# हैदराबाद के चौहत्तर साल के भद्रन्ना ने पसीने की मेहनत से पेश की अनूठी मिसाल

> हैदराबाद के रहने वाले चौहत्तर साल के भद्रन्ना अपनी उम्र को मात देकर आज भी युवाओं की तरह भारी शारीरिक श्रम कर रहे हैं और अपनी फिटनेस की वजह से चर्चा में हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/haidarabada-ke-chauhattara-sala-ke-bhadranna-ne-pasine-ki-mehanata-se-pesha-ki-anuthi-misala-50194 · **Language:** Hindi
**Tags:** हैदराबाद, फिटनेस, मोटा अनाज, स्वास्थ्य, बुजुर्ग

हैदराबाद में एक ऐसे बुजुर्ग की चर्चा जोरों पर है जो इस पड़ाव पर भी युवाओं को मात दे रहे हैं। आमतौर पर आधुनिक दौर की गलत जीवनशैली और मिलावट के कारण लोग साठ साल की उम्र पार करते ही तमाम बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इसके विपरीत चौहत्तर वर्ष के भद्रन्ना ने अपनी शारीरिक क्षमता से सबको चौंका दिया है। इस उम्र में लोग घर पर आराम करना पसंद करते हैं, लेकिन वे चिलचिलाती धूप में भी जमीन खोदने जैसे कठिन काम बड़ी फुर्ती के साथ करते हैं।

## पारंपरिक खानपान और मेहनत का कमाल
अपनी इस असाधारण फिटनेस के पीछे भद्रन्ना अपने पुराने खानपान और जीवनशैली को मुख्य वजह मानते हैं। उनका कहना है कि आज का खानपान पहले जैसा शुद्ध नहीं रह गया है। अपने शुरुआती जीवन में उन्होंने रागी, ज्वार, बाजरा और मक्का जैसे पौष्टिक मोटे अनाजों का नियमित सेवन किया है। उनके रोजाना के भोजन में रागी का दलिया और मक्के की रोटियां मुख्य रूप से शामिल हुआ करती थीं। इसके साथ ही प्राकृतिक रूप से मिलने वाले मांसाहारी विकल्प, अंडे और मछलियों ने उनकी हड्डियों और मांसपेशियों को भीतर से मजबूत बनाने का काम किया है।

## दो दशकों से जारी है शारीरिक श्रम
भद्रन्ना पिछले बीस साल से ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत लगातार मेहनत मजदूरी कर रहे हैं। भारी पत्थरों को हटाना हो या जमीन की खुदाई करनी हो, वे कभी भी काम से पीछे नहीं हटते हैं। वर्तमान में चल रहे एक कार्य को पूरा होने में लगभग चालीस से पैंतालीस दिन का समय लगना है, जिसमें वे बिना किसी थकावट के लगातार पसीना बहा रहे हैं। उनका यह मानना है कि शरीर से लगातार काम लेते रहने से बीमारियां दूर रहती हैं और इंसान हमेशा चुस्त-दुरुस्त बना रहता है।

## युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत
आज की नई पीढ़ी जो लगातार जंक फूड और निष्क्रिय जीवनशैली की आदी होती जा रही है, उसके लिए भद्रन्ना का यह जीवन एक बड़ा सबक है। उनकी यह कहानी साफ तौर पर यह साबित करती है कि यदि खानपान में पारंपरिक और पौष्टिक अनाजों को जगह दी जाए और शरीर को सक्रिय रखा जाए, तो उम्र केवल एक कागजी आंकड़ा बनकर रह जाती है।

## इसका आप पर असर
यह खबर हमारे खानपान और जीवनशैली के प्रति नजरिए को गहराई से प्रभावित करती है।

- **देशभर में:** यह कहानी उन तमाम लोगों के लिए एक सीख है जो कम उम्र में ही शारीरिक कमजोरी के शिकार हो रहे हैं। पारंपरिक अनाजों को अपनी दिनचर्या में शामिल करके फिटनेस बेहतर की जा सकती है।
- **तेलंगाना में:** हैदराबाद और आसपास के स्थानीय युवाओं को यह समझ मिलती है कि मेहनत और सादा खानपान से लंबी उम्र तक स्वस्थ रहा जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
भद्रन्ना की इस बेहतरीन सेहत और शारीरिक क्षमता के पीछे उनका दशकों पुराना जीवनयापन और खानपान रहा है।

- **पारंपरिक खानपान:** बचपन और जवानी के दिनों में रागी, ज्वार, बाजरा और मक्के जैसे मोटे अनाजों का सेवन उनकी हड्डियों की मजबूती का मुख्य कारण रहा है।
- **निरंतर श्रम:** पिछले बीस वर्षों से ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत लगातार शारीरिक मेहनत करने से उनका शरीर हमेशा सक्रिय और रोगों से दूर रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. भद्रन्ना की उम्र कितनी है?
भद्रन्ना की उम्र चौहत्तर साल है।

### 2. वे कहाँ के रहने वाले हैं?
वे हैदराबाद के रहने वाले हैं।

### 3. वे पिछले कितने वर्षों से काम कर रहे हैं?
वे पिछले बीस वर्षों से ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम कर रहे हैं।

### 4. उनकी फिटनेस का मुख्य राज क्या है?
उनकी फिटनेस का मुख्य राज पारंपरिक मोटे अनाजों का सेवन और लगातार शारीरिक श्रम करना है।

## प्रेरणा और सबक
भद्रन्ना का जीवन हमें कई महत्वपूर्ण बातें सिखाता है जिन्हें हर कोई अपने जीवन में अपना सकता है।

- **खानपान में बदलाव:** अपने दैनिक भोजन में पारंपरिक मोटे अनाजों और पौष्टिक आहार को जरूर शामिल करें।
- **शारीरिक सक्रियता:** उम्र चाहे जो भी हो, शरीर को लगातार गतिशील और मेहनती बनाए रखना स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है।

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