# हैदराबाद की वर्कशॉप से निकली कलमों का जलवा, आधी सदी तक चलने वाले हैंडमेड पेन के मुरीद हुए कई देश

> हैदराबाद के बाचुपल्ली में तैयार होने वाले विशेष हैंडमेड फाउंटेन पेन 50 वर्षों से अधिक समय तक चलने के लिए जाने जाते हैं, जिनकी मांग अमेरिका, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच चुकी है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/hyderabad-ki-varkashopa-se-nikali-kalamon-ka-jalava-adhi-sadi-taka-chalane-vale-haindameda-pena-ke-murida-hue-kai-desha-55485 · **Language:** Hindi
**Tags:** हैंडमेड पेन, हैदराबाद, पीएलपी हैंडमेड पेन्स, फाउंटेन पेन, पूना लक्ष्मीपति, भारतीय हस्तशिल्प, लघु उद्योग

हैदराबाद के बाचुपल्ली इलाके में स्थित एक छोटी सी कार्यशाला इन दिनों दुनिया भर के कलम प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां लेथ मशीनों की निरंतर आवाजों के बीच कुशल हाथों से ऐसे फाउंटेन पेन तराशे जाते हैं, जो कई पीढ़ियों तक साथ निभाने का माद्दा रखते हैं। पीएलपी हैंडमेड पेन्स के संस्थापक पूना लक्ष्मीपति पिछले 55 से अधिक वर्षों से कलम निर्माण की इस बारीक कला में सक्रिय हैं। अपने शुरुआती दौर में वे अन्य स्थापित कंपनियों के लिए पेनों का निर्माण करते थे। समय के साथ उन्होंने अपने समृद्ध अनुभव को एक स्वतंत्र पहचान देने का फैसला किया और अपने बेटे पूना सतीश कुमार के साथ मिलकर अपने खुद के ब्रांड पीएलपी की नींव रखी। आज यह उपक्रम भारतीय हस्तकला की बारीकी को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित कर रहा है।

## उत्कृष्ट कच्चा माल और हाथ से तराशने की प्रक्रिया
इन अनूठी कलमों के निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले एबोनाइट और ऐक्रेलिक कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है। कारखाने के भीतर पूरी उत्पादन प्रक्रिया बेहद सावधानी और मानवीय नियंत्रण के तहत संचालित होती है। सबसे पहले रॉ रॉड्स को सटीक नाप में काटा जाता है। इसके बाद लेथ मशीन के जरिए थ्रेडिंग, शेपिंग और पूरी बॉडी को आकार देने का काम कारीगरों के हाथों से ही पूरा किया जाता है। पेन का ढांचा तैयार होने के बाद उसकी सतह को चिकना बनाने और बेहतरीन फिनिशिंग प्रदान करने के लिए खास पॉलिशिंग तकनीक अपनाई जाती है, जिससे कलम को एक प्रीमियम स्पर्श मिलता है।

## किफायती दाम में अंतरराष्ट्रीय स्तर की बनावट
लिखावट के दौरान स्याही के सुचारू प्रवाह के लिए इन कलमों में आईड्रॉपर और आधुनिक कनवर्टर दोनों तरह की प्रणालियां प्रदान की जाती हैं। सुगम और सहज हैंडराइटिंग का अनुभव देने के मकसद से इनमें नंबर 5 और नंबर 6 आकार की प्रीमियम निब्स लगाई जाती हैं, जो कागज पर चलने वाले हर शब्द को स्पष्ट और सुंदर बनाती हैं। वैश्विक बाजार में जहां मोंट ब्लांक जैसे लग्जरी ब्रांड्स के कस्टमाइज्ड पेन लाखों रुपयों की कीमत में बेचे जाते हैं, वहीं हैदराबाद में तैयार ये टिकाऊ पेन 1,500 से 5,600 रुपए की शुरुआती कीमत में उपलब्ध हो जाते हैं। इसके साथ ही ग्राहकों की सहूलियत के लिए मात्र 75 रुपए में खास फाउंटेन इंक भी उपलब्ध कराई जाती है।

