{
  "type": "article",
  "title": "जमुई की सुषमा हर रोज घुटनों के बल डेढ़ किलोमीटर चलकर स्कूल पहुंचती है, सपना है पुलिस अफसर बनने का",
  "summary": "बिहार के जमुई जिले की दस साल की सुषमा कुमारी जन्म से ही पैरों से दिव्यांग है, फिर भी हर दिन डेढ़ किलोमीटर का सफर तय कर स्कूल जाती है और बड़ी होकर पुलिस अफसर बनना चाहती है।",
  "content": "बिहार के जमुई जिले के एक छोटे से गांव खुटौना में रहने वाली दस साल की सुषमा कुमारी की कहानी हौसले की मिसाल है। जन्म से ही उसके दोनों पैर टखने से नीचे पूरी तरह मुड़े हुए हैं, खड़ी होते ही पैर कांपने लगते हैं और सड़क पर चलना उसके लिए हर दिन एक कठिन इम्तिहान बन जाता है। इसके बावजूद वह रोज करीब डेढ़ किलोमीटर का सफर तय कर उत्क्रमित मध्य विद्यालय खुटौना पहुंचती है, जहां वह कक्षा चार में पढ़ती है।\n\nसुषमा अकेली नहीं है जो इस मुश्किल से जूझ रही है। उसकी बड़ी बहन भी दोनों पैरों से दिव्यांग है और वह भी इसी स्कूल में पढ़ चुकी है। इतना ही नहीं, सुषमा की मां सुन नहीं सकतीं। यानी पूरे परिवार को अलग-अलग तरह की शारीरिक चुनौतियों से रोज जूझना पड़ता है, फिर भी सुषमा ने पढ़ाई का रास्ता नहीं छोड़ा।\n\nमुड़े हुए पैरों के साथ हर कदम मुश्किल\nसुषमा के टखने से नीचे का हिस्सा पूरी तरह मुड़ा हुआ है, जिस वजह से वह चप्पल तक नहीं पहन सकती। सामान्य सड़क पर चलने पर गिट्टियां और कंकड़ उसके पैरों में चुभ जाते हैं, जिससे चलना और मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से वह सड़क की बजाय खेतों के रास्ते से स्कूल जाना पसंद करती है, क्योंकि वहां मिट्टी की नरम सतह मिल जाती है और स्कूल की दूरी भी कुछ कम हो जाती है।\n\nबारिश में लगभग नामुमकिन हो जाता है सफर\nबारिश का मौसम सुषमा के लिए सबसे बड़ी चुनौती लेकर आता है। कच्ची सड़कें और खेतों की पगडंडियां कीचड़ से भर जाती हैं। ऐसे मौसम में सामान्य व्यक्ति के लिए भी चलना मुश्किल हो जाता है, लेकिन सुषमा के लिए यह लगभग असंभव जैसा हो जाता है। सुषमा की दादी सिया देवी बताती हैं कि वह कीचड़ भरे रास्ते पर कई बार गिर चुकी है, जिस वजह से बारिश के दिनों में कई बार वह स्कूल ही नहीं जा पाती।\n\nबड़ी होकर पुलिस अफसर बनना है सपना\nअपनी सारी दिक्कतों के बीच भी सुषमा का सपना साफ है। उसने बताया, मैं पढ़-लिखकर पुलिस बनना चाहती हूं। उसने आगे कहा कि ऐसा पैर होने के कारण उसे चलने-फिरने में बहुत परेशानी होती है, सड़क पर गिट्टियां चुभती हैं तो दिक्कत और बढ़ जाती है, और बारिश में रास्ते में कीचड़ हो जाने पर स्कूल जाना बंद हो जाता है। स्कूल के प्रधानाचार्य राहुल कुमार ने बताया कि सुषमा प्रतिदिन स्कूल आती है। उन्होंने कहा कि उसे परेशानी होती है, लेकिन वह उसे नजरअंदाज कर हर रोज स्कूल पहुंचती है। उन्होंने यह भी बताया कि सुषमा की एक बड़ी बहन भी दिव्यांग है, जो पहले इसी स्कूल में पढ़ती थी।\n\nअब तक नहीं मिली कोई सरकारी मदद\nसुषमा के परिवार ने बताया कि आज तक उसे ऐसी कोई सरकारी सहायता नहीं मिल सकी, जिससे उसका स्कूल आना-जाना आसान हो सके। उसे अब तक एक ट्राई साइकिल तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। परिवार के लोगों का कहना है कि अगर उसके पास ट्राई साइकिल होती, तो उसका रोज का सफर काफी आसान हो जाता और बारिश के दिनों में भी उसकी पढ़ाई कम प्रभावित होती। सुषमा की यह कहानी अब कई और लोगों को भी प्रेरणा दे रही है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह घटना देश भर में दिव्यांग बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए ट्राई साइकिल और अन्य सहायक उपकरण जैसी सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत और उनमें रह गई कमियों को सामने लाती है।