# झारखंड में आयोजित राष्ट्रीय चेस टूर्नामेंट में चमकीं बिहार की वैष्णवी, अंडर-11 वर्ग में जीता दूसरा स्थान

> सीतामढ़ी के मिश्रौलिया गांव की सातवीं कक्षा की छात्रा वैष्णवी कुमारी ने हजारीबाग में आयोजित राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए उपविजेता का खिताब अपने नाम किया है.

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/jharkhand-men-ayojita-rashtriya-chesa-turnamenta-men-chamakin-bihar-ki-vaishnavi-andara-11-varga-men-jita-dusara-sthana-47409 · **Language:** Hindi
**Tags:** वैष्णवी कुमारी, सीतामढ़ी, शतरंज प्रतियोगिता, हजारीबाग, बिहार खेल, फिडे रेटिंग

बिहार के सीतामढ़ी जिले की उभरती हुई शतरंज खिलाड़ी वैष्णवी कुमारी ने राष्ट्रीय फलक पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है. डुमरा प्रखंड के छोटे से गांव मिश्रौलिया की रहने वाली और कक्षा 7 में पढ़ने वाली इस युवा खिलाड़ी ने झारखंड के हजारीबाग में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल कर पूरे इलाके का मान बढ़ाया है. यह मुकाबला ऑल इंडिया ओपन रैपिड फिडे रेटिंग चेस टूर्नामेंट के तहत आयोजित अटल टैलेंट हंट स्पर्धा का हिस्सा था, जिसमें उन्होंने अंडर-11 आयु वर्ग में यह प्रतिष्ठित मुकाम अपने नाम किया.

## स्कूल के खेल शिक्षक से मिली शतरंज की पहली प्रेरणा
वैष्णवी की शतरंज यात्रा की शुरुआत उनके अपने स्कूल परिसर से हुई थी. खेल के प्रति उनकी दिलचस्पी को सबसे पहले स्कूल के खेल शिक्षक ने पहचाना और उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. वैष्णवी के अनुसार, शिक्षक के उचित मार्गदर्शन और खेल की गहरी बारीकियों को समझाने के तरीके ने उनकी बुनियादी समझ को बेहद मजबूत बनाया. शुरुआती दौर में मिली पराजयों से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी गलतियों से लगातार सीख ली. खेल शैली में लगातार सुधार और बिसात पर सही चालों के अभ्यास ने उन्हें एक साधारण स्कूली खिलाड़ी से राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी के रूप में तैयार किया.

## हजारीबाग में कड़े मुकाबलों के बीच दिखाई रणनीतिक सूझबूझ
हजारीबाग में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश भर के कई राज्यों से आए शीर्ष स्तर के युवा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. इन प्रतिभागियों में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों के प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल थे, जिससे प्रत्येक राउंड में चुनौती काफी कठिन हो गई थी. प्रतियोगिता का तकनीकी स्तर कितना ऊंचा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां मार्गदर्शन के लिए ग्रैंडमास्टर और इंटरनेशनल मास्टर स्तर के दिग्गज खिलाड़ी भी मौजूद रहे.

शुरुआती दौर में पहले दिन के चार मुकाबलों के दौरान वैष्णवी को कड़े उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा. हालांकि, उन्होंने मानसिक दबाव को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया. दूसरे दिन अपनी रणनीतिक सूझबूझ, धैर्य और आक्रामक खेल का परिचय देते हुए उन्होंने जबर्दस्त वापसी की. वैष्णवी ने दूसरे दिन के अपने सभी मुकाबलों में जीत दर्ज की और देश भर से आए मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को मात देकर एडल्ट टैलेंटेड श्रेणी में उपविजेता का स्थान सुनिश्चित किया.

## स्कूल चैंपियनशिप से लेकर राष्ट्रीय मंच तक का सफर
वैष्णवी की इस यात्रा की नींव उनके घरेलू मैदान पर पड़ी थी, जहां वह पिछले दो वर्षों से लगातार अपने विद्यालय की चैंपियन रही हैं. इस मजबूत आधार के बाद उन्होंने राज्य स्तरीय स्पर्धाओं का रुख किया. राजधानी पटना में आयोजित पहली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उन्हें कड़े संघर्ष और शुरुआती चुनौतियों से जूझना पड़ा, लेकिन इस अनुभव ने उनके इरादों को कमजोर नहीं होने दिया.

