हैदराबाद की दीक्षिता ने शुरू किया पारंपरिक स्नैक्स का गृह उद्योग, हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये का कारोबार कूकटपल्ली निवासी दीक्षिता ने प्रोसेस्ड फूड और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए श्री रक्षा फूड्स की नींव रखी, जहां किसानों से सीधे बाजरा, ज्वार और रागी खरीदकर तैयार किए जा रहे पौष्टिक उत्पाद। शहरी जीवनशैली में रसायनों और प्रिजर्वेटिव्स से भरे खानपान ने जब आम लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालना शुरू किया, तब तेलंगाना की राजधानी में एक महिला ने पारंपरिक रसोई की शुद्धता को एक टिकाऊ आजीविका में बदलने का फैसला किया। हैदराबाद के कूकटपल्ली इलाके की रहने वाली दीक्षिता ने फास्ट फूड और डिब्बाबंद स्नैक्स के बढ़ते चलन के बीच शुद्ध खानपान का एक मजबूत विकल्प तैयार किया है। उन्होंने श्री रक्षा फूड्स नाम से एक घरेलू खाद्य उद्यम की शुरुआत की, जिसका बुनियादी मकसद लोगों की रोजमर्रा की थाली में पारंपरिक स्वाद और पोषण को दोबारा लौटाना है। स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बाद उभरा शुद्ध खानपान का विचार बाजार में बिकने वाले जरूरत से ज्यादा तले-भुने और रिफाइंड खाद्य पदार्थों के कारण ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और महिलाओं में पीसीओडी की शिकायतें आम हो चुकी हैं। इन गंभीर शारीरिक समस्याओं को नजदीक से देखने के बाद दीक्षिता ने तय किया कि वे आम जनता को ऐसा भोजन उपलब्ध कराएंगी जो हानिकारक रसायनों और अप्राकृतिक तत्वों से पूरी तरह मुक्त हो। उनकी सोच यह रही कि जिस तरह एक मां बिना किसी स्वार्थ के अपनी संतान के लिए घर में पौष्टिक भोजन पकाती है, ठीक उसी तरह का पोषक और सुरक्षित आहार समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने घरेलू उद्यम का खाका तैयार किया। हानिकारक सामग्रियों से दूरी और किसानों से सीधा संपर्क श्री रक्षा फूड्स की रसोई में बनने वाली किसी भी खाने-पीने की वस्तु में सफेद चीनी, मैदा, वनस्पति घी यानी डालडा, पाम ऑयल अथवा कृत्रिम रंगों की मिलावट पूरी तरह वर्जित रखी गई है। मीठे पकवानों को मिठास देने के लिए जैविक गुड़ काम में लाया जाता है, जबकि नमकीन नाश्ते तैयार करने हेतु गेहूं के आटे और लकड़ी की घानी से निकले कोल्ड-प्रेस्ड तेल का ही उपयोग होता है। भोजन बनाने की यह देसी पद्धति हृदय के स्वास्थ्य और पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में बेहद सहायक मानी जाती है। मोटे अनाजों यानी मिलेट्स की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए किसी मध्यस्थ या बिचौलिए का सहारा नहीं लिया जाता। दीक्षिता स्वयं खेतों तक पहुंचती हैं और बाजरा, ज्वार तथा रागी जैसी फसलों के दानों की गुणवत्ता की बारीकी से जांच करती हैं। लाखों की मासिक आय और सैकड़ों स्थायी ग्राहक फिलहाल यह उद्यम लगभग 10 से 15 किसान परिवारों से सीधे कृषि उत्पाद खरीद रहा है, जिससे अन्नदाताओं को भी उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। एक छोटे घरेलू सेटअप के तौर पर शुरू हुआ यह प्रयास अब एक मजबूत आर्थिक मॉडल बन चुका है। वर्तमान समय में इस उद्यम का मासिक टर्नओवर 1.5 से 2 लाख रुपये के आसपास पहुंच रहा है, जिसमें शुद्ध लाभ का मार्जिन 40 से 50 प्रतिशत तक रहता है। हर महीने 300 से अधिक नियमित ग्राहक सीधे तौर पर जुड़कर इन पारंपरिक उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं। दीक्षिता के अनुसार, “बाजार में मुनाफा कमाने के कई रास्ते उपलब्ध हैं, लेकिन मिलावट के बिना शुद्ध ऑर्गेनिक उत्पाद उपलब्ध कराने से जो आत्मसंतुष्टि मिलती है, वही इस उद्यम की असली सफलता है।” घर-घर तक सेहतमंद नाश्ता पहुंचाने की उनकी यह पहल स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता और प्रामाणिक खानपान का सशक्त उदाहरण बन चुकी है। इसका आप पर असर शुद्ध और रसायन मुक्त पारंपरिक स्नैक्स को अपनाकर आम परिवार बाजार के हानिकारक जंक फूड से बच सकते हैं और अपनी सेहत में सुधार ला सकते हैं। • हैदराबाद में: कूकटपल्ली और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग श्री रक्षा फूड्स से सीधे संपर्क कर ताजा पारंपरिक नाश्ता हासिल कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर 300 से अधिक परिवारों को भरोसेमंद जैविक खाद्य आपूर्ति मिल रही है। • भारत में: