जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल चाय ने बदल दी बिजनौर की ग्रामीण औरतों की जिंदगी, विदेश तक बनी पहचान बिजनौर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े एक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जैविक जड़ी-बूटियों से विदुर हर्बल टी तैयार कर रही हैं, जिसकी मांग अब अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गांव की कुछ महिलाओं ने अपने हाथों से एक ऐसा कारोबार खड़ा किया है जिसकी खुशबू अब देश की सीमाओं से बाहर तक फैल चुकी है। यह कहानी है विदुर हर्बल टी नाम के एक स्वयं सहायता समूह की, जिसने स्थानीय जड़ी-बूटियों से जैविक चाय बनाकर अपनी आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल डाली और आज इसकी खुशबू अमेरिका और यूरोप के घरों तक पहुंच रही है। कैसे हुई इस कारोबार की शुरुआत यह पूरा उद्यम राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की मदद से आगे बढ़ा। समूह की महिलाओं ने बैंक से एक लाख रुपये का कर्ज लेकर हर्बल चाय बनाने का काम शुरू किया था। शुरुआत में यह सिर्फ एक छोटा प्रयोग था, लेकिन मेहनत और लगन से यह जल्द ही एक पूरा कुटीर उद्योग बन गया। आज समूह से जुड़ी 10 महिलाएं मिलकर पूरी तरह केमिकल रहित और ऑर्गेनिक चाय तैयार करती हैं। इस काम ने इन महिलाओं की आमदनी को इतना बढ़ा दिया है कि इनकी गिनती अब गांव में लखपतियों में होने लगी है, जो ग्रामीण इलाकों में महिला सशक्तिकरण की एक बड़ी मिसाल बनकर सामने आई है। प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से तैयार होती है यह खास चाय समूह की अध्यक्ष बबीता रानी के मुताबिक, इस चाय को बनाने में लेमनग्रास, गिलोय, मुलेठी, जामुन के पत्ते, कच्ची हल्दी, अमरूद के पत्ते, दालचीनी, तुलसी, हरी इलायची और सौंफ जैसी चीजें डाली जाती हैं। यह सभी सामग्री पूरी तरह ऑर्गेनिक होती है और किसी भी तरह के रासायनिक तत्व का इसमें इस्तेमाल नहीं किया जाता। फिलहाल यह चाय दो अलग-अलग स्वादों में तैयार की जा रही है, ताकि ग्राहकों को अपनी पसंद के हिसाब से विकल्प मिल सके। इन जड़ी-बूटियों के मेल से बनी यह चाय अपनी सुगंध और सेहतमंद गुणों की वजह से लोगों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। बिजनौर से मुरादाबाद तक फैला कारोबार विदुर हर्बल टी का नेटवर्क अब सिर्फ एक गांव या कस्बे तक सीमित नहीं रहा। बिजनौर में करीब 40 आउटलेट और कैफे में यह चाय परोसी जा रही है, जो बताता है कि स्थानीय बाजार में इसकी पकड़ कितनी मजबूत हो चुकी है। इसके अलावा मुरादाबाद में भी महिलाओं ने दो केंद्र खोल रखे हैं। हाल ही में मुरादाबाद के सिविल लाइन इलाके में कचहरी गेट के पास एक और नया केंद्र शुरू किया गया है, जिससे शहर में इसकी पहुंच और बढ़ गई है। इस तरह कदम दर कदम यह छोटा सा समूह एक पहचाने जाने वाले ब्रांड की शक्ल लेता जा रहा है। विदेशों से भी बढ़ने लगी डिमांड पिछले साल दिल्ली में हुई एक प्रदर्शनी में इस समूह ने हिस्सा लिया था, जहां विदेशी मेहमानों ने इस चाय को चखा और इसकी सुगंध व स्वाद को बेहद पसंद किया। इसी मुलाकात के बाद विदेश से भी इसे मंगवाने की इच्छा जताई जाने लगी। बबीता रानी ने बताया कि अब अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों से इस चाय की फ्रेंचाइजी खोलने की मांग आ रही है। उन्होंने कहा, "धीरे-धीरे हमारी विदुर हर्बल टी एक ब्रांड बनती जा रही है।" इसके साथ ही भारत के भीतर भी कई राज्यों से बड़ी मात्रा में इसकी सप्लाई मंगाई जा रही है, जिससे समूह की महिलाओं के लिए यह कमाई का एक भरोसेमंद जरिया बन गया है। घर बैठे कैसे मंगाएं विदुर हर्बल टी अगर कोई इस चाय का स्वाद चखना चाहता है तो मोबाइल नंबर 9625 102715 पर सीधे संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा गूगल के जरिए भी ऑनलाइन ऑर्डर करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे देश के किसी भी कोने से ग्राहक तक यह चाय आसानी से पहुंचाई जा सके। समूह का दावा है कि यह हर्बल चाय सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद मानी जाती है, इसलिए इसे एक बार जरूर आजमाने की सलाह दी जाती है। बैंक के छोटे से कर्ज से शुरू हुआ यह सफर अब सरहदों के पार तक पहुंच चुका है, और यही वजह है कि बिजनौर की यह कहानी बाकी गांवों की महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणा बनती जा रही है। इसका आप पर असर अगर आप बिजनौर या मुरादाबाद के आसपास रहते हैं तो यह हर्बल चाय अब आपके नजदीकी बाजार तक पहुंच चुकी है। • भारत में: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सिर्फ एक लाख रुपये के बैंक कर्ज से शुरू हुआ यह मॉडल दिखाता है कि देश के किसी भी गांव