# झुंझुनूं के तिरंगा मैन जगदीशप्रसाद: दिल्ली पुलिस से रिटायरमेंट के बाद समाजसेवा में झोंक दी पूरी कमाई, ऐसे मिला अनोखा नाम

> दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त होने के बाद जगदीशप्रसाद झाझड़िया ने अपनी पूरी जिंदगी समाजसेवा के नाम कर दी है। वे गांवों में तिरंगा लगवाने के साथ-साथ बुजुर्गों की सेवा करने वालों को श्रवण पुरस्कार से सम्मानित कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/jhunjhunu-ke-tiranga-man-jagdishprasad-delhi-police-se-retirement-ke-baad-samajseva-me-jhok-di-puri-kamai-aise-mila-anokha-naam-20285 · **Language:** Hindi
**Tags:** तिरिंगा मैन, श्रवण पुरस्कार, जगदीशप्रसाद झाझड़िया, झुंझुनूं न्यूज, समाजसेवा, दिल्ली पुलिस रिटायरमेंट

झुंझुनूं जिले में अपनी एक अलग ही पहचान बना चुके दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त एसआई जगदीशप्रसाद झाझड़िया इन दिनों अपने सामाजिक सरोकारों के चलते खासे चर्चा में हैं। पुलिस विभाग की नौकरी पूरी करने के बाद उन्होंने अपने जीवन का एक ही मकसद बना लिया है और वह है समाज के उत्थान और जरूरतमंदों की मदद के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर देना। वे पिछले कई वर्षों से लगातार बुजुर्गों की देखभाल, असहाय लोगों की सहायता और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से जुड़े विभिन्न कार्यों में सक्रिय रूप से अपना योगदान दे रहे हैं। बुजुर्ग माता-पिता और अपने परिजनों की सेवा करने वाले लोगों को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने अनूठी पहल करते हुए श्रवण पुरस्कार की शुरुआत की है। इस योजना के तहत ऐसे सेवाभावी लोगों को 10 ग्राम का चांदी का सिक्का और एक प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया जाता है, ताकि समाज में एक सकारात्मक संदेश जा सके।

इस अनूठे श्रवण पुरस्कार की स्थापना के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प और सोचने पर मजबूर कर देने वाली कहानी जुड़ी है। करीब नौ साल पहले जब वे अपनी पुलिस सेवा पूरी करने के बाद अपने पैतृक गांव लौटे, तो उन्होंने आसपास की युवा पीढ़ी में बुजुर्गों के प्रति लगातार कम होते सम्मान और उपेक्षा की भावना को बहुत गहराई से महसूस किया। इस तरह के बर्ताव ने उनके मन को काफी ठेस पहुंचाई और उन्होंने तभी यह दृढ़ संकल्प ले लिया कि जो लोग आज के दौर में भी अपने बीमार, बुजुर्ग या असहाय माता-पिता और परिजनों की बिना किसी स्वार्थ के पूरी निष्ठा से सेवा कर रहे हैं, उन्हें समाज के सामने लाकर सम्मानित किया जाएगा।

इसी नेक सोच को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2025 में कुल सात गांवों के सात आदर्श पुत्र और पुत्रवधुओं को इस प्रतिष्ठित श्रवण पुरस्कार से नवाजा गया था। इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष उन्होंने आठ और ऐसे समर्पित लोगों को यह सम्मान प्रदान किया है। अब जगदीशप्रसाद ने आने वाले वर्ष 2027 के लिए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत वे कुल 100 लोगों को श्रवण पुरस्कार से सम्मानित करने की योजना बना रहे हैं। उनका पूरा विश्वास है कि इस तरह के सार्वजनिक सम्मान से समाज में बुजुर्गों की सेवा के प्रति एक नई सकारात्मक सोच मजबूत होगी और आने वाली युवा पीढ़ी भी अपने माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझेगी।

हालांकि, जगदीशप्रसाद की समाजसेवा का दायरा केवल श्रवण पुरस्कार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने अन्य कई क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर काम किया है। उन्होंने वर्ष 2018 में अपने सामाजिक कार्यों की शुरुआत करते हुए एक ऐसा अभियान चलाया जिसके तहत 100 फीट से अधिक ऊंचा तिरंगा स्थापित कराया गया। इसके बाद उन्होंने करीब 40 गांवों के सरकारी स्कूलों में 40 से 60 फीट ऊंचे तिरंगे लगवाने का बीड़ा उठाया। इनमें से कई तिरंगे उन्होंने अपनी देखरेख में स्वयं स्थापित करवाए, जबकि कुछ अन्य स्थानों पर स्थानीय भामाशाहों के आर्थिक सहयोग से इस कार्य को पूरा किया गया। उनका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण बच्चों के दिलों में देशप्रेम और राष्ट्रभक्ति की भावना को और अधिक मजबूत करना था। इसी महान कार्य की बदौलत उन्हें पूरे इलाके में तिरंगा मैन के नाम से जाना जाने लगा और उनकी यह पहचान दूर-दूर तक फैल गई।

