# जमुई के 72 वर्षीय कपिलदेव रावत ने मंडी में 24 हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाकर रचा इतिहास

> बिहार के जमुई जिले के 72 वर्षीय बुजुर्ग कपिलदेव रावत ने हिमाचल प्रदेश के मंडी में 24 हजार फीट की ऊंचाई से पैराग्लाइडिंग कर एक मिसाल कायम की है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/jamui-ke-72-varshiya-kapil-dev-rawat-ne-mandi-men-24-hajara-phita-ki-unchai-se-chhalanga-lagakara-racha-itihasa-31599 · **Language:** Hindi
**Tags:** कपिलदेव रावत, जमुई, पैराग्लाइडिंग, मंडी, हिमाचल प्रदेश, साहसिक खेल, प्रेरक कहानियां

उम्र का असर केवल शरीर पर होता है, हौसलों पर नहीं और इस बात को बिहार के एक बुजुर्ग ने सच कर दिखाया है। बिहार के जमुई जिले के रहने वाले 72 वर्षीय कपिलदेव रावत ने हिमाचल प्रदेश के मंडी में 24 हजार फीट की ऊंचाई से पैराग्लाइडिंग करके एक नया इतिहास रच दिया है। जिस उम्र में लोग आमतौर पर शांत और आरामदेह जीवन बिताना पसंद करते हैं, उस उम्र में कपिलदेव रावत ने आसमान की ऊंचाइयों को छूकर युवाओं को हैरत में डाल दिया है। उनकी इस साहसिक उड़ान की चर्चा अब पूरे देश में हो रही है।

## शुरुआती खौफ और फिर जन्नत जैसा अहसास

हवा में छलांग लगाने का फैसला जितना रोमांचक था, उसे पूरा करना उतना ही चुनौतीपूर्ण था। अपनी इस साहसिक यात्रा को याद करते हुए कपिलदेव रावत बताते हैं कि जब उन्होंने इतनी ऊंचाई से छलांग लगाई, तो शुरुआती तीन-चार सेकंड के लिए उनके मन में डर बैठ गया था। उन्हें लगा कि खाई बहुत गहरी है और अगर कोई भी छोटी सी चूक हुई तो सब कुछ खत्म हो जाएगा। लेकिन जैसे ही उनका पैराग्लाइडर हवा में स्थिर हुआ, उनका सारा डर गायब हो गया और उसकी जगह एक अद्भुत रोमांच ने ले ली।

कपिलदेव रावत के अनुसार, इसके बाद के करीब आधे घंटे का समय उनके जीवन का सबसे खूबसूरत अनुभव था। हवा में तैरते हुए नीचे की दुनिया किसी स्वर्ग जैसी लग रही थी। उन्होंने बताया कि उस समय ऐसा महसूस हो रहा था मानो यही असली जिंदगी है। चारों तरफ फैली हिमालय की खूबसूरत वादियां और ठंडी हवाएं उन्हें एक अलग ही दुनिया का अहसास करा रही थीं, जिसे वह जीवनभर कभी नहीं भूल पाएंगे।

## बुजुर्गों से मिली प्रेरणा और कुछ बड़ा करने की ठानी

इस खतरनाक खेल को आजमाने का विचार उनके मन में अचानक नहीं आया था, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत प्रेरणा थी। जब वह अपने परिवार के साथ हिमाचल प्रदेश घूमने की योजना बना रहे थे, तब उन्होंने अखबारों और सोशल मीडिया पर पढ़ा था कि एक 80 साल की महिला और एक 75 साल के बुजुर्ग ने पैराग्लाइडिंग की है। इन्हें देखकर कपिलदेव रावत के मन में यह विश्वास जागा कि जब इस उम्र के लोग ऐसा कर सकते हैं, तो वह खुद क्यों नहीं कर सकते। इसके बाद उन्होंने खुद को इस चुनौती के लिए तैयार किया।

हालांकि, कपिलदेव रावत सिर्फ पैराग्लाइडिंग ही नहीं करना चाहते थे, बल्कि वह कुछ अलग करना चाहते थे। उन्होंने गौर किया कि उनसे पहले जिन बुजुर्गों ने यह प्रयास किया था, उनमें से किसी ने 4500 फीट, किसी ने 8000 फीट तो किसी ने अधिकतम 10,000 फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई थी। लेकिन कपिलदेव रावत ने अपने लिए 24 हजार फीट की अत्यधिक ऊंचाई चुनी, जो अच्छे-अच्छे युवाओं के पसीने छुड़ाने के लिए काफी है।

## दुकान बंद करके भी घूमने का शौक और परिवार का साथ

कपिलदेव रावत बिहार के जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत पतसंडा के रहने वाले हैं। वह गिद्धौर बाजार में एक स्थानीय होटल चलाते हैं। होटल चलाने की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद, उनका घूमने-फिरने का शौक कभी कम नहीं हुआ। वह अक्सर अपनी दुकान बंद करके भी नई जगहों की यात्रा पर निकल जाते हैं। उनका मानना है कि जिंदगी को हर पल खुलकर जीना चाहिए और उम्र कभी भी आपके सपनों के आड़े नहीं आनी चाहिए।

