# जहानाबाद में रेखा देवी की अनोखी पहल: दारोगा की पत्नी 25 सालों से ग्रामीण महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर

> जहानाबाद के सलेमपुर गांव की रहने वाली बावन वर्षीय रेखा देवी पिछले 25 सालों से ग्रामीण महिलाओं को मुफ्त में सिलाई सिखा रही हैं। दारोगा की पत्नी होने के कारण उन्हें कोई आर्थिक समस्या नहीं है, लेकिन वे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर परिवारों को मजबूत करने के मिशन पर पूरे समर्पण के साथ काम कर रही हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-07-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/jehanabad-men-rekha-devi-ki-anokhi-pahala-daroga-ki-patni-25-salon-se-gramina-mahilaon-ko-bana-rahin-atmanirbhara-9752 · **Language:** Hindi
**Tags:** रेखा देवी, जहानाबाद न्यूज़, महिला सशक्तिकरण, स्किल डेवलपमेंट, मुफ्त सिलाई ट्रेनिंग, बिहार की प्रेरक कहानियां, सलेमपुर गांव

आमतौर पर जब घर में आर्थिक रूप से पूरी स्थिरता होती है, तो लोग एक आरामदायक और तनावमुक्त जीवन जीना पसंद करते हैं। लेकिन बावन साल की रेखा देवी ने अपने लिए एक बिल्कुल अलग और प्रेरणादायक रास्ता चुना है। जहानाबाद जिले के रतनी प्रखंड स्थित सलेमपुर गांव की रहने वाली रेखा देवी के पति पुलिस में दारोगा हैं, जिस कारण उनके परिवार को कभी भी पैसों की तंगी या किसी बड़े आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ा। अधिकांश लोग ऐसी सुविधाजनक स्थिति में शायद कोई काम न करें और घर की सुख-सुविधाओं का आनंद लें, लेकिन रेखा देवी की सोच इससे काफी अलग है। वे मानती हैं कि उनकी तरह समाज की हर महिला को आत्मनिर्भर होना चाहिए और इसके लिए वे बिना किसी स्वार्थ के काम कर रही हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने पिछले पच्चीस वर्षों से महिलाओं को मुफ्त में सिलाई सिखाने का जिम्मा उठाया हुआ है और वे दिन-रात इस काम में जुटी रहती हैं, ताकि ग्रामीण महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

## सुख-सुविधाओं से परे एक नेक मकसद

रेखा देवी का यह लंबा सफर महिलाओं की स्थिति के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता और समाज को कुछ वापस देने की इच्छा से उपजा है। चूंकि उनके पति एक सरकारी नौकरी में हैं, इसलिए उन पर आजीविका कमाने या घर चलाने का कोई भी दबाव नहीं था। अपने पति की नौकरी और उनकी ड्यूटी के दौरान लगभग बीस वर्षों तक वे उनके साथ विभिन्न जगहों पर रहीं। इसी दौरान उनके मन में यह विचार आया कि सिर्फ घर बैठे रहने के बजाय कुछ ऐसा किया जाए जिससे दूसरों का भला हो सके और समाज में सकारात्मक बदलाव आए। उन्होंने तय किया कि वे पहले खुद कोई उपयोगी हुनर सीखेंगी और फिर उसे अन्य जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचाएंगी। शुरुआत में उन्होंने खुद सिलाई का प्रशिक्षण लिया और कुछ दिनों तक इसका गहन अभ्यास किया। जब उन्हें इस काम में पूरी महारत हासिल हो गई, तब उन्होंने महिलाओं को इसके गुर सिखाने का दृढ़ फैसला किया, जिसने न सिर्फ उनके बल्कि सैकड़ों महिलाओं के जीवन को एक नई दिशा दे दी।

## मुजफ्फरपुर से शुरू हुआ बदलाव का सफर

पूरी तरह से सिलाई सीखने के बाद रेखा देवी ने मुजफ्फरपुर शहर में रहते हुए अपने इस महत्वपूर्ण मिशन को हकीकत में बदलना शुरू किया। उस शहर में बिताए गए करीब पंद्रह सालों के दौरान उन्होंने दो सौ पचास से अधिक महिलाओं को बिल्कुल मुफ्त में सिलाई की ट्रेनिंग दी। उनकी इस अनूठी पहल ने उन महिलाओं के लिए रोजगार और सम्मान के नए दरवाजे खोल दिए, जो अपनी खराब आर्थिक स्थिति के कारण महंगे कोर्स नहीं कर सकती थीं। बिना किसी शुल्क के सिखाए गए इस हुनर ने कई साधारण और घरेलू महिलाओं को एक कुशल कारीगर बना दिया, जिससे वे कपड़े सिलकर अपनी कमाई करने लगीं। मुजफ्फरपुर में मिली इस शुरुआती सफलता ने रेखा देवी के आत्मविश्वास को और भी अधिक मजबूत कर दिया और उन्हें यह अहसास दिलाया कि उनका यह निस्वार्थ प्रयास कितनी बड़ी संख्या में महिलाओं का जीवन हमेशा के लिए बदल सकता है।

