आगे हाथ फैलाने के बजाय अपनी मेहनत की राह चुनी. सुमित पिछले करीब 10 महीने से शहर भर में घूम-घूम कर ऑनलाइन फूड डिलीवरी का काम कर रहे हैं और अपनी रोजमर्रा की कमाई से परिवार का सहारा बने हुए हैं.

## दो मंजिला इमारत से गिरने के बाद बदल गई थी दुनिया
कुछ समय पहले सुमित के साथ एक अप्रत्याशित और गंभीर हादसा हुआ था, जिसने उनके पूरे जीवन की दिशा ही बदल कर रख दी. वह एक दो मंजिला इमारत से अचानक नीचे गिर पड़े थे. इस गंभीर चोट के कारण उनकी रीढ़ और कमर के निचले हिस्से पर बेहद बुरा असर पड़ा. अस्पताल में इलाज के बाद भी उनके दोनों पैरों में हरकत नहीं लौटी और वे स्थायी रूप से पैरालाइज्ड हो गए. इस घटना के बाद उनके लिए बिना सहारे के चलना-फिरना नामुमकिन हो गया और आम लोगों की तरह सामान्य दिनचर्या जीना बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया. अचानक आई इस शारीरिक अक्षमता ने उनके सामने अनगिनत सवाल खड़े कर दिए थे.

## इंटरमीडिएट की पढ़ाई और रोजगार का संकट
सुमित ने अपनी पढ़ाई इंटर तक पूरी की थी. हादसे से पहले वे अपने भविष्य को संवारने की योजना बना रहे थे, लेकिन दुर्घटना के बाद गंभीर शारीरिक सीमाओं के चलते उनके लिए सामान्य नौकरी पाना असंभव जैसा लगने लगा. एक तरफ शरीर की लाचारी थी, तो दूसरी तरफ अपने निजी खर्चे और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को पूरा करने का भारी दबाव. किसी भी आम इंसान का हौसला ऐसे मोड़ पर टूट सकता था, लेकिन सुमित ने खाली बैठने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया और अपनी शारीरिक स्थिति के अनुकूल काम की तलाश शुरू कर दी.

## रंजीत का साथ और फूड डिलीवरी की शुरुआत
आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के इस मुश्किल दौर में सुमित की मुलाकात रंजीत से हुई, जिनकी मदद उनके जीवन में नया मोड़ साबित हुई. रंजीत ने सुमित की लगन को देखते हुए उन्हें फूड एग्रीगेटर कंपनी जोमैटो से जोड़ा और फूड डिलीवरी का काम शुरू करने में हर संभव सहायता की. शुरुआत में शारीरिक दिक्कतों के कारण डिलीवरी का काम संभालना बेहद मुश्किल था, लेकिन सुमित ने धीरे-धीरे इसे अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में ढाल लिया. पिछले 10 महीने से वह सुल्तानपुर शहर में नियमित रूप से ग्राहकों के ऑर्डर पहुंचा रहे हैं और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर सम्मानपूर्वक आजीविका कमा रहे हैं.

## परेशानियों को मात देकर दूसरों के लिए बने मिसाल
सुमित का यह संघर्ष सिर्फ पेट भरने की मजबूरी नहीं, बल्कि मुश्किलों के आगे घुटने न टेकने की एक शानदार दास्तान है. उन्होंने अपनी शारीरिक मजबूरी को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया. सुमित का कहना है कि जीवन में संकट चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, अगर इंसान हिम्मत न हारे और लगातार प्रयास करता रहे, तो अंधेरे से बाहर निकलने का रास्ता खुद-ब-खुद बन जाता है. आज वह पूरे इलाके में मेहनत और आत्मसम्मान की जीती-जागती मिसाल बनकर दूसरों को प्रेरित कर रहे हैं.

## इसका आप पर असर
गंभीर दुर्घटना के बाद जीवनयापन के लिए सुमित का यह कदम दिव्यांगजनों के लिए आधुनिक गिग इकॉनमी और स्वरोजगार के व्यावहारिक विकल्पों को रेखांकित करता है.

