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  "title": "कोटा के यशराज ने मशरूम की खेती से बदली किस्मत, 10 हजार रुपये से खड़ा किया 20 लाख का कारोबार",
  "summary": "कोटा में बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने वाले यशराज ने नौकरी की जगह मशरूम की खेती को चुना, सिर्फ 50 बैग और 10 से 15 हजार रुपये से शुरू किया गया यह स्टार्टअप आज सालाना 20 लाख रुपये का टर्नओवर छू रहा है और 15 से 20 लोगों को रोजगार दे रहा है.",
  "content": "कोटा में बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी करने वाले यशराज ने वह रास्ता चुना जिस पर आमतौर पर बहुत कम युवा चलते हैं. जहां देश के लाखों ग्रेजुएट डिग्री लेने के बाद भारी पैकेज वाली कॉरपोरेट नौकरी की तलाश में जुट जाते हैं, वहीं यशराज ने नौकरी की लाइन में लगने के बजाय मिट्टी और तकनीक को साथ लेकर अपना खुद का एग्री-स्टार्टअप खड़ा किया. आज उनके इस फैसले का नतीजा है कि उनका सालाना कारोबार 20 लाख रुपये के आंकड़े तक पहुंच चुका है और वे कोटा सहित पूरे हाड़ौती क्षेत्र के युवाओं के लिए मिसाल बन गए हैं.\n\nट्रेनिंग के दौरान समझा मशरूम की खेती का गणित\nयशराज बताते हैं कि कॉलेज की पढ़ाई के आखिरी दौर में उन्हें कृषि से जुड़ी अलग-अलग ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था. इस दौरान उनके सामने मशरूम की खेती, डेयरी फार्मिंग और वर्मी कंपोस्ट जैसे कई विकल्प आए. इसी दौरान उन्होंने एक अहम बात नोट की, राजस्थान एक गर्म इलाका है, इसलिए यहां मशरूम की मांग और खपत दोनों काफी ज्यादा हैं, लेकिन इस मांग के मुकाबले स्थानीय स्तर पर इसका उत्पादन लगभग न के बराबर होता है. मांग और आपूर्ति के बीच के इसी बड़े फासले को यशराज ने एक शानदार बिजनेस मौके की तरह देखा और तय कर लिया कि वे कोटा से ही मशरूम की खेती शुरू करेंगे. उनका मानना था कि जिस इलाके में डिमांड इतनी ज्यादा हो, वहां लोकल उत्पादन शुरू करना सबसे समझदारी भरा कदम होगा.\n\nपॉकेट मनी जोड़कर सिर्फ 50 बैग से हुई शुरुआत\nयशराज का शुरुआती सफर आसान नहीं था. उनके पास निवेश के लिए कोई बड़ी पूंजी नहीं थी और परिवार की तरफ से भी सिर्फ कॉलेज की फीस तक ही मदद मिल पाना संभव था. ऐसे हालात में उन्होंने कॉलेज के दिनों में ही अपने दोस्तों के साथ मिलकर महज 10 से 15 हजार रुपये इकट्ठा किए और सिर्फ 50 बैग के साथ एक छोटे से कमरे में मशरूम उगाने का काम शुरू कर दिया. जगह छोटी थी और संसाधन सीमित, लेकिन हौसला बड़ा था. पहले ही प्रयास में उन्हें करीब 15 से 20 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ, जिसने साबित कर दिया कि उनका आइडिया सिर्फ किताबी नहीं बल्कि व्यावहारिक तौर पर भी कामयाब हो सकता है.\n\nफंडिंग नहीं मिलने पर टूटने लगा था हौसला\nइस छोटे से प्रयोग को बड़े बिजनेस में बदलने के लिए यशराज ने कई बैंकों और प्राइवेट कंपनियों के दरवाजे खटखटाए. उन्होंने सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने के मकसद से अपने स्टार्टअप को एमएसएमई में रजिस्टर भी कराया. लेकिन शुरुआत में उन्हें कहीं से भी कोई आर्थिक मदद या लोन नहीं मिल सका. यशराज बताते हैं कि एक समय ऐसा भी आया जब वे बुरी तरह डीमोटिवेट हो चुके थे और इस काम को पूरी तरह बंद करने तक की सोच रहे थे. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय किसी तरह निजी स्तर पर पैसों का इंतजाम किया और मेहनत जारी रखी, भले ही कोई बड़ा संस्थागत सहारा उन्हें उस वक्त नहीं मिला था.\n\nआज सालाना 20 लाख का टर्नओवर, दर्जनों को रोजगार\nकड़े संघर्ष और अटूट भरोसे की बदौलत आज यशराज का यह मशरूम बिजनेस सालाना 20 लाख रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है. सबसे खास बात यह है कि इस स्टार्टअप के जरिए यशराज खुद तो आत्मनिर्भर बने ही हैं, साथ ही उन्होंने अपने साथ 15 से 20 स्थानीय लोगों को भी रोजगार दिया है. जो छोटा सा प्रयास स्टूडेंट लाइफ में महज 10 हजार रुपये से शुरू हुआ था, वह आज एक मुनाफे वाली इंडस्ट्री का रूप ले चुका है.