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  "title": "झारखंड के इस इंजीनियर ने ठुकराई विदेश की शानदार नौकरी, आज अपने गांव में कपड़े बनाकर यूरोप को कर रहे निर्यात",
  "summary": "मैनचेस्टर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर काम कर चुके नागेश्वर चौधरी ने वापस लौटकर झारखंड के कोडरमा में अपना खुद का कपड़ों का ब्रांड 'डेगन' शुरू किया है. आज यह लोकल स्टार्टअप न सिर्फ स्थानीय कारीगरों को रोजगार दे रहा है, बल्कि इनके बनाए कपड़े ब्रिटेन के बाजारों में भी निर्यात किए जा रहे हैं.",
  "content": "आमतौर पर युवा वर्ग एक शानदार भविष्य की तलाश में विदेशी धरती का चुनाव करता है. बड़े शहरों और दूसरे देशों में बसना आज के दौर में एक आम चलन बन गया है. मगर कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया निवासी नागेश्वर चौधरी की कहानी बिल्कुल अलग और प्रेरणादायक है. उन्होंने विदेश की एक बेहद आकर्षक कॉरपोरेट नौकरी को हमेशा के लिए छोड़कर अपने ही होमटाउन में एक गारमेंट फैक्ट्री लगाने का साहसिक फैसला किया. आज उनका यह बिजनेस न सिर्फ दर्जनों स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार का बड़ा जरिया बन चुका है, बल्कि यहां तैयार किए गए कपड़े विदेशों में भी खासी धूम मचा रहे हैं. उनका यह अहम कदम जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने के स्वरोजगार का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है.\n\nटेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले वह पूरी तरह से एक दिग्गज आईटी प्रोफेशनल थे. साल 2019 में अपनी एमसीए की उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपने करियर को उड़ान देने के लिए यूनाइटेड किंगडम का रुख किया. वहां उन्हें मैनचेस्टर स्थित मशहूर बहुराष्ट्रीय कंपनी बॉश में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम करने का शानदार मौका मिला. इस अहम पद पर रहते हुए वह मुख्य रूप से 3डी एनीमेशन डिजाइनिंग से जुड़ी हुई जटिल कोडिंग का सारा काम संभालते थे. एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के बेहद प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करते हुए उन्होंने नई तकनीक और बेहतरीन बिजनेस मैनेजमेंट की गहरी समझ विकसित कर ली थी.\n\nसॉफ्टवेयर की नौकरी से कपड़ों के कारोबार तक\n\nविदेशी सरजमीं पर लगभग 13 साल का लंबा वक्त गुजारने के बाद उनके मन में अपने वतन लौटने की इच्छा तेजी से जागृत हुई. उन्हें यह एहसास हुआ कि अगर वह अपने इतने सालों के शानदार कॉरपोरेट अनुभव का सीधा इस्तेमाल अपने ही देश और शहर के विकास में करें, तो कई जरूरतमंद परिवारों की आर्थिक स्थिति को स्थायी रूप से सुधारा जा सकता है. इसी सामाजिक सोच और अपने पिछड़े क्षेत्र के प्रति गहरे लगाव के कारण उन्होंने विदेश की तमाम सुख-सुविधाएं छोड़ दीं और साल 2022 में हमेशा के लिए भारत वापस आ गए.\n\nस्वदेश लौटने के ठीक एक साल बाद उन्होंने अपनी उद्यमशीलता की असल शुरुआत की. साल 2023 में उन्होंने कपड़ों के निर्माण का अपना महत्वाकांक्षी स्टार्टअप शुरू किया. इस खास ब्रांड का नाम उन्होंने अपने प्यारे दादाजी की याद में 'डेगन' रखा. किसी भी नए और उभरते हुए कारोबार की तरह शुरुआती दौर में उनके पास संसाधनों और मशीनों की काफी कमी थी. हालांकि, उन्होंने अपने तैयार उत्पादों की क्वालिटी से कभी कोई समझौता नहीं किया, जिसके चलते बाजार में ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ता गया और उनका यह बिजनेस तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ता गया.\n\nस्थानीय कारीगरों को मिल रहा बेहतरीन मंच\n\nइस नई गारमेंट फैक्ट्री का मुख्य उद्देश्य सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. फिलहाल इस छोटे से कारखाने में करीब 20 लोगों को सम्मानजनक और स्थायी रोजगार मिल रहा है. झुमरी तिलैया और उसके आसपास के छोटे गांवों से आने वाले ये मेहनती कारीगर पूरी लगन और बारीकी से इन कपड़ों की सिलाई करते हैं. नागेश्वर इस बात पर पूरा जोर देते हैं कि अगर ग्रामीण प्रतिभाओं को सही प्रशिक्षण और एक अच्छा मंच प्रदान किया जाए, तो वे बेहतरीन गुणवत्ता के मामले में दुनिया की किसी भी बड़ी विदेशी कंपनी को कड़ी टक्कर देने का दम रखते हैं.