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  "type": "article",
  "title": "केरल की बुशरा ने LKG में छोड़ी थी पढ़ाई, अब 22 साल की उम्र में देंगी 10वीं की बोर्ड परीक्षा",
  "summary": "बचपन में आर्थिक तंगी के कारण LKG में पढ़ाई छोड़ने वाली केरल की 22 वर्षीय बुशरा अब साक्षरता मिशन की मदद से 10वीं कक्षा की परीक्षा की तैयारी में जुटी हैं।",
  "content": "किताबी दुनिया से कम उम्र में ही नाता टूट जाने के बावजूद सीखने की ललक कभी खत्म नहीं होती। कुछ ऐसी ही प्रेरक दास्तान केरल के मलप्पुरम जिले के कोट्टाक्कल की रहने वाली बुशरा की है, जिनका औपचारिक अध्ययन एलकेजी कक्षा में ही थम गया था। तंगहाली के दौर ने उन्हें स्कूली जीवन से बहुत जल्दी दूर कर दिया था, मगर उनके भीतर का विद्यार्थी हमेशा जीवित रहा। आज बाईस साल की उम्र में वह अपने उसी अधूरे संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और जिला साक्षरता अभियान के अंतर्गत संचालित समकक्षता पाठ्यक्रम के माध्यम से दसवीं की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। खास बात यह है कि वह इस साक्षरता कार्यक्रम से जुड़ी जिले की सबसे कम उम्र की शिक्षार्थी हैं।\n\n \n\nअधूरेपन से दोबारा पढ़ाई की शुरुआत\n बचपन में कक्षाओं का सफर बुशरा के लिए बहुत संक्षिप्त साबित हुआ था क्योंकि पारिवारिक उलझनों ने उनकी शिक्षा की शुरुआत में ही ब्रेक लगा दिया था। साक्षरता मिशन के गैर-औपचारिक शिक्षण माध्यमों के जरिए वर्ष 2018 में उन्हें दोबारा किताबें थामने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने चौथी कक्षा की समकक्ष परीक्षा अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण की और सत्रह साल की उम्र में इस मुकाम को हासिल किया। इसके बाद उन्होंने अपने कदम नहीं रोके और सातवीं कक्षा के पाठ्यक्रम को भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। अब उनका लक्ष्य उससे भी बड़ा है और वह अपनी मंजिल के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं।\n\n \n\nकक्षाओं में वापसी और मां का साथ\n वर्तमान समय में बुशरा कोट्टाप्पाडी गवर्नमेंट बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल के समकक्ष अध्ययन केंद्र में बैठकर दसवीं कक्षा की परीक्षा के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। जिस बेंच और क्लासरूम से उनका नाता बचपन में ही छूट गया था, आज वही प्रांगण उनके नए सपनों को उड़ान दे रहा है। उनके लिए यह केवल एक इम्तिहान पास करने भर का जरिया नहीं है, बल्कि उस समय को दोबारा जीने का प्रयास है जिसे हालात ने उनसे छीन लिया था। इस बारे में उनका कहना है कि यह उस चीज को वापस पाने का मौका है जो हालात ने बचपन में उनसे छीन ली थी सीखने का मौका।\n\n \n\nसंघर्षों भरा पारिवारिक सफर\n बुशरा अपने माता-पिता स्वर्गीय ए. शिहाबुद्दीन और सुलैखा की इकलौती संतान हैं। पिता के दुनिया से चले जाने के बाद घर की पूरी कमान उनकी मां के कंधों पर आ गई थी। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उनकी मां ने एक सुपरमार्केट में नौकरी की और बेटी की पढ़ाई की इच्छा को जिंदा रखने में हरसंभव सहायता प्रदान की। मां का यह संबल बुशरा के लिए केवल पैसों की मदद नहीं था, बल्कि विकट परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की एक बड़ी प्रेरणा साबित हुआ।\n\n \n\nप्रशासनिक सम्मान और प्रेरणा\n बुशरा के इस जज्बे और संघर्ष को जिला साक्षरता मिशन की ओर से भी सराहा गया है। अध्ययन केंद्र पर आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान जिला साक्षरता मिशन के समन्वयक पी.