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  "title": "कबाड़ से बनी अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल जो पीछे भी चलती है, पूर्णिया के 55 वर्षीय मिस्त्री का कमाल",
  "summary": "बिहार के पूर्णिया में रहने वाले 50 वर्षीय बिजली मिस्त्री पवन कुमार भगत ने एक अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल बनाई है, जो मात्र एक घंटे में चार्ज होकर 70 किलोमीटर चलती है और इसमें रिवर्स गियर भी लगा है।",
  "content": "नया करने या कुछ नया सीखने के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता। प्रतिभा और अनोखी सोच कभी भी किसी बड़े बदलाव को जन्म दे सकती है। बिहार के पूर्णिया जिले के एक 50 वर्षीय बिजली मिस्त्री ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। उन्होंने अपने हुनर और तकनीकी समझ का इस्तेमाल करके एक ऐसी इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार की है, जो इन दिनों सड़कों पर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अपनी रोजाना की जरूरतों को पूरा करने और परिवहन के खर्च को कम करने के लिए उन्होंने इस साइकिल का निर्माण किया है।\n\nमहंगी गाड़ियों के विकल्प के रूप में जन्मा यह विचार\nपूर्णिया के रानीपतरा (लोखड़ा) इलाके के रहने वाले पवन कुमार भगत पेशे से एक बिजली मिस्त्री हैं। वे पिछले कई वर्षों से बिजली का काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। आज के समय में जब गाड़ियां बेहद महंगी हो चुकी हैं, तब अपने सीमित बजट में गाड़ी खरीदना उनके लिए काफी कठिन काम था। इसी आर्थिक आवश्यकता ने उन्हें कुछ नया करने की प्रेरणा दी। अपने काम को आसान और किफायती बनाने के लिए उन्होंने सामान्य साइकिल को इलेक्ट्रिक साइकिल में बदलने का फैसला किया। पवन कुमार साल 2017 से अब तक ऐसी तीन से चार इलेक्ट्रिक साइकिलें बना चुके हैं, जिन्हें लोगों ने अच्छे दामों पर खरीद भी लिया है।\n\nघर के कबाड़ और ऑनलाइन पार्ट्स से मात्र 3 दिनों में तैयार\nपवन कुमार ने बताया कि इस बार उन्होंने एक नई इलेक्ट्रिक साइकिल बनाने के लिए घर में पड़े कबाड़ के सामान और इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन मंगाए गए कुछ पुर्जों का इस्तेमाल किया। उन्होंने केवल 3 दिनों की कड़ी मेहनत से इस शानदार साइकिल को असेंबल कर दिया। इस पूरी साइकिल को बनाने में उनका लगभग 70,000 रुपये का खर्च आया है। अब यह साइकिल जब भी सड़क पर निकलती है, तो लोग इसे कौतूहल से देखने लगते हैं।\n\n70 किलोमीटर का सफर, डिजिटल मीटर और रिवर्स गियर\nइस देसी ई-साइकिल की तकनीकी विशेषताएं किसी आधुनिक इलेक्ट्रिक बाइक से कम नहीं हैं। पवन कुमार के अनुसार, इसे पूरी तरह चार्ज होने में मात्र 1 घंटे का समय लगता है। एक बार फुल चार्ज होने के बाद यह साइकिल आसानी से 70 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। स्थानीय बाजार से खरीदे गए पार्ट्स और देसी जुगाड़ तकनीक की मदद से बनी इस साइकिल में एक डिजिटल स्पीड मीटर भी लगाया गया है। इस साइकिल की सबसे अनोखी विशेषता इसका रिवर्स गियर है, जो आमतौर पर कारों में देखने को मिलता है। इस गियर की वजह से साइकिल को आगे चलाने के साथ-साथ पीछे भी दौड़ाया जा सकता है। पवन रोजाना इसी साइकिल पर सवार होकर रानीपतरा से पूर्णिया, खुश्कीबाग और आसपास के अन्य इलाकों में अपने बिजली के काम के लिए जाते हैं।\n\nपैसे की बचत के साथ पर्यावरण की सुरक्षा\nपवन कुमार भगत का मानना है कि इस अनोखे आविष्कार से उनके पैसे की बड़ी बचत हो रही है। इस साइकिल की वजह से अब उन्हें पेट्रोल या डीजल पर पैसे खर्च नहीं करने पड़ते। इसके साथ ही, यह पूरी तरह से बैटरी चालित होने के कारण पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाती है। आज के महंगाई के दौर में यह साइकिल उनके काम के लिए बेहद उपयोगी, सस्ती और पर्यावरण अनुकूल साबित हो रही है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह नवाचार दर्शाता है कि कैसे कम खर्च में स्थानीय स्तर पर पर्यावरण अनुकूल परिवहन विकल्प तैयार किए जा सकते हैं, जिससे आम लोगों को महंगे ईंधन से राहत मिल सकती है।\n• पूर्णिया (बिहार) में: स्थानीय निवासियों के लिए पवन कुमार भगत का यह प्रयास कम दूरी की यात्रा के लिए एक किफायती और प्रदूषण मुक्त मिसाल पेश करता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पवन कुमार भगत कौन हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?\nपवन कुमार भगत पेशे से एक बिजली मिस्त्री हैं और वे बिहार के पूर्णिया जिले के रानीपतरा (लोखड़ा) के रहने वाले हैं।\n\n2. इस अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल को बनाने में कितना खर्च और समय लगा?\nइसे बनाने में लगभग 70,000 रुपये का खर्च आया है और इसे केवल 3 दिनों की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है।\n\n3. इस ई-साइकिल की रेंज और चार्जिंग समय क्या है?\nयह साइकिल महज 1 घंटे में पूरी तरह चार्ज हो जाती है और इसके बाद आसानी से 70 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है।\n\n4. इस साइकिल में कौन से विशेष फीचर्स दिए गए हैं?\nइसमें डिजिटल स्पीड मीटर लगाया गया है और साथ ही कारों की तरह रिवर्स गियर भी दिया गया है जिससे यह पीछे भी चल सकती है।\n\nप्रेरणा और सबक\n• समस्या को अवसर में बदलना: महंगी गाड़ियों की कमी को पवन कुमार ने अपनी रचनात्मकता के लिए प्रेरणा बनाया और खुद ही अपनी गाड़ी तैयार कर ली।\n• कबाड़ का सही उपयोग: बेकार पड़े घरेलू सामानों को मिलाकर एक उपयोगी साधन बनाना दर्शाता है कि संसाधन सीमित होने पर भी बड़ा काम किया जा सकता है।\n• उम्र का कोई बंधन नहीं: 50 वर्ष की उम्र में भी नई तकनीक सीखना और ई-साइकिल बनाना साबित करता है कि हुनर के लिए उम्र मायने नहीं रखती।\n• लगातार प्रयास: साल 2017 से लगातार प्रयोग करते रहना और अब तक कई सफल मॉडल बनाना निरंतर अभ्यास की शक्ति को दिखाता है।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-08",
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    "इलेक्ट्रिक साइकिल",
    "जुगाड़ आविष्कार",
    "पवन कुमार भगत",
    "इनोवेशन",
    "बिहार समाचार"
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  "site": "TrendKia"
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