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  "type": "article",
  "title": "कबाड़ बीनने वाले के बेटे सागर रेगर ने नीट में हासिल की 27157 ऑल इंडिया रैंक, बुआ की बेटी के कैंसर ने जगाया डॉक्टर बनने का जज़्बा",
  "summary": "राजस्थान के कोटा जिले में कबाड़ एकत्र करने वाले के बेटे सागर रेगर ने नीट परीक्षा में 564 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 27157 हासिल की है। पारिवारिक त्रासदी के बाद उन्होंने समाज को जागरूक करने का लक्ष्य चुना।",
  "content": "राजस्थान के कोटा जिले में कैथून कस्बे के निकट स्थित गोदल्याहेडी गांव के निवासी सागर रेगर ने विषम परिस्थितियों और भारी आर्थिक अभावों के बावजूद राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में शानदार सफलता प्राप्त की है। घर-घर कबाड़ बीनकर परिवार चलाने वाले पिता के बेटे सागर ने नीट परीक्षा में 564 अंक अर्जित किए हैं। उन्होंने 98.6296 परसेन्टाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक (AIR) 27157 हासिल की है, जबकि अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में उनकी ऑल इंडिया रैंक 684 रही है। कैथून के सरकारी स्कूल में पढ़ाई करते हुए सागर ने 10वीं कक्षा में 76 प्रतिशत और 12वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। उनकी इस बड़ी उपलब्धि से परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल है।\n\nपारिवारिक त्रासदी और डॉक्टर बनने का संकल्प\nसागर की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा सामाजिक मकसद और पारिवारिक दर्द जुड़ा हुआ है। सागर का परिवार काफी बड़ा है और उसमें ज्यादातर सदस्य निरक्षर हैं। शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के अभाव के कारण परिवार के कई लोग नशे की आदतों में फंसे हुए हैं। जीवन का सबसे बड़ा दुखद मोड़ तब आया जब उनकी बुआ की बेटी को गुटखे के सेवन के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया। इस घटना ने सागर को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि अज्ञानता और नशे के चंगुल से समाज को मुक्त कराने का सबसे प्रभावी जरिया शिक्षा ही है। इसी घटना से प्रेरणा लेकर उन्होंने डॉक्टर बनने का पक्का इरादा किया, ताकि वे भविष्य में मरीजों का इलाज करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को नशामुक्त जीवन और शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक कर सकें।\n\nआर्थिक तंगी और स्कूल प्रधानाचार्य का मार्गदर्शन\nसागर के पिता मुरली रेगर कबाड़ इकट्ठा करके परिवार का लालन-पालन करते हैं। उनकी मां एक गृहिणी हैं, जिन्होंने 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और वे पिता के लाए कबाड़ में से स्क्रैप अलग करने के काम में मदद करती हैं। पूरा परिवार केवल दो कमरों के छोटे से घर में रहता है। सागर की दो छोटी बहने हैं, जिनमें से बड़ी बहन मानसी 12वीं कक्षा में जीव विज्ञान विषय से पढ़ रही है, जबकि सबसे छोटी बहन इशिका 10वीं कक्षा की छात्रा है। पिता मुरली रेगर ने बताया कि सागर का हमेशा से डॉक्टर बनने का सपना था, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते वे निजी कोचिंग संस्थान की फीस भरने में पूरी तरह असमर्थ थे। इस मुश्किल मोड़ पर राजकीय विद्यालय कैथून के प्रधानाचार्य ने सागर का मार्गदर्शन किया और उन्हें एलन शिक्षा संबल योजना की जानकारी देकर प्रवेश परीक्षा देने के लिए प्रोत्साहित किया।