# करौली में हीना बाई ने अपने घर को बनाया सौ से अधिक बेजुबानों का आशियाना

> राजस्थान के करौली की रहने वाली हीना बाई किन्नर ने अपने घर में 100 से अधिक पशु-पक्षियों को पनाह दी है, जिनकी वे अपने बच्चों की तरह खुद देखभाल करती हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/karauli-men-heena-bai-ne-apane-ghara-ko-banaya-sau-se-adhika-bejubanon-ka-ashiyana-31918 · **Language:** Hindi
**Tags:** करौली, पशु प्रेम, हीना बाई, राजस्थान समाचार, पशु कल्याण, प्रेरक कहानी

आज की आधुनिक और व्यस्त जीवनशैली में जहां लोगों के पास अपने खुद के एक पालतू जानवर की देखभाल करने के लिए भी पर्याप्त समय नहीं बचता, वहीं राजस्थान के करौली जिले से मानवता और संवेदनशीलता की एक बेहद खूबसूरत मिसाल सामने आई है। यहां रहने वाली हीना बाई किन्नर ने अपने निस्वार्थ प्रेम और समर्पण से पशु-पक्षियों के प्रति एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है। हीना बाई ने अपने घर के आंगन को किसी कंक्रीट के मकान की तरह नहीं रखा, बल्कि उसे पूरी तरह से बेजुबान जीवों की एक खिली-खिली दुनिया में तब्दील कर दिया है। उनके इस आशियाने में आज एक या दो नहीं, बल्कि 100 से भी अधिक अलग-अलग प्रजातियों के पशु-पक्षी बेहद सुरक्षित और सुखी जीवन जी रहे हैं। सबसे प्रेरक बात यह है कि हीना बाई इन सभी बेजुबानों की दिनचर्या और उनके खान-पान की जिम्मेदारी किसी बाहरी नौकर या सहायक के भरोसे नहीं छोड़तीं, बल्कि वे खुद सुबह से लेकर रात तक एक मां की तरह अपने बच्चों की तरह इनका ख्याल रखती हैं।

## आंगन में बिखरी है बेजुबानों की अनूठी और चंचल दुनिया
जैसे ही कोई व्यक्ति हीना बाई के घर के भीतर कदम रखता है, उसे एक बेहद अनोखा और दिल को छू लेने वाला नजारा दिखाई देता है। वहां का माहौल किसी आम घर जैसा शांत नहीं होता, बल्कि वहां चारों तरफ प्रकृति का संगीत गूंजता रहता है। आंगन में कहीं वफादार डॉग्स आराम फरमाते दिखते हैं, तो कहीं गाय और बकरियां शांति से बैठी नजर आती हैं। वहीं दूसरी तरफ बत्तखें और मुर्गे-मुर्गियां मस्ती में घूमते-फिरते हैं। उनके इस परिवार में चूहे, बकरे और कई अन्य जीव भी एक साथ मिलकर रहते हैं। हीना बाई अपनी इस यात्रा को याद करते हुए बताती हैं कि शुरुआत में पशु-पक्षियों को अपने पास रखना उनके लिए केवल एक साधारण शौक था। लेकिन समय बीतने के साथ-साथ यह शौक कब एक अटूट भावनात्मक रिश्ते और गहरे लगाव में बदल गया, उन्हें खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ। आज स्थिति यह है कि जब तक वे रोजाना अपने इन बेजुबान साथियों के बीच जाकर उनका हालचाल नहीं ले लेतीं, तब तक उन्हें मानसिक सुकून नहीं मिलता। उनके लिए ये मासूम जीव केवल जानवर या पक्षी नहीं हैं, बल्कि उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा और उनके परिवार के सच्चे सदस्य बन चुके हैं।

