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  "type": "article",
  "title": "जहानाबाद के इस किसान ने अपने तालाब को बना दिया हाई-टेक किला, एक ही जमीन से कर रहे पांच तरह की कमाई",
  "summary": "बिहार के जहानाबाद में एक किसान ने पारंपरिक खेती छोड़कर अपनी एक एकड़ जमीन पर हाई-टेक इंटीग्रेटेड फिश फार्म तैयार किया है। 16 सीसीटीवी कैमरों की सुरक्षा वाले इस प्रोजेक्ट में मछली, झींगा, बकरी और मुर्गी पालन समेत पांच व्यवसाय एक साथ किए जा रहे हैं।",
  "content": "भारत के ग्रामीण इलाकों में अब रोजगार और आजीविका के साधन तेजी से बदल रहे हैं। केवल पारंपरिक खेती-बाड़ी पर निर्भर रहने के बजाय किसान अब नई और आधुनिक तकनीकों की ओर रुख कर रहे हैं। बिहार के जहानाबाद जिले में भी यह सकारात्मक बदलाव साफ तौर पर नजर आने लगा है, जहां मत्स्य पालन एक बड़े और मुनाफे वाले व्यवसाय का रूप ले चुका है। जिले के बहुत से किसानों का यह स्पष्ट मानना है कि पुरानी कृषि पद्धतियों से जितना आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता, उससे कहीं ज्यादा मुनाफा अब आधुनिक तरीके से मछली पालने में हो रहा है। यही मुख्य कारण है कि हर वर्ग के लोग इस व्यवसाय से जुड़ रहे हैं। इसी क्रम में जहानाबाद के मखदुमपुर इलाके में रहने वाले किसान देव शरण प्रसाद ने इलाके में एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़ते हुए एक पूरी तरह से आधुनिक और हाई-टेक फिश फार्म की शुरुआत की है। वह करीब एक एकड़ और 14 डेसिमल के विशाल भूभाग में वैज्ञानिक ढंग से मत्स्य पालन का कार्य कर रहे हैं, जो पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।\n\nआंध्र प्रदेश के अनुभव ने दिखाई राह\nदेव शरण के इस अनूठे सफर की कहानी काफी दिलचस्प है। इस क्षेत्र में आने से पहले वह काम के सिलसिले में आंध्र प्रदेश में रहा करते थे। वहां काम करने के दौरान उनका सामना पहली बार इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग यानी एकीकृत मत्स्य पालन की अत्याधुनिक तकनीक से हुआ। उन्होंने वहां देखा कि कैसे किसान एक ही जगह पर कई तरह के काम करके भारी मुनाफा कमा रहे हैं। इस मॉडल ने उन्हें इतनी गहराई से प्रभावित किया कि उन्होंने अपने गृह राज्य बिहार लौटकर इसे अपनी जमीन पर उतारने का पक्का इरादा कर लिया। आज से लगभग तीन साल पहले उन्होंने इस योजना पर काम शुरू किया और अपनी जमीन पर मछली पालन के लिए एक बड़े तालाब का निर्माण करवाया। मौजूदा समय में वह इस आधुनिक तालाब में चार अलग-अलग प्रकार की मछलियों का सफलतापूर्वक पालन कर रहे हैं। इसके अलावा, उनकी इस लगन को देखते हुए जिले स्तर पर उनका चयन विशेष रूप से झींगा पालन के लिए भी किया गया है। देव शरण ने बताया कि वह इसी वर्ष से अपने फार्म में झींगा का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर शुरू करने जा रहे हैं।\n\nकड़ी सुरक्षा के लिए कैमरों का पहरा\nदेव शरण का यह आधुनिक फार्म गांव की आबादी से दूर एक सुनसान इलाके में स्थित है। उन्होंने अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को खड़ा करने में अब तक 10 लाख रुपये से ज्यादा की पूंजी का निवेश किया है। चूंकि यह फार्म पूरी तरह से हाई-टेक है और इसमें काफी पैसा लगा है, इसलिए इसकी सुरक्षा उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। इसे किसी सुरक्षित लॉकर की तरह बनाने के लिए उन्होंने कड़ी डिजिटल निगरानी की व्यवस्था की है। सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए अब तक फार्म के चारों ओर 5 CCTV कैमरे इंस्टॉल करवाए जा चुके हैं। हालांकि, उनका अंतिम लक्ष्य पूरे परिसर में कुल 16 CCTV कैमरे लगाने का है ताकि फार्म के हर कोने पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि बाकी बचे 11 कैमरे भी खरीद कर फार्म पर रख लिए गए हैं। जल्द ही जैसे ही झींगा और मुर्गी पालन की नई यूनिट्स का काम विधिवत शुरू होगा, सुरक्षा ग्रिड को पूरा करते हुए उन सभी कैमरों को भी चालू कर दिया जाएगा।