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  "type": "article",
  "title": "मऊ के दो चचेरे भाई-बहन बने असिस्टेंट प्रोफेसर, एक ही दिन बिहार में मिली सफलता",
  "summary": "मऊ के दतौली गांव के रहने वाले चचेरे भाई-बहन शिव प्रताप सिंह और श्वेता सिंह का चयन बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ है। लंबे संघर्ष और तानों के बावजूद दोनों ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है।",
  "content": "कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प के सहारे इंसान अपनी मंजिल को हासिल कर ही लेता है, और यह बात मऊ जिले के दतौली गांव के दो चचेरे भाई-बहन ने साबित कर दी है। लंबे संघर्ष के बाद जब इन दोनों युवाओं को एक ही दिन सफलता मिली, तो पूरे परिवार और इलाके में जश्न का माहौल बन गया।\n\nबिहार में मिली एक साथ दोहरी सफलता\nदतौली ग्राम सभा के रहने वाले शिव प्रताप सिंह और उनकी चचेरी बहन श्वेता सिंह का चयन बिहार राज्य में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है। परिवार के सदस्य विजय प्रताप सिंह के अनुसार, शिव प्रताप सिंह का चयन बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से अर्थशास्त्र विषय में सहायक प्रोफेसर के रूप में हुआ है। वहीं, श्वेता सिंह का चयन इसी आयोग के तहत राजनीति विज्ञान विषय में सहायक प्रोफेसर पद के लिए किया गया है। दोनों भाई-बहन की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।\n\nइलाहाबाद और वाराणसी से पूरी की शिक्षा\nइन दोनों युवाओं ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के ही एक स्कूल से इंटरमीडिएट तक पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने प्रयागराज और वाराणसी का रुख किया। ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद दोनों ने पीएचडी की पढ़ाई पूरी की और फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए। पढ़ाई के लंबे सफर के दौरान उन्हें सात से आठ साल का समय लग गया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।\n\nताने कसने वाले लोग पहुंचे बधाई देने\nजब ये दोनों युवा घर से बाहर रहकर तैयारी कर रहे थे, तो इलाके के कुछ लोग तरह-तरह की बातें करते थे और परिवार पर दबाव बनाते थे कि इन्हें वापस बुला लिया जाए। हालांकि, परिवार ने कभी उनका हौसला टूटने नहीं दिया और उनका लगातार समर्थन करते रहे। आखिरकार, जब एक ही दिन दोनों के चयन की खबर आई, तो वही लोग सबसे पहले उनके घर बधाई देने और मिठाई लेकर पहुंचे, जो कभी ताने मारा करते थे।\n\nमाता-पिता और परिवार का मिला मजबूत साथ\nसफलता के बाद बातचीत करते हुए शिव प्रताप सिंह और श्वेता सिंह ने बताया कि यह मुकाम सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और बड़े भाई के भरोसे का नतीजा है। शुरुआती दौर में लगातार आलोचनाएं सुनने के बाद भी परिवार ने उन पर अटूट विश्वास बनाए रखा। पांच से छह साल के कड़े संघर्ष के बाद उन्हें यह मुकाम एक ही दिन हासिल हुआ। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर बनने का उनका मुख्य उद्देश्य न केवल खुद को स्थापित करना था, बल्कि इस क्षेत्र के जरिए अन्य युवाओं के भविष्य को भी संवारना था। फिलहाल परिणाम आने के बाद से वे अपने कार्यभार को संभालने की तैयारी में जुटे हुए हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सरकारी नौकरियों की लंबी तैयारी के दौरान सामाजिक दबाव का सामना करते हैं।\n\nमऊ में: स्थानीय युवाओं और उनके परिवारों को इससे कठिन परिस्थितियों में भी अपनी पढ़ाई और करियर पर टिके रहने की प्रेरणा मिलती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शिव प्रताप सिंह का चयन किस विषय में हुआ है?\nशिव प्रताप सिंह का चयन अर्थशास्त्र विषय में सहायक प्रोफेसर के पद पर हुआ है।\n\n2. श्वेता सिंह को किस विषय में सफलता मिली है?\nश्वेता सिंह का चयन राजनीति विज्ञान विषय में सहायक प्रोफेसर के रूप में हुआ है।\n\n3. इन युवाओं का चयन किस राज्य में हुआ है?\nदोनों चचेरे भाई-बहन का चयन बिहार राज्य में हुआ है।\n\n4. तैयारी के दौरान परिवार की क्या भूमिका रही?\nतमाम आलोचनाओं और ताने सुनने के बावजूद परिवार ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और उनका साथ दिया।\n\nप्रेरणा और सबक\nपरिवार का अटूट समर्थन: कठिन दौर में अपनों का साथ और भरोसा किसी भी व्यक्ति को आगे बढ़ने की ताकत देता है।\n\nकड़ी मेहनत और धैर्य: लंबी और कठिन तैयारी के दौरान धैर्य बनाए रखना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।\n\nआलोचनाओं को नजरअंदाज करना: लोगों की नकारात्मक बातों से विचलित होने के बजाय अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।\n\nबड़ा उद्देश्य रखना: केवल नौकरी पाने के बजाय समाज और अन्य युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने की सोच रखना सार्थक परिणाम देता है।",
  "url": "https://trendkia.com/success-stories/mau-ke-do-chachere-bhai-bahana-bane-assistant-professor-eka-hi-dina-bihar-men-mili-saphalata-13440",
  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-08-04",
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    "मऊ",
    "असिस्टेंट प्रोफेसर",
    "बिहार",
    "सफलता की कहानी",
    "शिक्षा"
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  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
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