# मास्टर जी का बेटा बनना चाहता था शिक्षक, अब यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बने छतरपुर के श्याम मणि दीक्षित

> छतरपुर जिले के लवकुशनगर निवासी 25 वर्षीय श्याम मणि दीक्षित ने यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती 2025 में सफलता हासिल की है, जबकि उनके शिक्षक पिता रामनारायण दीक्षित हमेशा चाहते थे कि बेटा भी शिक्षक बने। कई परीक्षाओं में असफलता झेलने के बाद आखिरकार श्याम मणि ने यह मुकाम हासिल किया।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-07-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/mastara-ji-ka-beta-banana-chahata-tha-shikshaka-aba-up-pulisa-men-saba-inspektara-bane-chhatarpur-ke-shyam-mani-dixit-9500 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूपी पुलिस भर्ती, सब इंस्पेक्टर, एसआई रिजल्ट 2025, छतरपुर, लवकुशनगर, श्याम मणि दीक्षित, सरकारी नौकरी, प्रेरणादायक कहानी

यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती 2025 का फाइनल रिजल्ट आते ही मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुशनगर कस्बे में एक परिवार की कहानी सुर्खियों में आ गई है। यहां के 25 वर्षीय श्याम मणि दीक्षित ने सब-इंस्पेक्टर पद पर सफलता पाई है, जबकि उनके पिता हमेशा से चाहते थे कि बेटा वर्दी नहीं बल्कि किताबें थामे और शिक्षक बने।

## गांव के सरकारी स्कूल से यूनिवर्सिटी तक का सफर
श्याम मणि की शुरुआती पढ़ाई गुधौरा गांव के सरकारी स्कूल से हुई, जहां उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने लवकुशनगर के सरकारी स्कूल में दाखिला लिया और वहीं से 12वीं पास की। ग्रेजुएशन के लिए उन्होंने छतरपुर के महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का रुख किया। घर में पिता खुद शिक्षक थे, इसलिए शुरू से मन में भी शिक्षक बनने का ही सपना था। इसी सोच के साथ उन्होंने लवकुशनगर से बीएड की डिग्री भी हासिल कर ली।

## भाई की राह देखकर बदला मन, चुना नया रास्ता
बीएड पूरा करने के बाद श्याम मणि बड़े भाई के साथ दिल्ली चले गए और वहीं रहकर आगे की तैयारी में जुट गए। लेकिन तभी उनके बड़े भाई शिक्षक बन गए और शादी के बाद घर में भाभी भी शिक्षिका के रूप में आ गईं। श्याम मणि बताते हैं कि परिवार में पहले से ही शिक्षक भरे होने के बाद उन्हें लगा कि अब कुछ अलग आजमाना चाहिए, इसी वजह से उन्होंने पुलिस लाइन में जाने का फैसला किया। हालांकि, वह यह भी बताते हैं कि उनकी असली प्राथमिकता पुलिस की वर्दी नहीं बल्कि कोई भी सरकारी नौकरी हासिल करना था।

## चोट से चूका मौका, रनिंग में हुए बाहर, फिर मिली मंज़िल
पुलिस लाइन में जाने का फैसला करने के बाद श्याम मणि ने सबसे पहले एमपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा दी। उन्होंने इसकी लिखित परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन चोटिल होने के चलते फिजिकल परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा दी, जिसकी लिखित परीक्षा में भी वह सफल रहे, लेकिन इस बार रनिंग की दौड़ में पिछड़ गए और बाहर हो गए। दो बार मौका हाथ से फिसलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती में उनका चयन हो गया।

## पिता बोले, वर्दी पसंद नहीं फिर भी बेटे पर पूरा भरोसा
पेशे से शिक्षक श्याम मणि के पिता रामनारायण दीक्षित बताते हैं कि उन्होंने अपनी पूरी नौकरी सादगी और ईमानदारी से की है, इसलिए वह चाहते थे कि बेटा भी उसी रास्ते पर चलते हुए शिक्षक बने। बेटे के सब-इंस्पेक्टर बनने पर उन्हें खुशी तो है, लेकिन वह मानते हैं कि पुलिस की नौकरी उन्हें पसंद नहीं है। उनका कहना है कि वह बेटे की नौकरी के विरोध में बिल्कुल नहीं हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि जिस परवरिश के साथ बेटे को बड़ा किया है, वह इस पद पर पूरी ईमानदारी से काम करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि बेटा आगे और पढ़ाई करके भविष्य में कुछ और भी बन सकता है।

