# झारखंड की 15 वर्षीय अजेता श्री कनौजिया बनीं 'गीता गर्ल', एक सांस में श्लोक और वंदे मातरम गाकर जीता लोगों का दिल

> जमशेदपुर की 15 वर्षीय छात्रा अजेता श्री कनौजिया अपनी अद्भुत श्वास नियंत्रण कला से भगवद्गीता के श्लोक और वंदे मातरम गाकर 'गीता गर्ल' के रूप में प्रसिद्ध हो चुकी हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-08-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/jharkhand-ki-15-varshiya-ajeta-shree-kanojia-banin-gita-girl-eka-sansa-men-shloka-aura-vande-mataram-gakara-jita-logon-ka-dila-22146 · **Language:** Hindi
**Tags:** अजेता श्री कनौजिया, गीता गर्ल, जमशेदपुर न्यूज़, भगवद्गीता, वंदे मातरम, चिन्मया विद्यालय, झारखंड न्यूज़

झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में 15 वर्ष की एक छात्रा अपनी अद्भुत कला और सांस्कृतिक निष्ठा की वजह से हर तरफ चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। चिन्मया विद्यालय में पढ़ने वाली अजेता श्री कनौजिया को लोग प्यार से 'गीता गर्ल' कहकर बुलाते हैं। अजेता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे बिना रुके, एक ही सांस में श्रीमद्भगवद्गीता के क्लिष्ट श्लोकों का उच्चारण कर लेती हैं और उसी प्रवाह में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का गायन भी करती हैं। उनकी यह अनूठी क्षमता सुनने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है और लोग उनकी प्रतिभा की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं।

## मंच पर प्रस्तुति और जन प्रतिनिधियों द्वारा सराहना
पूर्वी सिंहभूम जिले में आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक और शासकीय समारोहों में अजेता की प्रस्तुतियों की विशेष मांग रहती है। जब भी वे मंच संभालती हैं, उनका प्रभावशाली स्वर और श्वास नियंत्रण पूरे परिसर को भक्तिमय एवं देशभक्ति के माहौल से सराबोर कर देता है। उनकी इस प्रतिभा को देखने के बाद क्षेत्र के कई प्रमुख जन प्रतिनिधि भी उनकी सराहना कर चुके हैं। कार्यक्रमों के दौरान उपस्थित रहने वाले मंत्री, विधायक और सांसद अजेता की कला और उनके आत्मविश्वास से बेहद प्रभावित हुए हैं और उन्होंने सार्वजनिक रूप से उनकी प्रतिभा को सराहा है। कम उम्र में भारतीय दर्शन और देशभक्ति का यह संगम उन्हें अपनी उम्र के अन्य बच्चों से अलग पहचान दिलाता है।

## संस्कार, परंपरा और आधुनिकता का संतुलन
आज के दौर में जहां अधिकांश बच्चे और युवा अपना काफी समय सोशल मीडिया और डिजिटल उपकरणों पर बिताते हैं, वहीं अजेता अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विधाओं को निखारने में जुटी हुई हैं। उनका मानना है कि जीवन में आधुनिक तकनीकों को अपनाना जितना जरूरी है, उतना ही अपनी जड़ों, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जुड़े रहना भी आवश्यक है। वे अपनी इस विशिष्ट कला को लगातार अभ्यास के जरिए और अधिक परिपक्व बना रही हैं।

## माता-पिता का मार्गदर्शन और सांस्कृतिक जुड़ाव
अजेता अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उनका कहना है कि उनके माता-पिता ने बचपन से ही उन्हें भारतीय संस्कृति, संस्कारों और जीवन के वास्तविक सिद्धांतों की शिक्षा दी। उन्होंने घर के माहौल को ऐसा बनाए रखा, जिससे अजेता का झुकाव स्वाभाविक रूप से सनातन ज्ञान और देशभक्ति की ओर हुआ। माता-पिता के इसी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की बदौलत आज वे बड़े-बड़े मंचों पर बेझिझक अपनी कला का प्रदर्शन कर पा रही हैं।

## इसका आप पर असर
**पाठकों के लिए संदेश:**

- **विद्यार्थियों के लिए:** यह कहानी दर्शाती है कि अपनी रुचि और सांस्कृतिक अध्ययन में ध्यान लगाकर पढ़ाई के साथ-साथ विशेष कला को भी निखारा जा सकता है।
- **अभिभावकों के लिए:** बच्चों को शुरुआत से ही नैतिक संस्कारों और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।

## सवाल-जवाब

### 1. अजेता श्री कनौजिया को 'गीता गर्ल' क्यों कहा जाता है?
अजेता श्री कनौजिया एक ही सांस में श्रीमद्भगवद्गीता के कई श्लोक और राष्ट्रगीत वंदे मातरम बिना रुके गा सकती हैं, इसी अद्भुत प्रतिभा के कारण उन्हें 'गीता गर्ल' कहा जाता है।

### 2. अजेता श्री कनौजिया किस शहर की रहने वाली हैं और किस स्कूल में पढ़ती हैं?
वे झारखंड के जमशेदपुर शहर की रहने वाली हैं और वहां के चिन्मया विद्यालय में 15 वर्षीय छात्रा के रूप में पढ़ाई करती हैं।

### 3. अजेता की इस प्रतिभा को किन प्रमुख लोगों ने सराहा है?
पूर्वी सिंहभूम जिले के बड़े आयोजनों में शामिल होने वाले मंत्रियों, विधायकों और सांसदों जैसे कई जन प्रतिनिधियों ने उनकी प्रस्तुति की सराहना की है।

### 4. अजेता अपनी इस सफलता और संस्कारों का श्रेय किसे देती हैं?
अजेता अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं, जिन्होंने बचपन से ही उन्हें अपनी संस्कृति, संस्कारों और जीवन के मूल्यों से जोड़े रखा।

### 5. आधुनिक पीढ़ी और सोशल मीडिया के उपयोग पर अजेता के क्या विचार हैं?
अजेता का मानना है कि बच्चों को सोशल मीडिया पर अत्यधिक समय बिताने के बजाय अपनी जड़ों और संस्कारों को याद रखना चाहिए।

## प्रेरणा और सबक
**अजेता श्री कनौजिया के जीवन से मिलने वाली मुख्य प्रेरणाएं:**

- **सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव:** आधुनिकता को अपनाने के साथ-साथ अपनी परंपराओं और नैतिक मूल्यों को याद रखना व्यक्तित्व को समृद्ध बनाता है।
- **श्वास और मन का नियंत्रण:** कठिन श्लोकों को एक सांस में गाना निरंतर अभ्यास, एकाग्रता और अनुशासित जीवनशैली का परिणाम है।
- **समय का सही उपयोग:** सोशल मीडिया पर अत्यधिक समय गंवाने के बजाय अपनी रुचियों और कला को निखारने में समय लगाना सफलता दिलाता है।
- **परिवार का मार्गदर्शन:** बचपन में माता-पिता द्वारा दिए गए सही संस्कार और प्रोत्साहन बच्चे को विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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