यह मॉडल साबित करता है कि ग्रामीण किसानों से सीधे जुड़कर कोई भी व्यक्ति अपने घर से लाभदायक लघु उद्योग शुरू कर सकता है। उपभोक्ताओं को सफेद चीनी, मैदा और पाम ऑयल जैसे तत्वों से मुक्ति पाने की प्रेरणा मिलती है। • किसानों के लिए: 10 से 15 कृषि परिवारों को बिचौलियों के बिना अपनी बाजरा, ज्वार और रागी की फसल का सीधा खरीदार मिल रहा है। इससे छोटे अन्नदाताओं की नियमित आय सुनिश्चित होती है और मोटे अनाजों की खेती को प्रोत्साहन मिलता है। • घरेलू उद्यमियों के लिए: 40 से 50 प्रतिशत के लाभ मार्जिन के साथ गृह उद्योग स्थापित करने की एक व्यावहारिक रूपरेखा सामने आती है। कम लागत में स्वास्थ्यवर्धक खाद्य विकल्प तैयार कर आत्मनिर्भर बना जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह उद्यम जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की बढ़ती दरों और बाजार में उपलब्ध मिलावटी स्नैक्स की समस्या के समाधान के रूप में अस्तित्व में आया। • हानिकारक आहार का दुष्प्रभाव: आधुनिक समय में अत्यधिक रिफाइंड तेल, पाम ऑयल, मैदा और रासायनिक प्रिजर्वेटिव्स वाले भोजन से रक्तचाप, मधुमेह और पीसीओडी की समस्याएं तेजी से बढ़ रही थीं। इन्हीं प्रतिकूल प्रभावों को प्रत्यक्ष देखकर दीक्षिता ने शुद्ध आहार का मार्ग चुना। • पारंपरिक पोषण की कमी: बाजार में मौजूद अधिकांश रेडी-टू-ईट उत्पादों में जैविक गुणवत्ता और घरेलू शुद्धता का अभाव था। घर के बने पौष्टिक खाने की इसी कमी को पूरा करने के लिए प्राकृतिक मिलेट्स और कोल्ड-प्रेस्ड तेल का उपयोग तय किया गया। • बिचौलियों की निर्भरता खत्म करना: अच्छी गुणवत्ता वाले मोटे अनाज प्राप्त करने के लिए मंडियों के बिचौलियों पर भरोसा करने के बजाय खेतों से सीधी खरीद की रणनीति बनाई गई। इससे फसल के दानों की शुद्धता परखना और किसानों को उचित दाम देना संभव हुआ। सवाल-जवाब 1. श्री रक्षा फूड्स की शुरुआत किसने और कहां से की? इस गृह उद्योग की शुरुआत हैदराबाद के कूकटपल्ली निवासी दीक्षिता ने की है। 2. इस उद्यम में किन हानिकारक सामग्रियों का उपयोग नहीं किया जाता? यहाँ सफेद चीनी, मैदा, डालडा, पाम ऑयल और किसी भी प्रकार के कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। 3. मीठे और नमकीन उत्पादों को तैयार करने के लिए कौन से तत्व इस्तेमाल होते हैं? मीठे व्यंजनों के लिए जैविक गुड़ और नमकीन नाश्ते के लिए गेहूं का आटा तथा कोल्ड-प्रेस्ड तेल काम में लिया जाता है। 4. कच्चा माल जुटाने के लिए दीक्षिता क्या तरीका अपनाती हैं? वे बिचौलियों से दूर रहकर सीधे किसानों के पास जाती हैं और बाजरा, ज्वार तथा रागी की गुणवत्ता स्वयं जांचकर खरीदती हैं। 5. श्री रक्षा फूड्स से कितने किसान परिवार जुड़े हुए हैं? वर्तमान में लगभग 10 से 15 किसान परिवारों से सीधे तौर पर कच्चा माल खरीदा जा रहा है। 6. इस व्यवसाय का मासिक टर्नओवर और मुनाफा कितना है? उद्यम का मासिक टर्नओवर 1.5 से 2 लाख रुपये है, जिसमें 40 से 50 प्रतिशत तक का शुद्ध मुनाफा रहता है। 7. हर महीने कितने ग्राहक इस ब्रांड से उत्पाद खरीदते हैं? प्रतिमाह 300 से अधिक नियमित ग्राहक सीधे तौर पर जुड़कर इनसे उत्पाद खरीदते हैं। प्रेरणा और सबक दीक्षिता की यह यात्रा दर्शाती है कि समाज की बुनियादी जरूरत को पहचानकर घर से भी एक सफल और सम्मानजनक उद्यम खड़ा किया जा सकता है। • समस्या में खोजें अवसर: स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को केवल चुनौती मानने के बजाय उन्होंने उसे एक उपयोगी उत्पाद बनाने की प्रेरणा में बदल दिया। • गुणवत्ता से समझौता न करें: सफेद चीनी, मैदा और पाम ऑयल जैसे सस्ते विकल्पों को त्यागकर जैविक गुड़ और कोल्ड-प्रेस्ड तेल चुनना ही ग्राहकों के अटूट विश्वास का कारण बना। • किसानों के साथ सीधा जुड़ाव: बिचौलियों को हटाकर सीधे उत्पादक किसानों से कच्चा माल खरीदने से न केवल शुद्धता सुनिश्चित हुई, बल्कि ग्रामीण परिवारों को भी संबल मिला। • मुनाफे से ऊपर आत्मसंतुष्टि: सिर्फ अत्यधिक धन कमाने के बजाय उपभोक्ता की भलाई और शुद्धता को प्राथमिकता देकर टिकाऊ व्यावसायिक सफलता हासिल की जा सकती है। https://trendkia.com/success-stories/hyderabad-ki-dikshita-ne-shuru-kiya-parnparika-snaiksa-ka-griha-udyoga-hara-mahine-derha-se-do-lakha-rupaye-ka-karobara-53261 TrendKia — 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