# मझौलिया के नवीन चौधरी: लेह-लद्दाख से दिल्ली PWD विभाग तक, CBI छापे के बावजूद रहा दामन साफ

> दरभंगा के मझौलिया गांव के नवीन कुमार चौधरी ने 1994 में UPSC में छठी रैंक हासिल की थी और आज वे दिल्ली सरकार में PWD विभाग के प्रधान सचिव हैं, बीच में एक CBI जांच से भी गुजर चुके हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/majhaulia-ke-naveen-chaudhary-leh-ladakh-se-delhi-pwd-vibhaga-taka-cbi-chhape-ke-bavajuda-raha-damana-sapha-28291 · **Language:** Hindi
**Tags:** नवीन कुमार चौधरी, UPSC रिजल्ट, दरभंगा, दिल्ली PWD, लेह-लद्दाख, CBI जांच, IAS अधिकारी, मिथिला

बिहार के दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड स्थित मझौलिया गांव के एक बेटे ने प्रशासनिक सेवा में ऐसी छाप छोड़ी है कि तीन दशक बाद भी उसकी चर्चा होती है। नवीन कुमार चौधरी आज दिल्ली सरकार में PWD विभाग के प्रधान सचिव हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्होंने लेह-लद्दाख की कठिन प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं और एक विवादित मामले में CBI की जांच का भी सामना किया।

## 1994 में गांव में मना था जश्न
मई 1994 में जब UPSC का नतीजा आया, तो नवीन चौधरी ने देशभर में छठी रैंक हासिल की थी। यह खबर मझौलिया गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में मिठाइयां बंटने लगीं। ग्रामीणों और आसपास के लोगों ने बताया कि उस दौर में इतनी ऊंची रैंक किसी स्थानीय युवा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी, और इस सफलता ने पूरे मिथिला क्षेत्र को गर्व से भर दिया था।

## जम्मू-कश्मीर कैडर से लेह-लद्दाख तक
अच्छी रैंक मिलने के बाद नवीन चौधरी ने जम्मू-कश्मीर कैडर चुना। यहां उन्होंने लेह-लद्दाख के डिप्टी कमिश्नर यानी डीसी समेत कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाली। इसी दौरान एक पावर प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में तत्कालीन उपराज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उन पर आरोप लगाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI ने उनके घर सहित कई ठिकानों पर छापेमारी की। हालांकि जांच में कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगा। इस पूरे प्रकरण को राजनीति से प्रेरित माना गया और नवीन चौधरी की छवि बेदाग बनी रही।

## क्लीन चिट के बाद मेघालय, फिर दिल्ली की पुकार
जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद उनका कैडर बदलकर मेघालय कर दिया गया। इसके बाद दिल्ली सरकार ने उन्हें अपने यहां बुला लिया। दिल्ली में शुरुआत में उन्हें यमुना नदी की सफाई जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसमें उन्होंने काफी हद तक सफलता हासिल की। इसी अनुभव और काम को देखते हुए वर्तमान में उन्हें PWD विभाग के प्रधान सचिव का दायित्व दिया गया है, जो दिल्ली सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में गिना जाता है।

## गांव को आज भी है अपने बेटे पर नाज़
मझौलिया के ग्रामीणों का कहना है कि नवीन चौधरी के IAS अधिकारी बनने से पूरे गांव का नाम रोशन हुआ है। हालांकि अब गांव के लोग यह उम्मीद नहीं रखते कि कोई एक अधिकारी अकेले पूरे गांव का विकास कर देगा, फिर भी मझौलिया गांव आज भी अपने इस बेटे की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. नवीन कुमार चौधरी कौन हैं?
वे बिहार के दरभंगा जिले के मझौलिया गांव के रहने वाले हैं और वर्तमान में दिल्ली सरकार में PWD विभाग के प्रधान सचिव हैं।

### 2. उन्होंने UPSC में कब और कौन सी रैंक हासिल की थी?
मई 1994 में घोषित परिणाम में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर छठी रैंक हासिल की थी।

### 3. रैंक मिलने के बाद उन्होंने कौन सा कैडर चुना?
उन्होंने जम्मू-कश्मीर कैडर चुना और वहां लेह-लद्दाख के डीसी सहित कई अहम पद संभाले।

### 4. CBI जांच का मामला क्या था?
लेह-लद्दाख में एक पावर प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में तत्कालीन उपराज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उन पर आरोप लगाए थे, जिसके बाद CBI ने उनके घर सहित कई जगह छापेमारी की।

### 5. जांच का क्या नतीजा निकला?
जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला और इस मामले को राजनीति से प्रेरित माना गया, उनकी छवि बेदाग रही।

### 6. क्लीन चिट के बाद उनका कैडर क्या बदला?
क्लीन चिट मिलने के बाद उनका कैडर मेघालय कर दिया गया था, बाद में दिल्ली सरकार ने उन्हें बुला लिया।

### 7. दिल्ली में उन्हें सबसे पहले कौन सी जिम्मेदारी मिली?
दिल्ली में उन्हें सबसे पहले यमुना नदी की सफाई की जिम्मेदारी दी गई, जिसमें उन्होंने काफी हद तक सफलता हासिल की।

### 8. गांव वाले उनके बारे में क्या कहते हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि उनके IAS अधिकारी बनने से गांव का नाम रोशन हुआ है, और आज भी मझौलिया गांव उन पर गर्व करता है।

## प्रेरणा और सबक
नवीन कुमार चौधरी की कहानी उन युवाओं के लिए सीख है जो मुश्किल हालात में भी अपने काम पर भरोसा रखते हैं।

- **पढ़ाई पर फोकस:** एक छोटे गांव से निकलकर देशभर में छठी रैंक हासिल करना दिखाता है कि सीमित संसाधनों में भी मेहनत से बड़ा लक्ष्य पाया जा सकता है।
- **चुनौतीपूर्ण जगहों से न घबराना:** उन्होंने आसान रास्ता चुनने के बजाय जम्मू-कश्मीर कैडर और लेह-लद्दाख जैसी कठिन पोस्टिंग स्वीकार कीं।
- **आरोपों के दौर में धैर्य:** CBI छापे और आरोपों के बीच भी उन्होंने अपना काम जारी रखा, और समय ने उनकी बेदाग छवि को साबित कर दिया।
- **काम से मिलती है पहचान:** यमुना सफाई जैसी मुश्किल जिम्मेदारी में मिली सफलता ने ही उन्हें दिल्ली में और बड़ा दायित्व दिलाया।
- **जड़ों से जुड़ाव:** इतने बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी उनका गांव आज उन्हें अपनी पहचान मानता है, जो सफलता के बाद विनम्र बने रहने की सीख देता है।

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