की महिलाएं छोटी पूंजी से खुद का कारोबार खड़ा कर सकती हैं। जो महिलाएं समूह से जुड़ना चाहती हैं, वे स्थानीय ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय से संपर्क कर सकती हैं। • बिजनौर और मुरादाबाद में: यहां रहने वाले लोग अब 40 से ज्यादा आउटलेट और कैफे में यह ऑर्गेनिक चाय सीधे चख सकते हैं। मुरादाबाद के सिविल लाइन स्थित कचहरी गेट के पास खुला नया केंद्र स्थानीय लोगों के लिए सबसे नजदीकी विकल्प है। • ऑर्डर करने वालों के लिए: देश में कहीं से भी मोबाइल नंबर 9625 102715 पर संपर्क करके या गूगल के जरिए इस चाय को ऑनलाइन मंगाया जा सकता है। इससे बिना किसी दुकान के भी यह चाय ग्राहक के घर तक पहुंच जाती है। • विदेश में रहने वालों के लिए: अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस में फ्रेंचाइजी खुलने की तैयारी चल रही है, यानी आने वाले समय में वहां रहने वालों को भी यह चाय स्थानीय स्तर पर मिल सकती है। ऐसा क्यों हुआ विदुर हर्बल टी का यह सफर अचानक नहीं बना, बल्कि कुछ ठोस कदमों की वजह से आगे बढ़ा। सरकारी योजना से मिली शुरुआती पूंजी, उत्पाद की गुणवत्ता और एक प्रदर्शनी में मिले मौके ने इसे स्थानीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। • सरकारी योजना से मिला सहारा: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मिले एक लाख रुपये के कर्ज ने महिलाओं को बिना बड़ी पूंजी के अपना कारोबार शुरू करने का मौका दिया। • ऑर्गेनिक और केमिकल-मुक्त पहचान: लेमनग्रास, गिलोय, तुलसी जैसी जड़ी-बूटियों से बनी शुद्ध चाय ने इसे आम बाजार की चाय से अलग खड़ा किया, जिससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा। • दिल्ली की प्रदर्शनी बनी टर्निंग पॉइंट: पिछले साल दिल्ली में हुई एक प्रदर्शनी में विदेशी मेहमानों ने इस चाय को पसंद किया, जिसके बाद ही विदेश से फ्रेंचाइजी और ऑर्डर की मांग शुरू हुई। • धीरे-धीरे बढ़ता नेटवर्क: एक केंद्र से शुरू हुआ यह काम अब बिजनौर के 40 आउटलेट और मुरादाबाद के दो केंद्रों तक फैल चुका है, जिसने इसे एक पहचाने जाने वाले ब्रांड में बदल दिया। सवाल-जवाब 1. विदुर हर्बल टी कहां तैयार की जाती है? उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में ग्रामीण महिलाओं के एक स्वयं सहायता समूह द्वारा। 2. इस कारोबार को शुरू करने के लिए पैसा कहां से आया? समूह ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बैंक से एक लाख रुपये का कर्ज लिया था। 3. कितनी महिलाएं इस काम से जुड़ी हैं? फिलहाल 10 महिलाएं मिलकर यह चाय तैयार करती हैं। 4. इस चाय में किन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता है? लेमनग्रास, गिलोय, मुलेठी, जामुन के पत्ते, कच्ची हल्दी, अमरूद के पत्ते, दालचीनी, तुलसी, हरी इलायची और सौंफ का इस्तेमाल किया जाता है। 5. यह चाय किन देशों में मांगी जा रही है? अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस से इसकी फ्रेंचाइजी खोलने की मांग आ रही है। 6. इस समूह की अध्यक्ष कौन हैं? बबीता रानी इस समूह की अध्यक्ष हैं। 7. यह चाय कैसे मंगाई जा सकती है? मोबाइल नंबर 9625 102715 पर संपर्क करके या गूगल के जरिए ऑनलाइन ऑर्डर करके। 8. बिजनौर और मुरादाबाद में कितने आउटलेट हैं? बिजनौर में करीब 40 आउटलेट और कैफे में यह चाय मिलती है, जबकि मुरादाबाद में दो केंद्र संचालित हो रहे हैं। प्रेरणा और सबक बबीता रानी और उनके समूह की कहानी बताती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सही रणनीति से बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है। • छोटी शुरुआत से न घबराएं: सिर्फ एक लाख रुपये के कर्ज से शुरू किया गया काम आज दर्जनों आउटलेट और विदेशी फ्रेंचाइजी की मांग तक पहुंच गया है। • गुणवत्ता पर टिके रहें: पूरी तरह केमिकल-मुक्त और ऑर्गेनिक सामग्री पर जोर देने से उत्पाद की अलग पहचान बनी, जिसने ग्राहकों का भरोसा जीता। • सही मंच पर मौका पकड़ें: दिल्ली की प्रदर्शनी में हिस्सा लेने से मिले संपर्कों ने ही इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया, जो दिखाता है कि सही मंच पर अपना उत्पाद दिखाना कितना जरूरी है। • टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें: गूगल के जरिए ऑनलाइन ऑर्डर की सुविधा ने बिना बड़े निवेश के भी दूर-दराज के ग्राहकों तक पहुंच बना दी। • टीम के साथ आगे बढ़ें: 10 महिलाओं ने मिलकर काम किया, जिससे व्यक्तिगत मेहनत सामूहिक सफलता में बदल गई। https://trendkia.com/success-stories/jari-butiyon-se-bani-harbala-chaya-ne-badala-di-bijnor-ki-gramina-auraton-ki-jindagi-videsha-taka-bani-pahachana-29424 TrendKia — Har trend, sabse pehle.