मसूरी की ट्रेनिंग अकादमी से बिहार के प्रशासनिक गलियारे तक: आईएएस साहिला हीर और नितिन कुमार सिंह का प्रेरणादायक सफर 2018 बैच के आईएएस अधिकारी साहिला हीर और नितिन कुमार सिंह की कहानी लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से शुरू होकर बिहार के प्रशासनिक गलियारों तक पहुंची है, जहां दोनों अहम पदों पर सेवारत हैं। सिविल सेवा की तैयारी का रास्ता जितना लंबा और चुनौतीपूर्ण होता है, इसके पड़ाव कई बार जिंदगी में अप्रत्याशित और खूबसूरत मोड़ भी ले आते हैं। देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा के लिए चुने जाने के बाद जब युवा अधिकारी ट्रेनिंग के लिए मसूरी पहुंचते हैं, तो वहां न केवल देश संचालन के गुर सीखे जाते हैं बल्कि कई बार ऐसे रिश्ते भी बनते हैं जो ताउम्र साथ निभाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक यात्रा वर्ष 2018 बैच के दो अधिकारियों, साहिला हीर और नितिन कुमार सिंह की रही है, जिनकी मुलाकात लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में हुई और आज दोनों बिहार में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। साहिला हीर का प्रारंभिक जीवन और शैक्षणिक पृष्ठभूमि पंजाब के जालंधर से ताल्लुक रखने वाली साहिला हीर का जन्म 22 फरवरी 1991 को हुआ था। वे एक शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं। उनके पिता बीएल हीर पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में डिप्टी चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि उनकी मां कुलजीत हीर एक स्कूल प्रिंसिपल थीं। साहिला ने अपनी स्कूली शिक्षा जालंधर के एमजीएन स्कूल से पूरी की। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने तकनीकी शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया और पटियाला स्थित थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में दाखिला लिया। वहां से उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन कंट्रोल में बीटेक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने कौशल का दायरा बढ़ाते हुए इवेंट मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया। तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में हासिल की 572वीं रैंक तकनीकी और प्रबंधन की पढ़ाई के बाद साहिला हीर ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया। यह राह उनके लिए आसान नहीं रही और उन्हें शुरुआती दौर में कड़े इम्तिहान से गुजरना पड़ा। पहले तीन प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों को दूर करते हुए तैयारी जारी रखी। आखिरकार चौथे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 572वीं रैंक हासिल करके 2018 बैच में आईएएस बनने का गौरव प्राप्त किया। चयन के बाद उन्हें शुरुआत में त्रिपुरा कैडर आवंटित किया गया था। बाद में नितिन कुमार सिंह से विवाह के पश्चात उनके कैडर में बदलाव हुआ और वे बिहार कैडर में आ गईं। बिहार में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का सफर बिहार में साहिला हीर ने जमीनी स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने नरकटियागंज में अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद वे सहरसा और पूर्णिया में उप विकास आयुक्त (DDC) के पद पर तैनात रहीं। उन्होंने राज्य स्तर पर प्राथमिक शिक्षा निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। प्रशासनिक क्षेत्र में उनके कार्य अनुभव को देखते हुए दिसंबर 2025 में उन्हें बक्सर जिले के जिलाधिकारी (DM) का दायित्व