# जहानाबाद के अरविंद ने 2 गायों से शुरू किया डेयरी फार्म, अब रोजाना 100 किलो से ज्यादा दूध बेचकर संवार रहे भविष्य

> बिहार के जहानाबाद जिले में आठवीं पास अरविंद कुमार ने सरकारी योजना की मदद से अपना डेयरी व्यवसाय बढ़ाया और अब 15 गायों के साथ रोजाना 100 किलो से अधिक दूध बेच रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/jehanabad-ke-arvind-ne-2-gayon-se-shuru-kiya-deyari-pharma-aba-rojana-100-kilo-se-jyada-dudha-bechakara-snvara-rahe-bhavishya-38832 · **Language:** Hindi
**Tags:** जहानाबाद, डेयरी फार्मिंग, पशुपालन, गव्य विकास योजना, बिहार न्यूज़, सफलता की कहानी

बिहार के ग्रामीण अंचलों में कृषि के साथ-साथ पशुपालन की परंपरा काफी पुरानी और मजबूत रही है। गांवों में दुधारू मवेशी रखना केवल दूध की घरेलू जरूरत पूरी करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि खाद के लिए गोबर और जुताई के लिए बैलों का उपयोग भी सदियों से होता रहा है। वक्त के साथ अब पशुपालन पारंपरिक ढर्रे से निकलकर एक संगठित और लाभदायक व्यवसाय का रूप ले चुका है। जहानाबाद जिले के कई किसान और युवा इसे आजीविका का मुख्य माध्यम बनाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।

## आठवीं पास अरविंद ने तलाशा स्वरोजगार का रास्ता
जहानाबाद जिले के घोसी प्रखंड अंतर्गत साहोबिगहा ज्ञानगढ़ मठ गांव के रहने वाले अरविंद कुमार इस बदलाव का एक सटीक उदाहरण हैं। अरविंद सिर्फ आठवीं कक्षा तक पढ़े हैं और अपनी कम शैक्षणिक योग्यता के कारण नौकरी की तलाश में अक्सर चुनौतियों का सामना करते थे। उन्होंने गांव से बाहर जाने या हताश होने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही कुछ नया शुरू करने का मन बनाया। वर्ष 2024 में उन्होंने केवल 2 गायों के साथ डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की।

## सरकारी योजना बनी टर्निंग पॉइंट
शुरुआती दौर में अरविंद ने पूरी लगन के साथ दोनों गायों की देखभाल की और डेयरी के कामकाज की बारीकियां सीखीं। लगभग एक साल तक जमीनी स्तर पर कड़ी मेहनत करने के बाद उन्हें जिला पशुपालन कार्यालय के गव्य विकास प्रभाग में चल रही एक सरकारी योजना के बारे में पता चला। अरविंद ने तुरंत गव्य विकास कार्यालय जाकर योजना से जुड़ी सभी शर्तें समझीं और आवेदन पत्र जमा कर दिया। उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और योजना के सहयोग से उनके फार्म में गायों की संख्या बढ़कर 15 तक पहुंच गई।

## प्रतिदिन एक क्विंटल से अधिक दूध का उत्पादन
मौजूदा समय में अरविंद के पास कई उन्नत नस्ल की दुधारू गायें हैं। इनमें से एक-दो गायों की बाजार कीमत 1 लाख रुपये से भी अधिक है। नस्ल सुधार और बेहतर रखरखाव के चलते उनके फार्म से रोजाना 100 किलोग्राम यानी एक क्विंटल से अधिक दूध का उत्पादन हो रहा है। इस दूध की नियमित बिक्री से उन्हें हर दिन अच्छी खासी आमदनी हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

## गांव में रहकर ही मिली पहचान और स्वावलंबन
अरविंद बताते हैं कि कम पढ़ा-लिखा होने की वजह से भविष्य को लेकर हमेशा चिंता रहती थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कहा कि 15 गायों से हर दिन 100 किलो से अधिक दूध की आपूर्ति हो रही है, जिससे उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ी और गांव में ही सम्मानजनक कमाई हो रही है। उनका मानना है कि सही योजना, सरकारी सहयोग और अटूट मेहनत के बल पर कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थिति बदल सकता है।

## इसका आप पर असर
यह सफलता दर्शाती है कि ग्रामीण युवा सरकारी योजनाओं और आधुनिक पशुपालन को अपनाकर गांव में ही टिकाऊ आजीविका तैयार कर सकते हैं।