\n\nएक ही जमीन पर कई तरह के व्यवसाय\nइस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी एकीकृत या इंटीग्रेटेड प्रकृति है। देव शरण इसे महज एक मछली पालन केंद्र नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड मॉडर्न फार्म मानते हैं। वह अपनी इस डेढ़ एकड़ से भी कम जमीन पर एक साथ पांच प्रकार के व्यवसाय शुरू करने की विस्तृत योजना पर काम कर रहे हैं। इस बहुआयामी फार्म में मछली और झींगा पालन के अलावा बकरी, गाय, मुर्गी और बटेर पालने का काम भी शामिल है। उनका तर्क है कि अगर किसान एक खेत में केवल एक ही तरह की फसल उगाता है या एक ही काम करता है, तो उसे सिर्फ एक ही माध्यम से आमदनी होती है। लेकिन, उन्होंने अपनी जमीन को एक मल्टीपल इनकम स्रोत में बदल दिया है। इस नई व्यवस्था से उन्हें पूरी उम्मीद है कि भविष्य में उनके पास पांच अलग-अलग तरफ से कमाई के रास्ते खुलेंगे। यह तरीका न केवल जोखिम को कम करता है, बल्कि मुनाफे की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा देता है।\n\nनई सोच से मिलती है सफलता और पहचान\nदेव शरण की सोच और उनके काम करने का तरीका उन्हें बाकी लोगों से बिल्कुल अलग खड़ा करता है। अपने इस हाई-टेक फार्मिंग के मुख्य उद्देश्य पर रोशनी डालते हुए वह कहते हैं कि उनका लक्ष्य सिर्फ मछलियां पालकर पैसे कमाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनूठा उद्योग स्थापित करना है जो इलाके के लिए एक मिसाल बने। उनका स्पष्ट मानना है कि अगर वह भी बाकी लोगों की तरह एक ही घिसी-पिटी चाल चलते और उसी भीड़ का हिस्सा बन जाते, तो उनकी कमाई भी एक आम किसान जितनी ही सीमित रह जाती। जब आप कुछ अलग और नया करते हैं, तो आपकी पहचान भी विशेष होती है और आपकी आमदनी भी सामान्य से काफी अधिक होती है। अपने इसी सफल अनुभव के आधार पर वह अन्य सभी किसानों से यह अपील करते हैं कि वे चाहे किसी भी क्षेत्र या पेशे में काम करें, लेकिन उनका काम करने का तरीका हमेशा थोड़ा हटकर होना चाहिए। जब आप लीक से हटकर कुछ नया करने का साहस जुटाते हैं, तभी आपको समाज में दौलत और शोहरत दोनों एक साथ मिल सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• किसानों के लिए: यह मॉडल दिखाता है कि सीमित जमीन पर वैज्ञानिक तरीके से कई व्यवसाय एक साथ करके भारी मुनाफा कैसे कमाया जा सकता है।\n• ग्रामीण अर्थव्यवस्था में: पारंपरिक खेती के बजाय हाई-टेक फार्मिंग और सुरक्षा तकनीकों (CCTV) का इस्तेमाल गांवों में नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा कर रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. देव शरण प्रसाद का हाई-टेक फिश फार्म कहां स्थित है?\nउनका यह आधुनिक फिश फार्म बिहार के जहानाबाद जिले के मखदुमपुर इलाके में स्थित है।\n\n2. इस फिश फार्म की सुरक्षा के लिए कितने कैमरे लगाए जा रहे हैं?\nसुनसान इलाके में होने के कारण फार्म की सुरक्षा के लिए कुल 16 CCTV कैमरे लगाने की योजना है, जिनमें से 5 इंस्टॉल किए जा चुके हैं।\n\n3. देव शरण ने इस प्रोजेक्ट में अब तक कितना पैसा लगाया है?\nउन्होंने अपने इस इंटीग्रेटेड फार्मिंग प्रोजेक्ट में अब तक लगभग 10 लाख रुपये का निवेश किया है।\n\n4. इस इंटीग्रेटेड फार्म में कौन-कौन से व्यवसाय शामिल हैं?\nइस फार्म में मछली और झींगा पालन के साथ-साथ बकरी, गाय, मुर्गी और बटेर पालने की योजना शामिल है।\n\n5. फार्म के लिए जमीन का क्षेत्रफल कितना है?\nयह पूरा हाई-टेक कृषि प्रोजेक्ट करीब एक एकड़ और 14 डेसिमल जमीन पर फैला हुआ है।\n\nप्रेरणा और सबक\n• जोखिम लेने की हिम्मत: देव शरण ने पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने का जोखिम उठाया, जो उनकी सफलता का मूल कारण बना।\n• तकनीक का सही इस्तेमाल: दूरदराज के इलाके में भी भारी निवेश की सुरक्षा के लिए CCTV जैसी तकनीक का स्मार्ट उपयोग करना एक बड़ी सीख है।\n• एक साथ कई काम (मल्टी-टास्किंग): सिर्फ एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय, जमीन के एक छोटे से टुकड़े पर पांच अलग-अलग व्यवसाय स्थापित करके उन्होंने आय के कई रास्ते खोले।\n• सीखने की ललक: दूसरे राज्य (आंध्र प्रदेश) में काम करते हुए वहां की सफल तकनीकों को सीखना और उसे अपने गांव में लागू करना उनकी दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।",
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  "publishedAt": "2026-07-20",
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