\n\nयशराज का कहना है कि अगर आप किसी काम को पूरी शिद्दत के साथ अपने दिमाग में बिठा लें और मुश्किलों के आगे घुटने न टेकें, तो आपका संघर्ष एक दिन जरूर बड़ी सफलता में बदल जाता है.\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यशराज की कहानी दिखाती है कि खेती से जुड़ा कम लागत वाला स्टार्टअप भी कॉरपोरेट नौकरी जितना या उससे ज्यादा मुनाफा दे सकता है, जो कृषि क्षेत्र में करियर बनाने की सोच रहे युवाओं के लिए एक व्यावहारिक रास्ता दिखाता है.\n• कोटा-हाड़ौती में: स्थानीय स्तर पर मशरूम जैसी मांग वाली फसल का उत्पादन बढ़ने से हाड़ौती क्षेत्र के 15 से 20 लोगों को सीधा रोजगार मिल रहा है, और एमएसएमई रजिस्ट्रेशन के जरिए क्षेत्र के दूसरे युवाओं के लिए भी सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने का रास्ता खुलता दिख रहा है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यशराज कौन हैं?\nयशराज कोटा के रहने वाले हैं, जिन्होंने बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की और नौकरी की जगह मशरूम की खेती का स्टार्टअप शुरू किया.\n\n2. उन्होंने मशरूम की खेती ही क्यों चुनी?\nकॉलेज की ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने देखा कि गर्म इलाका होने के कारण राजस्थान में मशरूम की मांग ज्यादा है लेकिन स्थानीय उत्पादन बहुत कम, इसी गैप को उन्होंने अवसर के तौर पर देखा.\n\n3. उन्होंने शुरुआत कितने पैसों से की थी?\nदोस्तों के साथ मिलकर जोड़े गए 10 से 15 हजार रुपये और सिर्फ 50 बैग से उन्होंने यह काम शुरू किया था.\n\n4. पहले ही प्रयास में कितना मुनाफा हुआ?\nपहले प्रयास में ही उन्हें करीब 15 से 20 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ.\n\n5. क्या उन्हें बैंक या सरकार से मदद मिली?\nशुरुआत में कई बैंकों और प्राइवेट कंपनियों से संपर्क करने और एमएसएमई में रजिस्ट्रेशन कराने के बावजूद उन्हें कोई लोन या आर्थिक मदद नहीं मिली.\n\n6. आज उनका टर्नओवर कितना है?\nआज यशराज के मशरूम बिजनेस का सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपये तक पहुंच चुका है.\n\n7. उनके स्टार्टअप से कितने लोगों को रोजगार मिला है?\nउन्होंने अपने साथ 15 से 20 स्थानीय लोगों को रोजगार दिया है.\n\n8. यशराज का युवाओं के लिए क्या संदेश है?\nउनका कहना है कि किसी काम को पूरी शिद्दत से अपने दिमाग में बिठा लें और मुश्किलों से हार न मानें, तो संघर्ष एक दिन बड़ी सफलता में बदल जाता है.\n\nप्रेरणा और सबक\n• बाजार का गैप पहचानें: यशराज ने ट्रेनिंग के दौरान ही नोट कर लिया कि राजस्थान में मशरूम की मांग ज्यादा और उत्पादन कम है, और इसी गैप को उन्होंने अपने बिजनेस आइडिया में बदल दिया.\n• छोटे संसाधनों से शुरुआत करने से न डरें: महज 10 से 15 हजार रुपये और 50 बैग के साथ उन्होंने एक छोटे कमरे से अपना काम शुरू किया.\n• नाकामी के बावजूद डटे रहें: फंडिंग न मिलने और डीमोटिवेट होने के बाद भी उन्होंने काम बंद नहीं किया, बल्कि निजी स्तर पर फंड जुटाकर मेहनत जारी रखी.\n• सरकारी सिस्टम से जुड़ें: उन्होंने अपने स्टार्टअप को एमएसएमई में रजिस्टर कराया, ताकि आगे चलकर सरकारी योजनाओं का फायदा उठाया जा सके.\n• अपनी सफलता को दूसरों तक पहुंचाएं: कारोबार बढ़ाने के साथ-साथ उन्होंने 15 से 20 स्थानीय लोगों को भी रोजगार देकर अपनी कामयाबी को औरों तक फैलाया.",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-17",
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