# मां के निधन और सात साल की छूटी पढ़ाई के बाद अनेग सिंह पहले प्रयास में बने एसडीएम, साझा की अपनी रणनीति

> बचपन में मां को खोने और सात साल बाद पढ़ाई दोबारा शुरू करने वाले अनेग सिंह ने वर्ष 2023 में पहले ही प्रयास में यूपीपीसीएस क्रैक किया। चुनार में बतौर एसडीएम कार्यरत अनेग सिंह ने सिविल सेवा की तैयारी और कार्यशैली को लेकर अनुभव साझा किए।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/man-ke-nidhana-aura-sata-sala-ki-chhuti-parhai-ke-bada-aneg-singh-pahale-prayasa-men-bane-sdm-sajha-ki-apani-rananiti-41595 · **Language:** Hindi
**Tags:** अनेग सिंह, यूपीपीसीएस, एसडीएम चुनार, मिर्जापुर, सफलता की कहानी, सिविल सेवा परीक्षा, कासगंज, आगरा

जीवन की सबसे कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय करने वाले अफसरों की कहानियां युवाओं को प्रेरित करती हैं। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में तैनात एसडीएम अनेग सिंह का संघर्ष भी कुछ ऐसा ही रहा है। मूल रूप से आगरा जिले के रहने वाले अनेग सिंह के सिर से बचपन में ही मां का साया उठ गया था। मां के असामयिक निधन के कारण उनकी नियमित शिक्षा में एक लंबा विराम लग गया और वे लगभग 7 वर्षों तक विद्यालय से दूर रहे। विपरीत हालातों के बीच जब उन्होंने दोबारा अध्ययन शुरू किया, तो उम्र और समय के फासले को पाटने के लिए उन्हें दो कक्षाओं को छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने निरंतर लगन और कड़े परिश्रम से पढ़ाई में वापसी की, जिसका नतीजा यह रहा कि वर्ष 2023 में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा पास कर ली।

## शुरुआती पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन और अकादमिक रिकॉर्ड
चुनार के एसडीएम अनेग कुमार सिंह ने अपने शैक्षणिक सफर के बारे में विस्तार से बात करते हुए बताया कि सात साल के लंबे अंतराल के बाद जब वे दोबारा स्कूल लौटे, तो पढ़ाई की गति पकड़ने के लिए उन्हें दो क्लास स्किप करनी पड़ी थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत में कोई कमी नहीं आने दी। विद्यालयी परीक्षाओं में उन्होंने बेहतरीन अंक दर्ज किए, जिसमें दसवीं कक्षा में लगभग 80 प्रतिशत और बारहवीं में लगभग 88 प्रतिशत अंक शामिल रहे। उच्च शिक्षा के दौरान उन्होंने स्टैटिस्टिक्स ऑनर्स में स्नातक पूरा किया, जहां उन्हें लगभग 88 प्रतिशत अंक हासिल हुए। हालांकि, उनका मानना है कि स्कूली पाठ्यक्रम और सिविल सेवा परीक्षा की प्रकृति में जमीन-आसमान का अंतर होता है। स्कूल या कॉलेज में बेहतर अंक हासिल करने के बावजूद प्रशासनिक सेवा की प्रतियोगी परीक्षा के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ती है।

## सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी और कोचिंग पर दृष्टिकोण
यूपीपीसीएस परीक्षा की रणनीति पर बात करते हुए अनेग सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जनरल स्टडीज की तैयारी के लिए किसी भी कोचिंग संस्थान की मदद नहीं ली थी। सामान्य अध्ययन के विशाल पाठ्यक्रम को उन्होंने पूरी तरह स्वाध्याय के माध्यम से ही तैयार किया। वैकल्पिक विषय के तौर पर उन्होंने भूगोल की पढ़ाई के लिए एक कोचिंग संस्थान का सहारा जरूर लिया था, जबकि शेष पाठ्यक्रम खुद ही पूरा किया। प्रारंभिक परीक्षा में सफलता मिलने के बाद मुख्य परीक्षा के लिए उन्होंने कुछ विशिष्ट विषयों के मार्गदर्शन हेतु कोचिंग ली थी। इसके उपरांत साक्षात्कार के चरण को सफलतापूर्वक पार करते हुए वे पहले ही प्रयास में अधिकारी पद पर चयनित हो गए।