## यजमानों से उपहार में मिलने लगे सुंदर और विदेशी जीव
पशु-पक्षियों के प्रति हीना बाई के इस गहरे लगाव और निस्वार्थ सेवा की चर्चा धीरे-धीरे पूरे करौली और आसपास के इलाकों में फैल गई। उनके इस समर्पण को देखकर उनके परिचित, मित्र और यजमान भी बेहद प्रभावित हुए। जब लोगों को समझ में आ गया कि हीना बाई के लिए दुनिया के किसी भी भौतिक उपहार से बढ़कर इन बेजुबानों का साथ है, तो उन्होंने एक अनोखी परंपरा शुरू कर दी। अब किसी भी मांगलिक कार्यक्रम या शुभ अवसर पर लोग उन्हें सोने-चांदी या अन्य उपहारों के बजाय सुंदर पशु-पक्षी भेंट करने लगे हैं। यही वजह है कि आज उनके घर में कई दुर्लभ और विदेशी नस्ल के जीव भी देखने को मिलते हैं। हीना बाई के अनुसार, उनके इस कुनबे में विदेशी नस्ल के बेहद खूबसूरत गिनी फाउल पक्षी और कश्मीर की वादियों में पाई जाने वाली कश्मीरी नस्ल की शानदार बकरी भी शामिल हैं। ये सभी जीव उनके घर में बेहद प्यार और आपसी तालमेल के साथ रहते हैं। इसके अलावा उनके पास स्थानीय नस्ल की गाय, बकरे और अलग-अलग प्रकार के डॉग्स भी मौजूद हैं।

## पांच वर्षों की कठिन मेहनत और बेजोड़ समर्पण की कहानी
एक या दो जानवरों को संभालना ही कई बार लोगों के लिए सिरदर्द बन जाता है, ऐसे में 100 से अधिक बेजुबान जीवों की रोजाना देखभाल करना वाकई एक भगीरथ प्रयास है। हीना बाई पिछले लगभग पांच वर्षों से इस विशाल जिम्मेदारी को बिना थके और बिना रुके अकेले ही संभाल रही हैं। सुबह की पहली किरण के साथ ही उनकी व्यस्त दिनचर्या शुरू हो जाती है, जिसमें सभी जानवरों के लिए ताजा चारा, दाना-पानी, साफ पानी की व्यवस्था करना और उनके रहने के स्थान की पूरी तरह से सफाई करना शामिल है। हीना बाई बताती हैं कि इतने सारे जीवों को अकेले संभालना कई बार शारीरिक रूप से बेहद थका देने वाला होता है और इसमें कई व्यावहारिक परेशानियां भी आती हैं। लेकिन जब वे इन बेजुबानों की आंखों में अपने प्रति प्यार और कृतज्ञता देखती हैं, तो उनकी सारी मुश्किलें और शारीरिक थकान पल भर में रफूचक्कर हो जाती है। उनका यह अद्भुत पशु प्रेम आज समाज के हर व्यक्ति के लिए एक बड़ी सीख है।

## इसका आप पर असर
यह कहानी व्यक्तिगत सहानुभूति और करुणा की असीम शक्ति को दर्शाती है, जो सामुदायिक पशु कल्याण पहलों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

- **देशभर में:** यह नागरिकों को अपने आसपास के लावारिस और पालतू जानवरों के प्रति अधिक संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करती है। इस तरह की जागरूकता से पशु क्रूरता में कमी आ सकती है और लोग बेघर जानवरों को गोद लेने या उनकी देखभाल करने के लिए आगे आ सकते हैं।
- **करौली (राजस्थान) में:** स्थानीय निवासी और आगंतुक सह-अस्तित्व के एक अनूठे मॉडल के गवाह बन रहे हैं, जिससे क्षेत्र में जीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। यह दयालुता का एक स्थानीय उदाहरण बन चुका है, जो आसपास के लोगों को पशु आश्रयों और कल्याण कार्यक्रमों में योगदान देने के लिए प्रेरित कर रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
एक साधारण पालतू जानवर रखने से लेकर सौ से अधिक जीवों की देखरेख करने वाली संरक्षक बनने तक की हीना बाई की यह यात्रा उनके गहरे भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक सहयोग का परिणाम है।

