# ट्रिपलआईटी जबलपुर से निकलीं समृद्धि शर्मा कैसे बनीं गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जानिए उनकी कामयाबी का मंत्र

> आईआईटी या आईआईएम की डिग्री के बिना भी बड़ी टेक कंपनियों में मुकाम हासिल किया जा सकता है। ट्रिपलआईटी जबलपुर की पूर्व छात्रा समृद्धि शर्मा ने लगातार सीखने, इंटर्नशिप और कोडिंग क्लब के दम पर गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी पाई।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/iiit-jabalpur-se-nikalin-samriddhi-sharma-kaise-banin-google-men-sophtaveyara-injiniyara-janie-unaki-kamayabi-ka-mntra-46891 · **Language:** Hindi
**Tags:** समृद्धि शर्मा, गूगल, ट्रिपलआईटी जबलपुर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, करियर टिप्स, कोडिंग, हैकाथॉन

इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर विकास के क्षेत्र में कदम रखने वाले ज्यादातर युवाओं की दिली ख्वाहिश दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों में अपनी जगह बनाने की होती है। तकनीक की दुनिया में करियर तलाश रहे छात्रों के बीच अक्सर यह आम धारणा देखने को मिलती है कि गूगल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में प्रवेश पाने के लिए केवल प्रमुख आईआईटी या आईआईएम जैसे संस्थानों का ठप्पा होना ही अनिवार्य है। हालांकि, तकनीकी उद्योग का मौजूदा परिदृश्य यह स्पष्ट करता है कि किसी बड़े ब्रांड वाले संस्थान की डिग्री से कहीं अधिक अहमियत व्यावहारिक कौशल, वास्तविक समस्याओं के समाधान की क्षमता और लगातार सीखने की ललक की होती है। कॉलेज जीवन के दौरान विभिन्न प्रोजेक्ट्स का निर्माण, कोडिंग प्रतियोगिताओं में भागीदारी और खुद को आधुनिक तकनीकों के अनुकूल ढालना किसी भी छात्र को वैश्विक स्तर का सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल बना सकता है। ट्रिपलआईटी जबलपुर से पढ़ाई पूरी करके गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर का पद संभालने वाली समृद्धि शर्मा का करियर सफर इसी सोच की जीवंत मिसाल पेश करता है।

## बिना तयशुदा योजना के निरंतर सीखने का नजरिया
समृद्धि शर्मा ने ट्रिपलआईटी जबलपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग शाखा में बीटेक की डिग्री पूरी की। गैर-कंप्यूटर साइंस बैकग्राउंड से ताल्लुक रखने के बावजूद सॉफ्टवेयर के प्रति उनके स्वाभाविक रुझान और दृढ़ संकल्प ने उन्हें राह की हर चुनौती से पार पाने में मदद की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत किसी बेहद जटिल या सालों पहले तैयार किए गए पूर्व-नियोजित फॉर्मूले के तहत नहीं की थी। इसके उलट, उनका पूरा ध्यान अपने वर्तमान काम पर शत-प्रतिशत समर्पण देने, सही समय पर सटीक फैसले लेने और नई तकनीकों की बुनियादी समझ को पुख्ता करने पर केंद्रित रहा। कॉलेज के शुरुआती वर्षों से ही उनका झुकाव कठिन तकनीकी उलझनों को सुलझाने और नए सॉफ्टवेयर टूल्स को आजमाने में था। इसी निरंतर अभ्यास के बल पर उन्होंने साल 2024 में गूगल के प्रतिष्ठित स्टेप यानी स्टूडेंट ट्रेनिंग इन इंजीनियरिंग प्रोग्राम के तहत अपनी पहली इंटर्नशिप हासिल की थी।

## प्रोजेक्ट्स के अनुभव से फुल टाइम भूमिका तक का सफर
स्टेप इंटर्नशिप के सफल समापन के बाद समृद्धि ने अपने तकनीकी दायरे को और विस्तार दिया। साल 2025 में उन्होंने एक बार फिर गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की दूसरी इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी की। इस अहम इंटर्नशिप अवधि के दौरान उन्हें जटिल तकनीकी ढांचे, ऑटोमेटेड डेटा पाइपलाइंस और रियल-टाइम डैशबोर्ड जैसे वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिला। इन जिम्मेदारियों ने न सिर्फ उनके सिस्टम डिजाइन और कोडिंग कौशल को नई मजबूती दी, बल्कि कॉर्पोरेट कार्यप्रणाली की वास्तविक आवश्यकताओं से भी उन्हें गहराई से परिचित कराया। इसके उपरांत उन्होंने कुछ समय फिनटेक सेक्टर में काम करते हुए वित्तीय तकनीक की बारीकियों को समझा। विभिन्न क्षेत्रों के इस समृद्ध अनुभव के बाद आखिरकार वे फुल-टाइम सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर गूगल से जुड़ गईं।