नौकरी से सेवानिवृत्ति के समय मिली आर्थिक राशि का भी एक बहुत बड़ा हिस्सा उन्होंने पूरी तरह से समाजहित के कार्यों में ही लगा दिया। अक्टूबर 2018 से मार्च 2019 के बीच जखोड़ा गांव में एक खेल स्टेडियम का निर्माण कराया गया, जिसमें उन्होंने अपनी सारी जमा पूंजी खर्च कर दी। इस स्टेडियम के भीतर बाउंड्रीवॉल का निर्माण, रनिंग ट्रैक और खेलकूद से जुड़ी अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाएं विकसित कराई गईं। इसके अलावा स्थानीय मोक्षधामों में शवों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्लेटफॉर्म बनवाए गए। मंड्रेला उपतहसील कार्यालय के ठीक बाहर, धतरावाला और जखोड़ा के अस्पतालों के बाहर यात्रियों की सुविधा के लिए बस स्टैंड का निर्माण कराया गया, और साथ ही बुडानिया में भी एक बस स्टैंड बनवाया गया। सरकारी स्कूलों, शहीद स्मारकों और आयुर्वेदिक अस्पतालों में भी विकास कार्य कराए गए।

अपनी इन तमाम सामाजिक गतिविधियों के बारे में बात करते हुए जगदीशप्रसाद बताते हैं कि उन्होंने इन कार्यों को गति देने के लिए अपनी पेंशन और खेती से होने वाली आय को मुख्य जरिया बनाया है। रिटायरमेंट के वक्त मिली राशि के साथ-साथ वर्ष 2018 से लेकर अब तक वे अपनी पेंशन और कृषि आमदनी का एक बड़ा हिस्सा लगातार समाज के भले के लिए खर्च करते आ रहे हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि वे अब तक अपने जीवन की कमाई के लगभग 88 लाख रुपए समाजसेवा के इन कामों में लगा चुके हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि धन या पैसा केवल मनुष्य की अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए नहीं होता है, बल्कि यदि यह समाज के किसी काम आ जाए तो इसका वास्तविक महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है.

उनके मन में तिरंगा लगाने का यह विचार एक छोटी सी घटना के बाद आया था जब उन्होंने रिटायरमेंट के तुरंत बाद अपने घर पर 101 फीट ऊंचा तिरंगा फहराया था। उस समय उनके घर आए एक स्थानीय व्यक्ति ने उस झंडे को देखकर उनसे यह सवाल पूछ लिया था कि यह आखिर किस देवता का झंडा है। वह एक साधारण सा सवाल उनके भीतर तक को झकझोर गया और उन्होंने तभी यह पक्का इरादा कर लिया कि वे गांव-गांव जाकर तिरंगा फहराएंगे। महज तीन साल के भीतर उन्होंने विभिन्न स्कूलों और तहसील स्तर पर 40 फीट से अधिक ऊंचाई वाले करीब 15 तिरंगे लगवा दिए। अब वे इसी राष्ट्रभक्ति और सेवा की भावना को श्रवण पुरस्कार के माध्यम से बुजुर्गों के सम्मान के साथ जोड़ रहे हैं और उनका अगला बड़ा लक्ष्य वर्ष 2027 तक 100 सेवाभावी लोगों को सम्मानित करने का है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह पहल समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और पारिवारिक जिम्मेदारी की भावना को पुनर्जीवित करने का एक मजबूत उदाहरण पेश करती है।

**झुंझुनूं में:** स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं को बुजुर्गों की देखभाल करने और गांवों के विकास कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

## सवाल-जवाब

### 1. जगदीशप्रसाद झाझड़िया कौन हैं?
वे दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त एक एसआई हैं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी समाजसेवा और बुजुर्गों के सम्मान के लिए समर्पित कर दी है।

### 2. श्रवण पुरस्कार क्या है और इसमें क्या दिया जाता है?
यह पुरस्कार बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों की निस्वार्थ सेवा करने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है, जिसके तहत 10 ग्राम चांदी का सिक्का और प्रमाण-पत्र मिलता है।

### 3. जगदीशप्रसाद को 'तिरंगा मैन' क्यों कहा जाता है?
उन्होंने गांवों और सरकारी स्कूलों में 40 से 100 फीट ऊंचे तिरंगे स्थापित करवाए हैं, जिसके कारण उन्हें तिरंगा मैन के रूप में पहचान मिली।

### 4. उन्होंने समाजसेवा पर अब तक कितनी राशि खर्च की है?
उन्होंने अपनी पेंशन, खेती की आमदनी और रिटायरमेंट राशि से अब तक लगभग 88 लाख रुपए समाजसेवा के कार्यों में खर्च किए हैं।

### 5. वर्ष 2027 के लिए उनका क्या लक्ष्य है?
उनका लक्ष्य वर्ष 2027 तक कुल 100 सेवाभावी लोगों को श्रवण पुरस्कार से सम्मानित करने का है।

## प्रेरणा और सबक
**अपनी बचत का सही उपयोग:** सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली राशि और पेंशन का बड़ा हिस्सा व्यक्तिगत विलासिता के बजाय समाज के उत्थान और सार्वजनिक हित में लगाया जा सकता है।

**युवा पीढ़ी में संस्कार:** समाज में बुजुर्गों के प्रति आदर और पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

**राष्ट्रभक्ति की अलख:** स्थानीय स्तर पर प्रेरणादायक अभियान चलाकर बच्चों और युवाओं के मन में देशप्रेम की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

**बड़ा लक्ष्य और संकल्प:** समाज सेवा के कार्यों में निरंतरता बनाए रखते हुए भविष्य के लिए बड़े और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाने चाहिए।

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