## आधी सदी तक की मजबूती और दुनिया भर से मांग
इन हैंडमेड पेनों की सबसे बड़ी खासियत इनका असाधारण टिकाऊपन है। निर्माताओं के अनुसार, एक बार खरीदी गई यह कलम बिना किसी बड़ी तकनीकी खराबी के 50 साल या उससे भी अधिक समय तक लगातार काम कर सकती है। बाचुपल्ली से निकला यह देसी शिल्प अब भारत की सीमाओं को पार कर चुका है। डिजिटल दौर में टाइपिंग के बढ़ते चलन के बावजूद हाथ की लिखावट और पारंपरिक शिल्प के प्रति लोगों की दीवानगी कम नहीं हुई है। आज पीएलपी को अमेरिका, जर्मनी, समूचे यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों से ऑनलाइन माध्यम के जरिए लगातार ऑर्डर्स मिल रहे हैं, जो भारतीय कारीगरी की मजबूती को प्रमाणित करते हैं।

## इसका आप पर असर
यह समाचार टिकाऊ हस्तशिल्प की प्रासंगिकता और किफायती भारतीय विकल्पों की उपलब्धता को उजागर करता है।

- **भारत में खरीदारों के लिए:** स्टेशनरी प्रेमियों को महंगे विदेशी ब्रांड्स के मुकाबले बेहद किफायती दामों में उच्च गुणवत्ता वाले हैंडमेड फाउंटेन पेन मिल रहे हैं। मात्र 1,500 से 5,600 रुपए की शुरुआती कीमत में लंबे समय तक चलने वाला पेन और 75 रुपए में स्याही प्राप्त की जा सकती है।
- **हैदराबाद में स्थानीय शिल्प के लिए:** शहर के छोटे विनिर्माण उपक्रमों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से स्थानीय स्तर पर हुनरमंद कारीगरों के लिए रोजगार और सम्मान के नए अवसर बनते हैं। यह पारंपरिक कारीगरी को नई पीढ़ी के बीच प्रासंगिक बनाए रखने में मददगार है।
- **टिकाऊ उपभोग के प्रति दृष्टिकोण:** यूज़-एंड-थ्रो प्लास्टिक पेन के स्थान पर आधी सदी चलने वाली धातु और एबोनाइट की कलमें पर्यावरण के अनुकूल विकल्प पेश करती हैं। खरीदार बार-बार पेन बदलने के खर्चे से बचकर एकमुश्त समझदारी भरा निवेश कर सकते हैं।
- **वैश्विक स्तर पर भारतीय ब्रांडिंग:** पश्चिमी देशों में भारतीय हस्तकला की बढ़ती मांग घरेलू कारीगरों को ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर सीधे विदेशी ग्राहकों तक पहुंचने की प्रेरणा देती है। इससे स्थानीय उद्यमों का आत्मविश्वास और निर्यात क्षमता बढ़ती है।

## ऐसा क्यों हुआ
हैदराबाद के इस छोटे उद्यम की अंतरराष्ट्रीय सफलता दशकों के जमीनी अनुभव, उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल और आधुनिक वैश्विक ई-कॉमर्स की पहुंच का परिणाम है।

- **दशकों का व्यावहारिक अनुभव:** संस्थापक पूना लक्ष्मीपति ने 55 से अधिक वर्षों तक अन्य बड़े ब्रांडों के लिए पेन तैयार करके निर्माण तकनीक की बारीकियों में महारत हासिल की थी। इस गहरे तकनीकी ज्ञान ने उन्हें अपने खुद के स्वतंत्र ब्रांड के तहत दोषरहित उत्पाद विकसित करने का ठोस आधार दिया।
- **टिकाऊ कच्चे माल का चयन:** इन पेनों को बनाने के लिए उच्च श्रेणी के एबोनाइट और ऐक्रेलिक का उपयोग किया जाता है, जिन्हें हाथ से नियंत्रित लेथ मशीनों पर तराशा जाता है। हाथ से की जाने वाली थ्रेडिंग, शेपिंग और विशेष पॉलिशिंग इन कलमों को पांच दशकों तक चलने लायक मजबूती प्रदान करती है।
- **किफायती मूल्य निर्धारण और वैश्विक ऑनलाइन पहुंच:** जहां अंतरराष्ट्रीय कस्टमाइज्ड पेन लाखों रुपयों में आते हैं, वहीं 1,500 से 5,600 रुपए की श्रेणी ने विदेशी खरीदारों का ध्यान खींचा। डिजिटल दौर में ऑनलाइन माध्यमों ने अमेरिका, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के पेन संग्राहकों को हैदराबाद की इस वर्कशॉप से सीधे जोड़ दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. पीएलपी हैंडमेड पेन्स के संस्थापक कौन हैं?
इसकी स्थापना पूना लक्ष्मीपति ने की है, जो पिछले 55 से अधिक वर्षों से पेन निर्माण से जुड़े हैं और अपने बेटे पूना सतीश कुमार के साथ इसे चलाते हैं।