## कैंपस कम्युनिटी और कोडिंग क्लब में निभाई अहम भूमिका
तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ संवाद और टीमवर्क की क्षमता भी किसी सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सफलता में निर्णायक साबित होती है। समृद्धि शर्मा ट्रिपलआईटी जबलपुर के प्रोग्रामिंग क्लब बिटबाइट की कोर टीम का एक सक्रिय और महत्वपूर्ण हिस्सा थीं। कैंपस में रहते हुए उन्होंने कई प्रतिस्पर्धी कोडिंग प्रतियोगिताओं के संचालन में प्रमुख भूमिका निभाई। इसके साथ ही उन्होंने अपने से जूनियर बैच के छात्रों के लिए कई उपयोगी कार्यशालाएं आयोजित कीं और संस्थान के भीतर डेवलपर कम्युनिटी के विकास में बड़ा योगदान दिया। एक टीम के भीतर नेतृत्व करने और साथियों के साथ मिलकर काम करने के इस अनुभव ने उन्हें कॉर्पोरेट माहौल की बड़ी जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह मानसिक रूप से तैयार किया। उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति दूसरों को सिखाता है और टीम के साझा विकास पर जोर देता है, तो उसकी अपनी तकनीकी समझ भी पहले से कहीं अधिक मजबूत और स्पष्ट हो जाती है।

## हैकथॉन्स और फेलोशिप्स के जरिए मिली राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
समृद्धि की तकनीकी क्षमताओं ने उन्हें राष्ट्रीय पटल पर भी खास पहचान दिलाई। उन्होंने जाने-माने हैकथॉन हैकसीबीएस 7.0 में पहला स्थान प्राप्त करते हुए शानदार जीत हासिल की थी। इस हैकथॉन के दौरान उन्होंने एक स्केलेबल पीयर-टू-पीयर रिसोर्स-शेयरिंग प्लेटफॉर्म डिजाइन और डेवलप किया था। इसके अलावा वे गूगल गर्ल हैकाथॉन की फाइनलिस्ट सूची में शामिल रहीं और उन्हें गूगल विमेन टेकमेकर्स इंजीनियरिंग फेलोशिप यानी डब्ल्यूटीईएफ की कॉलर बनने का गौरव भी हासिल हुआ। प्रोग्रामिंग के स्तर पर जावा, पाइथन, सी, रिएक्ट और एमआईआरएन स्टैक जैसी आधुनिक वेब तकनीकों पर उनकी मजबूत पकड़ ने उन्हें उद्योग की आम भीड़ से अलग मुकाम दिलाया।

## दीर्घकालिक योजना के दबाव से बचने की व्यावहारिक सलाह
अक्सर इंजीनियरिंग और टेक क्षेत्र में पढ़ाई कर रहे युवा इस बात को लेकर मानसिक तनाव में आ जाते हैं कि अगले 5 या 10 वर्षों में उनका करियर किस मुकाम पर होगा। समृद्धि शर्मा इस सोच को पूरी तरह से अव्यावहारिक मानती हैं और एक बिल्कुल अलग दृष्टिकोण रखने की सलाह देती हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी छात्र को अपने पूरे करियर का कठोर ब्लूप्रिंट पहले से तैयार करने के फेर में नहीं पड़ना चाहिए। उनके अनुसार जिंदगी और करियर में एक समय पर सिर्फ एक कदम आगे बढ़ाना चाहिए। छात्र वर्तमान में जिस भी प्रोजेक्ट या पढ़ाई में लगे हैं, वहां अपनी पूरी ऊर्जा लगाएं और यह भरोसा रखें कि वर्तमान के अनुभव ही भविष्य की सही दिशा तय करेंगे। असफलता से डरने के बजाय हर अनुभव से नई सीख लेना ही किसी सफल प्रोफेशनल की सबसे बड़ी पूंजी होती है।

## इसका आप पर असर
समृद्धि शर्मा का यह सफर इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के छात्रों को बिना बड़े ब्रांड के दबाव में आए प्रैक्टिकल स्किल्स विकसित करने का स्पष्ट रास्ता दिखाता है।

- **इंजीनियरिंग छात्रों के लिए:** कॉलेज में केवल थ्योरी पढ़ने के बजाय ओपन सोर्स प्रोजेक्ट्स और कोडिंग प्रतियोगिताओं में भाग लेने की आदत डालें। इससे डिग्री पूरी होने से पहले ही इंडस्ट्री के लिए जरूरी व्यावहारिक अनुभव हासिल हो जाता है।
- **गैर-सीएस बैकग्राउंड के लिए:** इलेक्ट्रॉनिक्स या अन्य शाखाओं के छात्र भी कोडिंग पर मजबूत पकड़ बनाकर टेक कंपनियों में जगह बना सकते हैं। जावा, पाइथन और वेब डेवलपमेंट फ्रेमवर्क सीखकर खुद को सॉफ्टवेयर भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा सकता है।
- **करियर प्लानिंग पर:** अगले पांच या दस साल की जटिल योजना बनाने के बजाय मौजूदा प्रोजेक्ट और इंटर्नशिप पर पूरा ध्यान दें। वर्तमान में हासिल किया गया ठोस अनुभव ही आगे चलकर बेहतरीन जॉब के अवसर खोलता है।
- **नेटवर्किंग और क्लब्स:** कॉलेज के कोडिंग क्लब और कम्युनिटी गतिविधियों में हिस्सा लेकर टीमवर्क और लीडरशिप सीखें। यह अनुभव इंटरव्यू और कॉर्पोरेट कंपनियों की टीम वर्क संस्कृति में काफी मददगार साबित होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
समृद्धि शर्मा की सफलता किसी संयोग का नतीजा नहीं है, बल्कि कॉलेज के पहले साल से निरंतर अभ्यास और तकनीकी पहलों में सक्रिय रहने का परिणाम है।

