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  "title": "जबलपुर की राजेश्वरी ने लाडली बहना योजना के पैसों से खड़ा किया डेयरी कारोबार, अब हर महीने कमाई 15 हजार तक",
  "summary": "जबलपुर के कुगवां गांव की राजेश्वरी पटेल ने पति का ठेला हटने के बाद हार नहीं मानी और मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की मदद से डेयरी का काम शुरू किया, जिससे आज वे महीने में 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं।",
  "content": "कहते हैं कि तंगहाली अक्सर इंसान का असली दम आजमाने आती है, और जो इस कसौटी पर खरा उतरता है वही अपनी किस्मत की नई इबारत लिखता है। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के एक छोटे से गांव कुगवां की राजेश्वरी पटेल इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। एक वक्त था जब उनके घर पर दो वक्त की रोटी का संकट मंडरा रहा था और चारों तरफ निराशा थी, लेकिन उन्होंने हाथ पर हाथ रखकर बैठने के बजाय मेहनत का ऐसा रास्ता चुना जो आज पूरे इलाके के लिए प्रेरणा बन गया है।\n\nपहले राजेश्वरी का परिवार सुख-चैन से गुजर-बसर कर रहा था। उनके पति ठेला लगाकर सामान बेचते थे और इसी से घर का खर्च चलता था। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि अचानक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की चपेट में उनका ठेला आ गया और हट गया। इस अचानक आए झटके ने परिवार की कमाई का इकलौता जरिया छीन लिया। कमाने वाला सहारा टूटते ही घर चलाना पहाड़ जैसा लगने लगा और हालात भुखमरी की कगार तक पहुंच गए।\n\nनिराशा को पीछे छोड़ बुनी नई उम्मीद\nऐसे मुश्किल वक्त में जब ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, राजेश्वरी ने धीरज और समझदारी से काम लिया। इस संकट में उनके लिए मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना बड़ा सहारा बनी। योजना से हर महीने मिलने वाली रकम की एक-एक पाई को उन्होंने सहेजना शुरू किया। साथ ही घर पर थोड़ी-बहुत सिलाई-बुनाई का काम भी किया और पति के साथ मिलकर पाई-पाई जोड़ते हुए पूंजी इकट्ठा करने लगीं।\n\nएक गाय से शुरू हुआ सफर\nजुगाड़ और बचत से जुटाई गई इसी पूंजी और लाडली बहना योजना के पैसों के बल पर राजेश्वरी ने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा दांव खेला। सबसे पहले उन्होंने एक गाय खरीदी और दूध बेचने का काम शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा भी बनने लगा। इसके साथ ही उन्होंने गाय के गोबर से कंडे यानी उपले बनाकर बेचने का काम भी शुरू कर दिया, जिससे उनकी आमदनी में और इजाफा हो गया।\n\nदूध और उपलों से हर महीने हजारों की कमाई\nआज राजेश्वरी दूध और उपले बेचकर हर महीने बड़ी आसानी से 10 से 15 हजार रुपये तक कमा रही हैं। उनकी लगन और कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि अब उनके पास एक नहीं, बल्कि चार गायें हो चुकी हैं। राजेश्वरी बताती हैं कि अब उनके पति को धूप और छांव में ठेला नहीं लगाना पड़ता। पूरा परिवार अब आर्थिक रूप से सुरक्षित है और पहले से कहीं ज्यादा खुशहाल जिंदगी जी रहा है। एक छोटे से गांव की इस महिला ने दिखा दिया कि इरादे मजबूत हों तो मुसीबत भी तरक्की की सीढ़ी बन जाती है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: लाडली बहना जैसी सरकारी योजना का पैसा अगर बचत और छोटे कारोबार में लगाया जाए तो वह घर की स्थायी कमाई का जरिया बन सकता है।\n• मध्य प्रदेश में: प्रदेश की महिलाओं के लिए यह मिसाल है कि योजना की रकम से गाय खरीदकर दूध और उपले बेचने जैसे कम लागत वाले काम से हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक कमाए जा सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजेश्वरी पटेल कौन हैं?\nवे मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कुगवां गांव की रहने वाली हैं, जिन्होंने पति की कमाई छिनने के बाद डेयरी का काम शुरू किया।\n\n2. उनके परिवार पर संकट क्यों आया?\nअतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में उनके पति का ठेला हट गया, जिससे परिवार की कमाई का इकलौता जरिया खत्म हो गया।\n\n3. उन्होंने कारोबार के लिए पैसे कहां से जुटाए?\nमुख्यमंत्री लाडली बहना योजना से मिलने वाली रकम की बचत और सिलाई-बुनाई से जोड़ी गई पूंजी से।\n\n4. उन्होंने कौन सा कारोबार शुरू किया?\nपहले एक गाय खरीदकर दूध बेचना शुरू किया और साथ ही गोबर से उपले बनाकर बेचने लगीं।\n\n5. राजेश्वरी अब हर महीने कितना कमाती हैं?\nवे दूध और उपले बेचकर हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक कमा रही हैं।\n\n6. अब उनके पास कितनी गायें हैं?\nअब उनके पास एक नहीं बल्कि चार गायें हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\n• हार न मानें: पति का ठेला हटने के बाद भी राजेश्वरी ने टूटने के बजाय नया रास्ता तलाशा।\n• छोटी रकम को सहेजें: योजना से मिलने वाली एक-एक पाई को जोड़कर उन्होंने पूंजी खड़ी की।\n• छोटे से शुरुआत करें: उन्होंने सिर्फ एक गाय से काम शुरू किया और उसे चार गायों तक पहुंचाया।\n• हर मौके से कमाई: दूध के साथ-साथ गोबर के उपले बेचकर उन्होंने आमदनी के अतिरिक्त जरिए बनाए।\n• परिवार साथ रहे: पति के साथ मिलकर मेहनत करने से मुश्किल दौर आसान हुआ।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-21",
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    "लाडली बहना योजना",
    "राजेश्वरी पटेल",
    "जबलपुर",
    "डेयरी बिजनेस",
    "महिला सशक्तिकरण",
    "मध्य प्रदेश",
    "सफलता की कहानी"
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