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  "title": "कोडरमा के राहुल को नीट में मिले 595 अंक, ट्रक चालक पिता का सपना हुआ साकार",
  "summary": "कोडरमा के 19 वर्षीय राहुल कुमार ने नीट में 595 अंक और ऑल इंडिया रैंक 11591 हासिल की, महज एक साल पहले उनकी रैंक एक लाख से ज्यादा थी. ट्रक चालक पिता की मेहनत और मॉक टेस्ट पर फोकस से मिली यह कामयाबी अब पूरे परिवार को गर्व से भर रही है.",
  "content": "कोडरमा जिले के झुमरी इलाके में रहने वाले 19 साल के राहुल कुमार ने नीट मेडिकल प्रवेश परीक्षा में 595 अंक हासिल कर पूरे जिले में खुशी की लहर ला दी है. बालेश्वर यादव और बलिया देवी के बेटे राहुल ने इस परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 11591 और ओबीसी एनसीएल कैटेगरी में 5262वीं रैंक हासिल की है. यह कामयाबी अचानक नहीं मिली, बल्कि सालों की मेहनत, अनुशासन और डॉक्टर बनने के जज्बे का नतीजा है.\n\nपहली नाकामी से सीखकर एक साल में बदली किस्मत\nराहुल की शुरुआती पढ़ाई कोडरमा में ही हुई. 2023 में उन्होंने पीवीएसएस डीएवी पब्लिक स्कूल, कोडरमा से दसवीं पास की. इसके बाद उन्होंने एक सरकारी कॉलेज में दाखिला तो लिया, लेकिन नीट की तैयारी के लिए देश के जाने-माने कोचिंग हब कोटा का रुख किया, जहां लाखों छात्र हर साल मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने पहुंचते हैं. वहां करीब तीन साल तक राहुल ने पूरी लगन से पढ़ाई की और अपने लक्ष्य से कभी नजर नहीं हटाई. 2025 में उन्होंने पहली बार नीट परीक्षा दी थी, लेकिन तब उनकी रैंक एक लाख के पार चली गई थी. राहुल ने इस नाकामी को बोझ नहीं बनने दिया, बल्कि ठंडे दिमाग से अपनी कमजोरियों को समझने में जुट गए. इसके बाद उन्होंने रिवीजन, सेल्फ स्टडी और लगातार मॉक टेस्ट देने पर फोकस बढ़ाया. सिर्फ एक साल के भीतर रणनीति में आए इसी बदलाव का नतीजा रहा कि उनकी रैंक एक लाख से घटकर सीधे 11591 पर आ गई.\n\nपिता के कोरोना संक्रमित होने पर लिया था डॉक्टर बनने का फैसला\nसाल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान राहुल के पिता बालेश्वर यादव भी संक्रमित हो गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. उस मुश्किल दौर में अस्पतालों के हालात नजदीक से देखने के बाद राहुल ने उसी वक्त तय कर लिया था कि वह आगे चलकर डॉक्टर बनेंगे और जरूरतमंद लोगों की मदद करेंगे. इसी सोच के साथ उन्होंने मेडिकल फील्ड में करियर बनाने की ठान ली, और उसके बाद हर फैसला इसी लक्ष्य के इर्द-गिर्द लिया.\n\nरोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई, मॉक टेस्ट को बताया सबसे जरूरी\nराहुल अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता, टीचरों और नियमित अभ्यास को देते हैं. उन्होंने बताया कि कोटा में वह रोजाना 5 से 6 घंटे कोचिंग क्लास अटेंड करने के बाद 5 से 6 घंटे खुद से पढ़ाई करते थे, यानी हर दिन औसतन 10 से 12 घंटे किताबों के साथ बीतते थे. उनका मानना है कि नीट जैसी मुकाबले वाली परीक्षा में मॉक टेस्ट बहुत अहम भूमिका निभाते हैं. जितने ज्यादा मॉक टेस्ट दिए जाएं, परीक्षा हॉल में आत्मविश्वास और समय की प्लानिंग उतनी ही मजबूत होती है. एमबीबीएस पूरी करने के बाद राहुल की इच्छा हृदय रोग विशेषज्ञ यानी कार्डियोलॉजिस्ट बनने की है, ताकि वह दिल के मरीजों का बेहतर इलाज कर समाज की सेवा कर सकें.