# जुड़वां भाई का साथ निभाने के लिए ऑल इंडिया 32वें रेंकर महरूफ ने छोड़ी आईआईटी बॉम्बे की सीट, मसरूर के साथ आईआईटी कानपुर से करेंगे बीटेक

> जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया 32वीं रैंक पाने वाले 18 वर्षीय महरूफ अहमद खान ने आईआईटी बॉम्बे की बीटेक कंप्यूटर साइंस सीट छोड़ दी है। उन्होंने 169वीं रैंक पाने वाले अपने जुड़वां भाई मसरूर के साथ रहने के लिए आईआईटी कानपुर में दाखिला लिया है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-08-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/juravan-bhai-ka-satha-nibhane-ke-lie-la-indiya-32ven-renkara-mahroof-ne-chhori-iit-bombay-ki-sita-masroor-ke-satha-iit-kanpur-se-k-13202 · **Language:** Hindi
**Tags:** जेईई एडवांस्ड, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी कानपुर, महरूफ अहमद खान, मसरूर अहमद खान, लखनऊ, इंजीनियरिंग एडमिशन

देश की सबसे कठिन प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिनी जाने वाली जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया 32वीं रैंक पाना किसी भी छात्र के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इतनी शानदार रैंक हासिल करने के बाद देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी बॉम्बे में बीटेक कंप्यूटर साइंस की सीट मिलना लगभग तय होता है। हालांकि, लखनऊ के रहने वाले 18 साल के महरूफ अहमद खान ने इस ड्रीम ऑफर को बेहद खुशी के साथ छोड़ दिया। उनके इस बड़े फैसले के पीछे वजह बने उनके जुड़वां भाई मसरूर अहमद खान, जिन्होंने इसी परीक्षा में ऑल इंडिया 169वीं रैंक हासिल की है। दोनों भाइयों ने बचपन से लेकर पढ़ाई के हर पड़ाव तक एक-दूसरे का साथ निभाया है, और वे किसी भी कीमत पर एक-दूसरे से अलग नहीं होना चाहते थे।

## आईआईटी बॉम्बे की टॉप सीट छोड़ने की बड़ी वजह
जेईई एडवांस्ड की मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान महरूफ अहमद खान को उनकी ऑल इंडिया 32वीं रैंक के आधार पर आईआईटी बॉम्बे में बीटेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पसंदीदा सीट आसानी से मिल रही थी। दूसरी ओर, 169वीं ऑल इंडिया रैंक लाने वाले उनके जुड़वां भाई मसरूर अहमद खान के लिए आईआईटी बॉम्बे में उसी कंप्यूटर साइंस ब्रांच में जगह बनना बेहद मुश्किल लग रहा था। अगर महरूफ आईआईटी बॉम्बे का विकल्प चुनते, तो मसरूर को अपनी रैंक के हिसाब से किसी अन्य आईआईटी संस्थान में दाखिला लेना पड़ता। इसका सीधा अर्थ यह होता कि दोनों भाइयों को अपने जीवन में पहली बार एक-दूसरे से अलग होकर दो अलग-अलग शहरों में रहना पड़ता।

## आईआईटी कानपुर में एक साथ कंप्यूटर साइंस चुनने का फैसला
बचपन से ही एक साथ बड़े हुए और एक ही कमरे में रहकर पढ़ाई करने वाले दोनों भाई एक-दूसरे से दूर रहने के विचार मात्र से ही असहज हो गए। ऐसे में महरूफ ने बिना किसी संकोच के एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे जैसी शीर्ष चॉइस का मोह त्याग दिया और काउंसलिंग में आईआईटी कानपुर को अपनी पहली वरीयता के रूप में चुना। इस रणनीति के चलते महरूफ (ऑल इंडिया रैंक 32) और मसरूर (ऑल इंडिया रैंक 169) दोनों को ही आईआईटी कानपुर के बीटेक कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में एक साथ दाखिला मिल गया। इस तरह दोनों का एक ही कैंपस में रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखने का सपना पूरा हो गया।