## अपने पैतृक गांव में हुनर की पाठशाला

मुजफ्फरपुर के बाद जब रेखा देवी वापस जहानाबाद स्थित अपने पैतृक गांव सलेमपुर लौटीं, तो उन्होंने अपने इस अभियान को रुकने नहीं दिया। उन्होंने गहराई से महसूस किया कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को इस तरह के व्यावसायिक प्रशिक्षण की और भी ज्यादा सख्त जरूरत है, क्योंकि वहां सीखने के अवसर बेहद सीमित होते हैं। ऐसे में उन्होंने घर पर पहले से रखी सिलाई मशीनों का बेहतरीन उपयोग करते हुए आसपास की ग्रामीण महिलाओं को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। लगभग दो महीने पहले ही उन्होंने गांव में विधिवत रूप से इसकी शुरुआत की है और इसे महिलाओं की दिनचर्या के हिसाब से पूरी तरह व्यवस्थित किया है। फिलहाल वे हर दिन दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक लगातार एक-एक घंटे के तीन अलग-अलग बैच चलाती हैं। इन बैचों में इस समय करीब पचास महिलाएं नियमित रूप से सिलाई सीख रही हैं। उनके सिखाने का तरीका और समर्पण इतना प्रभावी है कि अब पांच किलोमीटर दूर के गांवों से भी महिलाएं सफर करके उनके पास सिर्फ सिलाई सीखने आ रही हैं। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इलाके में महिलाओं के लिए हुनर सीखने के कितने कम विकल्प मौजूद हैं और रेखा देवी का यह मुफ्त प्रशिक्षण उनके लिए कितना बड़ा वरदान साबित हो रहा है।

## परिवार के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने की सोच

इस पूरे अभियान को दशकों तक बिना रुके चलाने के पीछे रेखा देवी की एक बेहद स्पष्ट और व्यावहारिक सोच है। उनका दृढ़ता से मानना है कि जब घर का सारा खर्च केवल एक पुरुष की कमाई पर निर्भर होता है, तो बढ़ती महंगाई के दौर में कई बार यह परिवार पर एक भारी आर्थिक बोझ की तरह महसूस होता है। लेकिन अगर परिवार की महिलाएं भी कोई उपयोगी हुनर सीख लें और अपने पति या परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग करने लगें, तो वे परिवार के लिए एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय सहारे के रूप में उभरती हैं। रेखा देवी स्पष्ट रूप से कहती हैं कि वे शुरू से ही समाज की हर एक नारी को पूरी तरह सशक्त बनाने का मिशन लेकर चल रही हैं। उनके अनुसार, वे पिछले पच्चीस सालों से बिना थके यह काम कर रही हैं और अब तक लगभग पांच सौ महिलाओं को सिलाई की ट्रेनिंग देकर उन्हें उनके पैरों पर खड़ा कर चुकी हैं। उनका लक्ष्य यहीं नहीं रुकता; उन्होंने गांव की महिलाओं के लिए आगे और भी बड़े लक्ष्य तय किए हैं। उनका यह निस्वार्थ और निरंतर प्रयास यह साबित करता है कि सच्ची संपन्नता केवल धन में नहीं, बल्कि दूसरों को आत्मनिर्भर बनाने में है।

## सवाल-जवाब

### 1. रेखा देवी कौन हैं और वे कहां की रहने वाली हैं?
52 वर्षीय रेखा देवी जहानाबाद जिले के रतनी प्रखंड के सलेमपुर गांव की निवासी हैं और उनके पति एक पुलिस दारोगा हैं।

### 2. वे पिछले 25 सालों से समाज के लिए कौन सा काम कर रही हैं?
वे पिछले 25 वर्षों से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बिना किसी स्वार्थ के मुफ्त में सिलाई का प्रशिक्षण दे रही हैं।

### 3. मुजफ्फरपुर में रहते हुए उन्होंने कितनी महिलाओं को सिलाई सिखाई?
मुजफ्फरपुर शहर में 15 साल बिताने के दौरान उन्होंने 250 महिलाओं को बिना कोई शुल्क लिए सिलाई की ट्रेनिंग देकर हुनरमंद बनाया।

### 4. सलेमपुर गांव में उनके सिलाई प्रशिक्षण का वर्तमान समय क्या है?
वे वर्तमान में अपने गांव में दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक एक-एक घंटे के तीन बैच चलाती हैं, जिनमें करीब 50 महिलाएं सिलाई सीख रही हैं।

## प्रेरणा और सबक
- **सुविधाओं से बड़ा है उद्देश्य:** जीवन में आर्थिक संपन्नता को कभी भी निष्क्रियता का बहाना नहीं बनाना चाहिए। रेखा देवी ने साबित किया है कि सच्चा संतोष अपने संसाधनों और समय का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए करने में है।
- **छोटी शुरुआत, बड़ा असर:** समाज में गहरा बदलाव लाने के लिए किसी बड़ी संस्था या भारी निवेश की जरूरत नहीं होती। घर की सिलाई मशीनों का उपयोग करके एक अकेली महिला ने सैकड़ों जिंदगियां बदल दीं।
- **आर्थिक आत्मनिर्भरता की अहमियत:** जब महिलाएं कोई हुनर सीखकर परिवार में आर्थिक रूप से सहयोग करने लगती हैं, तो पूरा परिवार कहीं अधिक मजबूत और सुरक्षित हो जाता है।

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