उनके इस असाधारण हौसले के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा हाथ है। कपिलदेव रावत के दो बेटे हैं, जो उनके इस यात्रा प्रेम और साहसिक खेलों के प्रति लगाव का पूरा समर्थन करते हैं। बेटों के इसी सहयोग और हौसला अफजाई की वजह से ही वह इस उम्र में भी ऐसे साहसिक फैसले ले पाते हैं। आज उनकी यह बहादुरी उन युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी है जो छोटी-छोटी कठिनाइयों से घबराकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं।

## इसका आप पर असर
यह खबर हर उम्र के पाठकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को अपने सपनों को पूरा करने और उम्र की बाधाओं को तोड़ने की प्रेरणा देती है।

- **देशभर में:** यह घटना साबित करती है कि बढ़ती उम्र केवल एक संख्या है और शारीरिक रूप से फिट रहकर बुजुर्ग भी साहसिक गतिविधियों का हिस्सा बन सकते हैं। इससे समाज में बुजुर्गों के प्रति दृष्टिकोण बदलेगा और वे अधिक सक्रिय जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
- **बिहार (जमुई) में:** जमुई जिले के निवासियों के लिए कपिलदेव रावत एक स्थानीय नायक बन गए हैं। उनके इस साहसिक कार्य से क्षेत्र के युवाओं और बुजुर्गों में नया उत्साह पैदा हुआ है और लोग उनके होटल पर जाकर उन्हें बधाई दे रहे हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
कपिलदेव रावत के इस साहसिक कदम के पीछे उनकी खुद की इच्छाशक्ति, पूर्व में मिली प्रेरणा और उनके परिवार का अटूट सहयोग मुख्य कारण थे।

- **बुजुर्गों से प्रेरणा:** हिमाचल प्रदेश की यात्रा से पहले उन्होंने एक 80 वर्षीय महिला और 75 वर्षीय पुरुष के पैराग्लाइडिंग करने की खबर पढ़ी थी, जिससे उन्हें साहस मिला।
- **नया रिकॉर्ड बनाने की इच्छा:** उन्होंने देखा कि अन्य बुजुर्गों ने कम ऊंचाई से छलांग लगाई थी, इसलिए उन्होंने खुद को चुनौती देने के लिए 24 हजार फीट की ऊंचाई चुनी।
- **पारिवारिक समर्थन:** उनके दोनों बेटों ने उनके इस फैसले का विरोध करने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से सहारा दिया, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।

## सवाल-जवाब

### 1. कपिलदेव रावत कौन हैं?
वह बिहार के जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड के रहने वाले 72 वर्षीय होटल संचालक हैं, जिन्होंने हाल ही में पैराग्लाइडिंग की है।

### 2. उन्होंने कहां और कितनी ऊंचाई से पैराग्लाइडिंग की?
उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मंडी में 24 हजार फीट की ऊंचाई से पैराग्लाइडिंग की।

### 3. छलांग लगाने के शुरुआती पलों में उन्हें कैसा महसूस हुआ?
उन्हें शुरुआती 3-4 सेकंड तक काफी डर लगा कि अगर कुछ गलत हुआ तो सब खत्म हो जाएगा, लेकिन बाद में उन्हें बहुत आनंद आया।

### 4. इस उम्र में पैराग्लाइडिंग करने के लिए उन्हें किससे प्रेरणा मिली?
वह एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला और 75 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा पैराग्लाइडिंग करने की खबर से प्रेरित हुए थे।

### 5. उड़ान के दौरान वह कितनी देर हवा में रहे?
वह हवा में करीब आधे घंटे (30 मिनट) तक पैराग्लाइडिंग करते रहे।

## प्रेरणा और सबक
कपिलदेव रावत की यह असाधारण कहानी जीवन को जीने और सपनों को पूरा करने के लिए कई महत्वपूर्ण सबक सिखाती है।

- **उम्र केवल एक संख्या है:** मानसिक दृढ़ता और सकारात्मक सोच से किसी भी उम्र में असाधारण लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।
- **खुद पर विश्वास रखें:** दूसरों की सफलता को देखकर खुद के भीतर 'मैं भी कर सकता हूँ' का भाव जगाना ही कामयाबी की पहली सीढ़ी है।
- **दायरे से बाहर निकलें:** एक तयशुदा ढर्रे वाली जिंदगी से बाहर निकलकर जोखिम उठाना ही जीवन को अधिक सार्थक और रोमांचक बनाता है।
- **परिवार का महत्व:** परिवार का साथ और बच्चों का समर्थन किसी भी व्यक्ति के हौसलों को दोगुनी ताकत दे सकता है।

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