वी. सस्ता प्रसाद ने उन्हें शॉल भेंट कर सम्मानित किया। उनका यह सफर इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि ज्ञान अर्जन के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती। यदि किसी के दिल में कुछ नया सीखने की जिद बाकी हो, तो वह जीवन के किसी भी पड़ाव पर अपनी मंजिल हासिल कर सकता है। एलकेजी में छूटी उनकी पढ़ाई अब दसवीं की दहलीज तक आ पहुंची है, जो केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि कभी न हार मानने वाले जज्बे की जीत है।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर दिखाती है कि शिक्षा के क्षेत्र में उम्र या शुरुआती बाधाएं कभी भी अंतिम रुकावट नहीं बनतीं।\n\n• भारत में: देश भर के उन युवाओं और वयस्कों के लिए यह एक बड़ा उदाहरण है जो किसी कारणवश अपनी औपचारिक पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं। यह साक्षरता अभियानों के महत्व को रेखांकित करता है जो छूटे हुए सपनों को दोबारा पंख देते हैं।\n\n• मलप्पुरम में: स्थानीय स्तर पर यह खबर जिला साक्षरता मिशन की उपयोगिता को दर्शाती है, जिससे इस क्षेत्र के अन्य ड्रॉपआउट विद्यार्थियों को भी आगे आकर अपनी पढ़ाई पूरी करने की प्रेरणा मिलती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बुशरा की औपचारिक शिक्षा किस कक्षा में रुक गई थी?\nपरिवार की मुश्किलों के कारण बुशरा की पढ़ाई एलकेजी कक्षा में ही रुक गई थी।\n\n2. बुशरा ने दोबारा पढ़ाई किस वर्ष और किस माध्यम से शुरू की?\nउन्होंने वर्ष 2018 में साक्षरता मिशन के गैर-औपचारिक शिक्षा कार्यक्रम के जरिए दोबारा पढ़ाई शुरू की।\n\n3. बुशरा ने चौथी कक्षा की परीक्षा किस उम्र में पास की थी?\nउन्होंने 17 वर्ष की उम्र में चौथी कक्षा की समकक्ष परीक्षा पास की थी।\n\n4. वर्तमान में बुशरा किस परीक्षा की तैयारी कर रही हैं?\nबुशरा वर्तमान में 10वीं कक्षा की इक्विवेलेंसी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।\n\n5. बुशरा वर्तमान में कहाँ बैठकर पढ़ाई कर रही हैं?\nवह कोट्टाप्पाडी गवर्नमेंट बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल के इक्विवेलेंसी स्टडी सेंटर में पढ़ाई कर रही हैं।\n\n6. बुशरा के माता-पिता कौन हैं?\nवह अपने माता-पिता स्वर्गीय ए. शिहाबुद्दीन और सुलैखा की इकलौती बेटी हैं।\n\n7. बुशरा की पढ़ाई में उनकी मदद किसने की?\nपिता के निधन के बाद उनकी मां ने सुपरमार्केट में नौकरी करके उनकी पढ़ाई में हरसंभव मदद की।\n\n8. बुशरा को किसने सम्मानित किया?\nजिला लिटरेसी मिशन के समन्वयक पी.वी. सस्ता प्रसाद ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।\n\nप्रेरणा और सबक\nबुशरा के जीवन के संघर्ष से कोई भी व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ने के लिए ये महत्वपूर्ण सबक ले सकता है:\n\n• सीखने की कोई उम्र नहीं होती: शुरुआती मुश्किलें चाहे जितनी बड़ी हों, यदि भीतर सीखने की इच्छा जीवित है तो किसी भी पड़ाव पर दोबारा शुरुआत की जा सकती है।\n\n• मुश्किल वक्त में परिवार का साथ: विपरीत परिस्थितियों में अपनों का मानसिक और आर्थिक संबल व्यक्ति को बड़ी से बड़ी मंजिल तक पहुंचा सकता है।\n\n• निरंतर प्रयास की ताकत: चौथी और सातवीं कक्षा की समकक्ष परीक्षा पास करने के बाद दसवीं तक पहुँचना यह सिखाता है कि छोटे कदम भी बड़े लक्ष्यों तक पहुँचाते हैं।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-09-06",
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    "बुशरा सफलता की कहानी",
    "केरल साक्षरता मिशन",
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    "प्रेरक कहानियां"
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