- **व्यक्तिगत जुड़ाव:** पांच साल पहले जो काम एक मामूली शौक के तौर पर शुरू हुआ था, वह समय के साथ एक अटूट पारिवारिक बंधन में बदल गया। इन बेजुबान जीवों के साथ समय बिताना हीना बाई के लिए मानसिक शांति और आंतरिक खुशी का मुख्य जरिया बन गया।
- **सामाजिक प्रोत्साहन:** जब लोगों को उनके इस अनूठे पशु प्रेम के बारे में पता चला, तो उनके यजमानों और शुभचिंतकों ने उन्हें पारंपरिक उपहार देने के बजाय शुभ अवसरों पर विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी भेंट करना शुरू कर दिया, जिससे उनके इस कुनबे का दायरा बढ़ता गया।
- **अटूट प्रतिबद्धता:** इतने सारे जीवों की अकेले देखभाल करने में आने वाली शारीरिक और वित्तीय चुनौतियों के बावजूद, उनका गहरा लगाव उन्हें बिना किसी बाहरी मदद के इस पुनीत कार्य को जारी रखने की शक्ति देता है।

## सवाल-जवाब

### 1. हीना बाई कौन हैं और वे कहां रहती हैं?
हीना बाई राजस्थान के करौली की रहने वाली एक किन्नर हैं, जो पशु-पक्षियों के प्रति अपने असाधारण प्रेम और सेवा भाव के लिए जानी जाती हैं।

### 2. उनके घर में कुल कितने पशु-पक्षी रहते हैं?
उनके घर के आंगन में वर्तमान में 100 से भी अधिक अलग-अलग प्रजातियों के पशु-पक्षी रहते हैं।

### 3. उनके पास किस-किस तरह के जीव मौजूद हैं?
उनके इस अनोखे परिवार में गाय, बकरियां (कश्मीरी नस्ल सहित), डॉग्स, मुर्गे-मुर्गियां, बत्तखें, चूहे और विदेशी नस्ल के गिनी फाउल पक्षी शामिल हैं।

### 4. वे कितने समय से इन बेजुबानों की देखभाल कर रही हैं?
वे पिछले लगभग पांच वर्षों से अकेले ही इन सभी पशु-पक्षियों की रोजाना की देखरेख और खान-पान का जिम्मा संभाल रही हैं।

### 5. लोग उन्हें पारंपरिक उपहारों के बजाय पशु-पक्षी क्यों भेंट करते हैं?
पशु-पक्षियों के प्रति उनके गहरे लगाव को देखते हुए, उनके यजमान और परिचित अब शुभ अवसरों पर उन्हें उपहार के रूप में नए-नए जीव भेंट करने लगे हैं।

## प्रेरणा और सबक
हीना बाई की यह प्रेरणादायक यात्रा हमें करुणा, समर्पण और जीवन में एक निस्वार्थ उद्देश्य खोजने के बारे में बेहद महत्वपूर्ण सीख देती है।

- **सबके प्रति सहानुभूति:** उनकी कहानी सिखाती है कि सच्ची खुशी और मानसिक सुकून उन बेजुबान जीवों की निस्वार्थ सेवा करने में निहित है जो अपनी जरूरतें खुद बयां नहीं कर सकते।
- **निरंतरता और अटूट समर्पण:** पिछले पांच वर्षों से अकेले ही 100 से अधिक जीवों की देखभाल करना यह साबित करता है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो, तो हर रोज आने वाली व्यावहारिक और शारीरिक कठिनाइयों पर आसानी से विजय पाई जा सकती है।
- **सादगी में सुकून खोजना:** आज की तनावभरी दुनिया में, वे हमें दिखाती हैं कि कैसे प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ जुड़कर एक शांतिपूर्ण और संतोषजनक जीवन जिया जा सकता है।

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