महराजगंज के छात्रों का कमाल: 15 हजार रुपये में बना डाला रेस्क्यू आरसी प्लेन, बाढ़ में फंसे लोगों तक पहुंचाएगा राहत सामग्री महराजगंज के आरपीआईसी स्कूल के तीन होनहार छात्रों—अंश गुप्ता, अमरेंद्र कुशवाहा और श्रेयांशी रौनीयार—ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य को आसान बनाने के लिए महज 15,000 रुपये की लागत से एक एडवांस आरसी (रिमोट-कंट्रोल्ड) प्लेन विकसित किया है। यह विमान आपात स्थिति में फंसे लोगों तक सीधे जरूरी सामग्री पहुंचाने में सक्षम है। प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर बाढ़ के दौरान बचाव दलों को अक्सर प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विषम परिस्थितियों और आधुनिक संसाधनों के अभाव में कई बार राहत कार्य समय पर पूरा नहीं हो पाता, जिससे जान-माल का नुकसान और भी बढ़ जाता है। इसी गंभीर और व्यावहारिक समस्या का तकनीकी समाधान निकालते हुए, उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के तीन युवा छात्रों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अंश गुप्ता, अमरेंद्र कुशवाहा और श्रेयांशी रौनीयार नाम के इन होनहार विद्यार्थियों ने महज 15,000 रुपये की किफायती लागत से एक ऐसा आरसी (रिमोट-कंट्रोल्ड) प्लेन तैयार किया है, जो आपातकालीन स्थिति में न केवल बचाव कार्य को रफ्तार देगा, बल्कि बाढ़ में फंसे लोगों तक जरूरी सामग्री की तेज और सुरक्षित डिलीवरी भी सुनिश्चित करेगा। बाढ़ और आपदा में संजीवनी बनेगा यह नया इनोवेशन भारत के विभिन्न राज्यों में हर साल बाढ़, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाएं बड़े पैमाने पर तबाही मचाती हैं। जब भी कोई ऐसी अप्रत्याशित घटना होती है, तो अलग-अलग बचाव और राहत दल तुरंत घटना क्षेत्र में पहुंचते हैं और लोगों की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। हालांकि, कई बार भौगोलिक बाधाओं, खराब मौसम और जरूरत के हिसाब से सही उपकरणों की कमी के कारण रेस्क्यू अभियान अपनी पूरी क्षमता से सफल नहीं हो पाता है। महराजगंज जिले के सिसवा क्षेत्र के बीजापार स्थित आरपीआईसी स्कूल (RPIC School) में पढ़ने वाले इन तीनों छात्रों ने इसी जमीनी चुनौती को बहुत करीब से समझा। उन्होंने महसूस किया कि अगर आसमान के रास्ते एक छोटा, नियंत्रित और कुशल उपकरण भेजा जाए, तो वह उन जगहों पर भी आसानी से पहुंच सकता है जहां बचाव दल की नाव या बड़े हेलीकॉप्टर का पहुंचना मुश्किल होता है। इसी सोच के साथ उन्होंने एक ऐसे आरसी प्लेन का डिजाइन तैयार किया, जिसे विशेष रूप से रेस्क्यू और डिलीवरी ऑपरेशंस के लिए कस्टमाइज किया गया है। यह प्लेन सुरक्षित रूप से घटनास्थल तक पहुंचकर तत्काल मदद मुहैया करा सकता है। इंटरनेट से मिली प्रेरणा, तकनीक का किया गहन अध्ययन इस अनूठे और समाजोपयोगी प्रोजेक्ट की शुरुआत एक छोटे से विचार से हुई, जिसे इन छात्रों ने डिजिटल दुनिया में खोजा। अंश गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने पहली बार इस तरह के रेस्क्यू विमानों का शुरुआती कॉन्सेप्ट इंटरनेट पर देखा था। इसके बाद, अंश, अमरेंद्र और श्रेयांशी की टीम ने मिलकर इस विचार को हकीकत में बदलने का दृढ़ निश्चय किया। उन्होंने इसके लिए आवश्यक हर तरह की तकनीक, एयरोडायनामिक्स, रिमोट कंट्रोल मैकेनिज्म और मोटर क्षमता के बारे में ऑनलाइन गहन रिसर्च की। सिर्फ वीडियो देखने तक सीमित न रहकर, इन युवाओं ने आरसी प्लेन के निर्माण से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जुटाई और इसके काम करने के सिद्धांत को बारीकी से समझा। इन युवाओं ने आरसी प्लेन के बारे में गहन जानकारी हासिल करने के बाद इसको बनाना शुरू किया। उनके अथक प्रयास और दिन-रात की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि आज यह छोटा लेकिन बेहद उपयोगी विमान पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया है। महज पंद्रह हजार के बजट में तैयार हुआ अत्याधुनिक विमान आमतौर पर रेस्क्यू ऑपरेशंस में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन्स और रिमोट-कंट्रोल्ड विमानों की कीमत काफी अधिक होती है, लेकिन इन छात्रों ने अपने इनोवेशन को बेहद किफायती बजट में पूरा किया है। अंश गुप्ता