{
  "type": "article",
  "title": "मजदूरी छोड़कर शुरू किया कारोबार, छतरपुर के छिद्दू अनुरागी ऐसे बनाते हैं बच्चों की फेवरेट गुलाब लच्छी",
  "summary": "छतरपुर के लवकुश नगर के रहने वाले छिद्दू अनुरागी कभी मजदूरी करते थे, लेकिन गुलाब लच्छी बनाने का हुनर सीखकर उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया और आज इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं।",
  "content": "छतरपुर के लवकुश नगर के रहने वाले छिद्दू अनुरागी की कहानी संघर्ष से सफलता की एक मिसाल है। वह पिछले 25 सालों से अपने हाथों से गुलाब लच्छी तैयार कर रहे हैं और इसे बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। एक समय था जब वह मजदूरी करके अपने परिवार का खर्च चलाते थे, लेकिन जब आमदनी से गुजर बसर होना मुश्किल हो गया, तो उन्होंने जीवन में एक नया रास्ता चुना और गुलाब लच्छी बनाने की कला सीख ली। आज यही हुनर उनकी बढ़ती उम्र में उनके लिए बड़ा सहारा बना हुआ है।\n\nगुलाब लच्छी बनाने की अनूठी विधि और सामग्री\n55 वर्षीय छिद्दू अनुरागी बताते हैं कि यह कला उन्होंने अपने मोहल्ला में रहने वाले बाहर के लोगों से सीखी थी जो गुलाब लच्छी बनाना जानते थे। इसे तैयार करने में मैदा, शक्कर और डालडा का इस्तेमाल किया जाता है। बनाने की प्रक्रिया काफी हद तक गजक या सोन हलवा जैसी होती है, जिसमें काफी मेहनत लगती है। इसे कई घंटों तक लगातार खींचना पड़ता है। मौसम की बात करें तो इसे केवल ठंड और बरसात के महीनों में ही बनाया जा सकता है, क्योंकि गर्मी के मौसम में तापमान अधिक होने के कारण यह पिघलने लगती है।\n\nपैदल घूमकर और हाट बाजारों में होती है बिक्री\nछिद्दू अपनी इस खास मिठाई को बेचने के लिए सिर्फ लवकुश नगर तक ही सीमित नहीं रहते हैं, बल्कि आसपास के तमाम गांवों और कस्बों में भी जाते हैं। छतरपुर जिले में लगने वाले सभी हाट बाजारों में उनकी यह मिठाई खूब बिकती है। सफर के लिए उन्हें केवल बसों का किराया खर्च करना पड़ता है। इस छोटे कारोबार को चलाने के लिए उन्हें किसी बड़े संसाधन की आवश्यकता नहीं होती है। उन्हें बाजार में घूमने के लिए मोटरसाइकिल या साइकिल की भी जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि वह पैदल ही घूम-घूम कर गुलाब लच्छी बेचते हैं।\n\nकमाई और बाजार की मांग\nछिद्दू बताते हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा मुनाफा हाट बाजार के दिनों में होता है क्योंकि वहां हजारों लोगों की भीड़ जुटती है। नतीजा यह होता है कि उनका सारा सामान महज 1 या 2 घंटे के भीतर ही पूरी तरह बिक जाता है। वह रोजाना आसानी से 1500 रुपए की गुलाब लच्छी बेच लेते हैं और सभी तरह के खर्च निकालने के बाद उनके पास करीब 500 रुपए की शुद्ध बचत हो जाती है। हालांकि गुलाब लच्छी की मांग साल भर बनी रहती है, लेकिन गर्मी के मौसम में उत्पादन बंद करना पड़ता है क्योंकि गर्मी में यह टिक नहीं पाती।\n\nऋतु के अनुसार बदलते हैं काम और दाम\nबरसात और ठंड के मौसम में यह कारोबार बहुत बढ़िया चलता है और सबसे ज्यादा डिमांड ठंड के सीजन में ही होती है। गर्मियों के महीनों में जब गुलाब लच्छी नहीं बनती है, तब वह आतिशबाजी का काम संभालते हैं। ठंड के सीजन में इसकी कीमत और मांग दोनों खास होती हैं। अभी यह 10 रुपए की 50 ग्राम के हिसाब से बिक रही है, लेकिन ठंड जैसे-जैसे बढ़ती है, इसकी मात्रा में बदलाव आ जाता है और ठंड के सीजन में 10 रुपए में इसकी मात्रा कम हो जाती है। छिद्दू का मानना है कि यदि उन्होंने समय रहते यह हुनर नहीं सीखा होता, तो आज भी उन्हें मजदूरी ही करनी पड़ रही होती।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गुलाब लच्छी बनाने के लिए किन मुख्य चीजों की आवश्यकता होती है?\nगुलाब लच्छी तैयार करने के लिए मुख्य रूप से मैदा, शक्कर और डालडा का इस्तेमाल किया जाता है।\n\n2. छिद्दू अनुरागी अपनी गुलाब लच्छी बेचने के लिए कहां-कहां जाते हैं?\nवह लवकुश नगर के अलावा आसपास के गांवों और छतरपुर जिले में लगने वाले सभी हाट बाजारों में बेचने जाते हैं।\n\n3. गुलाब लच्छी को केवल ठंड और बरसात में ही क्यों बनाया जाता है?\nगर्मी के मौसम में तापमान अधिक होने के कारण गुलाब लच्छी पिघलने लगती है, इसलिए इसे सिर्फ ठंड और बरसात में ही बनाया जा सकता है।\n\n4. छिद्दू अनुरागी गर्मियों के मौसम में क्या काम करते हैं?\nगुलाब लच्छी न बना पाने की स्थिति में गर्मियों के दौरान वह आतिशबाजी का काम करते हैं।\n\n5. एक दिन में गुलाब लच्छी बेचकर कितनी कमाई हो जाती है?\nवह हर दिन आसानी से 1500 रुपए की गुलाब लच्छी बेच लेते हैं, जिसमें से खर्च काटकर करीब 500 रुपए की बचत होती है।\n\nप्रेरणा और सबक\nछिद्दू अनुरागी की इस प्रेरक यात्रा से निम्नलिखित महत्वपूर्ण सीख ली जा सकती हैं:\n\n• नया कौशल सीखना: कठिन समय में पारंपरिक मजदूरी से आगे बढ़कर कोई नया हुनर या हस्तकला सीखकर जीवन की दिशा बदली जा सकती है।\n• मौसम के अनुसार ढलना: व्यवसाय में मौसम की अनिश्चितता को समझते हुए गर्मियों में आतिशबाजी जैसे वैकल्पिक काम अपनाकर साल भर आय सुनिश्चित की जा सकती है।\n• साधनहीनता बाधा नहीं: बड़ा कारोबार शुरू करने के लिए भारी-भरकम संसाधनों या वाहनों की जरूरत नहीं होती, बल्कि मेहनत और पैदल यात्रा से भी काम चल सकता है।\n• स्थानीय बाजार की समझ: अपने आसपास के हाट बाजारों और ग्रामीण इलाकों की मांग को पहचानकर सही जगह पर उत्पाद बेचने से मुनाफा बढ़ाया जा सकता है।",
  "url": "https://trendkia.com/success-stories/majaduri-chhorakara-shuru-kiya-karobara-chhatarpur-ke-chheddu-anuragi-aise-banate-hain-bachchon-ki-phevareta-gulab-lachhi-21895",
  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-08-25",
  "tags": [
    "गुलाब लच्छी",
    "छतरपुर",
    "लवकुश नगर",
    "छिद्दू अनुरागी",
    "सफलता की कहानी"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}