## प्रतियोगी छात्रों को सोशल मीडिया से बचने की सख्त सलाह
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे अभ्यर्थियों के लिए उन्होंने डिजिटल विकर्षणों से दूर रहने का मूलमंत्र दिया है। अनेग सिंह का कहना है कि जो अभ्यर्थी सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग करते हैं, उन्हें विशेष रूप से परीक्षा नजदीक आने पर इससे पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। सोशल मीडिया का स्वरूप ऐसा है कि यह बहुत तेजी से एक लत बन जाता है। यदि कोई व्यक्ति एक बार सामग्री देखना शुरू करता है, तो वह घंटों तक स्क्रीन पर लगा रहता है और उसे समय बीतने का आभास तक नहीं होता। सिविल सेवा जैसी गंभीर परीक्षा की तैयारी के दौरान समय की बचत अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखना ही समझदारी है।

## कासगंज से चुनार तक का सफर और त्वरित न्याय की प्राथमिकता
प्रशासनिक उत्तरदायित्वों को लेकर एसडीएम अनेग सिंह ने कहा कि एक अधिकारी के रूप में उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। ग्रामीण अंचलों में अक्सर जमीन से जुड़े छोटे-छोटे विवाद देखने को मिलते हैं, जहां सगे भाइयों के बीच भी झगड़े खड़े हो जाते हैं। ऐसे मामलों में सबसे प्रभावी तरीका यही होता है कि अधिकारी खुद मौके पर पहुंचे, वास्तविक स्थिति को समझे और निष्पक्षता से विवाद का निस्तारण करे। अपने सेवाकाल की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी सबसे पहली तैनाती कासगंज में बतौर फील्ड अफसर हुई थी। इसके पश्चात उन्होंने मिर्जापुर जिले की मड़िहान तहसील में दायित्व निभाया। मड़िहान के बाद वर्तमान में वे चुनार तहसील में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां वे लंबे समय से पदस्थ हैं। उनका ध्येय है कि दफ्तर पहुंचने वाले प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति के लिए न्याय का दरवाजा हमेशा खुला रहे और जो भी उनके पास आए, उसे वास्तविक न्याय अवश्य मिले।

## इसका आप पर असर
यह समाचार प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और ग्रामीण स्तर पर सरकारी सेवाओं से जुड़े नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

- **प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए:** सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सोशल मीडिया के व्यसन से बचने की सीधी व्यावहारिक सीख मिलती है। परीक्षा के अंतिम महीनों में स्क्रीन टाइम बंद करने से अध्ययन के लिए प्रतिदिन कई घंटे अतिरिक्त बचाए जा सकते हैं।
- **सामान्य अध्ययन की तैयारी पर:** अभ्यर्थियों को महंगे कोचिंग संस्थानों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय स्वाध्याय और सीमित मार्गदर्शन की रणनीति अपनाने का मार्ग दिखता है। जनरल स्टडीज की तैयारी बिना कोचिंग के भी व्यवस्थित रूप से की जा सकती है।
- **चुनार और मिर्जापुर के स्थानीय नागरिकों के लिए:** चुनार तहसील में भूमि विवाद और पारिवारिक संपत्ति बंटवारे के मामलों में पीड़ित पक्ष सीधे तहसील प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं। मौके पर जाकर जांच करने की नीति के तहत स्थानीय स्तर पर लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण संभव होता है।
- **कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे छात्रों के लिए:** स्कूली शिक्षा में लंबा अंतराल आने के बाद भी छात्र निरंतर अभ्यास से प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकते हैं। पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद पढ़ाई दोबारा शुरू करने वाले विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ता है।

## ऐसा क्यों हुआ
अनेग सिंह की प्रशासनिक सफलता और उनके कार्य दृष्टिकोण के पीछे कई व्यक्तिगत संघर्ष और व्यावहारिक अनुभव जुड़े हुए हैं।