- **भारत में:** पशुपालन क्षेत्र में सरकारी सब्सिडी और वित्तीय सहायता का लाभ उठाकर ग्रामीण युवा बिना बड़े शहर गए स्थिर मासिक आय अर्जित कर सकते हैं। डेयरी आधारित सूक्ष्म उद्योग ग्रामीण भारत में स्वरोजगार और पोषण सुरक्षा दोनों को मजबूती प्रदान करते हैं।
- **जहानाबाद में:** जिले के युवा किसान जिला पशुपालन और गव्य विकास कार्यालय की योजनाओं के लिए आवेदन कर पशुधन का विस्तार कर सकते हैं। उच्च नस्ल की दुधारू गायों के पालन से स्थानीय बाजार में प्रतिदिन दूध की सुरक्षित आपूर्ति और नकद प्रवाह सुनिश्चित होता है।
- **सीमित शिक्षा वालों के लिए:** कम औपचारिक शिक्षा होने के बावजूद व्यावहारिक कौशल और लगन से बड़ा कृषि व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है। यह मॉडल अन्य बेरोजगार युवाओं को पलायन करने के बजाय स्थानीय स्तर पर उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
- **वित्तीय सुरक्षा:** रोजाना 100 किलोग्राम दूध की बिक्री से नियमित दैनिक नकदी प्रवाह मिलता है जो अप्रत्याशित खेती संकटों से सुरक्षा देता है। बेहतर नस्ल के मवेशी खुद में एक मूल्यवान परिसंपत्ति बन जाते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
अरविंद कुमार की सफलता उनकी शुरुआती लगन और समय पर सरकारी सहायता मिलने के मेल से संभव हुई।

- **सीमित विकल्पों के बीच स्वरोजगार:** आठवीं तक की पढ़ाई के चलते औपचारिक नौकरियों के अवसर सीमित थे, जिसके कारण अरविंद ने अपने दम पर स्थानीय व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने छोटे स्तर पर 2 गायों से प्रयोग शुरू कर जोखिम को नियंत्रित रखा।
- **संस्थागत सहायता की समय पर उपलब्धता:** एक साल तक जमीनी अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने जिला पशुपालन विभाग की गव्य विकास योजना का लाभ उठाया। इस योजना के तहत मिले समर्थन ने उनके पशुधन को 2 से बढ़ाकर 15 तक पहुंचाने में वित्तीय मदद दी।
- **उच्च गुणवत्ता वाली नस्लों पर ध्यान:** अरविंद ने साधारण पशुओं के बजाय उन्नत नस्ल की गायों को प्राथमिकता दी, जिनमें से कुछ की कीमत 1 लाख रुपये से अधिक है। इस निर्णय ने प्रति पशु दूध उत्पादकता को अधिकतम किया और दैनिक उत्पादन 100 किलो के पार पहुंचा दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. अरविंद कुमार कहां के रहने वाले हैं और उन्होंने व्यवसाय की शुरुआत कब की?
अरविंद कुमार बिहार के जहानाबाद जिले के घोसी प्रखंड स्थित साहोबिगहा ज्ञानगढ़ मठ गांव के निवासी हैं और उन्होंने 2024 में 2 गायों से डेयरी की शुरुआत की।

### 2. अरविंद का डेयरी फार्म 2 गायों से 15 गायों तक कैसे पहुंचा?
लगभग एक साल की मेहनत के बाद उन्होंने जिला पशुपालन कार्यालय के गव्य विकास प्रभाग की सरकारी योजना के तहत आवेदन किया, जिसके जरिए उनका फार्म 15 गायों तक विस्तारित हुआ।

### 3. वर्तमान में उनके फार्म से रोजाना कितना दूध बिकता है?
उनके डेयरी फार्म से हर दिन 100 किलोग्राम यानी 1 क्विंटल से अधिक दूध की आपूर्ति की जाती है।

### 4. अरविंद के पास मौजूद गायों की अनुमानित कीमत क्या है?
उनके पास कई अच्छी नस्ल की गायें हैं, जिनमें से एक-दो गायों की कीमत 1 लाख रुपये से भी अधिक है।

## प्रेरणा और सबक
कम संसाधनों और सीमित पढ़ाई के बावजूद दृढ़ संकल्प से खुद का व्यवसाय खड़ा करने की प्रेरणा इस कहानी से मिलती है।

- **शुरुआत छोटी, दृष्टि बड़ी:** संसाधनों की कमी होने पर भी छोटे स्तर पर काम शुरू करें और धीरे-धीरे अनुभव बढ़ाकर व्यवसाय को विस्तार दें।
- **सरकारी योजनाओं की जानकारी रखें:** अपने क्षेत्र और व्यवसाय से संबंधित सरकारी योजनाओं और अनुदानों की सक्रिय रूप से खोज करें और सही प्रक्रिया से उनका लाभ उठाएं।
- **कठिनाइयों में न मानें हार:** औपचारिक शिक्षा कम होने का यह मतलब नहीं कि आप सफल उद्यमी नहीं बन सकते; व्यावहारिक मेहनत और सीखने की इच्छा सबसे बड़ी ताकत है।
- **पलायन के बजाय स्थानीय समाधान:** बड़े शहरों की ओर भागने के बजाय अपने गांव और आसपास के संसाधनों में ही संभावनाओं की तलाश करें।

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