# इंजीनियरिंग और MBA के बाद शहर की चमक छोड़ अपने गांव लौटे आनंद भदौरिया, अब घर पर लगाते हैं जनता दरबार

> बहराइच के पयागपुर से निकले आनंद सिंह भदौरिया ने पढ़ाई और कारोबार में नाम कमाने के बाद वापस अपने गांव में बसने का फैसला किया और अब खुद जनता दरबार लगाकर लोगों की मदद करते हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-07-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/injiniyaringa-aura-mba-ke-bada-shahara-ki-chamaka-chhora-apane-ganva-laute-anand-bhadauria-aba-ghara-para-lagate-hain-janata-darab-5161 · **Language:** Hindi
**Tags:** आनंद सिंह भदौरिया, बहराइच, पयागपुर, जनता दरबार, सक्सेस स्टोरी, समाज सेवा, गांव वापसी

बहराइच के पयागपुर के एक छोटे से गांव में जन्मे आनंद सिंह भदौरिया आज पूरे जिले में एक पहचाना हुआ नाम बन चुके हैं। कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने पढ़ाई से लेकर कारोबार तक हर मोर्चे पर खुद को साबित किया। लेकिन उनकी असली पहचान सिर्फ कामयाबी नहीं है, बल्कि वह अंदाज़ है जिसमें वह सफल होने के बाद भी अपने गांव और अपने लोगों के बीच लौट आए। यही वजह है कि आज उनकी चर्चा बहराइच से बाहर दूसरे राज्यों तक होती है।

## पढ़ाई और कारोबार का सफर
आनंद सिंह भदौरिया ने इंजीनियरिंग की डिग्री ली और फिर MBA की पढ़ाई पूरी की। इसी काबिलियत के बूते वह एक बड़े बिजनेसमैन बने और अपने इलाके का नाम रोशन किया। शिक्षा और मेहनत ने उन्हें वह मुकाम दिलाया, जहां से वह चाहते तो किसी बड़े शहर में आराम की ज़िंदगी बिता सकते थे। लेकिन उन्होंने रास्ता बिल्कुल अलग चुना।

## सफलता के बाद अपनों के बीच वापसी
ऊंचाई छूने के बाद आनंद एक बार फिर अपनी मिट्टी की ओर लौट आए। उन्होंने तय किया कि अब वह अपने गांव में रहकर ही अपने माता-पिता और क्षेत्र के लोगों की सेवा करेंगे। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों की मदद करनी शुरू कर दी। आज वह समय-समय पर अपने घर पर ही जनता दरबार लगाते हैं, जहां लोग अपनी परेशानियां लेकर पहुंचते हैं। चाहे कोई स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कत हो, पढ़ाई की ज़रूरत हो या कोई और परेशानी, वह किसी को खाली हाथ नहीं लौटाते और जितना संभव हो सके, मदद करते हैं। इसी सादगी और सेवाभाव की वजह से गांव लौटने पर उन्हें लोगों का अपार प्यार मिला।

## बीस साल की नौकरी और गांव के हालात
पयागपुर के जगता जलालपुर लौकाही चौराहा के रहने वाले आनंद बीस सालों तक नौकरी करते रहे, लेकिन जब उन्होंने अपने गांव के हालात देखे तो उनका मन पसीज गया और वह सेवा के काम में जुट गए। वह कहते हैं कि आज उनके भीतर जो भी सेवाभाव और प्रेरणा है, वह उनके गुरु और माता-पिता के आदर्शों का ही नतीजा है। अपनी इस शालीनता, शिक्षा और सफलता का पूरा श्रेय वह अपने माता-पिता और गुरु शिवपाल सिंह भदौरिया को देते हैं।

## बच्चे गीली मिट्टी जैसे
आनंद अपनी सोच को एक सीधी मिसाल से समझाते हैं। उनके शब्दों में, बच्चे गीली मिट्टी और मोम की तरह होते हैं, उन्हें जिस भी सांचे में ढाला जाए, वैसे ही ढल जाते हैं। मुझे भी मेरे माता-पिता और गुरु ने हमेशा दूसरों की सेवा करना सिखाया। शायद यही वजह है कि आज सफलता पाने के बाद भी मैं इन्हीं ग्रामीणों के बीच रहता हूं। ईश्वर अगर मुझे और आगे पहुंचाएगा, तो यह सेवाभाव दिन-प्रतिदिन इसी तरह बढ़ता जाएगा।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह कहानी दिखाती है कि पढ़ाई और कारोबार में कामयाबी पाने के बाद भी अपने गांव और लोगों की सेवा करने का रास्ता चुना जा सकता है।
- **बहराइच में:** पयागपुर और आसपास के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़मर्रा की परेशानियों में जनता दरबार के जरिए सीधी मदद मिल रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. आनंद सिंह भदौरिया कौन हैं?
वह बहराइच के पयागपुर के एक छोटे गांव में जन्मे कारोबारी हैं, जो अपनी मेहनत और समाज सेवा के लिए पूरे जिले में जाने जाते हैं।

### 2. उन्होंने क्या पढ़ाई की है?
उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री ली और उसके बाद MBA किया, जिसके दम पर वह एक बड़े बिजनेसमैन बने।

### 3. वह अपने गांव क्यों लौटे?
सफलता पाने के बाद उन्होंने अपने माता-पिता और क्षेत्र के लोगों की सेवा करने के लिए वापस गांव में रहने का फैसला किया।

### 4. जनता दरबार में वह क्या करते हैं?
वह समय-समय पर अपने घर पर जनता दरबार लगाते हैं, जहां लोगों की स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य परेशानियां सुनकर वह यथासंभव मदद करते हैं।

### 5. उन्होंने कितने साल नौकरी की?
उन्होंने बीस सालों तक नौकरी की, लेकिन गांव के हालात देखकर उनका मन पसीज गया और वह सेवा में जुट गए।

### 6. वह अपनी सफलता का श्रेय किसे देते हैं?
वह अपनी शालीनता, शिक्षा और सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और गुरु शिवपाल सिंह भदौरिया को देते हैं।

## प्रेरणा और सबक
- **जड़ों से जुड़े रहें:** सफलता मिलने के बाद भी आनंद ने बड़े शहर की बजाय अपने गांव को चुना, यह याद दिलाता है कि कामयाबी अपनी मिट्टी से दूरी की शर्त नहीं है।
- **शिक्षा को सीढ़ी बनाएं:** इंजीनियरिंग और MBA जैसी पढ़ाई ने उन्हें वह मुकाम दिया जहां से वे दूसरों की मदद कर सकें।
- **सेवा को आदत बनाएं:** घर पर जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है, बड़ी शुरुआत छोटे और नियमित कदमों से होती है।
- **अपने गुरु और परिवार का सम्मान:** वे अपनी पूरी कामयाबी का श्रेय माता-पिता और गुरु को देते हैं, विनम्रता ही उनकी असली पूंजी है।

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