\n\nछह बहनों के इकलौते भाई, ट्रक चालक पिता ने नहीं होने दी पढ़ाई में कमी\nराहुल अपने घर में छह बहनों के इकलौते भाई हैं और उनकी इस उपलब्धि से पूरा परिवार बेहद खुश और गर्व से भरा हुआ है. पिता बालेश्वर यादव खुद सिर्फ दूसरी कक्षा तक ही स्कूल जा पाए थे, लेकिन उन्होंने हमेशा कोशिश की कि उनके सभी बच्चों को उनकी इच्छा के मुताबिक अच्छी शिक्षा मिले. खेती के साथ-साथ उन्होंने सालों तक ट्रक चलाकर कड़ी मेहनत की और बच्चों की पढ़ाई में कभी पैसों की कमी आड़े नहीं आने दी. आज मेहनत के इसी दौर के बूते उनके पास खुद के दो ट्रक हैं.\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: देश भर में नीट की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए राहुल की कहानी दिखाती है कि लगातार मॉक टेस्ट, रिवीजन और सेल्फ स्टडी से एक ही साल में रैंक में बड़ा सुधार लाया जा सकता है.\n• कोडरमा में: झुमरी सहित कोडरमा जिले के परिवारों और स्टूडेंट्स के लिए यह उपलब्धि प्रेरणा है कि सीमित आमदनी और संसाधनों में भी मेडिकल जैसी कठिन परीक्षा पास की जा सकती है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राहुल कुमार ने नीट में कितने अंक और रैंक हासिल की?\nराहुल ने 595 अंक के साथ ऑल इंडिया रैंक 11591 हासिल की है.\n\n2. ओबीसी एनसीएल श्रेणी में उनकी रैंक क्या है?\nओबीसी एनसीएल कैटेगरी में उनकी रैंक 5262 है.\n\n3. राहुल की पहली नीट परीक्षा का क्या नतीजा रहा था?\n2025 में पहली बार परीक्षा देने पर उनकी रैंक एक लाख से ज्यादा आई थी.\n\n4. राहुल ने डॉक्टर बनने का फैसला कब लिया?\n2020 में जब कोविड महामारी के दौरान उनके पिता संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती हुए थे.\n\n5. राहुल किस मेडिकल फील्ड में स्पेशलाइजेशन करना चाहते हैं?\nएमबीबीएस पूरी करने के बाद वह कार्डियोलॉजी यानी हृदय रोग विशेषज्ञ बनना चाहते हैं.\n\n6. राहुल के पिता क्या काम करते हैं?\nवह खेती के साथ ट्रक चालक का काम करते हैं और वर्तमान में उनके पास खुद के दो ट्रक हैं.\n\n7. राहुल के परिवार में कितने भाई-बहन हैं?\nराहुल छह बहनों के इकलौते भाई हैं.\n\n8. राहुल ने अपनी सफलता का श्रेय किसे दिया?\nउन्होंने अपने माता-पिता, शिक्षकों और नियमित मॉक टेस्ट अभ्यास को श्रेय दिया.\n\nप्रेरणा और सबक\n• असफलता को विश्लेषण में बदलें: पहली बार एक लाख से ज्यादा रैंक आने पर राहुल ने निराश होने के बजाय अपनी कमजोरियों को समझा.\n• मॉक टेस्ट को आदत बनाएं: उन्होंने लगातार मॉक टेस्ट देकर आत्मविश्वास और समय प्रबंधन दोनों मजबूत किए.\n• अनुशासित रूटीन अपनाएं: कोटा में रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करके उन्होंने तैयारी को नियमित आदत बनाया.\n• मुश्किल हालात को लक्ष्य में बदलें: पिता के कोविड संक्रमण के दौर ने ही राहुल को डॉक्टर बनने का संकल्प दिया.\n• परिवार के त्याग को याद रखें: सिर्फ दूसरी कक्षा तक पढ़े पिता ने खेती और ट्रक चलाकर बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी.",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-19",
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