## बचपन से पढ़ाई में एक-दूसरे के सबसे बड़े मददगार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निवासी महरूफ और मसरूर के माता-पिता पेशे से डॉक्टर हैं। दोनों भाइयों ने शुरुआती स्कूली शिक्षा से लेकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी तक हर कदम साथ मिलकर उठाया है। जेईई कोचिंग के दौरान वे न केवल भाई बल्कि एक-दूसरे के सबसे मजबूत स्टडी पार्टनर भी रहे। जब भी पढ़ाई के दौरान किसी को भी कोई कठिन सवाल समझ नहीं आता था या कोई संदेह होता था, तो दूसरा भाई तुरंत उसकी मदद करता था। इस निरंतर आपसी सहयोग ने दोनों को देश की शीर्ष रैंकिंग हासिल करने में मदद की। यही वजह रही कि करियर के इतने अहम मोड़ पर भी दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामे रखने का फैसला किया।

## परिजनों और सोशल मीडिया पर जमकर मिल रही तारीफ
दोनों भाइयों की इस दोहरी सफलता और महरूफ के इस त्याग भरे फैसले से परिवार में खुशी का माहौल है। डॉक्टर माता-पिता का कहना है कि उनके दोनों बेटों ने हमेशा एक-दूसरे की जरूरतों और खुशी का ध्यान रखा है। महरूफ द्वारा भाई के खातिर ली गई इस पहल ने परिवार का दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग दोनों भाइयों के इस अटूट जुड़ाव और महरूफ के त्याग की सराहना कर रहे हैं। अब दोनों भाई आईआईटी कानपुर के एक ही कैंपस में साथ रहकर बीटेक की पढ़ाई पूरी करेंगे और अपने भविष्य को नई दिशा देंगे।

## इसका आप पर असर
- **भारत भर में:** यह प्रेरणादायक कहानी छात्रों और अभिभावकों को सिखाती है कि केवल शीर्ष ब्रांड या कॉलेज के नाम के पीछे भागने से ज्यादा महत्वपूर्ण आपसी सहयोग और भावनात्मक मजबूती है।
- **लखनऊ और उत्तर प्रदेश में:** उत्तर प्रदेश के राजधानी शहर के इन दोनों भाइयों की सफलता राज्य के हजारों इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बनी है।

## सवाल-जवाब

### 1. महरूफ और मसरूर अहमद खान ने जेईई एडवांस्ड में कौन सी रैंक हासिल की?
महरूफ अहमद खान ने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया 32वीं रैंक हासिल की, जबकि उनके जुड़वां भाई मसरूर अहमद खान ने 169वीं ऑल इंडिया रैंक पाई।

### 2. महरूफ ने आईआईटी बॉम्बे की सीट क्यों छोड़ दी?
महरूफ को आईआईटी बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस की सीट मिल रही थी, लेकिन मसरूर को वहां उसी ब्रांच में सीट मिलना मुश्किल था। दोनों भाई अलग नहीं होना चाहते थे, इसलिए महरूफ ने आईआईटी बॉम्बे की सीट छोड़ दी।

### 3. दोनों भाइयों ने किस संस्थान और किस ब्रांच में एडमिशन लिया है?
दोनों भाइयों ने आईआईटी कानपुर के बीटेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) प्रोग्राम में एक साथ दाखिला लिया है।

### 4. दोनों भाई कहां के निवासी हैं और उनके माता-पिता क्या करते हैं?
महरूफ और मसरूर उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं और उनके माता-पिता पेशे से डॉक्टर हैं।

## प्रेरणा और सबक
**महरूफ और मसरूर के सफर से मिलने वाली मुख्य सीख:**

- **साथ मिलकर तैयारी की ताकत:** एक-दूसरे के डाउट सॉल्व करने और साथ मिलकर पढ़ाई करने से कठिन परीक्षा की राह भी आसान हो जाती है।
- **रिश्तों की अहमियत:** किसी भी बड़े टैग या पद से ऊपर अपनों के साथ और सहयोग को प्राथमिकता देना असली परिपक्वता है।
- **स्वस्थ तालमेल:** आपस में प्रतिस्पर्धा करने के बजाय एक-दूसरे को आगे बढ़ाने से दोनों साथी बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।

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