सौंपा गया। IIT कानपुर से प्रशासनिक सेवा तक: नितिन कुमार सिंह का सफर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी के रहने वाले आईएएस नितिन कुमार सिंह की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद मजबूत रही है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा का रुख किया और कड़ी मेहनत के दम पर वर्ष 2018 बैच में ही आईएएस अधिकारी बनने में सफलता पाई। उन्हें मूल रूप से बिहार कैडर आवंटित हुआ था। नितिन कुमार सिंह ने अपनी प्रशासनिक सेवा की शुरुआत पटना सदर के एसडीओ के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने मधेपुरा जिले में डीडीसी के रूप में काम किया और भागलपुर में नगर आयुक्त के पद पर रहते हुए अपनी कार्यशैली से पहचान बनाई। पड़ोसी जिलों के डीएम से लेकर राज्य स्तरीय जिम्मेदारी तक प्रशासनिक सेवा के दौरान इस दंपती के करियर में ऐसा दौर भी आया जब दोनों पड़ोसी जिलों की कमान संभाल रहे थे। दिसंबर 2025 के दौरान जब साहिला हीर को बक्सर जिले का डीएम नियुक्त किया गया, उसी समय नितिन कुमार सिंह को पड़ोसी जिले कैमूर का डीएम बनाया गया था। दोनों अधिकारी एक ही समय पर सीमावर्ती जिलों के मुखिया के रूप में जनता की सेवा कर रहे थे। इसके बाद अगस्त 2026 में हुए प्रशासनिक फेरबदल के तहत नितिन कुमार सिंह को नई जिम्मेदारी सौंपी गई और वे राज्य स्तर पर माध्यमिक शिक्षा के निदेशक पद पर पदस्थापित किए गए। कठिन परीक्षाओं को पास कर प्रशासनिक पदों पर रहते हुए जनसेवा और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन बनाने के मामले में इस अधिकारी दंपती का सफर प्रशासनिक हलकों में काफी सराहा जाता है। इसका आप पर असर यह समाचार प्रशासनिक व्यवस्था, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं और संबंधित जिलों के नागरिकों के लिए प्रासंगिक प्रशासनिक जानकारी प्रदान करता है। • प्रतियोगी छात्रों के लिए: यह यात्रा दिखाती है कि तीन असफलताओं के बाद भी चौथे प्रयास में लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षा में निरंतरता और धैर्य ही सफलता की असली कुंजी है। • बिहार के नागरिकों के लिए: बक्सर जिले और राज्य के माध्यमिक शिक्षा विभाग में उच्च प्रशासनिक स्तर पर तैनात अधिकारियों की पृष्ठभूमि की जानकारी मिलती है। इससे आम जनता को प्रशासनिक नेतृत्व की कार्यशैली और दक्षता को समझने में मदद मिलती है। • कैडर नियमों की जानकारी: अखिल भारतीय सेवाओं में दंपती के विवाह उपरांत कैडर परिवर्तन के नियमों का व्यावहारिक उदाहरण सामने आता है। यह नियम अधिकारियों को एक ही राज्य में सेवा देने की सुविधा प्रदान करता है। • सार्वजनिक सेवा में संतुलन: चुनौतीपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन का व्यावहारिक मॉडल देखने को मिलता है। इससे करियर और परिवार दोनों को साथ लेकर चलने की प्रेरणा मिलती है। ऐसा क्यों हुआ सिविल सेवा में प्रवेश और बाद की प्रशासनिक नियुक्तियां नियमों, मेरिट और सरकारी स्थानांतरण नीतियों के तहत तय होती हैं। • लगातार तैयारी और चयन: संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शुरुआती तीन असफलताओं के बाद निरंतर प्रयास से साहिला हीर ने चौथे प्रयास में 572वीं रैंक प्राप्त की, जबकि नितिन कुमार सिंह ने आईआईटी कानपुर के बाद 2018 में सफलता पाई। दोनों का चयन मेरिट के आधार पर 2018 बैच के आईएएस के रूप में हुआ। • ट्रेनिंग के दौरान संपर्क: लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) मसूरी में फाउंडेशन कोर्स और पेशेवर प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों