जमुई की सोनी देवी ने सिलाई की एक मशीन से खड़ा किया अपना कारोबार, दर्जनों लड़कियों को सिखाया हुनर जमुई की सोनी देवी ने मायके से मिली एक सिलाई मशीन के सहारे खुद को उद्यमी के तौर पर स्थापित किया और जीविका से डेढ़ लाख रुपये का लोन लेकर अपनी ननद की शादी भी करवाई, जिसे वह पूरी तरह चुका चुकी हैं. बिहार के जमुई जिले में एक बहू ने वो कर दिखाया है जो गांव की कई औरतें सोचने से भी कतराती हैं. जमुई की सोनी देवी ने ससुराल की बंदिशों में बंधने के बजाय अपने हुनर के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई और आज वह खुद एक उद्यमी बन चुकी हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने आस पड़ोस की दो दर्जन से ज्यादा लड़कियों को सिलाई सिखाकर उन्हें भी रोजगार की राह दिखाई है. घूंघट की परंपरा तोड़ खुद बनाई पहचान गांवों में शादी के बाद बहुओं का घर की चौखट से बाहर निकलना आज भी आसान नहीं माना जाता. घूंघट ओढ़कर घर का काम संभालना ही सदियों पुरानी परंपरा रही है और आज भी कई गांवों में यह परंपरा कायम है. जमुई जिले के खैरा प्रखंड की रहने वाली सोनी देवी ने इसी लीक से हटकर रास्ता चुना. ससुराल की तमाम बंदिशों के बावजूद उन्होंने खुद को साबित करने की ठानी और आज वह ना सिर्फ अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी हैं, बल्कि इलाके की दूसरी लड़कियों और महिलाओं के लिए भी मिसाल बन चुकी हैं. मायके से आई सिलाई मशीन बनी सहारा सोनी देवी की शादी साल 2011 में राजू कुमार से हुई थी. शादी के बाद वह अपने ससुराल आ गईं. उस वक्त वह अपने मायके से एक सिलाई मशीन भी अपने साथ लेकर आई थीं, जो आगे चलकर उनकी जिंदगी बदलने वाली साबित हुई. शादी के बाद परिवार की बढ़ती आर्थिक जरूरतों के बीच घर चलाना मुश्किल होने लगा. ऐसे में सोनी देवी ने ससुराल की तमाम बंदिशों को पीछे छोड़कर खुद कमाने का फैसला किया. बचपन से ही उन्हें सिलाई कढ़ाई का काफी शौक था, और यही शौक आगे चलकर उनकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन गया. जीविका से जुड़कर पहचाना अपना हुनर साल 2016 में सोनी देवी बमबम जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं. जीविका ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का काम करता है और इसी समूह से जुड़ने के बाद सोनी देवी ने अपने अंदर छिपे हुनर को पहचाना और विधिवत सिलाई सीखनी शुरू की. धीरे धीरे गांव की कई लड़कियां भी उनके सिलाई सेंटर पर आने लगीं. सोनी देवी बताती हैं कि उन्होंने महज एक सिलाई मशीन से अपनी शुरुआत की थी. आज वह चार से ज्यादा सिलाई मशीनें खरीद चुकी हैं और अपने ही घर पर लड़कियों को सिलाई का प्रशिक्षण देती हैं. अब तक वह गांव की दो दर्जन से अधिक लड़कियों को सिलाई सिखा चुकी हैं. 2018 से चल रहा प्रशिक्षण, अपनी कमाई से खरीदीं मशीनें सोनी देवी ने साल 2018 से बाकायदा सिलाई प्रशिक्षण का काम शुरू किया था. इस काम को करते हुए अब उन्हें करीब 9 साल हो चुके हैं और वह आज भी लगातार लड़कियों और युवतियों को सिलाई सिखा रही हैं. उन्होंने बताया कि अपनी कमाई से ही उन्होंने एक के बाद एक सारी सिलाई मशीनें खरीदीं और धीरे धीरे अपनी कमाई की बदौलत अपने कारोबार का विस्तार करती चली गईं. जीविका से लोन लेकर करवाई ननद की शादी सोनी देवी ने जीविका से करीब डेढ़ लाख रुपये यानी 150000 रुपये का लोन लेकर अपनी ननद की शादी करवाई थी. उन्होंने यह पूरा कर्ज समय पर चुका भी दिया है. इसके अलावा अपने कारोबार को और आगे बढ़ाने के लिए भी उन्होंने वक्त वक्त पर कई तरह के लोन लिए, लेकिन आज तक वह वह सारा पैसा भी लौटा चुकी हैं. शादी सीजन