\n• जमुई, बिहार में: स्थानीय प्रशासन और स्कूल विभाग पर सुषमा जैसे दिव्यांग बच्चों को तुरंत ट्राई साइकिल और अन्य सहायता मुहैया कराने का दबाव बढ़ सकता है, ताकि बारिश के मौसम में उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुषमा कौन है और वह कहां रहती है?\nसुषमा कुमारी बिहार के जमुई जिले के गांव खुटौना की रहने वाली दस साल की छात्रा है, जो उत्क्रमित मध्य विद्यालय खुटौना की कक्षा चार में पढ़ती है।\n\n2. सुषमा को चलने में क्या दिक्कत है?\nसुषमा के दोनों पैर जन्म से ही टखने से नीचे पूरी तरह मुड़े हुए हैं, जिस वजह से वह चप्पल तक नहीं पहन सकती और खड़ी होने पर पैर कांपने लगते हैं।\n\n3. सुषमा रोज स्कूल कैसे पहुंचती है?\nवह घर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्कूल तक सड़क की बजाय खेतों के रास्ते से जाती है, क्योंकि वहां मिट्टी की सतह उसके पैरों के लिए ज्यादा आसान होती है।\n\n4. बारिश के मौसम में सुषमा को क्या समस्या होती है?\nबारिश में कच्ची सड़कें और पगडंडियां कीचड़ से भर जाती हैं, जिससे उसका चलना लगभग असंभव हो जाता है और कई बार वह स्कूल नहीं जा पाती।\n\n5. सुषमा का सपना क्या है?\nसुषमा पढ़-लिखकर पुलिस अफसर बनना चाहती है।\n\n6. क्या सुषमा को सरकार से कोई मदद मिली है?\nनहीं, परिवार के मुताबिक आज तक सुषमा को कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है और उसे अब तक एक ट्राई साइकिल तक नहीं दी गई है।\n\n7. स्कूल के प्रधानाचार्य ने सुषमा के बारे में क्या कहा?\nप्रधानाचार्य राहुल कुमार ने बताया कि सुषमा को परेशानी होती है, लेकिन वह उसे नजरअंदाज कर हर रोज स्कूल आती है।\n\n8. सुषमा के परिवार में और कौन दिव्यांग है?\nसुषमा की बड़ी बहन भी दोनों पैरों से दिव्यांग है और वह भी पहले इसी स्कूल में पढ़ती थी, वहीं उसकी मां सुन नहीं सकती हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\n• लक्ष्य साफ रखें: तमाम शारीरिक दिक्कतों के बावजूद सुषमा का सपना पुलिस अफसर बनना है, और यही स्पष्ट लक्ष्य उसे रोज स्कूल जाने की ताकत देता है।\n• रास्ता न मिले तो नया रास्ता बनाएं: सड़क पर चलना मुश्किल होने पर सुषमा ने खेतों से होकर जाने का अपना रास्ता खुद खोज लिया, जो उसके लिए ज्यादा आसान साबित हुआ।\n• मुश्किलों को बहाना न बनाएं: स्कूल के प्रधानाचार्य के मुताबिक सुषमा को परेशानी तो होती है, लेकिन वह उसे नजरअंदाज कर हर दिन स्कूल पहुंचती है।\n• परिवार की चुनौतियां भी नहीं रोक पातीं हौसला: बड़ी बहन का दिव्यांग होना और मां का सुन न पाना भी सुषमा को पढ़ाई से पीछे नहीं हटा पाया।",
  "url": "https://trendkia.com/success-stories/jamui-ki-sushma-hara-roja-ghutanon-ke-bala-derha-kilomitara-chalakara-skula-pahunchati-hai-sapana-hai-pulisa-aphasara-banane-ka-4730",
  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-04",
  "tags": [
    "सुषमा कुमारी",
    "जमुई दिव्यांग बच्ची",
    "खुटौना स्कूल",
    "दिव्यांग छात्रा संघर्ष",
    "बिहार प्रेरणादायक कहानी",
    "ट्राई साइकिल"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}