जयपुर के पाछूडाला गांव ने पेश की जनसहयोग की मिसाल, ग्रामीणों ने 1.25 करोड़ रुपए से खुद बनाया 30 फीट गहरा बांध जयपुर के विराटनगर स्थित ऐतिहासिक पाछूडाला गांव में ग्रामीणों ने बिना सरकारी मदद के 1.25 करोड़ रुपए का जनसहयोग जुटाकर 30 फीट गहरा नया बांध तैयार किया है। जयपुर जिले की विराटनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पहाड़ियों की गोद में स्थित पाछूडाला गांव ने जल संरक्षण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्षों पुराने जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने सरकारी बजट या प्रशासनिक सहायता का इंतजार करने के बजाय स्वयं ही समाधान निकालने का बीड़ा उठाया। गांव के लोगों ने मिलकर सामूहिक जनसहयोग से लगभग 1.25 करोड़ रुपए की धनराशि एकत्र की और 30 फीट गहरा नया बांध बना डाला। यह पहल न केवल गांव की जल सुरक्षा को मजबूत कर रही है, बल्कि प्राचीन विरासत और आधुनिक जनभागीदारी का एक अनोखा संगम भी पेश कर रही है। महाभारत काल से जुड़ी है पाछूडाला की पौराणिक पहचान पाछूडाला गांव केवल अपनी सामाजिक पहल ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन इतिहास और आस्था के लिए भी विशेष स्थान रखता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पांडवों ने अपने अज्ञातवास की अवधि का कुछ समय इसी क्षेत्र में व्यतीत किया था। पांडवों के प्रवास के कारण इस स्थान को प्राचीन काल में पांडवाला के नाम से जाना जाता था। समय बीतने के साथ-साथ बोलचाल में इसका नाम परिवर्तित होकर पाछूडाला हो गया, यद्यपि सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में आज भी यह गांव पाछोडाला नाम से ही दर्ज है। पहाड़ियों की तलहटी में बसा यह गांव सदियों पुरानी अपनी इस ऐतिहासिक पहचान को आज भी पूरी निष्ठा से सहेजे हुए है। अखंड ज्योत और सिद्धमुनी महाराज के पावन धाम की महिमा धार्मिक दृष्टिकोण से भी पाछूडाला क्षेत्र में अत्यंत पवित्र माना जाता है। गांव में सिद्धमुनी महाराज और चूणसिद्ध महाराज के प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं, जहां स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से संत-महात्मा और श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इन सभी धर्मस्थलों में सिद्धमुनी महाराज का मंदिर सर्वाधिक प्रमुख है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पीढ़ियों से एक अखंड ज्योत निरंतर प्रज्वलित हो रही है। गांव के लोग इसे अपनी अटूट आस्था का केंद्र मानते हैं और इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। इसके अतिरिक्त गांव में ठाकुरजी और जगन्नाथ महाराज के भी विशाल मंदिर मौजूद हैं। नारू रोग के पारंपरिक इलाज की सदियों पुरानी परंपरा पाछूडाला गांव की एक अन्य अनूठी पहचान यहां का पारंपरिक स्वास्थ्य उपचार भी है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार नारू रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यहां पारंपरिक विधि से झाड़ा लगाने की पुरानी परंपरा चली आ रही है। इस विश्वास के कारण आसपास के ग्रामीण अंचलों के अलावा काफी दूर-दराज के क्षेत्रों से भी मरीज और उनके परिजन पाछूडाला पहुंचते हैं। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रसार के बावजूद लोग इस परंपरा पर गहरा विश्वास रखते हैं। उपचार की प्रक्रिया के दौरान पीड़ित लोग अपने परिवारों के साथ कई दिनों तक गांव में ही प्रवास करते हैं। जल संकट और जनसहयोग से समाधान की शुरुआत हाल के वर्षों में पाछूडाला गांव की सबसे बड़ी चुनौती जल संकट के रूप में उभरकर सामने आई थी। गांव में पूर्व से एक पुराना बांध मौजूद था, जिसकी पानी रोकने की क्षमता 20 फीट से ज्यादा थी। हालांकि, समय के साथ मरम्मत के अभाव और प्राकृतिक कारणों से इस बांध में पानी रुकना बंद हो गया। बारिश का सारा पानी व्यर्थ बहकर बिलाली क्षेत्र की ओर चला जाता था। इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव गांव के भूजल स्तर और पेयजल आपूर्ति पर पड़ने लगा। जब समस्या गंभीर होने लगी, तो ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने गुहार लगाने के बजाय आपस में विचार-विमर्श करके खुद ही नया बांध बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। 