इंजीनियर से अफसर बने अंकित शर्मा, पिता के निधन के बाद भी नहीं मानी हार, बीपीएससी में 218वीं रैंक से मिला SDM पद जमशेदपुर के अंकित शर्मा ने IIIT ग्वालियर से बीटेक और जर्मन आईटी कंपनी नागारो में नौकरी के बाद सिविल सेवा की राह चुनी और बीपीएससी 2026 में 218वीं रैंक हासिल कर एसडीएम बने। पिता के निधन और पहले प्रयास में नाकामी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। जमशेदपुर के अंकित शर्मा ने वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े कोचिंग सेंटरों और मोटी फीस के बिना शायद ही कोई सोच पाता है। बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी 2026 की परीक्षा में 218वीं रैंक हासिल कर उन्होंने एसडीएम पद पर अपना नाम दर्ज करा लिया। यह सफलता इसलिए और खास है क्योंकि इसके पीछे एक ऐसे युवक की कहानी है जिसने अपने पिता को खोया, कॉरपोरेट की चमक-दमक पीछे छोड़ी और पूरी तरह अपनी काबिलियत के दम पर यह मुकाम हासिल किया। पिता चले गए, पर संकल्प डगमगाया नहीं अंकित के जीवन में सबसे बड़ा झटका तब आया जब छह महीने पहले उनके पिता परमेश्वर शर्मा का हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया। परमेश्वर शर्मा जमशेदपुर में केमिस्ट्री के जाने-माने शिक्षक थे और उनकी अचानक मृत्यु पूरे परिवार के लिए गहरा सदमा थी। माँ इंदु शर्मा गृहिणी हैं और उन्होंने हर कठिन घड़ी में बेटे के कंधे पर हाथ रखकर उसे आगे बढ़ने की हिम्मत दी। इतने गहरे दुख के बावजूद अंकित ने खुद को बिखरने नहीं दिया और अपनी तैयारी जारी रखी। इंजीनियरिंग से अफसरी तक का लंबा सफर अंकित की पढ़ाई की बुनियाद मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल, जमशेदपुर से पड़ी, जहां उन्होंने दसवीं पूरी की। बारहवीं की पढ़ाई उन्होंने मुसाबनी से की। टेक्नोलॉजी में गहरी रुचि के चलते उन्होंने 2016 से 2021 के बीच भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) ग्वालियर से बीटेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने जर्मनी की आईटी कंपनी नागारो में नौकरी शुरू की और गुरुग्राम में रहते हुए डेटा एनालिसिस के क्षेत्र में खुद को साबित किया। साथ ही फ्रीलांसिंग के जरिए कई अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर भी उनका काम चलता रहा। कॉरपोरेट छोड़ा, सिविल सेवा को चुना एक स्थिर और अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी होने के बावजूद अंकित के मन में एक बेचैनी बनी रहती थी। समाज और देश के लिए कुछ ठोस करने की चाहत उन्हें अंदर से खींचती रही। वर्ष 2023 में उन्होंने फैसला किया कि वह सिविल सेवा की राह पकड़ेंगे। उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान का दरवाजा नहीं खटखटाया, बल्कि पूरी तरह सेल्फ स्टडी को अपना हथियार बनाया। आत्म-अनुशासन और खुद पर भरोसा उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। पहली बार नाकामी, दूसरी बार इतिहास पहले प्रयास में अंकित को सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने इस नाकामी को सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया। उन्होंने अपनी गलतियों की परत-दर-परत पड़ताल की, कमजोरियों को पहचाना और तय किया कि अगली बार वही गलतियां नहीं दोहराएंगे। दूसरे प्रयास में उनकी यह मेहनत रंग लाई और बीपीएससी परीक्षा में 218वीं रैंक के साथ एसडीएम पद पर उनका चयन पक्का हो गया। कैवल्य प्लेटफॉर्म पर 14 हजार छात्रों का भरोसा अंकित की उपलब्धि सिर्फ एक परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है। तैयारी के दौरान ही उन्होंने कैवल्य (KAIVALYA) नाम से