लंदन में पढ़ाई के दौरान आया विचार बना बड़ी सफलता, जौनपुर के युवा ने एचवीआर मसाले से तीन राज्यों में बनाई पहचान लंदन से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद जौनपुर लौटे हर्षवर्धन रघुवंशी ने एचवीआर मसाले की नींव रखी। महज 18 महीने में यह ब्रांड उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के 20 से अधिक शहरों में फैल चुका है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से निकलकर विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद अपने गृहनगर में एक सफल विनिर्माण व्यवसाय खड़ा करने की कहानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। जौनपुर निवासी हर्षवर्धन रघुवंशी ने यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में अपनी मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की और वहीं रहते हुए भारतीय खाद्य पदार्थों के विशाल बाजार को समझा। भारत लौटने के बाद उन्होंने पारंपरिक व्यापार से अलग हटकर एचवीआर मसाले नाम से अपने मैन्युफैक्चरिंग कारोबार की नींव रखी। महज 18 महीने यानी डेढ़ साल के संक्षिप्त समय में उनका यह ब्रांड उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के विभिन्न बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ बना चुका है। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ यह व्यवसाय आज 20 से अधिक शहरों तक विस्तार कर चुका है और तेजी से आगे बढ़ रहा है। लंदन की पढ़ाई और वैश्विक बाजार में भारतीय मसालों की कमी लंदन में मास्टर्स की पढ़ाई के दौरान हर्षवर्धन रघुवंशी को भारतीय खानपान और व्यंजनों का काफी शौक था। जब वह वहां के एशियन स्टोर्स और सुपरमार्केट्स में भारतीय खाद्य सामग्री खरीदने जाते थे, तो उन्हें वहां गिने-चुने प्रमुख भारतीय ब्रांड ही नजर आते थे। विदेशी धरती पर भारतीय मसालों की सीमित उपलब्धता देखकर उनके मन में एक नया विजन पैदा हुआ। उन्होंने महसूस किया कि दुनिया भर में भारतीय खाने की मांग होने के बावजूद भारतीय मसाला ब्रांड्स की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति की अभी भी बड़ी गुंजाइश है। उसी समय उन्होंने सपना देखा कि वह एक दिन अपने गृह जिले जौनपुर से ऐसा मसाला ब्रांड तैयार करेंगे जिसकी चमक और पहचान विदेशों तक पहुंचे। उनका लक्ष्य था कि आने वाली पीढ़ियां गर्व से यह कह सकें कि उनके शहर के एक युवा ने एक वैश्विक ब्रांड की स्थापना की थी। मसाला कारोबार का चयन और दैनिक खपत की क्षमता मसाले के क्षेत्र को चुनने के पीछे हर्षवर्धन रघुवंशी की व्यावसायिक सोच एकदम स्पष्ट और व्यावहारिक थी। उनके अनुसार, भारत में मसालों का बाजार अत्यंत विशाल है क्योंकि यह उत्पाद आम नागरिक की दिनचर्या और दैनिक खानपान से सीधा जुड़ा हुआ है। देश में चाहे कोई व्यक्ति दिन में चार बार खाना खाए या पांच बार, हर भोजन की तैयारी में मसालों का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से होता है। इसी वजह से इस उद्योग में मांग की कमी कभी महसूस नहीं होती। इसके अलावा, मसालों में न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी निर्यात और विस्तार की असीम संभावनाएं छिपी हुई हैं। यही कारण था कि उन्होंने किसी अन्य सेक्टर के बजाय विनिर्माण और प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग में उतरने का फैसला किया। पारंपरिक पारिवारिक व्यापार से अलग नई पहचान की तलाश हर्षवर्धन रघुवंशी खुद को सेकंड जनरेशन एंटरप्रेन्योर यानी दूसरी पीढ़ी का उद्यमी मानते हैं। उनके पिता पहली पीढ़ी के व्यवसायी हैं, जिस कारण हर्षवर्धन ने अपने बचपन से ही घर के भीतर व्यापारिक गतिविधियों, व्यावसायिक निर्णयों और बाजार के तौर-तरीकों को बहुत करीब से देखा था। हालांकि, पारिवारिक व्यवसाय की स्थापित पृष्ठभूमि होने के बावजूद हर्षवर्धन सिर्फ उसी लीक पर नहीं चलना चाहते थे। वह अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहते थे और खुद की नई वैल्यू क्रिएट करने के प्रति प्रतिबद्ध थे। इसी सोच के तहत उन्होंने पारिवारिक व्यवसाय से हटकर एक नए विनिर्माण क्षेत्र में कदम रखा और स्क्रैच से अपना ब्रांड खड़ा करने की चुनौती स्वीकार की। स्वाद की विविधता और गुणवत्ता नियंत्रण की बारीक तकनीक मसाला उद्योग में सफलता पाने के लिए हर्षवर्धन गुणवत्ता को सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ मानते हैं। उनका मानना है कि भारत में भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता के कारण हर कुछ किलोमीटर की दूरी पर लोगों की स्वाद संबंधी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। कहीं के लोग अधिक तीखा खाना पसंद करते हैं, तो किसी अन्य क्षेत्र में चटपटा और संतुलित स्वाद पसंद किया जाता है। ऐसे विविधतापूर्ण बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए बेहतरीन सोर्सिंग, गुणवत्तापूर्ण कच्चा माल और फाइन प्रोडक्शन ही सबसे बड़ी ताकत साबित होती है। उनके अनुसार केवल अच्छी फसल खरीद लेना ही गुणवत्ता की गारंटी नहीं है। उत्पाद की शुद्धता और ताजगी बनाए रखने के लिए संपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया, वैज्ञानिक ग्रेडिंग, सुरक्षित स्टोरेज और एम्बीएंट टेम्परेचर यानी अनुकूल तापमान नियंत्रण पर निरंतर ध्यान देना अनिवार्य होता है। 