रामनारायण दीक्षित यह भी बताते हैं कि श्याम मणि कभी वकालत की पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने इसकी इजाजत नहीं दी। उनका कहना है, "वकालत की कमाई झूठ और बेईमानी की होती है, यह मुझे पसंद नहीं था।" इसी वजह से उन्होंने बेटे को लॉ की पढ़ाई करने से रोक दिया और हमेशा चाहा कि वह शिक्षक ही बने।

## दादा को हनुमान जी की कृपा पर भरोसा
श्याम मणि के दादा राम अवतार दीक्षित इस सफलता से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि परिवार में इससे पहले कभी कोई पुलिस की नौकरी में नहीं रहा, ऐसे में नाती का सब-इंस्पेक्टर बनना पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है। वह इसका श्रेय गुधौरा गांव के हनुमान जी को देते हुए कहते हैं, "ये सब गुधौरा वाले हनुमान जी की कृपा है।"

## सवाल-जवाब

### 1. श्याम मणि दीक्षित कौन हैं और वह कहां से हैं?
वह छतरपुर जिले के लवकुशनगर के रहने वाले 25 वर्षीय अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती 2025 में सफलता हासिल की है।

### 2. श्याम मणि के पिता उन्हें क्या बनाना चाहते थे?
पिता रामनारायण दीक्षित खुद शिक्षक हैं और चाहते थे कि बेटा भी शिक्षक बने, उन्हें पुलिस की नौकरी पसंद नहीं थी।

### 3. श्याम मणि ने इससे पहले कौन सी परीक्षाएं दी थीं?
उन्होंने पहले एमपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा दी थी जिसमें लिखित पास कर ली पर चोट के कारण फिजिकल नहीं दे पाए, फिर यूपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा में लिखित पास करने के बाद रनिंग में बाहर हो गए।

### 4. श्याम मणि ने कहां तक पढ़ाई की है?
उन्होंने गुधौरा गांव के सरकारी स्कूल से 8वीं, लवकुशनगर के सरकारी स्कूल से 12वीं, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर से ग्रेजुएशन और फिर बीएड किया।

### 5. श्याम मणि को पुलिस में जाने का विचार कैसे आया?
बड़े भाई के शिक्षक बनने और शादी के बाद भाभी भी शिक्षिका होने पर श्याम मणि ने कुछ अलग करने की सोची और पुलिस लाइन में जाने का फैसला किया।

### 6. श्याम मणि के दादा ने इस सफलता पर क्या कहा?
दादा राम अवतार दीक्षित ने खुशी जताते हुए कहा कि परिवार में पहले कोई पुलिस में नहीं रहा और यह सब गुधौरा वाले हनुमान जी की कृपा है।

### 7. क्या रामनारायण दीक्षित अपने बेटे के फैसले के खिलाफ हैं?
नहीं, वह बेटे की नौकरी के विरोध में नहीं हैं, हालांकि उन्हें पुलिस की नौकरी पसंद नहीं, फिर भी उन्हें बेटे की परवरिश और ईमानदारी पर पूरा भरोसा है।

## प्रेरणा और सबक
श्याम मणि दीक्षित की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए सीख है जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं।

- **बार-बार असफलता के बावजूद कोशिश जारी रखें:** चोट के कारण फिजिकल परीक्षा छूटना और रनिंग में बाहर होना, दोनों झटकों के बाद भी श्याम मणि ने प्रयास नहीं छोड़ा।
- **जरूरत पड़ने पर रास्ता बदलने से न डरें:** शुरू में शिक्षक बनने का सपना था, लेकिन हालात बदलने पर उन्होंने खुले मन से नया विकल्प अपनाया।
- **हर मौके को आजमाएं:** एमपी पुलिस कांस्टेबल से लेकर यूपी पुलिस कांस्टेबल और अंत में सब-इंस्पेक्टर तक, उन्होंने हर उपलब्ध सरकारी भर्ती परीक्षा में हाथ आजमाया।
- **परिवार में जो पहले से हो रहा है उसे देखकर खुद के लिए सही राह चुनें:** भाई और भाभी दोनों के शिक्षक बनने पर उन्होंने खुद के लिए अलग क्षेत्र चुनने का फैसला किया।
- **असहमति के बावजूद भरोसा बनाए रखना जरूरी है:** पिता को पुलिस की नौकरी पसंद नहीं होने के बावजूद उन्होंने बेटे के फैसले का विरोध नहीं किया, जो घर में समर्थन के माहौल का महत्व दिखाता है।

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