एक ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म शुरू किया, जहां आज 14 हजार से अधिक विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। यानी अंकित खुद पढ़ते भी रहे और हजारों दूसरे युवाओं को पढ़ाते भी रहे। उनकी यह कहानी बताती है कि मुश्किल हालात इंसान को तोड़ नहीं, बल्कि उसे और मजबूत बना देते हैं। इसका आप पर असर • प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए: अंकित की सफलता साबित करती है कि बिना किसी कोचिंग संस्थान के, सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर बीपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में शीर्ष रैंक हासिल की जा सकती है। • कैवल्य प्लेटफॉर्म के छात्रों के लिए: उनके 14 हजार से अधिक छात्रों को अब एक ऐसे मेंटर का भरोसा मिलेगा जिसने खुद उसी परीक्षा को 218वीं रैंक से पास किया है। सवाल-जवाब 1. अंकित शर्मा ने बीपीएससी 2026 में कौन सी रैंक हासिल की? उन्होंने बीपीएससी 2026 परीक्षा में 218वीं रैंक हासिल की और एसडीएम पद के लिए चुने गए। 2. अंकित शर्मा कहां के रहने वाले हैं? वह झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले हैं। 3. अंकित ने इंजीनियरिंग कहां से की और कब पूरी की? उन्होंने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) ग्वालियर से 2016 से 2021 के बीच बीटेक की डिग्री ली। 4. क्या अंकित ने बीपीएससी की तैयारी के लिए कोचिंग ली? नहीं, उन्होंने पूरी तरह सेल्फ स्टडी और आत्म-अनुशासन के बल पर तैयारी की, किसी कोचिंग संस्थान की मदद नहीं ली। 5. कैवल्य प्लेटफॉर्म क्या है और उस पर कितने छात्र हैं? कैवल्य (KAIVALYA) अंकित का ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म है जहां 14 हजार से अधिक विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। 6. अंकित के पिता कौन थे और उनका क्या हुआ? उनके पिता परमेश्वर शर्मा जमशेदपुर में केमिस्ट्री के शिक्षक थे, जिनका परिणाम से करीब छह महीने पहले हार्ट अटैक से निधन हो गया। 7. अंकित शर्मा ने सिविल सेवा की तैयारी कब शुरू की? उन्होंने वर्ष 2023 में कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। 8. क्या अंकित ने पहले प्रयास में बीपीएससी पास किया था? नहीं, पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली। उन्होंने अपनी गलतियों को सुधारकर दूसरे प्रयास में 218वीं रैंक हासिल की। प्रेरणा और सबक अंकित शर्मा की यात्रा में कई ऐसे पल हैं जो हर युवा को कुछ ठोस सिखाते हैं। • आराम से बड़ा उद्देश्य होता है: नागारो जैसी प्रतिष्ठित जर्मन कंपनी में नौकरी होने के बावजूद उन्होंने समाज की सेवा के सपने को करियर की सुरक्षा से ऊपर रखा। • नाकामी को सबक बनाएं, बाधा नहीं: पहले प्रयास में असफल होने पर उन्होंने पीछे हटने की बजाय अपनी गलतियों की पड़ताल की और खुद को बेहतर किया। • दुख में भी लक्ष्य से नजर मत हटाओ: पिता के अचानक जाने के भारी सदमे के बावजूद उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया और तैयारी जारी रखी। • खुद सीखो, दूसरों को भी सिखाओ: तैयारी के दौरान ही उन्होंने कैवल्य प्लेटफॉर्म बनाकर 14 हजार से अधिक छात्रों की मदद शुरू कर दी। • आत्म-अनुशासन ही सबसे बड़ी कोचिंग है: किसी बाहरी संस्थान का सहारा लिए बिना, सिर्फ खुद पर भरोसे से उन्होंने साबित किया कि इरादा मजबूत हो तो रास्ता खुद बन जाता है। https://trendkia.com/success-stories/injiniyara-se-aphasara-bane-ankit-sharma-pita-ke-nidhana-ke-bada-bhi-nahin-mani-hara-bpsc-men-218vin-rainka-se-mila-sdm-pada-2295 TrendKia — Har trend, sabse pehle.