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  "type": "article",
  "title": "हैदराबाद में जन्मे प्रेम वत्स अब खरीदेंगे आईडीबीआई बैंक, कभी जेब में थे सिर्फ 8 डॉलर",
  "summary": "सरकार ने आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचने के लिए कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के करीब 53,000 करोड़ रुपये के ऑफर को मंजूरी दे दी है। कंपनी के चेयरमैन प्रेम वत्स कभी सिर्फ 8 डॉलर लेकर हैदराबाद से कनाडा गए थे और आज उन्हें कनाडा का वॉरेन बफे कहा जाता है।",
  "content": "देश के सरकारी बैंकों में शुमार आईडीबीआई बैंक का मालिकाना हक अब बदलने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए कनाडा की दिग्गज कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के ऑफर को मंजूरी दे दी है और अब किसी भी वक्त इसका औपचारिक ऐलान हो सकता है। यह सौदा करीब 5.5 अरब डॉलर यानी लगभग 53,000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। अगर यह डील पूरी होती है, तो यह भारत के बैंकिंग इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश बन जाएगा। सरकार लंबे समय से इस बैंक की हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में जुटी थी, ताकि इसे प्राइवेट हाथों में देकर मुनाफे वाला बैंक बनाया जा सके। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जिस विदेशी कंपनी को यह बैंक मिलने जा रहा है, उसके मुखिया का नाता खुद भारत से रहा है।\n\nहैदराबाद की गलियों से शुरू हुआ सफर\nफेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के चेयरमैन और सीईओ का नाम प्रेम वत्स है। उनका जन्म 1950 में हैदराबाद के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। बचपन और पढ़ाई-लिखाई भारत में ही हुई और शुरू से ही वे पढ़ाई में तेज माने जाते थे। यही वजह रही कि 1971 में उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में गिने जाने वाले आईआईटी मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरा किया। लेकिन प्रेम वत्स के मन में कुछ बड़ा करने की चाह थी, इसलिए ग्रेजुएशन के फौरन बाद उन्होंने अपना बोरिया-बिस्तर बांधा और 1970 के दशक की शुरुआत में कनाडा के लिए निकल पड़े। जब वे कनाडा पहुंचे, तब उनकी जेब में सिर्फ 8 डॉलर थे, जो आज के हिसाब से करीब 600-700 रुपये के बराबर बैठते हैं। इतनी मामूली रकम के साथ किसी नए मुल्क में जिंदगी शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।\n\nनौकरी से करियर की नई दिशा\nकनाडा पहुंचने के बाद प्रेम वत्स ने वहां की मशहूर वेस्टर्न ओंटारियो यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और एमबीए की डिग्री हासिल की। यहीं से उनके करियर की दिशा पूरी तरह बदल गई और केमिकल इंजीनियरिंग पढ़ने वाला यह छात्र फाइनेंस की दुनिया की ओर मुड़ गया। एमबीए पूरा करने के बाद 1974 में उन्होंने कन्फेडरेशन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी शुरू की, जहां उनका काम स्टॉक पोर्टफोलियो संभालना और निवेश के मौकों पर रिसर्च करना था। इसी नौकरी के दौरान उन्होंने शेयर बाजार, फाइनेंस और इंश्योरेंस इंडस्ट्री की बारीकियां करीब से सीखीं। कुछ साल नौकरी करने के बाद उन्होंने अपना काम शुरू करने का फैसला किया और निवेश की दुनिया में कदम रखा। इसी क्रम में उन्होंने हैम्ब्लिन वत्स इन्वेस्टमेंट काउंसिल लिमिटेड नाम से अपनी कंपनी खड़ी की। इसके बाद 1985 में उन्होंने फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की नींव रखी। कंपनी के नाम में ही उसका मकसद छिपा है, फेयरफैक्स का मतलब है फेयर यानी सही और फ्रेंडली एक्विजिशन यानी दोस्ताना अधिग्रहण। प्रेम वत्स खुद कहते हैं कि उनका मकसद किसी कंपनी को धोखे से या जबरन हथियाना नहीं, बल्कि उसकी सही कीमत चुकाकर उसमें निवेश करना है। आज इसी कंपनी का मार्केट कैप 5310.26 मिलियन कैनेडियन डॉलर से भी ज्यादा हो चुका है।\n\nवॉरेन बफे से क्यों होती है तुलना\nअमेरिका के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे को वैल्यू इन्वेस्टिंग का मास्टर माना जाता है और प्रेम वत्स के निवेश करने का तरीका भी काफी हद तक वैसा ही है। वे रातों-रात अमीर बनाने वाली ट्रेडिंग या सट्टेबाजी वाली रणनीति में यकीन नहीं रखते। इसके बजाय वे उन कंपनियों की तलाश करते हैं जिनका भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन फिलहाल बाजार में उन्हें सही कीमत नहीं मिल रही। ऐसी कंपनियों में वे पैसा लगाते हैं और फिर सालों तक धैर्य के साथ इंतजार करते हैं, जब तक कि उनकी असली कीमत सामने न आ जाए। निवेश के इसी अनुशासित और धैर्यभरे तरीके की वजह से उन्हें कनाडा का वॉरेन बफे कहा जाने लगा।