जमुई की रेखा कुमारी ने तमाम रुकावटों को पछाड़ते हुए 10 साल बाद सेकंड डिवीजन से पास की मैट्रिक परीक्षा पारिवारिक विरोध, पहले पति की प्रताड़ना और मां के निधन जैसे भारी संकटों के बावजूद जमुई की रेखा कुमारी ने 286 अंकों के साथ 10वीं पास करने का सपना साकार किया। बिहार के जमुई जिले में फतेहपुर गांव की रहने वाली रेखा कुमारी ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो जिंदगी की कोई भी रुकावट शिक्षा की राह नहीं रोक सकती। एक समय ऐसा था जब रेखा को पढ़ने की इच्छा जताने पर अपने परिवार से लेकर ससुराल तक में कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। उस दौर में पहले पति की प्रताड़ना, तलाक, मां की मौत और सामाजिक तानों ने उन्हें इस कदर तोड़ दिया था कि उनके मन में आत्महत्या तक का विचार आने लगा था। हालांकि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पूरे दस साल के लंबे अंतराल के बाद आखिरकार 10वीं की परीक्षा पास कर अपने संकल्प को पूरा कर दिखाया। आज वह चार महीने के एक बच्चे की मां हैं और अपनी आगे की पढ़ाई को नई दिशा देने में जुटी हुई हैं। कम उम्र में निकाह, घरेलू हिंसा और अलगाव का दौर रेखा का जीवन बचपन से ही सामाजिक दबावों और पुरानी मान्यताओं की भेंट चढ़ गया था। उनका विवाह बहुत कम उम्र में ही कर दिया गया था। साल 2016 में उन्होंने पहली दफा 10वीं की परीक्षा देने की कोशिश की थी। जब उन्होंने आगे पढ़ने की इच्छा जाहिर की, तो उनके पहले पति ने उनका कड़ा विरोध किया। रेखा के साथ लगातार मारपीट की गई, उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और अंत में पति ने उन्हें तलाक देकर बेसहारा छोड़ दिया। पहले पति से अलग होने के बाद रेखा पूरी तरह अकेली पड़ गईं और उनकी पढ़ाई का सपना टूटता नजर आने लगा। विवश होकर वह अपने मायके फतेहपुर गांव लौट आईं और वहीं रहने लगीं। इसी मुश्किल दौर में रेखा की मां का भी देहांत हो गया। मां के असमय निधन के गहरे सदमे और पारिवारिक उथल-पुथल की वजह से वह साल 2016 में परीक्षा की समुचित तैयारी नहीं कर पाई थीं, जिसके चलते वह उस वक्त मैट्रिक परीक्षा में सफल नहीं हो सकी थीं। मायके के तानों और अकेलेपन के बीच फिर जागी उम्मीद मां के जाने और वैवाहिक जीवन के बिखरने के बाद गांव में रेखा को समाज के तीखे ताने सुनने पड़ते थे। लोग उनके पढ़ने के विचार पर बातें बनाते थे, जिसके कारण वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगी थीं। एक वक्त ऐसा भी आया जब निराशा के गहरे भंवर में उन्हें खुद को समाप्त करने का ख्याल सताने लगा था, मगर उन्होंने भीतर से अपनी हिम्मत को बिखरने नहीं दिया। कुछ वर्षों के बाद रेखा का दूसरा विवाह हुआ। इस नए रिश्ते ने उनके जीवन को एक नया मोड़ दिया, क्योंकि उनके दूसरे पति ने उनकी पढ़ाई की चाहत को समझा और उनका पूरा समर्थन किया। हालांकि मायके और आसपास के लोगों का नकारात्मक रवैया पूरी तरह नहीं बदला और वे तरह-तरह की बातें बनाकर उन पर दबाव डालते रहे। सामाजिक दखल और पारिवारिक कठिनाइयों से बचने के लिए रेखा ने अपने गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर जमुई शहर में एक कमरा किराए पर ले लिया और वहीं रहकर अपनी पढ़ाई में जुटने का कठिन फैसला किया। समग्र सेवा संस्था का सहारा और सेकंड डिवीजन से मिली कामयाबी जमुई में रहकर पढ़ाई के सफर को आगे बढ़ाने में रेखा को समग्र सेवा संस्था का भरपूर सहयोग मिला। संस्था से जुड़ी शिक्षिका अंबिका कुमारी ने रेखा को परीक्षा की व्यवस्थित तैयारी कराने में अहम भूमिका निभाई। शिक्षिका अंबिका कुमारी के अनुसार रेखा बेहद साहसी महिला हैं, जिन्होंने तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच दिन-रात एक करके कड़ी मेहनत की। करीब दस साल के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद रेखा ने दोबारा मैट्रिक की परीक्षा दी। जब परिणाम आया तो उन्होंने 286 अंक हासिल किए और सेकंड डिवीजन से 10वीं की परीक्षा पास कर ली। मैट्रिक पास करने के बाद अब वह इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही हैं। रेखा का अंतिम लक्ष्य पढ़-लिखकर एक शिक्षिका बनना है, ताकि वह अपने गांव की दूसरी लड़कियों को शिक्षित कर सकें और उन्हें पढ़ाई के लिए उन जैसी तकलीफों और रुकावटों का सामना न करना पड़े। इसका आप पर असर यह घटना ग्रामीण समाज में बाल विवाह, घरेलू हिंसा और सामाजिक विरोध से जूझ रही महिलाओं के लिए शिक्षा