\n\nवक्त के साथ उनकी फैक्ट्री में बनने वाले कपड़ों की रेंज और वेरायटी में भी काफी इजाफा हुआ है. आज यह तेजी से उभरता स्टार्टअप बड़े पैमाने पर स्कूली बच्चों की यूनिफॉर्म, आम टी-शर्ट, ट्राउजर और शानदार एक्टिव वियर का निर्माण कर रहा है. इसके अलावा कड़ाके की सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए यहां बेहतरीन क्वालिटी वाले विंटर जैकेट और विंटर ट्राउजर भी बनाए जा रहे हैं. बेहतरीन सिलाई, बेहद आधुनिक डिजाइन और काफी आरामदायक फैब्रिक होने की वजह से आम ग्राहक इन कपड़ों को हाथोंहाथ खरीद रहे हैं.\n\nयूके के बाजारों में छाई झारखंड की शानदार कारीगरी\n\nइस देसी और ग्रामीण स्टार्टअप की सबसे बड़ी कामयाबी इसका अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी एक मजबूत जगह बनाना है. अब डेगन ब्रांड के कपड़ों की बढ़ती हुई मांग केवल भारतीय बाजारों तक ही सीमित नहीं रह गई है. झुमरी तिलैया के इस छोटे से कारखाने में सूती टी-शर्ट के साथ-साथ शानदार विंटर जैकेट और विंटर ट्राउजर तैयार किए जा रहे हैं. इन सभी उच्च कोटि के कपड़ों का सीधा निर्यात अब यूके स्थित बड़े मैनचेस्टर शहर में किया जा रहा है.\n\nयह अपने आप में एक बेहद दिलचस्प संयोग है कि नागेश्वर चौधरी कभी जिस शहर में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करते थे, आज उसी शहर में उनके बनाए हुए कपड़े बड़े चाव से बेचे जा रहे हैं. मैनचेस्टर के विदेशी ग्राहक इन आकर्षक कपड़ों की शानदार फिनिशिंग और प्रीमियम क्वालिटी की जमकर तारीफ कर रहे हैं. अपने इस अनोखे और प्रेरणादायक सफर के जरिए उन्होंने दुनिया को यह साबित कर दिया है कि अगर मन में मजबूत इरादा हो तो देश के एक छोटे से कस्बे से भी ग्लोबल स्तर का सफल बिजनेस आसानी से खड़ा किया जा सकता है.\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह स्टार्टअप साबित करता है कि विदेशी बाजारों में सफलता पाने के लिए बड़े महानगरों में होना जरूरी नहीं है; बेहतरीन क्वालिटी वाला उत्पाद देश के किसी भी हिस्से से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच सकता है.\n• झारखंड में: कोडरमा और झुमरी तिलैया के स्थानीय कारीगरों को अपने ही शहर में रोजगार और कौशल विकास के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डेगन (Degan) कपड़ों का ब्रांड किसने शुरू किया है?\nझारखंड के रहने वाले पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर नागेश्वर चौधरी ने विदेश से लौटने के बाद डेगन कपड़ों का ब्रांड शुरू किया है.\n\n2. डेगन ब्रांड के कपड़े भारत में कहां बनाए जाते हैं?\nइन कपड़ों की मैन्युफैक्चरिंग कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया में स्थित एक कारखाने में की जाती है.\n\n3. इस स्टार्टअप के जरिए कितने लोगों को रोजगार मिला है?\nफिलहाल इस कारखाने में झुमरी तिलैया और आसपास के गांवों के करीब 20 स्थानीय कारीगरों को रोजगार मिला हुआ है.\n\n4. कोडरमा में बने इन कपड़ों का निर्यात किस देश में हो रहा है?\nकारखाने में तैयार की गई कॉटन टी-शर्ट और विंटर जैकेट जैसी चीजों का निर्यात यूनाइटेड किंगडम (UK) के मैनचेस्टर शहर में किया जा रहा है.\n\nप्रेरणा और सबक\n• अपनी जड़ों से जुड़ाव: विदेश में एक बेहतरीन कॉरपोरेट करियर होने के बावजूद अपने लोगों के लिए कुछ करने की सोच ही असली सफलता की नींव रखती है.\n• क्वालिटी पर जोर: सीमित संसाधनों से शुरुआत करने के बावजूद अगर उत्पाद की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की हो, तो बाजार खुद-ब-खुद मिल जाता है.\n• स्थानीय प्रतिभा पर भरोसा: छोटे शहरों के कारीगरों को सही अवसर और मंच देकर उन्हें ग्लोबल स्तर के काम के लिए तैयार किया जा सकता है.",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-21",
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    "बिजनेस आइडिया"
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