- **भारत में:** यह उदाहरण दिखाता है कि गिग इकॉनमी और डिलीवरी प्लेटफॉर्म शारीरिक रूप से प्रभावित युवाओं के लिए आय का साधन बन सकते हैं. दिव्यांगजन सहायता और उपयुक्त वाहनों के जरिए बिना किसी औपचारिक दफ्तर के आत्मनिर्भर आजीविका अर्जित कर सकते हैं.
- **सुल्तानपुर में:** स्थानीय शहर में ग्राहकों और व्यापारियों के बीच दिव्यांग डिलीवरी कर्मियों के प्रति सहयोग की भावना बढ़ सकती है. इसके अलावा जिले के अन्य जरूरतमंद युवाओं को भी मुश्किल हालात में काम शुरू करने की प्रेरणा मिलेगी.
- **रोजगार के अवसर:** इंटरमीडिएट तक पढ़ाई करने वाले युवाओं के लिए यह सीख है कि भारी बाधाओं के बावजूद कौशल और तकनीक का उपयोग करके काम खोजा जा सकता है. इससे परिवार पर आर्थिक बोझ कम करने में सीधी मदद मिलती है.
- **सामाजिक दृष्टिकोण:** समाज में शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे लोगों को लाचार समझने की पुरानी मानसिकता में बदलाव आता है. लोग उन्हें सहानुभूति के बजाय सम्मान और स्वावलंबन के नजरिए से देखने लगते हैं.

## ऐसा क्यों हुआ
सुमित की जिंदगी में यह बड़ा बदलाव एक गंभीर हादसे और उसके बाद उपजे आर्थिक संकट के कारण आया, जिसके बाद उन्होंने फूड डिलीवरी को अपनी आजीविका का जरिया बनाया.

- **सीधा कारण:** कुछ समय पहले सुमित एक दो मंजिला इमारत से नीचे गिर गए थे. इस गंभीर दुर्घटना के कारण उनकी कमर के नीचे का हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हुआ और उनके दोनों पैर हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गए.
- **पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियां:** इंटरमीडिएट तक पढ़े सुमित के सामने हादसे के बाद आजीविका चलाने और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई थी. शारीरिक रूप से लाचार होने के कारण उन्हें सामान्य नौकरियां नहीं मिल पा रही थीं.
- **सहयोग और शुरुआत:** मुश्किल दौर में रंजीत नाम के व्यक्ति ने उनकी स्थिति को समझा और उन्हें जोमैटो प्लेटफॉर्म से जुड़ने में मदद की. इसके बाद सुमित ने इस काम को स्वीकार किया और पिछले 10 महीने से लगातार फूड डिलीवरी कर रहे हैं.

## सवाल-जवाब

### 1. सुमित के साथ कौन सा हादसा हुआ था?
सुमित कुछ समय पहले एक दो मंजिला इमारत से नीचे गिर गए थे, जिसके कारण उनकी कमर के नीचे का हिस्सा प्रभावित हुआ और दोनों पैर पैरालाइज्ड हो गए.

### 2. हादसे के बाद सुमित ने अपनी आजीविका चलाने के लिए क्या काम शुरू किया?
सुमित ने सुल्तानपुर में जोमैटो के साथ फूड डिलीवरी का काम शुरू किया और अपनी मेहनत से खर्च चला रहे हैं.

### 3. सुमित कितने समय से फूड डिलीवरी का काम कर रहे हैं?
सुमित पिछले करीब 10 महीने से शहर में लगातार फूड डिलीवरी कर रहे हैं.

### 4. फूड डिलीवरी का काम शुरू करने में सुमित की मदद किसने की?
सुमित की जिंदगी में रंजीत ने मदद की और उन्हें जोमैटो प्लेटफॉर्म से जोड़कर काम शुरू करवाया.

### 5. सुमित की शैक्षिक योग्यता क्या है?
सुमित ने इंटर तक की पढ़ाई पूरी की है.

## प्रेरणा और सबक
सुमित की यह संघर्ष गाथा सिखाती है कि विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर सम्मानजनक जीवन जिया जा सकता है.

- **परिस्थितियों को कमजोरी न बनाएं:** शारीरिक नुकसान चाहे कितना भी बड़ा हो, इंसान को अपनी स्थिति के आगे झुकने के बजाय उपलब्ध विकल्पों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
- **परिश्रम का कोई विकल्प नहीं:** लाचारी का रोना रोने के बजाय अपनी मेहनत से रोटी कमाना व्यक्ति को सच्चा स्वाभिमान और सामाजिक सम्मान दिलाता है.
- **समय पर मदद लेना और देना:** जैसे रंजीत ने सुमित को सही दिशा दिखाई, वैसे ही जीवन में सही मार्गदर्शन को अपनाना और संकट के समय दूसरों का हाथ थामना बहुत जरूरी है.
- **धैर्य और निरंतरता:** नई शुरुआत में मुश्किलें आती हैं, लेकिन 10 महीने तक लगातार काम करके सुमित ने साबित किया कि निरंतर प्रयास से हर काम आसान हो जाता है.

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