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  "type": "article",
  "title": "जोधपुर की 9 साल की देवांशी चांडक क्लासिकल भरतनाट्यम के जरिए राजस्थान भर के युवाओं को कर रही हैं प्रेरित",
  "summary": "जोधपुर की 9 साल की देवांशी चांडक अपनी भरतनाट्यम प्रस्तुतियों से हर किसी को हैरान कर रही हैं। 150 प्रकार के एक्सप्रेशन्स का प्रदर्शन करने वाली देवांशी अब पाली में अन्य बच्चियों को इस क्लासिकल डांस के गुर सिखा रही हैं।",
  "content": "पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच राजस्थान के जोधपुर की रहने वाली 9 साल की देवांशी चांडक भारतीय शास्त्रीय नृत्य की मिसाल बनकर उभर रही हैं। अपनी अद्भुत नृत्य प्रतिभा और समर्पण के बल पर देवांशी राजस्थान भर में युवाओं और बच्चों को भरतनाट्यम के प्रति प्रेरित कर रही हैं। वर्तमान में वह पाली जिले में कई बेटियों को इस प्राचीन कला के गुर सिखा रही हैं। कम उम्र में ही अपने माता-पिता से मिली प्रेरणा को ध्येय बनाकर देवांशी ने शास्त्रीय कला के क्षेत्र में वह उपलब्धि हासिल की है, जिसे हासिल करना बड़ों के लिए भी एक बड़ी चुनौती माना जाता है।\n\n \n\nमंच पर अद्भुत अभिव्यक्ति और 150 भाव-भंगिमाएं\n\nभरतनाट्यम की नृत्यांगना के रूप में देवांशी चांडक ने मंच पर अपनी उत्कृष्ट कलात्मक क्षमता से हर किसी को हैरान कर दिया है। अपनी प्रस्तुतियों के दौरान वह लगभग 150 प्रकार के चेहरे के भावों यानी एक्सप्रेशन्स का सफल प्रदर्शन करती हैं। इसके अलावा, वह 12 से भी अधिक जटिल भाव-भंगिमाओं को बेहद सधे हुए अंदाज में पेश करती हैं। उनकी हर प्रस्तुति में भारतीय कला की गहराई और संवेदनशीलता स्पष्ट झलकती है।\n\nमंच पर पौराणिक कथाओं और संवेदनशील दृश्यों का सजीव चित्रण देवांशी की सबसे बड़ी खासियत है। विशेष रूप से जब वह महाभारत के द्रौपदी चीर-हरण जैसे मार्मिक प्रसंग को अपने नृत्य अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत करती हैं, तो सभागार में मौजूद दर्शक भावुक हो उठते हैं। उनकी भावाभिव्यक्ति, आंखों के इशारे और सधे हुए कदमों की लयबद्ध गति हर दर्शक को बांधकर रखती है, जिससे पूरा प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है।\n\n \n\nअपनी एकेडमी खोलकर संस्कृति के प्रसार का लक्ष्य\n\nअपनी इस कलात्मक यात्रा के बारे में बात करते हुए देवांशी इस उपलब्धि को बेहद खास मानती हैं। उनका मानना है कि भरतनाट्यम केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि भारत की एक समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है। अपनी शुरुआती यात्रा को याद करते हुए देवांशी चांडक ने कहा, \"शुरुआत में मेरी मां ने मुझे इसे सीखने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद मैंने इसे अपने दिल में उतार लिया।\"\n\nअपने भविष्य के सपनों को साझा करते हुए देवांशी ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य अपनी एक खुद की नृत्य एकेडमी खोलना है। वह चाहती हैं कि इस एकेडमी के माध्यम से वह अन्य बच्चों को भरतनाट्यम की ट्रेनिंग दे सकें और उनके दिलों में शास्त्रीय संगीत और नृत्य के प्रति रुचि जगा सकें। उनका अंतिम लक्ष्य भारतीय संस्कृति के मूल्यों और इस महान कला को घर-घर तक पहुंचाना है।