### 2. यह वर्कशॉप कहां स्थित है?
यह वर्कशॉप तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के बाचुपल्ली इलाके में स्थित है।

### 3. इन कलमों को बनाने में किस सामग्री का उपयोग किया जाता है?
इन पेनों को तैयार करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले एबोनाइट और ऐक्रेलिक कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है।

### 4. इन हैंडमेड पेनों की शुरुआती कीमत क्या है?
हैदराबाद में बनने वाले ये टिकाऊ हैंडमेड पेन 1,500 से 5,600 रुपए की शुरुआती रेंज में उपलब्ध हैं।

### 5. स्याही भरने और निब के लिए क्या विकल्प दिए गए हैं?
इनमें आईड्रॉपर और आधुनिक कनवर्टर दोनों विकल्प मिलते हैं, साथ ही स्मूथ राइटिंग के लिए नंबर 5 और नंबर 6 साइज की प्रीमियम निब्स लगाई जाती हैं।

### 6. इन पेनों का जीवनकाल कितना बताया गया है?
निर्माताओं के अनुसार, यह पेन एक बार खरीदने पर बिना किसी बड़ी खराबी के 50 साल या उससे भी अधिक समय तक चल सकता है।

### 7. किन विदेशी देशों से इन कलमों के ऑर्डर्स आ रहे हैं?
पीएलपी को ऑनलाइन माध्यम से अमेरिका, जर्मनी, पूरे यूरोप और ऑस्ट्रेलिया से नियमित ऑर्डर्स मिल रहे हैं।

### 8. इस ब्रांड की फाउंटेन इंक की कीमत क्या है?
यह ब्रांड अपनी खास फाउंटेन इंक केवल 75 रुपए की कीमत में उपलब्ध कराता है।

## प्रेरणा और सबक
पीएलपी हैंडमेड पेन्स की यात्रा साबित करती है कि लंबा समर्पण, गुणवत्ता पर भरोसा और पारिवारिक साझेदारी किसी भी छोटे हुनर को वैश्विक पहचान दिला सकती है।

- **अपने हुनर को स्वतंत्र पहचान दें:** दशकों तक दूसरों के लिए काम करने के बाद भी अपनी खुद की ब्रांड पहचान स्थापित करने का साहस करना चाहिए। उम्र या समय कभी भी नई शुरुआत करने में बाधा नहीं बनता।
- **गुणवत्ता से कोई समझौता न करें:** पांच दशकों से अधिक चलने वाले उत्पादों का निर्माण करके यह दिखाया गया कि उत्पाद की दीर्घायु ही सबसे बड़ा विज्ञापन है। जब वस्तु मजबूत और विश्वसनीय हो, तो ग्राहक दूर देशों से भी खिंचे चले आते हैं।
- **पारंपरिक कौशल के साथ नई पीढ़ी को जोड़ें:** पूना लक्ष्मीपति ने अपने बेटे पूना सतीश कुमार के साथ मिलकर काम शुरू किया, जिससे पुराने तजुर्बे को नया विस्तार मिला। पारिवारिक हुनर को आगे बढ़ाने से पारंपरिक शिल्प आधुनिक दौर में भी जीवित रहते हैं।
- **डिजिटल साधनों से सीमाओं को लांघें:** एक छोटे से इलाके की वर्कशॉप से निकलकर दुनिया भर में सामान बेचना दिखाता है कि आधुनिक तकनीक से जुड़कर स्थानीय कारीगर वैश्विक व्यापारी बन सकते हैं।

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