खंडवा में महिलाओं को मिल रहा घर बैठे काम, ट्रेनिंग देकर बनाया जा रहा आत्मनिर्भर खंडवा में शुरू हुए 'जीवनदान ग्रुप' की मदद से वे महिलाएं भी कमाई कर पा रही हैं, जो घर की जिम्मेदारियों के चलते बाहर जाकर काम नहीं कर सकतीं. ग्रुप पहले महिलाओं को ट्रेनिंग देता है, फिर उनकी काबिलियत के हिसाब से उन्हें काम सौंपता है. खंडवा शहर की गलियों में इन दिनों एक नई पहल चर्चा में है, जो उन महिलाओं के लिए उम्मीद बनकर आई है जो घर-परिवार की जिम्मेदारियों के चलते बाहर निकलकर नौकरी नहीं कर पातीं. बच्चों की देखभाल, घर का काम और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच कई महिलाएं चाहकर भी कमाई का जरिया नहीं ढूंढ पातीं. ऐसी ही महिलाओं के लिए 'जीवनदान ग्रुप' नाम से एक मुहिम शुरू हुई है, जिसका इरादा साफ है, उन्हें घर बैठे काम देकर आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ा करना. पांच महिलाओं और कुछ समाजसेवियों ने मिलकर रखी नींव इस ग्रुप को खड़ा करने में शहर की पांच महिलाओं के साथ-साथ कुछ समाजसेवी पुरुषों की भी बड़ी भूमिका रही है. पुरुषों की तरफ से सुनील दत्त शर्मा, रविराज पटेल, कन्हैया सरंगत और मानसिंह पटेल जैसे नाम इस टीम में शामिल हैं, वहीं मोनिका श्रीवास और सोनिका श्रीवास के साथ रेणु बिरदरी, रेखा योगी और शुभ यादव महिलाओं की तरफ से इस मुहिम को आगे बढ़ा रही हैं. इन सभी का मकसद एक ही है, घर में बैठी महिलाओं को काम के साथ जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाना. पहले सिखाया जाएगा हुनर, फिर मिलेगा काम ग्रुप की सदस्य मोनिका श्रीवास के मुताबिक, इसमें शामिल होने वाली महिलाओं को सबसे पहले जरूरी ट्रेनिंग दी जाएगी, उसके बाद ही उन्हें काम सौंपा जाएगा. इसके तहत राखी बनाना, राखी बेचना, कपड़े सिलना, साड़ी में फॉल-पीको लगाना और ब्लाउज-पेटीकोट तैयार करने जैसे कई काम सिखाए जाएंगे. जो महिलाएं स्कूली पढ़ाई पूरी नहीं कर पाईं या जिनके पास किसी खास हुनर का प्रमाण नहीं है, उन्हें भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, बल्कि उनकी अपनी क्षमता देखकर उन्हें भी काम पर लगाया जाएगा. जिसे सिलाई नहीं आती, उसके लिए भी रास्ता खुला शांतिलाल पटेल का कहना है कि सिलाई हर महिला को आनी जरूरी नहीं है. जिन महिलाओं को यह हुनर नहीं आता, वे चाहें तो साड़ियां बेचने या राखियां तैयार करने के काम से जुड़ सकती हैं. यानी हर महिला को उसकी अपनी योग्यता के हिसाब से रोजगार का कोई न कोई विकल्प दिया जा रहा है, ताकि कोई भी इस मुहिम से वंचित न रह जाए. रजिस्ट्रेशन के लिए देने होंगे आधार, पैन और बैंक की डिटेल इस पहल से जुड़ने की इच्छुक महिलाओं को पहले अपना रजिस्ट्रेशन कराना होता है, जिसमें उन्हें आधार कार्ड, पैन कार्ड के साथ-साथ बैंक पासबुक से जुड़ी जानकारी भी जमा करानी होती है. ग्रुप की मानें तो यह पूरी प्रक्रिया इसलिए रखी गई है ताकि काम व्यवस्थित तरीके और जिम्मेदारी के साथ चले, जिससे महिलाओं को लगातार काम और तय आय मिलती रहे. घर से या केंद्र पर, दोनों जगह मिलेगा काम, हर महीने होगी कमाई ग्रुप के अनुसार महिलाएं अपनी मेहनत के हिसाब से हर महीने पैसे कमा सकेंगी. उनके पास दो विकल्प रहेंगे, चाहें तो घर से ही काम करें, या फिर