इसके बाद भागलपुर और छत्तीसगढ़ के जशपुर में आयोजित चेस प्रतियोगिताओं में वैष्णवी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. वहां किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए दो-दिन लंबे और बेहद थकाऊ सफर की कठिनाइयों के बावजूद उनके संकल्प में कोई कमी नहीं आई. परिवार के निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन ने भी हर मुश्किल मोड़ पर उनके हौसले को बनाए रखा.

## सीतामढ़ी में खुशी की लहर और आगामी नेशनल गेम्स की तैयारी
इस राष्ट्रीय उपलब्धि के बाद मिश्रौलिया गांव, वैष्णवी के स्कूल और पूरे सीतामढ़ी जिले में उत्साह और गर्व का माहौल है. उनके पिता और परिवार के सदस्यों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एक सुदूर ग्रामीण अंचल से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पहचान बनाना पूरे क्षेत्र के लिए सम्मान की बात है. इस सफलता के बाद वैष्णवी का ध्यान अब आगामी नेशनल गेम्स पर केंद्रित हो गया है. वह आगामी प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए कड़ा अभ्यास कर रही हैं, जबकि स्थानीय खेल प्रशंसकों को भरोसा है कि वह आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी देश और राज्य का नाम रोशन करेंगी.

## इसका आप पर असर
ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली युवा प्रतिभाओं के लिए यह सफलता खेल के क्षेत्र में नए अवसर और प्रेरणा लेकर आई है.

- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर की रेटिंग प्रतियोगिताओं में ग्रामीण खिलाड़ियों की यह भागीदारी देश के खेल ढांचे में जमीनी प्रतिभाओं की बढ़ती मौजूदगी को रेखांकित करती है. इससे दूसरे राज्यों के स्कूलों में भी बच्चों को शतरंज जैसे बौद्धिक खेलों में करियर बनाने के लिए संस्थागत प्रोत्साहन मिलेगा.
- **बिहार और सीतामढ़ी में:** सीतामढ़ी जिले और राज्य भर के स्थानीय खेल अकादमियों में युवा छात्र-छात्राओं के लिए शतरंज के प्रति दिलचस्पी और संसाधन बढ़ने की उम्मीद है. माता-पिता और स्थानीय स्कूलों को अपनी बेटियों को पढ़ाई के साथ-साथ राष्ट्रीय खेलों की ओर अग्रसर करने के लिए नया हौसला मिलेगा.
- **युवा खिलाड़ियों के लिए:** शुरुआती हार और थकाऊ यात्राओं के बाद भी खेल में निरंतरता बनाए रखने का यह उदाहरण नए खिलाड़ियों को मानसिक मजबूती देगा. खिलाड़ी अपनी गलतियों से सीख लेकर प्रतिस्पर्धी शतरंज में अपनी रेटिंग में सुधार कर सकते हैं.
- **स्कूल स्तर की खेल नीतियों पर:** विद्यालय के खेल शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करने वाली यह उपलब्धि अन्य संस्थानों को भी योग्य खेल कोच नियुक्त करने के लिए प्रेरित करेगी. इससे जमीनी स्तर पर प्रारंभिक प्रशिक्षण व्यवस्था और अधिक प्रभावी हो सकेगी.

## ऐसा क्यों हुआ
वैष्णवी की यह राष्ट्रीय उपलब्धि स्कूल स्तर से मिले सही मार्गदर्शन, लगातार अभ्यास और खेल में हार के बाद भी धैर्यपूर्वक रणनीति बदलने की क्षमता का सीधा परिणाम है.

- **शुरुआती मार्गदर्शन और कोचिंग:** विद्यालय के खेल शिक्षक ने समय रहते वैष्णवी के रुझान को पहचाना और उन्हें खेल के बुनियादी नियमों और रणनीतिक बारीकियों से परिचित कराया. इसी शुरुआती प्रशिक्षण ने उन्हें स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार चैंपियन बनाए रखा.
- **असफलताओं से निरंतर सुधार:** पटना में आयोजित पहली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में मिली चुनौतियों और हार को उन्होंने निराशा के बजाय सीखने के अवसर में बदला. इसके बाद भागलपुर और जशपुर में खेले गए मैचों से उनके खेल में स्थिरता और आत्मविश्वास आया.
- **टूर्नामेंट के दौरान रणनीतिक वापसी:** हजारीबाग में पहले दिन के शुरुआती चार कठिन मुकाबलों में उतार-चढ़ाव झेलने के बावजूद उन्होंने मानसिक नियंत्रण बनाए रखा. दूसरे दिन अपनी चालों में सूझबूझ और आक्रामकता लाकर उन्होंने अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को मात देकर उपविजेता का खिताब जीता.