ने इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से बातचीत करते हुए बताया कि उनके इस अत्याधुनिक तकनीक से लैस आरसी प्लेन को बनाने में कुल मिलाकर लगभग 15,000 रुपये तक का खर्च आया है। इतने कम बजट में तैयार होने के बावजूद, यह प्लेन आधुनिक तकनीक से लैस है और कई तरह के महत्वपूर्ण काम करने में सक्षम है। इसको मुख्य रूप से इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि आपदा आने पर यह फंसे हुए लोगों की लोकेशन तक पहुंच सके। इसके माध्यम से जरूरत की सामग्री—जैसे फर्स्ट एड किट, दवाइयां या सूखा राशन—सीधे प्रभावित लोगों तक हवा के रास्ते पहुंचाई जा सकती है। इसके साथ ही, यह रेस्क्यू ऑपरेशंस के दौरान बचाव दल को सही दिशा दिखाने और स्थिति का जायजा लेने में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है। सफलतापूर्वक हुए दो परीक्षण, हर तरफ हो रही जमकर सराहना किसी भी नए आविष्कार की असली प्रामाणिकता उसके सफल परीक्षण पर निर्भर करती है। इस आरसी प्लेन के मामले में भी छात्रों की टीम ने इसे पूरी तरह से परखने का काम किया है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद, अंश, अमरेंद्र और श्रेयांशी की टीम ने इस विमान को दो बार सफलतापूर्वक उड़ाकर इसकी टेस्टिंग की है। परीक्षण की दोनों उड़ानों के परिणाम पूरी तरह से सकारात्मक आए हैं, जिससे यह साबित हो गया है कि यह तकनीक मैदान पर काम करने के लिए तैयार है। अगर इस आरसी प्लेन की बात करें, तो यह देखने में बहुत ही आकर्षक है और आपदा प्रबंधन के लिहाज से बेहद फायदेमंद लगता है। इन युवाओं ने जिस नेक उद्देश्य के साथ इसे तैयार किया है, वह साफ तौर पर दिखाता है कि आज का युवा समाज में होने वाली घटनाओं को किस नजरिए से देखता है और उन चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक समय में क्या रचनात्मक प्रयास करता है। महराजगंज के इन छात्रों के आरसी प्लेन की अब खूब तारीफ की जा रही है और उनकी इस शानदार वैज्ञानिक प्रतिभा को हर स्तर पर भरपूर सराहना मिल रही है। इसका आप पर असर • आपदा प्रबंधन में: इस तरह के कम लागत वाले इनोवेशन से स्थानीय बचाव दलों को बाढ़ जैसी स्थिति में राहत सामग्री पहुंचाने का एक सस्ता और प्रभावी विकल्प मिल सकता है। • महराजगंज में: स्थानीय छात्रों की इस उपलब्धि से क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में नया सोचने की प्रेरणा मिलेगी। सवाल-जवाब 1. महराजगंज के छात्रों ने कौन सा उपकरण बनाया है? छात्रों ने एक अत्याधुनिक आरसी (रिमोट-कंट्रोल्ड) प्लेन तैयार किया है। 2. इस आरसी प्लेन को बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसे प्राकृतिक आपदाओं और बाढ़ के समय फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और रेस्क्यू अभियान में मदद करने के लिए बनाया गया है। 3. इस आरसी प्लेन को बनाने में कितना खर्च आया? इस विमान को बनाने में छात्रों को कुल मिलाकर लगभग 15,000 रुपये का खर्च आया है। 4. यह प्लेन किन छात्रों ने मिलकर बनाया है? इसे महराजगंज के बीजापार स्थित आरपीआईसी स्कूल के छात्र अंश गुप्ता, अमरेंद्र कुशवाहा और श्रेयांशी रौनीयार ने मिलकर बनाया है। 5. क्या इस आरसी प्लेन का सफल परीक्षण किया जा चुका है? हां, छात्रों की टीम ने इसे दो बार सफलतापूर्वक उड़ाकर टेस्ट किया है और इसके परिणाम पूरी तरह सकारात्मक रहे हैं। प्रेरणा और सबक • समस्या का समाधान खोजना: छात्रों ने बाढ़ के दौरान राहत पहुंचने में होने वाली देरी की समस्या को पहचाना और उसका व्यावहारिक तकनीकी समाधान निकाला। • इंटरनेट का सही उपयोग: सिर्फ मनोरंजन वाले वीडियो देखने के बजाय, उन्होंने इंटरनेट का उपयोग रिसर्च करने और एक उपयोगी मशीन बनाने की तकनीक सीखने के लिए किया। • कम संसाधनों में बड़ा काम: महज 15 हजार रुपये के सीमित बजट में अत्याधुनिक उपकरण तैयार करके उन्होंने साबित किया कि इनोवेशन के लिए बड़े फंड से ज्यादा मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। https://trendkia.com/success-stories/maharajganj-ke-chhatron-ka-kamala-15-hajara-rupaye-men-bana-dala-reskyu-rc-plane-barha-men-phnse-logon-taka-pahunchaega-rahata-sam-10060 TrendKia — Har trend, sabse pehle.