का एक साथ वक्त बीता, जहां उनकी मुलाकात हुई। बाद में दोनों ने विवाह करने का फैसला किया। • कैडर परिवर्तन का आधार: केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार जब दो आईएएस अधिकारी विवाह करते हैं, तो वे एक कैडर में आने के लिए स्थानांतरण का आवेदन कर सकते हैं। इसी प्रावधान के तहत साहिला हीर का कैडर त्रिपुरा से बदलकर बिहार किया गया। • प्रशासनिक फेरबदल और पदस्थापना: दिसंबर 2025 में कार्यकुशलता के आधार पर दोनों को बक्सर और कैमूर की कमान सौंपी गई। इसके बाद अगस्त 2026 में राज्य सरकार के नियमित प्रशासनिक फेरबदल के तहत नितिन कुमार सिंह को माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पद पर स्थानांतरित किया गया। सवाल-जवाब 1. आईएएस साहिला हीर और आईएएस नितिन कुमार सिंह किस बैच के अधिकारी हैं? दोनों अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वर्ष 2018 बैच से संबंधित हैं। 2. साहिला हीर ने यूपीएससी परीक्षा में कौन सी रैंक हासिल की थी? साहिला हीर ने अपने चौथे प्रयास में अखिल भारतीय स्तर पर 572वीं रैंक हासिल की थी। 3. आईएएस साहिला हीर की शैक्षणिक योग्यता क्या है? उन्होंने पटियाला के थापर इंस्टीट्यूट से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन कंट्रोल में बीटेक और उसके बाद इवेंट मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। 4. आईएएस नितिन कुमार सिंह ने अपनी उच्च शिक्षा कहां से पूरी की? नितिन कुमार सिंह ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री पूरी की है। 5. चयन के समय साहिला हीर को कौन सा कैडर मिला था और वे बिहार कैसे आईं? चयन के समय उन्हें त्रिपुरा कैडर आवंटित हुआ था, लेकिन आईएएस नितिन कुमार सिंह से विवाह के बाद कैडर नियमों के तहत वे बिहार कैडर में आ गईं। 6. दिसंबर 2025 में दोनों अधिकारियों को किन जिलों की जिम्मेदारी मिली थी? दिसंबर 2025 में साहिला हीर को बक्सर जिले का डीएम और नितिन कुमार सिंह को पड़ोसी जिले कैमूर का डीएम बनाया गया था। 7. वर्तमान में दोनों अधिकारी किन प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हैं? साहिला हीर बक्सर की डीएम हैं, जबकि नितिन कुमार सिंह राज्य में माध्यमिक शिक्षा के निदेशक के रूप में सेवारत हैं। प्रेरणा और सबक असफलताओं के बावजूद हार न मानने और जीवन के हर पहलू में संतुलन साधने की यह यात्रा युवाओं के लिए मूल्यवान सीख देती है। • धैर्य और निरंतरता: शुरुआती तीन प्रयासों में असफलता मिलने के बावजूद लक्ष्य पर टिके रहना और चौथे प्रयास में 572वीं रैंक हासिल करना सिखाता है कि असफलता केवल एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। • विविध कौशलों का संचय: इंजीनियरिंग के साथ-साथ इवेंट मैनेजमेंट जैसी विधाओं की पढ़ाई यह दर्शाती है कि बहुआयामी ज्ञान व्यक्ति की सोच और निर्णय क्षमता को मजबूत करता है। • साझे सपनों का सामंजस्य: जब दो लोग एक जैसे लक्ष्य और सेवा भाव के साथ आगे बढ़ते हैं, तो कठिन चुनौतियां भी आसान हो जाती हैं और पेशेवर दायित्वों को बेहतर ढंग से निभाया जा सकता है। • कर्तव्य और समर्पण: चुनौतीपूर्ण जिलों और विभागों की कमान संभालते हुए जनसेवा को प्राथमिकता देना यह साबित करता है कि सच्ची लगन से हर दायित्व को कुशलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है। https://trendkia.com/success-stories/masuri-ki-treninga-akadami-se-bihar-ke-prashasanika-galiyare-taka-ias-sahila-heer-aura-nitin-kumar-singh-ka-preranadayaka-saphara-42564 TrendKia — Har trend, sabse pehle.