18 महीनों में 20 शहरों तक विस्तार और बाजार की प्रतिस्पर्धा अपनी शुरुआत के महज डेढ़ साल के भीतर एचवीआर मसाले ने प्रभावशाली प्रगति की है। वर्तमान में यह ब्रांड 20 से अधिक शहरों में उपभोक्ताओं तक अपनी पहुंच बना चुका है। कंपनी के नेटवर्क से 150 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर जुड़ चुके हैं, जो उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के प्रमुख बाजारों में उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। कंपनी लगातार अपने नेटवर्क को और अधिक विस्तृत करने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि, इस सफर में स्थापित और बड़े खिलाड़ियों की मौजूदगी के बीच नए ब्रांड के रूप में जगह बनाना एक बड़ी चुनौती थी। बाजार में उपभोक्ताओं को नए स्वाद के प्रति आकर्षित करना और उनका विश्वास जीतना आसान नहीं था। इस दौरान उन्हें पाउच के आकार और पैकेट के रंग को लेकर कई तरह के सुझाव व आलोचनाएं भी मिलीं, जिन्हें उन्होंने सीख के रूप में स्वीकार कर अपने उत्पाद में सुधार किया। युवा उद्यमियों के लिए संदेश और धैर्य का महत्व हर्षवर्धन रघुवंशी नए और उभरते उद्यमियों को सफलता का एक मूल मंत्र देते हैं, और वह है धैर्य। उनका मानना है कि व्यवसाय की दुनिया में रातों-रात या तुरंत नतीजों की उम्मीद करना सही नहीं है। किसी भी नए वेंचर को स्थापित होने में समय लगता है। सफलता पाने के लिए लगातार कड़ी मेहनत करना, ग्राहकों और बाजार से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं को ध्यान से सुनना, अपनी कमियों और उत्पादों में समय-समय पर सुधार करना तथा अपने उत्पाद की गुणवत्ता पर अटूट भरोसा बनाए रखना ही वास्तविक रास्ता है। लंदन में पढ़ाई के दौरान आया एक विचार आज जौनपुर की धरती पर एचवीआर मसाले के रूप में एक मजबूत विनिर्माण व्यवसाय बन चुका है, जो यह साबित करता है कि सही विजन और धैर्य से स्थानीय प्रयास भी बड़े क्षितिज को छू सकते हैं। इसका आप पर असर यह समाचार उद्यमियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है: • भारत में: स्थानीय विनिर्माण और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलने से घरेलू मसालों की गुणवत्ता सुधर रही है और नए ब्रांड्स के आने से उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प मिल रहे हैं। • उत्तर प्रदेश और जौनपुर में: छोटे शहरों में विनिर्माण इकाइयां स्थापित होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। सवाल-जवाब 1. हर्षवर्धन रघुवंशी कौन हैं? हर्षवर्धन रघुवंशी जौनपुर के एक युवा उद्यमी हैं, जिन्होंने लंदन से मास्टर्स करने के बाद एचवीआर मसाले नामक मैन्युफैक्चरिंग ब्रांड की शुरुआत की है। 2. एचवीआर मसाले का कारोबार किन राज्यों में फैला है? यह ब्रांड वर्तमान में उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के 20 से अधिक शहरों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। 3. एचवीआर मसाले के पास कितना बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क है? कंपनी के साथ 18 महीनों के भीतर 150 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर जुड़ चुके हैं। 4. हर्षवर्धन ने मसाले के कारोबार को ही क्यों चुना? भारत में रोजाना के खानपान में मसालों की खपत लगातार बनी रहती है और इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े ब्रांड बनने की अपार संभावनाएं हैं। 5. ब्रांड की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किन बातों पर ध्यान दिया जाता है? बेहतर कच्चे माल की सोर्सिंग के अलावा मैन्युफैक्चरिंग, ग्रेडिंग, स्टोरेज और एम्बीएंट टेम्परेचर का विशेष ध्यान रखा जाता है। 6. नए उद्यमियों के लिए हर्षवर्धन की क्या सलाह है? उन्होंने नए उद्यमियों को तुरंत नतीजों की उम्मीद न करने और धैर्य के साथ लगातार सुधार करते रहने की सलाह दी है। प्रेरणा और सबक हर्षवर्धन रघुवंशी की इस व्यावसायिक यात्रा से प्रमुख सीखें: • वैश्विक विजन के साथ स्थानीय शुरुआत: विदेश में अध्ययन करते हुए बाजार की कमी को पहचानना और उसे अपने गृहनगर में एक व्यावसायिक अवसर में बदलना। • अपनी पहचान बनाना: पारिवारिक व्यवसाय के कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर खुद का नया मैन्युफैक्चरिंग वेंचर स्थापित करना। • गुणवत्ता पर केंद्रित दृष्टिकोण: उत्पाद की पैकेजिंग, ग्रेडिंग और तापमान नियंत्रण जैसे हर बारीक पहलू पर ध्यान देकर ग्राहकों का भरोसा जीतना। • आलोचनाओं से सीखना: पैकेट के साइज या रंग पर मिलने वाले फीडबैक को सकारात्मक रूप से स्वीकार कर उत्पाद में निरंतर सुधार करना। • धैर्य और दृढ़ता: त्वरित सफलता की उम्मीद करने के बजाय लगातार मेहनत और बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए संयम रखना। https://trendkia.com/success-stories/london-men-parhai-ke-daurana-aya-vichara-bana-bari-saphalata-jaunpur-ke-yuva-ne-hvr-spices-se-tina-rajyon-men-banai-pahachana-18730 TrendKia — Har trend, sabse pehle.