\n\nमुफ्त कोचिंग, आवास और सामाजिक परिवर्तन की सोच\nचयन परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सागर का जीवन बदल गया। एलन शिक्षा संबल योजना के माध्यम से उन्हें कोटा में नीट परीक्षा की पूरी तरह निशुल्क कोचिंग मिली। इसके अतिरिक्त एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास की ओर से उनके कोटा में रहने और भोजन की मुफ्त व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। सागर का कहना है कि यदि उन्हें यह संबल न मिलता, तो आर्थिक तंगी के कारण नीट की तैयारी छोड़कर किसी सामान्य कॉलेज में बीएससी में दाखिला लेना पड़ता। हालांकि उनके पिता निरक्षर हैं और मां 8वीं पास हैं, लेकिन दोनों ने शिक्षा का महत्व समझते हुए हमेशा बेटे का हौसला बढ़ाया। इस संबंध में एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास के ट्रस्टी और एलन के संस्थापक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि सरकारी स्कूलों के हिंदी माध्यम के मेधावी बच्चों को आगे लाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम संचालित किया जाता है, जिससे सफल होकर ये छात्र पूरे समाज में बदलाव ला सकें।\n\nइसका आप पर असर\nपाठकों के लिए मायने:\n\n• भारत में: यह कहानी दर्शाती है कि सरकारी स्कूलों के छात्र भी सही सरकारी व सामाजिक छात्रवृत्ति योजनाओं के सहारे नीट जैसी कठिन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अव्वल आ सकते हैं।\n• कोटा में: कैथून और आसपास के ग्रामीण इलाकों के कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले प्रतिभाशाली छात्रों के लिए एलन शिक्षा संबल जैसी मुफ्त कोचिंग और आवास योजनाएं बिना वित्तीय बोझ के उच्च शिक्षा का रास्ता खोलती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सागर रेगर ने नीट परीक्षा में कितना स्कोर और कौन सी रैंक हासिल की?\nसागर रेगर ने नीट में 564 अंक प्राप्त किए और 98.6296 परसेन्टाइल हासिल किया। उनकी ऑल इंडिया रैंक 27157 और एससी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 684 रही।\n\n2. सागर को डॉक्टर बनने की प्रेरणा किस घटना से मिली?\nगुटखा सेवन के कारण उनकी बुआ की बेटी को कैंसर हो गया था। इस पारिवारिक घटना ने सागर को deeply प्रभावित किया और उन्होंने समाज को जागरूक करने के लिए डॉक्टर बनने का संकल्प लिया।\n\n3. सागर रेगर के परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी है?\nउनके पिता मुरली रेगर घर-घर से कबाड़ बिनने का काम करते हैं और मां कबाड़ से स्क्रैप अलग करने में मदद करती हैं। परिवार केवल दो कमरों के छोटे मकान में रहता है।\n\n4. सागर को नीट की तैयारी के लिए किस संस्था से सहायता मिली?\nउन्हें एलन शिक्षा संबल योजना के तहत मुफ्त नीट कोचिंग मिली, जबकि एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास ने कोटा में उनके रहने और खाने का नि:शुल्क प्रबंध किया।\n\n5. यदि नि:शुल्क कोचिंग न मिलती तो सागर की क्या योजना थी?\nसागर के अनुसार यदि उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलता, तो परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें किसी कॉलेज में सामान्य बीएससी कोर्स में दाखिला लेना पड़ता।\n\nप्रेरणा और सबक\nप्रेरणादायक सबक:\n\n• आपदा को लक्ष्य में बदलें: बुआ की बेटी के कैंसर की दुखद घटना को सागर ने हताशा के बजाय समाज सुधार और डॉक्टर बनने के अपने जीवन ध्येय में परिवर्तित किया।\n• सीमित संसाधनों में भी निरंतरता रखें: दो कमरों के घर और कबाड़ बीनने वाले परिवार से आने के बावजूद सागर ने 10वीं में 76% और 12वीं में 92% अंक प्राप्त कर अपनी काबिलियत साबित की।\n• सही मार्गदर्शन का लाभ उठाएं: वित्तीय तंगी के कारण निराश होने के बजाय स्कूल प्रधानाचार्य की सलाह मानकर कल्याणकारी योजनाओं की प्रवेश परीक्षा दी।\n• दीर्घकालिक सपनों को प्राथमिकता दें: माता-पिता के प्रोत्साहन से उन्होंने मजबूरी में सामान्य डिग्री कोर्स चुनने के बजाय नीट की कठिन तैयारी का रास्ता चुना।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-31",
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    "सागर रेगर",
    "नीट 2026",
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    "राजस्थान न्यूज"
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