में बड़े ऑर्डर, बच्चों की पढ़ाई और बचत भी सोनी देवी अपने सेंटर पर लड़कियों को सिलाई सिखाने के साथ साथ शादी विवाह के मौसम में बड़े बड़े ऑर्डर भी लेती हैं, जिससे उन्हें अच्छी खासी कमाई हो जाती है. इसी कमाई से वह ना सिर्फ अपना परिवार चला रही हैं, बल्कि अपने बच्चों को भी पढ़ा रही हैं और आने वाले समय की कई योजनाओं के लिए अच्छी खासी बचत भी कर रही हैं. आगे और बड़ा करने की तैयारी सोनी देवी ने बताया कि आने वाले दिनों में वह अपने कारोबार को और आगे बढ़ाना चाहती हैं, ताकि वह और बेहतर कमाई कर सकें और अपने आसपास की ज्यादा से ज्यादा लड़कियों को रोजगार से जोड़ सकें. इसका आप पर असर • भारत में: यह कहानी दिखाती है कि जीविका जैसे स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर देश की ग्रामीण महिलाएं भी एक छोटी सी शुरुआत से अपना कारोबार खड़ा कर सकती हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं. • जमुई में: खैरा प्रखंड की दो दर्जन से ज्यादा लड़कियों को सोनी देवी के सेंटर से सिलाई सीखकर घर बैठे कमाई का जरिया मिल चुका है. सवाल-जवाब 1. सोनी देवी कहां की रहने वाली हैं? सोनी देवी बिहार के जमुई जिले के खैरा प्रखंड की रहने वाली हैं. 2. सोनी देवी की शादी कब और किससे हुई थी? उनकी शादी साल 2011 में राजू कुमार से हुई थी. 3. उन्होंने अपना काम कैसे शुरू किया था? वह मायके से एक सिलाई मशीन लेकर आई थीं और साल 2016 में बमबम जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद सिलाई सीखनी शुरू की. 4. अभी उनके पास कितनी सिलाई मशीनें हैं? शुरुआत में एक मशीन से काम शुरू करने वाली सोनी देवी अब चार से ज्यादा सिलाई मशीनों की मालकिन हैं. 5. उन्होंने अब तक कितनी लड़कियों को सिलाई सिखाई है? अब तक वह गांव की दो दर्जन से अधिक लड़कियों को सिलाई सिखा चुकी हैं. 6. जीविका से लिया गया लोन किस काम के लिए था? उन्होंने जीविका से करीब डेढ़ लाख रुपये यानी 150000 रुपये का लोन लेकर अपनी ननद की शादी करवाई थी, जिसे वह पूरी तरह चुका चुकी हैं. 7. उनकी कमाई का बड़ा जरिया क्या है? सिलाई सिखाने के अलावा वह शादी विवाह के मौसम में बड़े ऑर्डर लेकर अच्छी कमाई करती हैं. 8. सोनी देवी ने सिलाई प्रशिक्षण कब से शुरू किया? उन्होंने साल 2018 से बाकायदा सिलाई प्रशिक्षण का काम शुरू किया था, जिसे अब करीब 9 साल हो चुके हैं. प्रेरणा और सबक • अपने हुनर को पहचानें: सोनी देवी ने बचपन के शौक यानी सिलाई कढ़ाई को ही अपनी कमाई का जरिया बना लिया, यह सिखाता है कि अपनी रुचि में ही सबसे बड़ा मौका छिपा हो सकता है. • छोटी शुरुआत से न घबराएं: उन्होंने महज एक सिलाई मशीन से शुरुआत की और आज चार से ज्यादा मशीनों की मालकिन हैं, बड़ा बनने के लिए बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती. • सही समूह से जुड़ना फायदेमंद: जीविका के बमबम स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद ही उन्हें अपनी क्षमता पहचानने और आगे बढ़ने का मौका मिला. • कर्ज को जिम्मेदारी से निभाएं: ननद की शादी के लिए लिया डेढ़ लाख का लोन हो या कारोबार के लिए लिए गए दूसरे लोन, सोनी देवी ने हर कर्ज समय पर चुकाया, जिससे उनकी साख मजबूत हुई. • दूसरों को साथ लेकर चलें: कमाने के साथ साथ उन्होंने गांव की दो दर्जन से अधिक लड़कियों को भी सिलाई सिखाई, यानी सफलता को अकेले नहीं बल्कि साथ लेकर आगे बढ़ने में असली मायने हैं. https://trendkia.com/success-stories/jamui-ki-soni-devi-ne-silai-ki-eka-mashina-se-khara-kiya-apana-karobara-darjanon-larakiyon-ko-sikhaya-hunara-7533 TrendKia — Har trend, sabse pehle.