- **निरंतर व्यावहारिक अभ्यास:** उन्होंने केवल क्लासरूम की पढ़ाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि हैकथॉन और बिटबाइट क्लब के माध्यम से नियमित कोडिंग की। इस लगातार अभ्यास से उनकी बुनियादी प्रोग्रामिंग समझ बेहद मजबूत हो गई।
- **समय पर सही इंटर्नशिप:** साल 2024 में गूगल के स्टेप प्रोग्राम और 2025 में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग इंटर्नशिप ने उनके काम को परखा। इन इंटर्नशिप्स में रियल-टाइम प्रोजेक्ट्स पर दिए गए बेहतरीन योगदान ने उनके लिए फुल-टाइम जॉब का रास्ता साफ किया।
- **कम्युनिटी और फेलोशिप्स का लाभ:** गूगल विमेन टेकमेकर्स इंजीनियरिंग फेलोशिप और हैकसीबीएस 7.0 जैसे मंचों से उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिला। इस राष्ट्रीय पहचान ने उन्हें रिक्रूटर्स के सामने एक मजबूत उम्मीदवार के तौर पर स्थापित किया।

## सवाल-जवाब

### 1. समृद्धि शर्मा ने किस कॉलेज और शाखा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है?
उन्होंने ट्रिपलआईटी जबलपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में अपनी बीटेक डिग्री पूरी की है।

### 2. गूगल में समृद्धि शर्मा को पहली इंटर्नशिप किस प्रोग्राम के तहत मिली थी?
उन्हें साल 2024 में गूगल के स्टूडेंट ट्रेनिंग इन इंजीनियरिंग प्रोग्राम यानी स्टेप के तहत पहली इंटर्नशिप मिली थी।

### 3. साल 2025 की इंटर्नशिप में उन्होंने किन मुख्य प्रोजेक्ट्स पर काम किया?
2025 की इंटर्नशिप के दौरान उन्होंने ऑटोमेटेड डेटा पाइपलाइंस और रियल-टाइम डैशबोर्ड जैसे जटिल प्रोजेक्ट्स पर काम किया था।

### 4. समृद्धि शर्मा ने किस हैकथॉन में जीत हासिल की थी?
उन्होंने हैकसीबीएस 7.0 हैकथॉन में स्केलेबल पीयर-टू-पीयर रिसोर्स-शेयरिंग प्लेटफॉर्म बनाकर शानदार जीत हासिल की थी।

### 5. गूगल जॉइन करने से पहले उन्होंने किस सेक्टर में काम किया था?
गूगल में फुल-टाइम सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने से पहले उन्होंने कुछ समय फिनटेक सेक्टर में काम किया था।

### 6. करियर प्लानिंग को लेकर समृद्धि शर्मा का क्या नजरिया है?
उनका मानना है कि पूरे करियर का पहले से ब्लूप्रिंट बनाने की जरूरत नहीं है, बल्कि वर्तमान में एक समय पर एक कदम आगे बढ़ाते हुए अपना 100% देना चाहिए।

## प्रेरणा और सबक
समृद्धि शर्मा का सफर साबित करता है कि संसाधनों और बड़े कॉलेज के नाम से ज्यादा इंसान की मेहनत और सीखने की लगन मायने रखती है।

- **वर्तमान पर फोकस करें:** भविष्य की अत्यधिक चिंता करने के बजाय आज के काम पर अपना पूरा ध्यान लगाएं। वर्तमान में किए गए प्रयास ही आने वाले कल की नींव तैयार करते हैं।
- **दूसरों को सिखाकर सीखें:** टीम में काम करने और जूनियर्स को गाइड करने से अपनी समझ भी परिपक्व होती है। ज्ञान बांटने से तकनीकी स्पष्टता बढ़ती है।
- **गलतियों से सबक लें:** असफलता से घबराने के बजाय अपनी कमियों को पहचानें और उनसे सीखकर आगे बढ़ें। लगातार सुधार ही स्थायी सफलता की कुंजी है।
- **प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स बनाएं:** केवल किताबें पढ़ने से स्किल नहीं आती, बल्कि वास्तविक समस्याओं को कोड के जरिए हल करना जरूरी है। प्रोजेक्ट्स ही तकनीकी दुनिया में आपकी पहचान बनाते हैं।

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