30 फीट गहरा नया बांध और भूजल स्तर सुधारने का लक्ष्य गांव के लोगों ने मिलकर 1.25 करोड़ रुपए का कोष जुटाया और नए बांध का निर्माण कार्य शुरू कर दिया। निर्मित नए बांध की भराव क्षमता करीब 30 फीट रखी गई है, जो पुराने बांध की तुलना में काफी अधिक है। इस बांध की सुरक्षा पाल लगभग 500 मीटर लंबी बनाई गई है, जबकि इसका कुल जलग्रहण क्षेत्र आसपास की पहाड़ियों में करीब 3 किलोमीटर तक फैला हुआ है। पहाड़ियों से बहकर आने वाले मानसूनी पानी को रोककर गांव में ही संचित किया जाएगा। इससे न केवल पाछूडाला बल्कि आसपास के इलाकों का भूजल स्तर बढ़ेगा और आने वाले कई दशकों के लिए पानी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। इसका आप पर असर जयपुर और राजस्थान में: पाछूडाला गांव का यह नया बांध आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर को रिचार्ज करेगा, जिससे ग्रामीणों को पेयजल संकट और सिंचाई के पानी की कमी से बड़ी राहत मिलेगी। पूरे भारत में: सरकारी सहायता का इंतजार किए बिना जल संरक्षण का यह सामुदायिक मॉडल देश के अन्य सूखाग्रस्त ग्रामीण इलाकों के लिए एक प्रेरणादायक मार्गदर्शक बन सकता है। सवाल-जवाब 1. पाछूडाला गांव कहां स्थित है और इसका ऐतिहासिक नाम क्या था? पाछूडाला गांव राजस्थान के जयपुर जिले में विराटनगर विधानसभा क्षेत्र की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। लोकमान्यता के अनुसार पांडवों के अज्ञातवास के प्रवास के कारण इसे पूर्व में पांडवाला कहा जाता था, जबकि राजस्व रिकॉर्ड में यह पाछोडाला दर्ज है। 2. ग्रामीणों द्वारा बनाए जा रहे नए बांध की लागत और भराव क्षमता कितनी है? ग्रामीणों ने बिना किसी सरकारी मदद के लगभग 1.25 करोड़ रुपए का जनसहयोग जुटाकर नया बांध बनाया है, जिसकी पानी भराव क्षमता करीब 30 फीट है। 3. पाछूडाला में नया बांध बनाने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? गांव का पुराना बांध केवल 20 फीट क्षमता का था और जर्जर होने के कारण उसमें पानी का ठहराव बंद हो गया था। मानसूनी पानी बहकर बिलाली क्षेत्र की ओर चला जाता था, जिससे गांव में गंभीर जल संकट पैदा हो गया था। 4. नए बांध के मुख्य तकनीकी आंकड़े क्या हैं? इस नए बांध की पाल लगभग 500 मीटर लंबी है और इसका जलग्रहण क्षेत्र आसपास की पहाड़ियों में करीब 3 किलोमीटर तक फैला हुआ है। 5. पाछूडाला गांव में कौन-कौन से प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं? गांव में सिद्धमुनी महाराज का प्रमुख मंदिर है जहां सदियों से अखंड ज्योत जल रही है। इसके अलावा यहां चूणसिद्ध महाराज, ठाकुरजी और जगन्नाथ महाराज के बड़े मंदिर भी स्थित हैं। 6. पाछूडाला में किस बीमारी के पारंपरिक इलाज के लिए लोग आते हैं? पाछूडाला गांव नारू रोग के पारंपरिक उपचार (झाड़ा लगाने) की अपनी पुरानी परंपरा के लिए जाना जाता है, जिसके लिए दूर-दूर से मरीज आकर कुछ दिन गांव में ठहरते हैं। प्रेरणा और सबक पाछूडाला गांव की पहल से मिलने वाले मुख्य सबक: • आत्मनिर्भरता की शक्ति: समस्याओं के लिए केवल सरकार पर निर्भर रहने के बजाय खुद कदम उठाना ही वास्तविक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। • सामूहिक जनसहयोग: जब पूरा समाज एक लक्ष्य के लिए एकजुट होता है, तो 1.25 करोड़ रुपए जैसी बड़ी धनराशि और निर्माण कार्य भी बिना बाहरी मदद के संभव हो जाते हैं। • जल संरक्षण की दूरदर्शिता: आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी का संचय और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा समय रहते करना अत्यंत आवश्यक है। • विरासत और आधुनिकता का संतुलन: अपनी प्राचीन सांस्कृतिक व धार्मिक पहचान को सहेजते हुए पर्यावरण और जीवन की प्राथमिक आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना। https://trendkia.com/success-stories/jaipur-ke-pachudala-ganva-ne-pesha-ki-janasahayoga-ki-misala-graminon-ne-1-25-karora-rupae-se-khuda-banaya-30-phita-gahara-bandha-16485 TrendKia — Har trend, sabse pehle.