# किसान अश्विनी 25 बीघा खेत में उगाते हैं 10 तरह की ऑर्गेनिक दालें, बाजार में बढ़िया दाम और मोटी कमाई

> मुरादाबाद के किसान अश्विनी ठाकुर बिना किसी रसायन के 20 से 25 बीघा जमीन पर करीब 10 प्रकार की ऑर्गेनिक दालें उगा रहे हैं, जिन्हें वे 120 रुपए किलो के भाव से बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

**Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-06-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/kisana-ashvini-25-bigha-kheta-men-ugate-hain-10-taraha-ki-rgenika-dalen-bajara-m-146

मुरादाबादः खेती-किसानी में अब बदलाव की बयार चल पड़ी है और किसानों का झुकाव लगातार ऑर्गेनिक खेती की तरफ बढ़ रहा है। कई किसान तो ऐसे हैं जिन्होंने पूरी तरह जैविक खेती को ही अपना जरिया बना लिया है। इन्हीं में से एक किसान दालों को प्राकृतिक तरीके से तैयार कर लोगों की थाली तक शुद्ध दाल पहुंचाने का काम कर रहे हैं। वे कई अलग-अलग किस्म की दालें उगाते हैं और इसमें किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते। पूरी तरह कुदरती ढंग से उगाई गई इन दालों को वे बाजार में बेचते हैं, जिससे उन्हें शानदार फायदा हो रहा है और उनकी आमदनी में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है।

अश्विनी ठाकुर ने लोकल 18 को बताया कि वे करीब 20 से 25 बीघा जमीन पर दालों की खेती करते हैं और यह पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से होती है, जिसमें किसी किस्म की मिलावट की गुंजाइश नहीं रहती। इस खेती में वे वर्मी कंपोस्ट, जीवामृत और केचुआ खाद का सहारा लेते हैं, ताकि सब कुछ शत-प्रतिशत ऑर्गेनिक बना रहे। उन्होंने बताया कि दाल तैयार हो जाने के बाद गांव की महिलाएं उसे वहीं चलने वाली चाखि (चक्की) के जरिए प्रोसेस करती हैं और फिर पैकिंग कर इसे बिक्री के लिए भेजा जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि उनके पास 8 से 10 तरह की दालें मौजूद हैं और ये सभी नॉन-पॉलिश हैं यानी इन पर किसी प्रकार की पॉलिश नहीं की जाती। उनके पास मूंग की दाल, मसूर की दाल, उड़द की दाल और अरहर की दाल समेत करीब 10 किस्म की दालें हैं। अश्विनी के मुताबिक उनकी इन प्राकृतिक दालों की मांग अलग-अलग राज्यों और जिलों से आती है, और सबसे ज्यादा डिमांड हरियाणा से देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि उन्होंने दामों को भी ज्यादा नहीं रखा है और 120 रुपए किलो के हिसाब से दाल बेच रहे हैं, जिसमें उन्हें अच्छा-खासा मुनाफा हो रहा है। साथ ही वे दूसरे किसानों से भी अपील करते हैं कि वे भी अधिक से अधिक ऑर्गेनिक खेती को अपनाएं।

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