\n\nभारत से नहीं टूटा नाता\nकनाडा में बसने के बावजूद प्रेम वत्स का भारत से रिश्ता कभी कमजोर नहीं पड़ा। आईडीबीआई बैंक की डील से पहले भी फेयरफैक्स की भारतीय यूनिट के पास केरल की सीएसबी बैंक यानी कैथोलिक सीरियन बैंक में करीब 40% की बड़ी हिस्सेदारी पहले से मौजूद है। इसका मतलब है कि भारत में बैंक चलाने का अनुभव उनके पास पहले से ही है। इसके अलावा भारत की जानी-मानी फाइनेंस कंपनी आईआईएफएल कैपिटल में भी उनका बड़ा निवेश है। यही नहीं, बेंगलुरु के शानदार केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन में भी उनकी कंपनी का पैसा लगा हुआ है। इन सभी निवेशों से साफ है कि प्रेम वत्स भारत के कारोबारी माहौल को अच्छी तरह समझते हैं और यहां लंबे समय से भरोसा जताते आए हैं।\n\nआईडीबीआई ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा\nअगर आपका खाता आईडीबीआई बैंक में है, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आपका जमा पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। मालिकाना हक बदलने के बाद सिर्फ बैंक के काम करने का तरीका बदलेगा। बैंक की तकनीक, जैसे मोबाइल ऐप और वेबसाइट, पहले से ज्यादा एडवांस हो जाएगी। ग्राहकों को लोन लेना पहले से आसान हो सकता है और बैंक नई-नई सुविधाएं लेकर आ सकता है। मोटे तौर पर समझा जाए तो जिस तरह एचडीएफसी या आईसीआईसीआई बैंक अपने ग्राहकों को लगातार नई सर्विस और सुविधाएं देते रहते हैं, आने वाले समय में आईडीबीआई बैंक में भी ऐसी ही सुविधाएं मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।\n\nइसका आप पर असर\n• आईडीबीआई ग्राहकों के लिए: बैंक में जमा आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा, लेकिन मालिकाना हक बदलने के बाद ऐप, वेबसाइट और लोन प्रक्रिया जैसी सुविधाएं पहले से बेहतर हो सकती हैं।\n• निवेशकों और बाजार के लिए: अगर यह डील फाइनल होती है तो यह भारत के बैंकिंग सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश होगा, जिस पर आने वाले दिनों में बाजार की नजर बनी रहेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आईडीबीआई बैंक को कौन खरीद रहा है?\nकनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स सरकार की हिस्सेदारी खरीदने जा रही है, जिसके ऑफर को मंजूरी मिल चुकी है।\n\n2. यह डील कितने रुपये की है?\nयह सौदा करीब 5.5 अरब डॉलर यानी लगभग 53,000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है।\n\n3. प्रेम वत्स कौन हैं?\nफेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के चेयरमैन और सीईओ प्रेम वत्स का जन्म 1950 में हैदराबाद में हुआ था और उन्होंने आईआईटी मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है।\n\n4. प्रेम वत्स को कनाडा का वॉरेन बफे क्यों कहा जाता है?\nकम आंकी गई अच्छी कंपनियों में निवेश कर सालों तक धैर्य से इंतजार करने की उनकी रणनीति वॉरेन बफे की वैल्यू इन्वेस्टिंग शैली से मिलती-जुलती है।\n\n5. क्या आईडीबीआई बैंक में मेरा जमा पैसा सुरक्षित रहेगा?\nहां, मालिकाना हक बदलने से ग्राहकों का जमा पैसा प्रभावित नहीं होगा और वह पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।\n\n6. भारत में फेयरफैक्स के पहले से कौन-कौन से निवेश हैं?\nफेयरफैक्स की भारतीय यूनिट के पास केरल की सीएसबी बैंक में करीब 40% हिस्सेदारी है, साथ ही आईआईएफएल कैपिटल और बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में भी निवेश है।\n\n7. डील पूरी होने के बाद आईडीबीआई ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?\nबैंक की तकनीक जैसे ऐप और वेबसाइट एडवांस होंगी, लोन लेना आसान हो सकता है और बैंक नई सुविधाएं ला सकता है, जैसा एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक करते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\n• सीमित संसाधनों को बहाना न बनाएं: प्रेम वत्स महज 8 डॉलर लेकर कनाडा पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने इसे कभी अपनी सीमा नहीं बनने दिया।\n• शिक्षा की मजबूत नींव रखें: आईआईटी मद्रास से मिली तकनीकी और विश्लेषणात्मक सोच ने आगे चलकर उन्हें फाइनेंस की दुनिया समझने में मदद की।\n• पहले अनुभव लें, फिर अपना रास्ता बनाएं: उन्होंने कन्फेडरेशन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी करके इंडस्ट्री को करीब से समझा, उसके बाद ही अपनी कंपनी खड़ी की।\n• धैर्य और अनुशासन अपनाएं: रातों-रात मुनाफे की जगह उन्होंने कम आंकी गई अच्छी कंपनियों में निवेश कर सालों इंतजार करने की रणनीति चुनी।\n• अपनी जड़ों से जुड़े रहें: कनाडा में सफल होने के बावजूद उन्होंने सीएसबी बैंक, आईआईएफएल कैपिटल और बेंगलुरु एयरपोर्ट जैसे निवेशों के जरिए भारत से नाता बनाए रखा।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-15",
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