ग्रुप के केंद्र पर आकर काम पूरा करें. इस सुविधा का सबसे ज्यादा फायदा उन महिलाओं को होगा जो किसी वजह से घर से बाहर निकलकर काम नहीं कर पातीं. सिर्फ कमाई नहीं, आत्मविश्वास और पहचान की भी कोशिश 'जीवनदान ग्रुप' की यह पहल केवल महिलाओं को काम दिलाने तक सीमित नहीं है. इसका मकसद उन्हें आत्मविश्वास से भरना और समाज में एक अलग पहचान दिलाना भी है. आने वाले समय में यह ग्रुप कितनी महिलाओं की जिंदगी संवारेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल खंडवा के कई घरों में इस पहल ने उम्मीद की एक नई किरण जरूर जगाई है. इसका आप पर असर यह पहल सीधे तौर पर उन महिलाओं की जिंदगी बदल सकती है जो घर की जिम्मेदारियों के चलते बाहर जाकर कमाई नहीं कर पातीं. • भारत में: यह मॉडल दिखाता है कि छोटे शहरों में भी सामाजिक पहल के जरिए महिलाओं को बिना घर से बाहर निकले नियमित आमदनी से जोड़ा जा सकता है. • खंडवा में: यहां की महिलाएं आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक के साथ रजिस्ट्रेशन कराकर राखी बनाने, सिलाई, फॉल-पीको जैसे कामों की ट्रेनिंग ले सकती हैं और घर या ग्रुप के केंद्र से काम शुरू कर सकती हैं. सवाल-जवाब 1. 'जीवनदान ग्रुप' क्या है? यह खंडवा में शुरू हुई एक पहल है जो घर बैठे महिलाओं को ट्रेनिंग देकर रोजगार से जोड़ती है. 2. इस ग्रुप की शुरुआत किसने की? शहर की 5 महिलाओं और सुनील दत्त शर्मा, रविराज पटेल, कन्हैया सरंगत, मानसिंह पटेल समेत कुछ समाजसेवी पुरुषों ने मिलकर इसे शुरू किया. 3. महिलाओं को किस तरह का काम दिया जाता है? राखी बनाना, राखी बेचना, सिलाई, साड़ी में फॉल-पीको और ब्लाउज-पेटीकोट सिलने जैसे काम दिए जाते हैं. 4. जुड़ने के लिए क्या दस्तावेज चाहिए? रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक की जानकारी देनी होती है. 5. जिन महिलाओं को सिलाई नहीं आती, उनका क्या होगा? उन्हें साड़ी बेचने या राखी तैयार करने जैसे दूसरे विकल्प दिए जाते हैं. 6. क्या महिलाएं घर से काम कर सकती हैं? हां, महिलाएं घर से या ग्रुप के केंद्र पर आकर, दोनों तरीकों से काम कर सकती हैं. 7. महिलाओं की कमाई कैसे तय होगी? ग्रुप के मुताबिक महिलाएं अपनी मेहनत के हिसाब से हर महीने कमाई कर सकेंगी. प्रेरणा और सबक 'जीवनदान ग्रुप' की कहानी बताती है कि छोटे शहर में भी सोच बदलकर कैसे बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. • हुनर सिखाकर आगे बढ़ाना: ग्रुप सीधे काम देने की बजाय पहले ट्रेनिंग देता है, जिससे महिलाएं लंबे समय तक खुद कमाई कर सकें. • हर किसी के लिए विकल्प: जिन महिलाओं को सिलाई नहीं आती, उनके लिए भी राखी बनाने या साड़ी बेचने जैसे विकल्प रखे गए, यानी किसी को उसकी कमी की वजह से बाहर नहीं रखा गया. • व्यवस्थित तरीके से काम: आधार, पैन और बैंक पासबुक जैसी जानकारी लेकर ग्रुप ने पूरी प्रक्रिया को भरोसेमंद और जिम्मेदार बनाया. • लचीलापन: महिलाओं को घर से या केंद्र पर, दोनों जगह से काम करने की छूट दी गई, जिससे हर महिला अपनी सुविधा के हिसाब से जुड़ सकती है. https://trendkia.com/success-stories/khandwa-men-mahilaon-ko-mila-raha-ghara-baithe-kama-treninga-dekara-banaya-ja-raha-atmanirbhara-9425 TrendKia — Har trend, sabse pehle.