की राह पर अडिग रहने का एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करती है। • बिहार में: राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पारिवारिक विरोध और सामाजिक रूढ़ियों का सामना कर रही युवतियों के लिए यह सफलता एक बड़ा संबल बनकर उभरी है। यह साबित करती है कि कठिन घरेलू हालात के बावजूद स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं और समर्पित शिक्षकों की मदद से पढ़ाई दोबारा शुरू की जा सकती है। • भारत में: देशभर की उन महिलाओं के लिए यह एक ठोस सीख है जिनकी पढ़ाई बाल विवाह या घरेलू कलह के कारण बीच में ही छूट गई थी। वयस्क उम्र में भी ओपन स्कूलिंग या बोर्ड परीक्षाओं के माध्यम से सेकंड चांस एजुकेशन हासिल कर अपने करियर को दोबारा पटरी पर लाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ रेखा कुमारी को अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने में दस साल का लंबा समय इसलिए लगा क्योंकि वह कम उम्र में जबरन शादी, घरेलू हिंसा और पारिवारिक नुकसान के भंवर में फंस गई थीं। • घरेलू हिंसा और तलाक: साल 2016 में पढ़ाई की मांग करने पर पहले पति द्वारा की गई मारपीट और बाद में दिए गए तलाक ने रेखा को सामाजिक व मानसिक रूप से असहाय बना दिया था। इस अलगाव की वजह से उनका अध्ययन पूरी तरह ठप हो गया था। • मां का आकस्मिक निधन: पहले प्रयास के दौरान मां की मृत्यु हो जाने से रेखा को गहरा मानसिक आघात पहुंचा था। पारिवारिक शोक और संबल छिन जाने के कारण वह 2016 में परीक्षा की तैयारी नहीं कर पाई थीं और असफल हो गईं। • मायके का सामाजिक दबाव और दूरी: दूसरी शादी के बाद पति का समर्थन मिलने के बावजूद मायके वालों और ग्रामीणों के तानों ने बाधाएं खड़ी कीं। इस व्यवधान को खत्म करने के लिए उन्हें गांव छोड़कर 20 किलोमीटर दूर किराए पर रहकर समग्र सेवा संस्था की मदद से पढ़ाई करनी पड़ी। सवाल-जवाब 1. रेखा कुमारी मूल रूप से कहां की रहने वाली हैं? रेखा कुमारी बिहार के जमुई जिले के फतेहपुर गांव की रहने वाली हैं। 2. रेखा कुमारी ने 10वीं की परीक्षा में कितने अंक प्राप्त किए हैं? रेखा ने मैट्रिक परीक्षा में कुल 286 अंक हासिल किए और वह सेकंड डिवीजन से उत्तीर्ण हुईं। 3. रेखा कुमारी ने पहली बार मैट्रिक की परीक्षा कब दी थी? उन्होंने सबसे पहले साल 2016 में मैट्रिक की परीक्षा दी थी, लेकिन मां के निधन और पारिवारिक समस्याओं की वजह से वह पास नहीं हो सकी थीं। 4. रेखा कुमारी के पहले विवाह में क्या परेशानियां आई थीं? बचपन में शादी होने के बाद जब उन्होंने पढ़ने की इच्छा जताई तो पहले पति ने मारपीट कर उन्हें प्रताड़ित किया और अंत में तलाक दे दिया। 5. मैट्रिक की परीक्षा की तैयारी के लिए रेखा को गांव क्यों छोड़ना पड़ा? मायके और ग्रामीणों के तानों से बचने के लिए वह अपने गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर जमुई में किराए के कमरे में रहकर तैयारी करने लगीं। 6. रेखा की परीक्षा की तैयारी में किस संस्था और शिक्षिका ने मदद की? उनकी तैयारी में समग्र सेवा संस्था ने सहयोग दिया और शिक्षिका अंबिका कुमारी ने उन्हें परीक्षा के लिए पढ़ाया। 7. रेखा कुमारी का आगे का क्या लक्ष्य है? वह वर्तमान में इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही हैं और भविष्य में शिक्षिका बनकर गांव की अन्य लड़कियों को पढ़ाना चाहती हैं। प्रेरणा और सबक रेखा कुमारी का यह सफर उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत सामाजिक परिस्थितियों और पारिवारिक दबावों के कारण अपने सपनों को छोड़ चुके हैं। • उम्र और रुकावटों से ऊपर उठना: जीवन में विवाह, मातृत्व या सामाजिक विरोध चाहे जो भी पड़ाव आए, शिक्षा हासिल करने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं होती। दस साल का लंबा अंतराल भी लक्ष्य को हासिल करने में आड़े नहीं आया। • सकारात्मक माहौल का चुनाव: नकारात्मक तानों और विरोध से बचने के लिए गांव से 20 किलोमीटर दूर जाकर रहने का उनका निर्णय यह सिखाता है कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए अनावश्यक विवादों से दूर सही माहौल बनाना आवश्यक है। • समाज को वापस लौटाने का संकल्प: अपनी सफलता के बाद शिक्षिका बनकर गांव की अन्य बच्चियों को पढ़ाने का उनका ध्येय यह दिखाता है कि अपनी व्यक्तिगत पीड़ा को समाज सेवा और सुधार का साधन कैसे बनाया जाता है। 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