# जेम्स स्ट्रॉन की अनूठी कहानी: टेक कंपनी में 25 साल की नौकरी जाने के बाद अब चला रहे हैं स्कूल बस

> अमेरिका के कोलोराडो में रहने वाले जेम्स स्ट्रॉन ने करीब ढाई दशक तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम किया, लेकिन एडॉब से निकाले जाने के बाद उन्होंने एक नया करियर चुनते हुए स्कूल बस ड्राइवर की कमान संभाल ली है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-08-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/james-stron-left-tech-after-25-years-and-now-drives-a-school-bus-17782 · **Language:** Hindi
**Tags:** जेम्स स्ट्रॉन, लेऑफ, टेक इंडस्ट्री, स्कूल बस ड्राइवर, दीपा मिश्रा, पत्रकारिता

कहा जाता है कि किसी भी कार्यक्षेत्र में लंबा अनुभव हासिल कर लेने के बाद आपकी अहमियत बढ़ जाती है और आपको आसानी से बदला नहीं जा सकता है। हालांकि, अमेरिका के कोलोराडो में रहने वाले जेम्स स्ट्रॉन की जीवन यात्रा कुछ अलग ही मोड़ पर आ गई है। करीब पच्चीस साल तक तकनीकी उद्योग में अपनी सेवाएं देने के बाद, उन्होंने अब एक स्कूल बस चालक के रूप में अपने कामकाजी सफर की एक बिल्कुल नई पारी शुरू की है। जेम्स पहले एडॉब में सॉफ्टवेयर क्वॉलिटी इंजीनियर के पद पर काम कर रहे थे। लेकिन अगस्त 2025 के दौरान उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इसके बाद उन्होंने लगातार नए अवसरों की तलाश की, मगर हर तरफ से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इन तमाम मुश्किलों और हताशा से उबरते हुए, उन्होंने आखिरकार एक स्कूल बस ड्राइवर के रूप में कमान संभालने का फैसला किया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जेम्स ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट साझा की है, जो इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल हो रही है।

## नौकरी जाने के बाद कड़ा संघर्ष और निराशा
एडॉब द्वारा नौकरी से निकाले जाने के बाद जेम्स को भारी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने रोजगार पाने के लिए हरसंभव प्रयास किए और कई अलग-अलग कंपनियों में लगातार आवेदन किए। तमाम कोशिशें करने के बावजूद उन्हें किसी भी जगह से सकारात्मक परिणाम नहीं मिले और असफलता ही हाथ लगी। जेम्स बताते हैं कि उन्होंने अपनी तरफ से पूरी मेहनत की, लेकिन हाई-टेक इंडस्ट्री से उन्हें कोई ढंग का रिस्पांस नहीं मिला। इस पूरे दौर में उन्हें काफी मानसिक और व्यावहारिक समस्याओं से गुजरना पड़ा। आखिरकार उन्होंने अपने जीवन में एक नया अध्याय शुरू करने का पक्का इरादा कर लिया। जेम्स ने लिंक्डइन पर लिखा कि उन्हें इस बात से काफी प्रसन्नता महसूस हो रही है कि वे जीवन में एक नई शुरुआत करने में पूरी तरह सफल रहे हैं।

## कम वेतन के बावजूद नई नौकरी में मिल रहा है सुकून
भले ही जेम्स को अपनी इस नई नौकरी में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हो, और तकनीकी क्षेत्र की तुलना में उनका वेतन भी काफी कम हो गया है, फिर भी वे इस बड़े बदलाव से पूरी तरह संतुष्ट और खुश हैं। उन्होंने स्कूल बस चलाने के अपने इस काम को बेहद मनोरंजक बताया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जिक्र किया कि उनके साथ काम करने वाले सहकर्मी बेहद देखभाल करने वाले, दयालु और स्वभाव से बहुत विनम्र हैं। जेम्स ने साझा किया कि आने वाले हफ्ते में वे अपने इस नए और संभवतः अंतिम करियर अध्याय की शुरुआत करेंगे। हालांकि यहां मिलने वाला मेहनताना काफी कम है, लेकिन काम बहुत मजेदार है, स्कूली बच्चे बहुत अच्छे हैं और आसपास के लोग भी बेहद शानदार हैं।

## सहकर्मियों का आभार और भविष्य की नई दिशा
इसके अलावा, जेम्स ने अपने पुराने सहकर्मियों और लिंक्डइन पर जुड़े सभी परिचितों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नई नौकरी तलाशने के दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन आप सभी लोगों का समर्थन और सहयोग लगातार बना रहा। अपनी पुरानी कंपनी के बारे में जिक्र करते हुए जेम्स ने लिखा कि आप लोगों ने मुझे हमेशा नजरअंदाज किया, मुझे मानसिक रूप से नीचे गिराने की कोशिश की और अंततः नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बावजूद मैं आप सभी का धन्यवाद करना चाहता हूं कि आपने मुझे एक बेहतर भविष्य की राह दिखाई। यह आप ही लोगों की बदौलत संभव हो पाया है कि अब मैं एक कंप्यूटर के सामने बैठने के बजाय, चालीस फुट लंबी बस को सड़क पर दौड़ाता हूं। साथ ही उन्होंने उन तमाम लोगों का भी शुक्रिया अदा किया जिन्होंने नए रोजगार की तलाश के दौरान उन्हें तवज्जो देने से इनकार कर दिया था।