\n\n \n\nपारिवारिक प्रोत्साहन और प्राचीन धरोहर का संरक्षण\n\nदेवांशी की इस उपलब्धि पर उनके परिवार को गर्व है। उनके बड़े भाई विकास चांडक ने अपनी छोटी बहन की लगन और निष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में 9 साल की मेहनत के बाद इस कला को आत्मसात करना सभी के लिए प्रेरणादायक है। मंच पर भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में एक बड़ी मिसाल है।\n\nअपनी बहन की कला के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए विकास चांडक ने कहा, \"भारत की इस प्राचीन कला को संजोकर रखना नई पीढ़ी का भी काम है।\" उन्होंने उम्मीद जताई कि देवांशी भविष्य में भरतनाट्यम को और भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी तथा देश के विभिन्न मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर अपनी संस्कृति का नाम रोशन करेगी। देवांशी की यह यात्रा दर्शाती है कि यदि दृढ़ संकल्प हो तो नई पीढ़ी भी अपनी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं को नए आयाम दे सकती है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह कहानी यह संदेश देती है कि कैसे शास्त्रीय कलाएं नई पीढ़ी के बीच सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर सकती हैं।\n\n  - राजस्थान में: जोधपुर और पाली की यह पहल स्थानीय युवाओं को भारतीय शास्त्रीय नृत्य सीखने और अपनी संस्कृति से जुड़ने का प्रत्यक्ष अवसर प्रदान करती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. देवांशी चांडक कौन हैं?\nदेवांशी चांडक जोधपुर, राजस्थान की रहने वाली 9 साल की भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं, जो राज्य भर में बच्चों को शास्त्रीय नृत्य के प्रति प्रेरित कर रही हैं।\n\n2. देवांशी भरतनाट्यम में किस प्रकार की प्रतिभा का प्रदर्शन करती हैं?\nवह मंच पर लगभग 150 प्रकार के चेहरे के एक्सप्रेशन्स और 12 से अधिक भाव-भंगिमाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं।\n\n3. देवांशी मंच पर किस संवेदनशील पौराणिक प्रसंग को जीवंत करती हैं?\nवह महाभारत के द्रौपदी चीर-हरण जैसे मार्मिक और संवेदनशील दृश्य को अपने सजीव नृत्य अभिनय से प्रस्तुत करती हैं।\n\n4. देवांशी वर्तमान में कहां अन्य बच्चियों को नृत्य सिखा रही हैं?\nवह वर्तमान में राजस्थान के पाली जिले में अन्य बेटियों को भरतनाट्यम के गुर सिखा रही हैं।\n\n5. देवांशी का भविष्य का मुख्य लक्ष्य क्या है?\nउनका मुख्य लक्ष्य अपनी खुद की एक एकेडमी खोलना है ताकि वह बच्चों को ट्रेंड कर सकें और भारतीय संस्कृति को घर-घर तक पहुंचा सकें।\n\nप्रेरणा और सबक\n• पारिवारिक प्रोत्साहन की ताकत: माता-पिता की सही प्रेरणा और समर्थन से बच्चे कम उम्र में भी अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं।\n\n  - निरंतर समर्पण और अनुशासन: कम उम्र से ही लगातार अभ्यास और मेहनत कठिन से कठिन कला में भी महारत दिला सकती है।\n\n  - संस्कृति से जुड़ाव: आधुनिकता के साथ-साथ अपनी जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर रखना जीवन में एक विशिष्ट पहचान देता है।\n\n  - दृढ़ संकल्प और शिक्षण की भावना: अपनी कला को दूसरों तक पहुंचाने और सिखाने का विचार ही व्यक्तिगत उपलब्धि को समाज के लिए उपयोगी बनाता है।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-08-26",
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    "भरतनाट्यम",
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