- **प्रारंभिक पारिवारिक आघात:** बचपन में ही मां के निधन के कारण उनकी पढ़ाई में लगभग 7 वर्षों का गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुआ था। विपरीत आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उन्हें लंबे समय तक औपचारिक शिक्षा से अलग रहना पड़ा।
- **अध्ययन में वापसी और तेजी:** उम्र के अंतर को पाटने के लिए उन्होंने दोबारा विद्यालय जाने पर दो कक्षाएं छोड़ दी थीं। इसके बाद लगातार कठिन परिश्रम कर उन्होंने दसवीं, बारहवीं और सांख्यिकी स्नातक में 80 से 88 प्रतिशत तक अंक प्राप्त किए।
- **आत्मनिर्भर अध्ययन की रणनीति:** सिविल सेवा परीक्षा की प्रकृति को समझते हुए उन्होंने सामान्य अध्ययन के लिए भारी कोचिंग के बजाय सेल्फ-स्टडी पर ध्यान केंद्रित किया। केवल भूगोल विषय और मुख्य परीक्षा के कुछ घटकों के लिए ही उन्होंने बाहरी मार्गदर्शन लिया।
- **प्रशासनिक प्राथमिकताओं का निर्धारण:** कासगंज और मिर्जापुर की मड़िहान तहसील में फील्ड ऑफिसर के तौर पर कार्य करते हुए उन्होंने देखा कि ग्रामीण विवादों का समाधान मौके पर जाकर ही सबसे बेहतर तरीके से हो सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. अनेग सिंह वर्तमान में किस पद पर और कहां तैनात हैं?
अनेग सिंह वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले की चुनार तहसील में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के पद पर तैनात हैं।

### 2. अनेग सिंह मूल रूप से किस जिले के निवासी हैं?
अनेग सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के रहने वाले हैं।

### 3. अनेग सिंह की पढ़ाई में कितने वर्षों का व्यवधान आया था?
बचपन में मां के निधन के कारण उनकी पढ़ाई में लगभग 7 वर्षों का व्यवधान आया था, जिसके बाद उन्होंने दो कक्षाएं छोड़कर पढ़ाई शुरू की।

### 4. अनेग सिंह का शैक्षणिक प्रदर्शन कैसा रहा था?
उन्होंने दसवीं कक्षा में लगभग 80 प्रतिशत, बारहवीं में लगभग 88 प्रतिशत और स्टैटिस्टिक्स ऑनर्स स्नातक में लगभग 88 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे।

### 5. अनेग सिंह ने यूपीपीसीएस परीक्षा कब और किस प्रयास में उत्तीर्ण की?
अनेग सिंह ने वर्ष 2023 में अपने पहले ही प्रयास में यूपीपीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की थी।

### 6. क्या अनेग सिंह ने सिविल सेवा परीक्षा के लिए कोचिंग ली थी?
उन्होंने जनरल स्टडीज की तैयारी बिना कोचिंग के खुद से की थी, जबकि केवल भूगोल और मुख्य परीक्षा के कुछ विषयों के लिए कोचिंग ली थी।

### 7. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अनेग सिंह ने क्या सलाह दी?
उन्होंने छात्रों को सोशल मीडिया से दूर रहने की सलाह दी है, क्योंकि यह समय बर्बाद करने वाली एक बड़ी लत बन जाता है।

### 8. एसडीएम बनने के बाद उनकी पहली और अन्य पोस्टिंग कहां हुई थी?
उनकी पहली पोस्टिंग कासगंज में फील्ड अफसर के रूप में हुई थी, जिसके बाद वे मिर्जापुर की मड़िहान तहसील और फिर चुनार तहसील में पदस्थ हुए।

## प्रेरणा और सबक
कठिनतम परिस्थितियों से उबरकर सफलता के शिखर पर पहुंचने की यह यात्रा हर उस युवा के लिए प्रेरक है जो अभावों से जूझ रहा है।

- **कठिनाइयों के आगे कभी न झुकें:** मां के असामयिक निधन और सात वर्ष तक पढ़ाई से दूर रहने के बावजूद अनेग सिंह ने उम्मीद नहीं छोड़ी और दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लौटे।
- **आत्म-अध्ययन की शक्ति पर भरोसा रखें:** सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए सामान्य अध्ययन की तैयारी उन्होंने बिना किसी कोचिंग संस्थान के पूरी तरह खुद से की।
- **डिजिटल विकर्षणों पर अनुशासन साधें:** सोशल मीडिया की लत से समय की भारी बर्बादी होती है, जिसे त्यागकर लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना अनिवार्य है।
- **जनसेवा और न्याय के प्रति निष्ठा:** पदभार संभालने के बाद जनसमस्याओं के समाधान हेतु मौके पर जाकर त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की कार्यशैली अपनाएं।

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