## सवाल-जवाब

### 1. वैष्णवी कुमारी कौन हैं और उन्होंने हाल ही में क्या उपलब्धि हासिल की है?
वैष्णवी कुमारी बिहार के सीतामढ़ी जिले के मिश्रौलिया गांव की रहने वाली कक्षा 7 की छात्रा हैं. उन्होंने झारखंड के हजारीबाग में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की शतरंज प्रतियोगिता के अंडर-11 वर्ग में दूसरा स्थान हासिल किया है.

### 2. हजारीबाग में आयोजित शतरंज प्रतियोगिता का पूरा नाम क्या था?
यह प्रतियोगिता 'ऑल इंडिया ओपन रैपिड फिडे रेटिंग चेस टूर्नामेंट' के अंतर्गत अटल टैलेंट हंट के रूप में आयोजित की गई थी.

### 3. वैष्णवी को शतरंज खेलने की शुरुआती प्रेरणा कहां से मिली?
उन्हें शतरंज की प्रेरणा अपने विद्यालय के खेल शिक्षक से मिली, जिन्होंने उन्हें खेल के नियम और बारीकियां समझाकर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया.

### 4. हजारीबाग प्रतियोगिता में किन-किन राज्यों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था?
इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था.

### 5. टूर्नामेंट के दौरान वैष्णवी का खेल प्रदर्शन कैसा रहा?
पहले दिन के चार कठिन मुकाबलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन दूसरे दिन वैष्णवी ने जबर्दस्त वापसी करते हुए अपने सभी मुकाबलों में जीत दर्ज की और उपविजेता बनीं.

### 6. राष्ट्रीय स्तर से पहले वैष्णवी किन प्रमुख प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी थीं?
वह दो वर्षों तक अपने स्कूल की चैंपियन रहीं और उन्होंने पटना, भागलपुर और छत्तीसगढ़ के जशपुर में आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपना अनुभव बढ़ाया.

### 7. वैष्णवी का अगला प्रमुख लक्ष्य क्या है?
वैष्णवी अब आगामी नेशनल गेम्स की तैयारियों में जुटी हैं, जहां वह बेहतर प्रदर्शन कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना चाहती हैं.

## प्रेरणा और सबक
सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय मंच पर परचम लहराने की वैष्णवी की यह यात्रा युवाओं के लिए दृढ़ संकल्प और मेहनत की बेहतरीन मिसाल है.

- **गलतियों और हार को सीखने का जरिया बनाएं:** शुरुआती मुकाबलों या पहले टूर्नामेंट में मिलने वाली असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सुधार का मार्ग खोलती है. पटना की असफलताओं से सीख लेकर ही वैष्णवी ने राष्ट्रीय स्तर तक का रास्ता तय किया.
- **सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा लक्ष्य रखें:** किसी बड़े शहर या आधुनिक सुविधाओं के अभाव को अपनी प्रगति में बाधा न बनने दें. एक छोटे गांव से निकलकर भी समर्पण और नियमित अभ्यास से देश भर के प्रतिस्पर्धियों को मात दी जा सकती है.
- **मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य और वापसी का जज्बा रखें:** हजारीबाग में पहले दिन लड़खड़ाने के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दूसरे दिन सभी मैच जीतकर शानदार वापसी की. खेल और जीवन दोनों में धैर्य ही सबसे बड़ी ताकत साबित होता है.
- **लंबी और थकाऊ यात्राओं से हौसला न खोएं:** प्रतियोगिताओं के लिए दो-दिन की कठिन यात्राओं के बावजूद वैष्णवी का संकल्प कभी नहीं डिगा. सफलता हासिल करने के लिए शारीरिक और मानसिक थकावट से पार पाना आवश्यक है.

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