## दीपा मिश्रा का पत्रकारिता तक का सफर
मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपा मिश्रा के लिए पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखना किसी इत्तेफाक की बात नहीं थी। घर पर आने वाली विभिन्न पत्रिकाओं और समाचार पत्रों को पढ़ते-पढ़ते वह खुद अखबारों के लिए खबरें लिखने तक का सफर तय कर गए। हालांकि यह रास्ता इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद जब परिवार के लोगों को उनके इस इरादे की भनक लगी, तो उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने मन में ठान लिया कि मैदानी स्तर पर जाकर हकीकत खुद देखनी चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान ही आजमगढ़ के लोकल टेलीविजन चैनल में काम करना शुरू कर दिया। कैमरे के जरिए शहर की तमाम गतिविधियों को रिकॉर्ड करना, समाचार बुलेटिन तैयार करना और कई बार कैमरे के सामने खुद उन्हें पढ़ना, इन सब अनुभवों ने उनके इस इरादे को और ज्यादा मजबूत कर दिया कि उन्हें अब मीडिया की दुनिया में ही आगे बढ़ना है.

## शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मीडिया संस्थानों में काम
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान और इतिहास विषयों में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद अखबारों में उनके पेशेवर करियर की शुरुआत आज अखबार से हुई। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण के द्विभाषी समाचार पत्र आई नेक्स्ट के वाराणसी संस्करण में डेस्क पर कार्य किया। वहां से उनका सफर सेंट्रल डेस्क कानपुर तक पहुंचा और फिर उन्होंने पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की बड़ी जिम्मेदारी संभाली। बाद में उन्हें पत्रिका अखबार के खेल डेस्क पर भी अपनी सेवाएं देने का अवसर मिला। पत्रिका समूह के साथ काम करते हुए उन्हें साल 2014 के फीफा विश्व कप की बेहतरीन कवरेज के लिए प्रतिष्ठित पुरस्कार से भी नवाजा गया।

उत्तर प्रदेश में उनकी वापसी फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के जरिए हुई और इस बार उन्हें गोरखपुर में डेस्क हेड के रूप में तैनात किया गया। आई नेक्स्ट की अपनी दूसरी पारी के दौरान उन्होंने दो बार गोरखपुर संस्करण के संपादकीय प्रभारी की भूमिका भी बखूबी निभाई। इसके साथ ही कुछ समय के लिए उन्होंने इलाहाबाद में भी डेस्क हेड के दायित्व को संभाला। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए लगातार वीडियो स्टोरीज तैयार करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए बनाई गई खास वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। इसके बाद उन्होंने इस संस्थान के लिए दो अलग-अलग पॉडकास्ट शो भी किए, जिनमें से एक का नाम आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरे का नाम शहर का किस्सा था।

जून 2021 से वह लाइव हिन्दुस्तान की होम टीम का अहम हिस्सा बने हुए हैं। इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने तमाम चुनावों, राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी घटनाओं की खबरें कवर कीं। इसके अलावा क्रिकेट टीम के साथ मिलकर काम करते हुए उन्होंने आईपीएल, टी-20 विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान भी उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान के लिए कई महत्वपूर्ण वीडियो स्टोरीज तैयार कीं। यदि उनकी व्यक्तिगत रुचियों की बात की जाए, तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना और निरंतर नए कौशल सीखते रहना उनकी प्राथमिकता में शामिल है। वे मिररलेस कैमरे की मदद से वीडियो शूट करने और प्रीमियर प्रो सॉफ्टवेयर पर वीडियो एडिटिंग करने में पूरी तरह माहिर हैं। उनके प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल उनके दिल के बेहद करीब हैं।

## इसका आप पर असर
**व्यावसायिक जीवन पर असर:** कॉर्पोरेट क्षेत्र में अनिश्चितता और नौकरी छूटने की स्थिति में नया करियर अपनाने के लचीलेपन को यह कहानी दर्शाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. जेम्स स्ट्रॉन पहले किस कंपनी में काम करते थे?
जेम्स स्ट्रॉन एडॉब में सॉफ्टवेयर क्वॉलिटी इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे।

### 2. जेम्स स्ट्रॉन को नौकरी से कब निकाला गया था?
जेम्स स्ट्रॉन को अगस्त 2025 में नौकरी से निकाल दिया गया था।

### 3. अब जेम्स स्ट्रॉन क्या काम कर रहे हैं?
नौकरी जाने और लगातार निराशा मिलने के बाद अब जेम्स स्ट्रॉन स्कूल बस ड्राइवर के रूप में काम कर रहे हैं।

### 4. दीपा मिश्रा ने अपनी उच्च शिक्षा कहां से पूरी की?
दीपा मिश्रा ने वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की।

## प्रेरणा और सबक
**कठिन समय में सकारात्मक दृष्टिकोण:** नौकरी छूटने जैसी बड़ी असफलता के बाद भी निराश होने के बजाय नए सिरे से शुरुआत करने की हिम्मत रखनी चाहिए।

**काम छोटा या बड़ा नहीं होता:** अपनी प्राथमिकताओं को बदलकर जीवन में मानसिक शांति और खुशी को प्राथमिकता देना अधिक महत्वपूर्ण है।

**निरंतर सीखते रहना:** जीवन के हर मोड़ पर नए कौशल और अनुभव व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

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